Billionaire Forced Bride Ch. 2

Billionaire Forced Bride - Chapter 2

Posted by Simran Ansari • Jan 19, 2025 03:43 PM

2

अंतिम फेरा लेने के बाद, उस मंडप में एक गहरी खामोशी छा गई। मिष्टी के आँसू उसके गालों पर ढलक रहे थे, और उसकी आँखों में अनगिनत सवाल और दर्द साफ दिखाई दे रहे थे। उसकी पूरी दुनिया जैसे एक पल बदल गई थी। वह अपने मन में जितना भी समेटे हुए थी, सब कुछ उसके आंसुओं में बह रहा था।

पंडित ने युग को थाल में रखा सिंदूर उठाने का इशारा किया। युग ने बिना कुछ बोले अपनी उँगलियों में सिंदूर उठाया और मिष्टी की ओर देखा।

मिष्टी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे उस पल को महसूस करने से भी डर रही हो। उसकी साँसे तेज़ हो गईं और गालों पर बहती हुई आँसुओं की धार और भी गहरी हो गई।

युग ने कुछ जताए बिना, ठंडी आँखों से मिष्टी के माथे के बीच में सिंदूर लगाया। मिष्टी का दिल एक बार फिर से बुरी तरह धड़कने लगा। उसके चेहरे पर झुके हुए युग की उँगलियों का स्पर्श उसके दिल की धड़कनें बढ़ा रहा था, परंतु युग के चेहरे पर गुस्से की एक हल्की झलक अब भी दिखाई दे रही थी।

इसके बाद, पंडित ने युग को मंगलसूत्र पहनाने का को कहा। युग ने मंगलसूत्र उठाया और धीरे से मिष्टी के गले में पहना दिया।

मिष्टी ने अपनी आँखें खोलीं, और अपनी धुंधली नज़र से युग की ओर देखा। उसके दिल में उठ रहे इमोशन का तूफान उन आँसुओं के साथ बह रहा था, लेकिन युग का चेहरा बिल्कुल शांत था, जैसे यह सब उसके लिए सिर्फ एक फॉर्मेलिटी हो। उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था, न खुशी, न प्यार, और न ही किसी तरह का अपनापन, उनके बीच भी नहीं था सिवाय इल्ज़ाम और नफ़रत के...

मिष्टी तो ये शादी करना ही नहीं चाहती थी लेकिन फिर भी उस ने खुद को संभालते हुए यह सब सहा।

वह नहीं जानती थी कि उसकी जिंदगी का यह पल कैसा होना चाहिए था, लेकिन युग की जबरदस्ती और जिद ने उसकी उम्मीदों और सपनों को चूर-चूर कर दिया। हर रस्म के साथ, वह एक नया दर्द महसूस कर रही थी, लेकिन युग की आँखों में उसे अब भी वह गुस्सा नजर आ रहा था, जिसने उसे इस हद तक ला दिया था।

सारी रस्में पूरी हो चुकी थीं, लेकिन दोनों के दिलों में जैसे अब भी एक खालीपन था। मिष्टी की आँखों में आँसुओं का सैलाब था, जबकि युग के चेहरे पर एक ठंडापन और उसकी वो गुस्से भरी आँखें।

युग और मिष्टी के बीच टेंशन का माहौल था। शादी की सारी रस्में खत्म होते ही युग ने मिष्टी का हाथ कसकर पकड़ा और उसे बिना कुछ कहे खींचते हुए अपने कमरे की तरफ ले गया। मिष्टी अभी भी रो रही थी, उसकी आँखों में आँसू बह रहे थे, और उसकी मनोदशा एकदम हारी हुई लग रही थी। वह जानती थी कि युग किसी भी हाल में उसकी नहीं सुनेगा।

"छोड़ो मुझे... मेरा हाथ छोड़िए..." – मिष्टी युग के हाथ की पकड़ से खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी, लेकिन युग उसे अपने साथ सीधा सीढ़ियों से ऊपर ले जा रहा था, जैसे कोई कैदी को उसकी सजा की जगह पर ले जा रहा हो।

उसके घर के लोग और बाकी मेहमान भी इस नाटक को देख रहे थे, लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं हुई कि वह युग के खिलाफ बोले।

मिष्टी ने रोते हुए कहा, "युग, प्लीज़... मुझे छोड़ दो। मैं यह सब नहीं चाहती थी, मैंने कुछ गलत नहीं किया। मैं बस विहान की मदद कर रही थी, कसम से, मेरा तुम्हारी शादी तोड़ने का कोई इरादा नहीं था।"

युग ने उसकी एक नहीं सुनी। उसकी आँखों में एक सख्ती थी। वह उसकी कोई भी सफाई सुनने को तैयार नहीं था। वह अब अपने गुस्से में इतना डूब चुका था कि उसे कुछ भी और नहीं दिखाई दे रहा था। उसकी पकड़ मिष्टी के हाथ पर और मजबूत हो गई, और वह उसे खींचते हुए सीधा अपने कमरे के दरवाजे के सामने ले आया।

