Rebirth Novel ki Duniya mein - Chapter 1
कहते हैं, जब एक नई कहानी शुरू होती है, तो पुरानी कहानी का अंत होना निश्चित होता है। वैसे ही, उस दिन सनम और अभिमन्यु की कहानी समाप्त हुई, और एक नई कहानी शुरू हुई।
एक घर में एक लड़की बेड के नीचे बैठी रो रही थी। उसने शादी का जोड़ा पहन रखा था, लेकिन वह यह शादी बिल्कुल नहीं करना चाहती थी। क्योंकि उसकी सौतेली माँ उसकी शादी जबरदस्ती उसके पिता की उम्र के आदमी से करना चाहती थी। लेकिन वह लड़की यह शादी बिल्कुल नहीं करना चाहती थी। इसीलिए वह वहाँ से भाग जाना चाहती थी। लेकिन उसके भागने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे।
तभी उसे कमरे में एक बूढ़ा आदमी आया, और उसने लड़की के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, "भाग जा बेटी, यहाँ से, वरना ये लोग तेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर देंगे।" वह लड़की अपनी आँखें खोलकर उसे, बूढ़े आदमी को, देखती है और कहती है, "काका, उन लोगों ने मेरे भागने के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। बस एक रास्ता बचा है। अगर मैं मौत को चुन लेती हूँ, तो शायद मेरी ज़िन्दगी और मेरी इज़्ज़त दोनों बच जाएँ।"
तभी उसे कमरे में एक 40-45 साल की औरत आई, और उसके साथ एक 20 साल की लड़की थी, और एक 22 साल का लड़का। सब लोग वहाँ जाकर उस लड़की से कहते हैं, "यह तैयार हो गई है, तो इसे जल्दी से नीचे लेकर चलो। इसकी शादी होते ही, यह सारी प्रॉपर्टी हमारी हो जाएगी। और तुम जानते हो ना, मिस्टर गुप्ता ने हमें इस लड़की से शादी करने के लिए पूरे 25 करोड़ रुपये दिए हैं।" मैंने लड़की को भरी आँखों से उस लड़की की तरफ़ देखते हुए कहा, "हमने तो तुमसे प्यार किया था, ना, मोहित? फिर तुमने हमें धोखा क्यों दिया?"
"हम तो वही करते थे जो तुम कहते थे, और तुमने हमें 25 करोड़ में बेच दिया।" तभी वह लड़का उस लड़की के करीब आया और कहता है, "आंचल, यह दुनिया सिर्फ़ पैसों से चलती है। प्यार-मोहब्बत का कोई काम नहीं है। अगर मैं तुम्हारे प्यार में पड़ा रहता, तो पहले की ही तरह कंकाल और भिखारी रहता। आज देखो, मेरे पास सब कुछ है - पैसा, प्रॉपर्टी, पॉवर, और मियाँ जैसी गर्लफ्रेंड। फिर मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है।"
आंचल भरी आँखों से अपनी बहन की तरफ़ देखती है और कहती है, "मैंने तुम्हें हमेशा अपनी छोटी बहन माना, तुमने जो कहा मैंने किया। जो मुझे पसंद आया मैंने सब तुम्हें दे दिया। और आज तुम मेरी शादी एक 50 साल के बूढ़े से कराने जा रही हो। अरे, अगर मैं इतनी ही बेकार थी, तो तुम सब के ऊपर मुझे मार ही देतीं ना, लेकिन मुझे ऐसे किसी नरक में मत भेजो।"
तभी औरत कहती है, "यह इमोशनल ड्रामा ना तू किसी और को दिखाना। यहाँ तेरा यह इमोशनल ड्रामा काम नहीं आने वाला है। और जल्दी से अपना हुलिया ठीक कर, नीचे शादी होने वाली है। और फिर यह सारी प्रॉपर्टी हमारी और तू यहाँ से दफ़ा हो जाएगी।" और तीनों जोर-जोर से हँसते हैं।
वही वह लड़की मुस्कुराते हुए उन सब की तरफ़ देखती है और कहती है, "मैं मर जाऊँगी, लेकिन ना तो यह प्रॉपर्टी दूँगी, और ना ही उस बूढ़े से शादी करूँगी। और एक बात, मैंने यह सारी प्रॉपर्टी ट्रस्ट में दान कर दी है, तो इसकी एक फूटी कौड़ी भी तुम लोगों को नसीब नहीं होगी। और रही मेरी बात, तो मैं उस बूढ़े से शादी नहीं करूँगी। इसलिए, तुम सब लोग अपनी बर्बादी का मातम मानो, और तुम, मोहित, तुमने दौलत के लिए मुझे छोड़ा था ना? आज मेरी दौलत ही तुम्हारे ऊपर बात कर रही है, या यूँ कहो, स्मार्ट को पैसा और पॉवर।"
