Chapter 1 (मैसेज!)
शाम का समय,
सोनीपत - हरियाणा,
आज का मौसम बहुत सुहाना था। हल्की-हल्की धूप के साथ कुछ बादल आसमान में छाए हुए थे और मंद-मंद हवाएँ बह रही थीं, जो मन को सुकून देने वाली थीं।
एक कॉलेज बस एक दिशा में आगे बढ़ रही थी। अपनी आँखों में भविष्य के सपने सजाए हुए बहुत से बच्चे उस बस में बैठे हुए थे।
उन्हीं में एक लड़की भी बैठी हुई थी, जिसकी उम्र 20 साल के आसपास रही होगी।
उसने नीले रंग की जीन्स के साथ सफेद रंग का टॉप पहना हुआ था और साथ में एक डेनिम जैकेट डाल रखा था, जो उसके हल्के साँवले रंग पर बहुत ही खिल रहा था।
उसके बाएँ हाथ में सिंपल-सी घड़ी थी और दाएँ हाथ में महादेव का एक ब्रेसलेट था। उसके पैरों में काले रंग के लेडीज़ जूते थे। बालों की उसने पोनी बनाई हुई थी। उसके कानों में छोटे-छोटे बूँदे थे।
उसका चेहरा गोल था और उसकी बड़ी-बड़ी आँखें उसके चेहरे पर और भी प्यारी लग रही थीं। उसके पतले गुलाबी होंठों पर हल्का-सा लिपबाम लगा हुआ था।
वो आराम से कानों में हेडफोन लगाकर अपने फोन में इंस्टाग्राम चला रही थी कि तभी उसकी नज़र एक पोस्ट पर गई, जहाँ वूमेन एंपावरमेंट और महिलाओं के अधिकार की बात की गई थी।
उसे वो पोस्ट बहुत ही अच्छी लगी। इसलिए वो उस प्रोफाइल पर चली गई और ऐसा करते ही उसकी आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं।
उस प्रोफाइल पर बहुत सारी ऐसी ही पोस्ट्स थीं, जिनमें महिलाओं के हित में बातें लिखी गई थीं, वो भी कविताओं और शायरियों के ज़रिए और सबसे ज़्यादा हैरानी की बात तो ये थी कि ये प्रोफाइल किसी लड़के की थी, जिसका नाम था, समृद्ध निगम।
वो लड़की एक-एक करके उसकी सारी पोस्ट्स देखती गई और बहुत ज़्यादा प्रभावित भी हुई। इसलिए वो तुरंत उस लड़के का चेहरा देखने के लिए उसकी प्रोफाइल पिक्चर देखने लगी, लेकिन उसकी प्रोफाइल पिक्चर किसी एनीमे कैरेक्टर की थी।
उस लड़की ने निराशा के साथ मुँह बना कर कहा,
“क्या यार, इस लड़के ने अपनी फोटो क्यों नहीं लगाई है अपनी प्रोफाइल पर!”
उसने इतना ही कहा था कि इतने में किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख कर शरारती अंदाज़ में कहा,
“क्या हुआ तेजस? किसकी फोटो देखे बिना चिढ़ रही है!”
ये सब अचानक से हुआ था, जिसकी वजह से तेजस का फोन उसके हाथ से छूटकर उछला और नीचे गिर पड़ा।
तेजस ने हड़बड़ा कर अपना फोन उठाया और फिर सामने की ओर देख कर, जहाँ एक लड़की अपने कंधे पर एक बैग टाँगे खड़ी थी, चिढ़न के साथ कहा, “कोई नहीं, तू अपना देख न!”
उस लड़की ने पहले तेजस को अजीब तरीके से घूरा, फिर अपने कंधे उठा कर कहा,
“मैं तो अपना ही देख रही हूँ, तभी तो उतर रही हूँ बस से।”
फिर उसने अपनी भौंहें उठा कर कहा, “तू अपना देख ले।”
तेजस ने नासमझी से उसे देखा तो उसने बाहर की तरफ इशारा कर दिया। तेजस ने तुरंत बाहर की तरफ गर्दन घुमाई तो उसकी आँखें बड़ी हो गईं। उनका बस स्टॉप आ चुका था।
उसने अपना बैग उठाते हुए दूसरी लड़की के कंधे पर हल्के से मार कर कहा, “क्या सौम्या, पहले नहीं बता सकती थी!”
