Obsessed Billionaire Hubby - Chapter 3
"अपनी बकवास बंद करो। मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तुम लोग क्या हो, क्या नहीं।"
सुमित ने कहा, "हाँ यार, आकाश, दादाजी से बहस करना बिल्कुल बेकार है। कहीं ऐसा ना हो कि उन्होंने जो अभी हमें रात को पार्टी करने की परमिशन दी है, उसे भी वह कैंसल ना कर दें!"
आहान ने कहा, "अच्छा-अच्छा, ठीक है दादाजी। अभी इस बात पर ध्यान देते हैं। हमने शादी में यहाँ मौज-मस्ती नहीं की, अब हमें रात को मौज-मस्ती करने देंगे!" बस इतना कहकर आहान ने दादाजी को मना लिया। दादा ने एक लंबी, गहरी साँस ली और वहाँ से चले गए!
दादाजी के जाने के बाद सुमित ने कहा, "ना ढोल, ना नाचना, ना गाना-बजाना, क्या यार, यह कितनी बोरिंग शादी हो गई अरमान ब्रो की! कहने के लिए तो यह इस शहर का सबसे बड़ा रईस और हैंडसम मुंडा है, लेकिन यहाँ पर इतनी सी भी मौज-मस्ती नहीं हो रही है। सब कुछ बड़ा ही फ़ीका-फ़ीका सा लग रहा है।" ऐसा कहकर सुमित ने फिर से अपना मुँह बिचका लिया...
ध्रुव ने कहा, "हाँ यार, लेकिन आप अपना मूड इस वक़्त ठीक करो! और देखो, शादी ऑलरेडी हो चुकी है। अभी फ़िलहाल आप सब एक काम करो, घर जाकर भाभी के आने का वेलकम की तैयारी करो। हमारे घर में तो कोई लेडीज़ वगैरह भी नहीं हैं, जो भाभी के वेलकम की तैयारी करें, हम लोगों को ही सब कुछ करना होगा..."
आकाश ने कहा, "यार, शायद तुम लोग भूल रहे हो, पूरे के पूरे घर में लेडीज़ अगर कोई है तो भाभी ही होंगी! और उनको हम लोगों के बीच ऑकवर्ड ना फील हो, तो हमें इस तरह का कुछ मैनेजमेंट लेकर चलना होगा। और वैसे भी अरमान को तो देखकर लग रहा है कि वह जितना ध्यान अपने फ़ोन और लैपटॉप पर देने वाला है,
वह भाभी पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देने वाला। और वैसे भी उसने यह शादी सिर्फ़ और सिर्फ़ दादा के लिए की है, तो यह बात हमें याद रखनी चाहिए।"
वे आकाश की हाँ में हाँ मिलाते हुए बोले, "शायद तुम ठीक कह रहे हो यार, हमें अपनी पार्टी से ज़्यादा भाभी का ध्यान रखना होगा।" ऐसा कहकर
चारों ने अपने-अपने प्लान्स बनाना शुरू कर दिया, और उनमें से दो जल्दी वहाँ से विदा लेकर सिंघानिया मेंशन की ओर रवाना हो गए,
क्योंकि वहाँ जाकर उन्हें आस्था के वेलकम की तैयारी भी करनी थी।
आस्था और अरमान की शादी पूरी होने के बाद जल्दी ही विदाई का समय आ गया था। इस बीच, भले ही अरमान की शादी आस्था से हो गई हो, लेकिन उसने एक बार भी उसकी ओर देखना ज़रूरी नहीं समझा। उसका ध्यान अगर कहीं था तो सिर्फ़ और सिर्फ़ पूरी तरह से अपने काम पर।
यहाँ आस्था ने भी अरमान की शक्ल नहीं देखी थी। उसे तो पता ही नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ है। उसकी नज़र अपनी नानी को ढूँढ रही थी। उसे इस वक़्त इमोशनल सपोर्ट की बहुत ज़्यादा ज़रूरत थी।
आस्था ना तो वह शहर में रहती थी, और ना ही शहर के बारे में उसे ज़्यादा कुछ ख़ास नॉलेज थी। उसे खुद कोई आईडिया नहीं था कि आखिरकार उसकी शादी कितने बड़े मॉन्स्टर से हुई है।
वेल, जल्दी ही विदाई का समय आ गया था, और आस्था जल्दी से दौड़कर अपनी नानी के पास आई और उसे गले से लगा लिया और बुरी तरह से रोने लगी।
आस्था ने जैसे ही उन्हें नानी कहकर बुलाया, गले लगाकर रो पड़ी! उन्हें अब इस बात का पता चल चुका था कि असल में जिसकी शादी आज यहाँ हुई है, वह उनकी लाडली आस्था की हुई है! तो उनकी आँखों से आँसू निकलने शुरू हो गए थे! उन्हें समझ नहीं आ रहा था, वे क्या कहें? क्या करें? उनकी आस्था की शादी इस तरह से कैसे हो गई? क्योंकि उन्होंने आस्था के बगैर रहने के बारे में अब तक सोचा तक नहीं था।
उन दोनों को रोते हुए देख,
दादाजी अब थोड़ा सा परेशान हो गए थे। कहीं ना कहीं वह समझ चुके थे कि आस्था और उसकी नानी इसी तरह से रोती रहीं तो,
भरी महफ़िल में अरमान को इस बात का पता चल सकता है कि उसकी शादी जिससे हुई है वह प्रियंका नहीं है, बल्कि आस्था हुई है। और अगर ऐसा हुआ तो यह उनके परिवार की इज़्ज़त के लिए बिल्कुल ठीक नहीं होगा! पूरी दुनिया के सामने उनकी फैमिली मज़ाक बनकर रह जाएगी...
