Twisted marriage Ch. 1

Twisted marriage - Chapter 1

Posted by stuty Kumari • Feb 06, 2025 07:18 AM

बीस साल पहले

महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव में दो ऐसे लोग रहते थे जो बहुत गहरे दोस्त थे। उन दोनों में इतनी गहरी दोस्ती थी कि उसकी मिसाल दी जाती थी। पहले दोस्त का नाम राजेश कदम था। उसकी पत्नी पूर्वा थी जो उस समय प्रेग्नेंट थी। राजेश एक सरकारी कंपनी में काम करता था। दूसरे दोस्त का नाम परमवीर सिंघानिया था। उसकी पत्नी पूजा सिंघानिया और एक बेटा मयूर सिंघानिया था। उसकी उम्र लगभग दस साल थी। वह बहुत गुस्सैल स्वभाव का था। परमवीर एक बिज़नेस मैन था। उसने मुंबई जाकर एक फैक्ट्री लगाने का सोचा था। उसने जमीन खरीदकर फैक्ट्री का काम शुरू किया था।

एक दिन राजेश परमवीर से कहता है,

"परम यार, तू बहुत बड़ा आदमी बन गया है। अब तो तू यहाँ से चला जाएगा। फिर तो तू हम सब को पहचानेगा भी नहीं।"

"ये कैसी बात कर रहा है? हम दोनों रिश्तेदार बनेंगे। मैं तुझसे वादा करता हूँ कि तेरे होने वाले बच्चे से मैं अपने बेटे की शादी करवाऊँगा।"

"अगर मुझे बेटा हुआ तब क्या करेगा?"

"तुम्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं है? चलो इस गाँव की परंपरा अनुसार हम दोनों अपने बच्चों की शादी अभी ही करा देते हैं।"

यह कहकर वे दोनों शादी की तैयारी करते हैं और फिर यह शादी हो जाती है। उस गाँव में अजन्मे बच्चे की शादी भी कराई जा सकती थी। यह भी एक रिवाज था। कोई भी इसे तोड़ नहीं सकता था।

कुछ दिन बाद पूर्वा एक बेटे को जन्म देती है। उसका नाम मयंक रखते हैं। मयूर उस बच्चे को अपनी पत्नी मानता था।

थोड़े दिन बाद परमवीर की फैक्ट्री का काम पूरा हो जाता है जिसके लिए वह मुंबई जाने लगता है। वह वहाँ रहकर ही अपना बिज़नेस बड़ा करना चाहता था।

जाते हुए वह राजेश से कहता है कि मयंक उसकी अमानत है और जब वह अठारह साल का हो जाएगा तो वह उन दोनों की फिर से शादी करा अपने घर ले आएगा। यह कहकर वह वहाँ से चला जाता है। यह बात भूलना नहीं है।

वर्तमान समय

एक लड़का अपने पीठ पर बैग टाँगे तेजी से स्कूल जा रहा था। वह दौड़कर गेट पर पहुँचता है। गेट बंद होने में कुछ ही सेकंड बाकी बचे थे। गेटकीपर उसे देखकर गेट खोलकर उसे अंदर करता है।

"अरे बच्चा, तू आज फिर से इतना लेट आया। कुछ ही समय में गेट बंद हो जाता ना।"

अन्य अपना सिर नीचे कर अफ़सोस से कहता है, "आई एम सॉरी, सब कुछ करते हुए लेट हो गया और ऊपर से आज बस भी छूट गई। दौड़ते हुए आ रहा हूँ।"

उसकी बात सुनकर गेटकीपर को भी बुरा लगता है। वह आगे कुछ नहीं बोलता है और उसे आगे जाने देता है।

अन्य सोलह साल का बेहद खूबसूरत लड़का था। वह अपनी मौसी के साथ रहता था। उसकी नीली आँखें किसी को भी दीवाना बना देती थीं। उस पर उसका फिजिक जो किसी ग्रीक गॉड से कम नहीं था। सभी की आँखें उस पर ठहर जाती थीं। लोग उसे कुछ समय के लिए देखने को मजबूर हो जाते थे।