और बस के गेट की ओर बढ़ने लगी। सौम्या ने उसके पीछे आते हुए कहा, “तुझे बताने ही तो आई थी, पर तू तो अलग ही दुनिया में थी। अब इसमें मेरी क्या गलती!”
अब तक वो दोनों बस से उतर चुकी थीं। तेजस ने सौम्या की ओर पलटकर कहा, “बस, बस! अब ज़्यादा ज़ुबान मत चला।”
और एक ओर बढ़ने लगी। सौम्या ने दूसरी ओर जाते हुए थोड़ी तेज़ आवाज़ में कहा, “कल फ्रेशर्स पार्टी है। भूल मत जाना।”
तेजस ने चिढ़कर कहा, “हाँ-हाँ! नहीं भूलूँगी।”
फिर उसने खुद से ही कहा, “पार्टी फ्रेशर्स की है और एक्साइटेड ये हो रही है।”
और इसी के साथ वो दोनों अपने-अपने घर चली गईं।
कुछ देर बाद,
तेजस ने कपड़े बदल लिए थे। फिलहाल उसने नीले रंग का सूट और सलवार पहन रखा था। उसने थोड़ा-सा नाश्ता किया और फिर अपना फोन लेकर बैठ गई।
वो जब से घर आई थी, उसने अपना फोन वैसे ही रख दिया था। जैसे ही उसने फोन अनलॉक किया, वैसे ही उसकी आँखें बड़ी हो गईं और फोन फिर से एक बार उसके हाथों से उछलने लगा।
तेजस ने कैसे भी अपना फोन संभाला और फिर लंबी-लंबी साँसें लेने लगी। उसने फिर से फोन देखा, जहाँ इंस्टाग्राम में मैसेज सेक्शन खुला हुआ था और समृद्ध को “हेलो!” का मैसेज सेंट हो चुका था।
तेजस ने चिढ़कर खुद से ही कहा, “ये क्या… ये… ये… इसे मैसेज कैसे चला गया!”
फिर उसने बस वाले इंसीडेंट को याद करके कहा, “सौम्या, इसे तो मैं छोड़ूँगी नहीं। सब इसी की वजह से हुआ है। तू कल मुझे मिल कॉलेज में, फिर बताती हूँ मैं तुझे।”
फिर उसने वापस फोन को देख कर कहा, “पता नहीं, ये बंदा क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में!”
फिर वो खुद को बिज़ी करने के लिए डिनर तैयार करने किचन में चली गई।
जहाँ एक तरफ हरियाणा में तेजस के हाथ किचन में करछी चला रहे थे, तो वहीं दूसरी तरफ भारत के किसी दूसरे हिस्से में कोई हाथ कलम चला रहा था।
देख कर ही पता चल रहा था कि ये हाथ कितना काम करते होंगे, क्योंकि उनकी नसें भी साफ दिख रही थीं। वो हाथ किसके थे, ये बता पाना तो मुश्किल था, क्योंकि वो शख्स अंधेरे में बैठा हुआ था और उसके टेबल पर जो छोटी-सी लैंप जल रही थी, उसकी रोशनी में सिर्फ उन हाथों पर कोहनी तक मुड़ी हुई काली शर्ट की बाजुएँ दिख रही थीं।
उस लैंप की रोशनी उसके डायरी पर भी पड़ रही थी, जिस पर वो लिख रहा था और जिस टॉपिक पर वो शख्स लिख रहा था, वो था, अंधकार।
उस डायरी के बगल में एक फोन भी था, जिससे एक हेडफोन जुड़ा हुआ था। फोन में यूट्यूब पर बाँसुरी की धुन बज रही थी। इतने में फोन पर नोटिफिकेशन आया।
ये तेजस के मैसेज का नोटिफिकेशन था, जिसे देखे बिना ही रिमूव कर दिया गया और वो शख्स अपना काम करता रहा।
जारी है...