बालकनी से नीचे कूद जाती है आंचल। आंचल का कमरा 18वें फ्लोर पर था। गिरते ही आंचल का सिर फटकर दो टुकड़ों में हो गया था, और उसकी साँसें तुरंत टूट गई थीं। वही वह तीनों लोग बालकनी से नीचे झाँककर आंचल को देख रहे थे। जब आंचल नीचे गिर रही थी, तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, और वह मुस्कान उन दिनों की बर्बादी का सबूत थी।
बहुत सी पुलिस आई और आंचल को अस्पताल ले गई। वहाँ आंचल की साँसें पहले ही रुक चुकी थीं। तभी उस औरत, मोहित और मियाँ के पास वकील का फ़ोन आया, और वह कहता है, "हाँ, आंचल जो कह रही थी वह सच था। उसने एक महीने पहले ही सारी प्रॉपर्टी ट्रस्ट में दान कर दी है। और उसने यह भी कहा था, अगर उसे कुछ होता है या उसकी मौत होती है, तो उसके ज़िम्मेदार तुम तीनों होंगे। इसलिए, अब तुम तीनों, या तो वहाँ से भाग जाओ, या फिर खुद को पुलिस के हवाले कर दो। क्योंकि थोड़ी देर में पुलिस वहाँ पहुँचने वाली है।" यह सब सुनकर उन तीनों के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। वे तीनों हड़बड़ा गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि वहाँ पुलिस पहुँच चुकी थी, और उन तीनों को ज़बरदस्ती अपने साथ ले गई।
यह अंत नहीं, शुरूआत थी एक नई कहानी की। आंचल की कहानी का तो अंत हो गया था, लेकिन आंचल का पुनर्जन्म हुआ था। उसका फेवरेट नॉवेल "मेरी आशिकी तुमसे ही" था, और आंचल काफी समय से उसे पढ़ रही थी। लेकिन इस नॉवेल का अंत आंचल ने अभी तक नहीं पढ़ा था। क्या होगा, जब अपने फेवरेट नॉवेल में ही आंचल पहुँच जाए, एक लीड कैरेक्टर के रूप में? यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि आंचल पहले से ही सब कुछ जानती होगी।
एक अस्पताल के वार्ड में एक लड़की बेड पर लेटी हुई थी। उसकी कंडीशन बहुत खराब थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसका शरीर ना होकर सिर्फ़ एक कंकाल हो, लेकिन उसकी खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई थी। क्योंकि वह आज भी उतनी ही खूबसूरत थी, जितनी 3 साल पहले थी। हाँ, 3 साल हो गए थे। इस लड़की को कोमा में गए हुए 3 साल हो गए थे और उसकी फैमिली ने अब तो उम्मीद भी छोड़ दी थी कि वह कभी कोमा से बाहर आएगी। अचानक उस लड़की की आँखों की पुतलियाँ हिलने लगीं, और उसके हाथों की उंगलियाँ। तभी उस लड़की के पास बैठी नर्स डॉक्टर के पास गई, और उसे बुलाकर लाई। डॉक्टर ने उसे चेक किया, और बाहर आकर कहा, "कैसा है? आपकी बेटी को होश आ रहा है।"
वहाँ के सारे लोग बहुत खुश हो गए कि आखिरकार 3 साल बाद उनकी बेटी को होश आ रहा था। तभी उस लड़की की आँखें खुलीं। उसकी नज़रें चमक उठीं। उसने अपनी आँखें बंद कीं और फिर बोली, "उसे अपनी आँखों के सामने एक सफ़ेद दीवार दिखाई दी। उसने चारों तरफ़ नज़र घुमाई, तो वह समझ गई कि यह अस्पताल का वार्ड है। उसने अपने मन में सोचा, "क्या मैं बच गई हूँ या मुझे किसी ने बचा लिया है? लेकिन मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं काफी समय से सोई हुई थी?"