और अरमान सच्चाई जान गया तो, उसके कहर से कोई नहीं बच पाएगा, और फिर आस्था को अरमान किसी भी कीमत पर अपने साथ घर लेकर नहीं जाएगा। वे अपने पोते के गुस्से को अच्छी तरह जानते थे। इसीलिए उन्होंने मनोज को कुछ इशारा किया कि वह अपनी माँ को अभी और इसी वक़्त यहाँ से लेकर जाए!
क्योंकि अगर वह अंदर अपनी माँ को लेकर नहीं गया तो, उसकी माँ रो-रोकर सबके सामने इस बात का बयान कर देगी कि उनकी पोती की नहीं, बल्कि यह उनकी नाती आस्था है, जिसकी शादी धोके से अरमान से हुई है। कहीं वे सवाल-जवाब ना करने लगें।
आहान और ध्रुव दोनों नानी को इतनी बुरी तरह से आस्था से लिपटकर रोते हुए देख रहे थे। वे दोनों आपस में बात करने लगे। आहान ने कहा, "भाई, यह सब क्या हो रहा है यहाँ पर? कहीं नानी को हमारे भाई के बारे में पता तो नहीं चल गया ना, कि हमारा भाई कितना ज़्यादा ख़तरनाक मॉन्स्टर है, इसीलिए तो यह भाभी से इस तरह से चिपककर फूट-फूटकर रो रही है।"
ध्रुव ने कहा, "यार, चाहे कुछ भी कहो, मुझे तो बेचारी ग्रैंड नैनी के लिए काफी ज़्यादा बुरा लग रहा है।"
आहान ने कहा, "तुम इस तरह से बोल रहे हो! भाभी की नहीं, बल्कि तुम्हारी ही दादी है।"
ध्रुव ने कहा, "वह सब तो ठीक है यार, पर तूने देखा किस तरह से रोना-धोना चल रहा है? वैसे भी आज के ज़माने में इस तरह से कोई इतना रोता है क्या? ऐसा लग रहा है कि भाभी को हम सबके सामने से किडनैप करके ले जा रहे हैं..."
आहान ने अपनी कोहनी ध्रुव को मारी और उसे घूरकर कहा, "यार, तू अपनी बकवास बंद कर! जब देखो तेरे दिमाग में यह किडनैपिंग, अगवा, या कोई ना कोई क्रिमिनल ख़्याल आते-जाते रहते हैं! कितनी बार कहा है तुझे कि यह क्रिमिनल वेब सीरीज़ थोड़े से कम देखा कर!" ऐसा कहकर आहान ध्रुव की बातों से इरिटेट होने लगा।
ध्रुव ने कहा, "तुम देखना, एक दिन मेरे ये सारे थॉट तुम लोगों के बहुत काम आएंगे।" ऐसा कहकर उसने अपना कॉलर ऊँचा किया।
आहान ने कहा, "फ़ालतू की बकवास छोड़ो! फ़टाफ़ट से चलो! कहीं ऐसा ना हो कि भाई हमें यहीं छोड़कर चले जाएँ। तुम तो जानते हो ना भाई को, गुस्सा..." वेल, जल्दी ही आहान और ध्रुव चुपचाप फिर से सर झुकाकर अरमान के ठीक पीछे जाकर खड़े हो गए।
अब आलोक जी ने मनोज के द्वारा उसकी माँ को अंदर भिजवा दिया था। सभी मेहमानों को विदा करने के बाद, वह आस्था को लेकर चलने का इशारा करने लगे,
लेकिन आस्था के क़दम वहीं के वहीं रुक गए। उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि वह अरमान के साथ एक भी क़दम आगे बढ़ा सके! और फिर जैसे-तैसे धीरे-धीरे मनोज जी की पत्नी, यानी कि आस्था की मामी, उसे खींचते-खींचते थोड़ा सा आगे लेकर जाने लगी, लेकिन आस्था बड़ी ही धीमी-धीमी रो-रोकर, सिसक-सिसक कर चल रही थी।
वहीं अरमान को उसके दादाजी ने सख़्त इंस्ट्रक्शन दिए थे कि उसे दुल्हन के साथ-साथ ही चलना है। लेकिन आस्था के इस तरह से धीरे-धीरे चलने पर अरमान बहुत ही ज़्यादा चिढ़ गया, और अब उसके बर्दाश्त के बाहर हो गया। तभी अचानक अरमान रुका और उसने आगे बढ़कर आस्था को गोद में उठा लिया।
जैसे ही उसने आस्था को इस तरह से अपने गोद में उठाया, वहाँ मौजूद सभी लोगों ने ज़ोरों से तालियाँ बजानी शुरू कर दीं।
अरमान ने गुस्से से सबको घूरना शुरू कर दिया। सबको तो यही लग रहा था कि अरमान एकदम से रोमांटिक हो गया है, उसने अपनी नई-नवेली दुल्हन को गोद में जो उठा लिया था।
लेकिन अरमान ने उसे गोद में इसलिए उठाया था क्योंकि आस्था बड़े ही धीमे-धीमे क़दमों से चल रही थी, और अरमान को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं आया, क्योंकि उसे जल्द से जल्द अपने घर पहुँचकर अपना काम कंटिन्यू करना था। तो इसीलिए उसने दुल्हन को गोद में उठा लिया था।
ध्रुव और आहान हैरानी से एक-दूसरे की शक्ल देखने लगे। ध्रुव तो जैसे पत्थर के जैसा जम सा गया था। वह आहान से कहने लगा, "यार, मुझे पिंच करके तो देख, क्या मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ?"
