My Toxic Husband - Chapter 1
"मुझसे दूर रहो और मुझे छूने की कोशिश भी मत करना, वरना... (उसे गर्दन से पकड़कर) I won't even give you a chance to take a breath, and fuck you right harshly here that... हफ्तों तक चलने लायक भी नहीं बचोगी।"
"For God's sake... मैं तुम्हें जल्दी ही खोज लूंगा और सच में (बेड पर जोर से मारकर) अगर मुझे पता चला कि तुम सिर्फ एक prostitute थी, तो छोड़ दूंगा। पर नहीं... तब मैं 😡 (मुठ्ठी भींचते हुए) इतनी बुरी तरह से, भयानक और बेदर्दी से सज़ा दूंगा कि मेरा पहली बार मुझसे छीनने और उसके बाद बिना बताए... मुझे यहां अकेले बेड पर छोड़ने की तुम सोच भी नहीं पाओगी।"
"Uncle," वो कहती है।
"Shut up, you... (उसे अपने करीब कर) मैं तुम्हें अंकल दिखता हूं?"
"पर... uncle आ..."
(उसकी बात पूरी होने से पहले ही वो उसे खींचकर अपने चेहरे के करीब कर लेता है और कहता है।)
"ये अंकल बोलना बंद करो, वरना मुझे समय नहीं लगेगा तुम्हारे इन रसीले होंठों को अपने होंठों से चूसने में और (अपना हाथ कसकर उसकी कमर पर रखते हुए) तुम्हें यहां से फिर भागने भी नहीं दूंगा और छोड़ूंगा भी नहीं। तो अगर जाना है... **SO RUN BABY RUN! RUN FOR YOUR LIFE.... OTHERWISE....**"
**एक दृश्य**
एक खूबसूरत सा कमरा, जो सफेद चमेली और गुलाब के फूलों से सजा हुआ है। कमरा देखकर तो ऐसा लग रहा है जैसे किसी नवविवाहित जोड़े का हो, जिनकी आज पहली रात है। हां, सब उसी तरह ही सजा हुआ है। पूरे कमरे में मोमबत्तियां बहुत खूबसूरती से जल रही हैं और साथ में मनमोहक और मदहोश करने वाली भीनी-भीनी गुलाब की खुशबू भी महक रही है, जो इस आलम को बहुत रूमानी और लावण्य सी बना रही है। जिसे कोई भी महक ले तो बस खुद से ही अपनी प्रेमिका को मोहब्बत करने से न रोक सके।
वही, उसी कमरे के सामने वाली फूलों से लदी खिड़की के पास एक लड़की खड़ी हुई है। वो ऊपर से नीचे पूरी जरी वाले भारी लाल जोड़े में सजी हुई है और बाहर निहार रही है। जैसे दुल्हनों के चेहरे पर भाव होते हैं, वैसे उस पर कोई भाव नहीं है, बल्कि है तो बस एक शांति। वो लगातार ही बस अब भी बाहर ही निहारना जारी रखती है, लेकिन अब उसका ध्यान टूट जाता है, जब कमरे का डोर झट से ओपन हो जाता है।
वही, डोर ओपन होने की आवाज़ सुनकर वो लड़की अब उधर डोर की तरफ मुड़ जाती है और देखने लगती है अपने सामने खड़े एक शख्स को, जो अब उसे ही देख रहा होता है। जिसकी वजह से वही लड़की अब अपनी ड्रेस (चुन्नी) को कसकर अपनी कमर पर बांधकर उससे अपने सीने को ढक लेती है और अपना भारी लहंगा संभालते हुए बेड पर आ जाती है।
अब कमरे में बिल्कुल ही शांति थी, जैसे कोई हो ही न। पर अचानक से कमरे का तापमान, जिसे आज की रात के लिए नॉर्मल किया गया था, वो बेधड़क ही अपनी गति से ज़्यादा हो जाता है और अब कमरे का माहौल मानो ऐसा होने लगता है जैसे ये कमरा घर में नहीं बल्कि किसी बर्फीले एरिया में हो। ऊपर से पंखा भी एकाएक ही तेजी से चलने लगता है, जिसकी वजह से अब कमरे की हालत धीरे-धीरे बुरी तरह ठंड की वजह से उफान मचाने लगती है। एक तो वैसे ही ठंड थी, ऊपर से ये हाल। और इसी में ही दांतों की किटकिटाने की भी आवाज़ आनी शुरू हो जाती है, जिससे ये सुन अब कोई था, जो बहुत खुश हो रहा होता है और तभी एक आवाज़ आती है।
"मुझसे ही शादी क्यों की?"
पर कमरे में इसका कोई जवाब नहीं मिलता है, बल्कि आती है तो बस चुप्पी ही। जिसकी वजह से एक बार फिर से ये सवाल उठता है।
"आपने मुझसे शादी क्यों की? क्या मिल रहा है ये करके?"
"Forced marriage शब्द सुना है तुमने, वही किया है।"
"मेरा अब भी वही सवाल है, आपने मुझसे ही शादी क्यों की?"
"मुझे क्या इसका जवाब देना पड़ेगा?"
"यहां बहुत लोग हैं, जिन्हें आप पसंद हैं, तो इस तरह की जबरदस्ती मेरे साथ ही क्यों?"
"दफा हो जाओ।"
"मुझे मेरा जवाब चाहिए। मुझसे ही शादी क्यों?"
"Get lost. You don’t argue with me, otherwise I’m gonna kill you and feed my dogs."
"Do it then, मैं तंग हूं इन सबसे।"
"इतनी आसानी से हार मान लिया?" (उसे कमर से पकड़ अपनी तरफ खींचकर) "जान, इस शादी को अच्छे से निभाना है तुम्हें।" (उसके गाल पर उंगली फिसलाते हुए) "बेबी, well... ARE you virgin?"
पर उसे कोई जवाब नहीं मिलता है, बल्कि फिर से ही वो सवाल उठता है।
"मुझसे ही शादी क्यों की आपने?"
"तो तुम्हें सिर्फ यही जवाब ही सुनना है?"
"हां।"
"तो सुनो... तुम्हें जिंदगी नर्क से ज्यादा बर्बाद करने के लिए, जहां से तुम उठ भी न सको... और..."
**और का जवाब कहानी में मिलेगा क्योंकि ये कौन... किससे बोल रहा है?**