कमरे में बहुत से लोग आए। उन सबको देखकर आंचल कन्फ़्यूज़ हो गई और सबकी तरफ़ ऐसे देख रही थी जैसे वे सब उसके लिए अजनबी हों। हाँ, अजनबी ही तो थे वे सब, उसके लिए, क्योंकि आंचल का पुनर्जन्म हुआ था।
अपनी बेटी को अपनी तरफ़ अजनबी की तरह देखते देखकर उसके माँ-बाप की आँखें नम हो गईं। तभी डॉक्टर ने कहा, "आप अपना ख्याल रखिए, मिस्टर और मिसेज़ प्रताप। यह भी बहुत बड़ा मेडिकल चमत्कार है कि आपकी बेटी 3 साल बाद कोमा से बाहर आई है। लेकिन उसे थोड़ा समय लगेगा क्योंकि कितने भयानक एक्सीडेंट के बाद वह ज़िंदा बची है। यही सबके लिए बहुत बड़ी बात थी, और धीरे-धीरे उसकी याददाश्त भी वापस आ जाएगी। और नहीं भी आई तो क्या हुआ, वह पुरानी चीज़ों को पीछे छोड़कर अपनी ज़िन्दगी की नई शुरुआत कर सकती है।"
तभी आंचल बेड से उठने की कोशिश करती है। एक लड़का जाकर उसे सहारा देकर खड़ा करता है। आंचल उस लड़के की तरफ़ देखती है। तो वह लड़का आंचल के माथे को चूमकर कहता है, "बहुत वक़्त लगा दिया, प्रिंसेस। उठने में मुझे नहीं पता था। मेरी प्रिंसेस मुझे इतनी बड़ी सज़ा देगी, अपने बर्थडे पर ना आने की।" आंचल बहुत गौर से उस लड़के का चेहरा देख रही थी। लेकिन उसे कुछ भी समझ नहीं आया। तभी वह लड़का आंचल के सिर पर हाथ फेरकर कहता है, "मैं सब बता दूँगा, लेकिन अभी तुम्हें वाशरूम जाना है ना? चलो, मैं छोड़कर आता हूँ।"
आंचल वाशरूम में आती है और आईने के सामने खड़ी हो जाती है। जब वह खुद के चेहरे को देखती है, तो चौंक जाती है क्योंकि यह चेहरा उसका तो नहीं था। यह तो किसी बहुत खूबसूरत लड़की का चेहरा था, और वह बहुत सुंदर थी। लेकिन वह इतनी दुबली-पतली थी कि ऐसा लग रहा था कि कपड़े ने उसे नहीं, बल्कि कपड़ों ने उसे पहना है। तभी उसके दिमाग में बहुत सी यादें आने लगती हैं। वह कहती है, "ये कैरेक्टर मुझे कुछ जाने-पहचाने से क्यों लग रहे हैं? ये तो मेरे फेवरेट नॉवेल के कैरेक्टर हैं। मैं मतलब, मैं अपने फ़ेवरेट नॉवेल में ज़िंदा हूँ। ओह माय गॉड!" फिर कहती है, "चलो, अच्छा है, उन धोखेबाज़ों की दुनिया से तो मैं बाहर आ गई। लेकिन यहाँ भी धोखेबाज़ अपने ही रिश्तेदारों के वेश में बैठे हैं।"
बाहर आती है तो वह लड़का उसे उठाकर कार में बिठा देता है और कहता है, "कैसी हो, प्रिंस?" आंचल अपनी गर्दन हिला देती है। तभी वह औरत उसके पास आती है और कहती है, "क्या हुआ मेरी बच्ची? ऐसे क्यों देख रही है?" आंचल उसकी तरफ़ देखती है और कहती है, "मुझे कुछ याद नहीं। क्या आप मुझे बता सकती हैं, मैं कौन हूँ और आप लोग कौन हो? क्या आप लोग मुझे अपना परिचय दे सकते हैं?"
उस औरत की आँखों में आँसू आ जाते हैं। तभी वह लड़का सामने आता है और कहता है, "तुम हमारी बहन हो। ये तुम्हारे पापा हैं, और ये तुम्हारी माँ। और मैं तुम्हारा भाई हूँ। मेरा नाम सात्विक है। और ये हमारे माँ-बाप, मिस्टर एंड मिसेज़ रोहित और काजल प्रताप हैं। और तुम हमारी गुड़िया हो, हमारी जान, हमारी ज़िन्दगी, हमारा सब कुछ। अक्षरा मेरी छोटी बहन है, मेरी गुड़िया।"