युग ने कमरे का दरवाजा एक झटके में खोला, और मिष्टी को अंदर धकेल दिया। मिष्टी संतुलन खोकर सीधे जमीन पर गिर पड़ी। उसका सिर थोड़ा दीवार से टकराया, और उसकी आँखों से आँसू और तेजी से बहने लगे। उसकी हालत ऐसी थी जैसे वह पूरी तरह से टूटी और हारी हुई हो, क्योंकि वह खुद को इस सिचुएशन से निकलने के लिए कुछ कर नहीं पा रही थी।

युग ने ज़ोर से पटककर अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और पलटकर तेज कदमों से उसकी तरफ़ बढ़ा।

युग को इस तरह से अपनी तरफ आते देख मिष्टी का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, वह बुरी तरह से घबरा गई। उसकी साँसें तेज हो गईं, और वो उल्टा चलते हुए पीछे जाने लगी, पीछे जाते हुए उसने खुद को दीवार से एकदम सटा लिया।

युग की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, और चेहरे पर एक तिरछी मुस्कुराहट, जैसे वह मिष्टी को डराने के लिए ही करीब आ रहा हो।

मिष्टी ने कांपती हुई आवाज में कहा, "रुक जाओ, वहीं रुक जाओ। द.. दूर.. दूर रहो मुझसे.. प्लीज स्टाॅप!!" उसकी आवाज में डर और बेबसी थी।

युग ने कोई जवाब नहीं दिया, वह बस उसके करीब और करीब आता गया। मिष्टी ने डर के मारे अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, और अपने हाथों की कसकर मुट्ठी बांध ली, उसके दिल में डर और घबराहट थी कि युग उसके साथ अपनी मनमानी करने वाला है।

मिष्टी के मन में यह ख्याल आते ही जैसे उसकी साँसें रुक-सी गई थीं, और वह अपने दिल की धड़कनों को तेज़ी से महसूस कर रही थी, उसने अपने दिल पर हाथ रख लिया और अपनी घबराहट को छुपाते हुए चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

युग ने उसके करीब आकर उसकी ठोड़ी को अपने हाथों से ऊपर उठाया, और उसकी आँखों में गुस्से से देखते हुए बोला, "क्यों रहूं मैं तुमसे दूर? क्यों रुक जाऊं? अब तो हम पति-पत्नी हैं और आज है हमारी शादी की पहली रात.. आज तो नजदीक आना बनता है आखिर पूरा हक है मेरा अब तो, तुम पर.."

युग की आवाज सुनकर मिष्टी ने धीरे से अपनी आंखें खोलकर उसकी तरफ देखते हुए कहा, "प्लीज़, मुझे माफ कर दो! आई एम सॉरी.. मुझसे गलती हो गई। मैं नहीं जानती थी कि कियारा तुम्हारी मंगेतर थी! कुछ भी नहीं पता था मुझे इस बारे में, मुझसे अनजाने में वो सब हो गया।"

रुद्र ने एकदम भारी गहरी आवाज़ में कहा, तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें माफ कर दूँगा? इतनी आसानी से नहीं, मिष्टी। तुमने जो किया है, उसके लिए तुम्हें हर पल इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।"

मिष्टी ने डर की वजह से दोबारा अपनी आंखें बंद कर ली क्योंकि युग की आवाज में गुस्सा और भारीपन था, जैसे वह उसे अपनी पावर का एहसास करना चाहता हो कि मिष्टी अब कुछ नहीं कर सकती उसके सामने...

मिष्टी ने अपनी आँखें अभी भी बंद रखीं, लेकिन युग के शब्दों ने उसे और ज्यादा डर का एहसास करा दिया।

मिष्टी ने धीरे से कहा, "मैंने जानबूझकर तुम्हारे साथ कुछ भी गलत नहीं किया, युग। यह सब सिर्फ एक गलतफहमी थी। प्लीज, मुझ पर भरोसा करो, मेरी बात सुनो, मुझे कम से कम एक मौका तो दो अपनी बात रखो ।"

युग ने उसकी ठोड़ी को और कसकर पकड़ लिया और ठंडी हँसी हंसते हुए कहा, "भरोसा? तुमने जो किया, उसके बाद मुझसे यह उम्मीद कर रही हो कि मैं तुम पर भरोसा करूँ? तुम्हारी इस मासूमियत का कोई असर नहीं होने वाला मुझ पर, मिष्टी। अब तुम मेरी पत्नी हो, और मैं तुम्हें कभी भी इस बंधन से आज़ाद नहीं करूँगा।"

मिष्टी ने एक झटके से अपनी आँखें खोल दीं और युग की आँखों में देखा। उसके अंदर का गुस्सा और चिढ़ उसे साफ उसकी आंखों में दिख रहा था। मिष्टी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे युग को समझा पाएगी, या फिर वो कैसे इन हालातों को सुधारेगी।

To Be Continued

कैसा लगा आप लोगों को आज का एपिसोड और क्या अपने गुस्से में अंधा युग में कुछ और देख पाएगा क्या वह मिष्टी को अपनी बात रखने का एक मौका देगा और क्या करेगी अब मिष्टी? युग सच में सिर्फ उसको डरा रहा है या फिर गुस्से में हूं हद से आगे बढ़ने वाला है क्या लगता है आप लोगों को जानने के लिए अगले एपिसोड का इंतजार करें और इस एपिसोड पर कमेंट जरुर करके जाइए।

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