आहान ने जोरों से उसकी कमर में नोच ली, और वह चीख पड़ा। दर्द से करहाते हुए कहने लगा, "बेवकूफ़, तुझे पिंच करने के लिए बोला था, इस तरह से बिल्ली की तरह नोचने के लिए नहीं!"
आहान ने कहा, "यार, मुझे भी यकीन नहीं हो रहा है कि ऐसा भी कुछ हो सकता है। मेरे अरमान भाई, जिन्होंने आज तक अपने आस-पास लड़कियों को फ़टकने तक नहीं दिया, उन्होंने आज भाभी को पहले ही दिन गोद में उठा लिया। कहीं हमारी भाभी ने आने से पहले ही हमारे भाई के दिल पर कब्ज़ा नहीं जमा लिया?" ऐसा कहकर वह मुस्कुराने लगा।
ध्रुव ने अपना क्रिमिनल वाला दिमाग चलाते हुए कहा, "तू गलत समझ रहा है। तुझे क्या, अरमान ब्रो के बारे में पता नहीं है? ज़रूर उसके पीछे भी उनका कोई ना कोई मक़सद रहा होगा!"
"अब चल फ़टाफ़ट! अगर हम यहीं खड़े रहे बकवास करते रहे तो वह हमें छोड़कर चले जाएँगे!" जल्दी ही अरमान ने आस्था को ले जाकर गाड़ी में बिठा दिया।
आस्था अब और भी ज़्यादा डर गई और सँकुच कर बैठ गई। अरमान ने पहली बार किसी लड़की को इस तरह से अपनी गोद में उठाया था, तो उसके लिए कुछ अलग ही तरह का एहसास था। उसे उसकी बीवी एकदम हल्की-फुल्की सी लगी थी।
आलोक जी हल्का सा मुस्कुराते हुए अपनी कार में जा बैठे थे।
अरमान आस्था के ठीक बराबर आकर बैठ गया, और अरमान ने एक बार फिर से अपना काम करना शुरू कर दिया! आस्था बेचारी घूँघट में से कार की खिड़की से झाँक रही थी कि उसे आख़िरी बार उसकी नानी का चेहरा देखने को मिल जाए,
लेकिन वहाँ उसे कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था। अब तो उसकी आँखों से आँसू भी नहीं निकल रहे थे, क्योंकि ऑलरेडी वह शादी के वक़्त इतना रो चुकी थी कि उसकी आँखों के आँसू भी सूख चुके थे। जल्दी ही गाड़ी सिंघानिया मेंशन की ओर रवाना हो गई थी।
वहीं दूसरी ओर, आकाश और सुमित आस्था के गृह प्रवेश के लिए जो कुछ भी उनसे बन पड़ा था, वह सारी तैयारियाँ कर रहे थे।
वह सारी तैयारियाँ उन्होंने टीवी में या यूट्यूब वीडियो सर्च करके की थी, क्योंकि उन्हें रस्मों-रिवाजों का कोई ख़ास नॉलेज नहीं था कि आखिरकार नई-नवेली बहू का स्वागत किस तरह से किया जाता है। और इसीलिए उन्होंने जैसे-तैसे आरती की थाली तो तैयार कर ली,...
लेकिन अब कलश में क्या-क्या भरकर रखें, और किस तरह से कलश भरें! थोड़ा-बहुत उन्होंने यूट्यूब से सर्च करके जो भी सामान रेडी किया था। और अब खुश होकर दुल्हा-दुल्हन का इंतज़ार करने लगे।