वह तेजी से अपनी क्लास में जाता है। वह हायर सेकेंडरी में था। वह जाकर सबसे पहले अपनी क्लास टीचर को गुड मॉर्निंग विश करता है। उसकी आवाज़ सुनकर टीचर भी उसे स्माइल पास करती है।

वह बहुत ध्यान से अपने क्लास को अटेंड कर रहा था। लंच ब्रेक के समय अन्य के पास उसके दोस्त आते हैं। अन्य के दोस्त तब से उसके साथ हैं जब से वह इस शहर आया था। उसके दोस्तों का नाम राज, रमा, प्रिया और दीप था।

प्रिया अपना लंच बॉक्स अन्य की तरफ़ बढ़ाते हुए कहती है, "ये ले, आज इतनी देर कैसे हो गई? और खाते हुए ही बात कर लेना, तुझे भूख लगी होगी। आज जब इतना लेट हुआ है तो तू बिना खाए ही आया होगा।"

अन्य उसकी बात सुनकर अपना सिर नीचे झुका लेता है। उसकी बात सही थी। वह सच में भूखा था और लंच लेकर भी नहीं आया था। यह लगभग रोज ही होता था। उसे अपना लंच बनाने का टाइम ही नहीं मिलता था तो वह वैसे ही आ जाता था। उसे अपना लंच खुद ही बनाना रहता था। कोई और उसके लिए लंच बनाने वाला नहीं था। उसके फ़्रेंड उसके बारे में सब जानते थे।

"आज क्या हुआ?" दीप पूछता है।

"वह आज मौसी के गेस्ट आने वाले थे। इसलिए दिन की सब्जी और दाल चटनी बनाकर आ रहा हूँ। यह सब करते हुए लेट हो गया और बस भी छूट गई। फिर दौड़ते हुए स्कूल आ रहा हूँ।"

"तेरी मौसी दो आदमी का खाना खुद नहीं बना सकती है क्या? और भी तो नौकर हैं ना। उन्हें ही कह देती लेकिन नहीं, हर काम तुझे ही करना है। बहुत ही घटिया है।" राज कहता है।

"राज, प्लीज़ ऐसा मत बोलो। उनके बहुत एहसान हैं मेरे ऊपर।" अन्य कहता है।

"राज, रहने दे यार।" दीप कहता है। "वह सही ही कह रहा है, वह उनके साथ रहता है तो वो अपनी मनमानी करेंगे ही। मुझे तो अंकल-आंटी पर गुस्सा आता है कि उन्होंने क्यों इसे छोड़ दिया।"

अन्य यह सब सुनकर उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। वह वाशरूम जाने के बहाने से वहाँ से उठकर अलग चला जाता है। एक जगह अकेला होकर रोने लगता है।

वहीं दूसरी ओर उसके फ़्रेंड दीप को डाँट रहे थे।

"दीप, कितनी बार कहा है कि उसके आगे उसके माँ-बाप का ज़िक्र मत किया करो। तुम सोच भी नहीं सकते कि वह कैसा महसूस करता होगा। सब कुछ होते हुए भी वह उन्हें नहीं मिल सकता। माँ-बाप होते हुए भी वह उनके प्यार को नहीं पा सकता है। पता नहीं क्यों वे उससे इतनी नफ़रत करते हैं कि उससे अलग रहते हैं। उसका सही कारण तो वह बेचारा खुद भी नहीं जानता है। वह कुछ नहीं कर सकता है। तुम लोग प्लीज़ रोज उसे एक ही बात के लिए ताना मारना बंद करो। वह कैसे इन बातों को झेलने के बाद भी अपने को स्ट्रांग बनाने की कोशिश करता है यह हम में से कोई नहीं समझ सकता।" रमा कहती है।

रमा की बात सुनकर उन्हें भी अपनी गलती का एहसास हो रहा था।

दूसरी ओर जब अन्य रो रहा था तो एक लड़का आकर उसके गले लग जाता है। उसे देखकर अन्य और जोर से रोने लगता है।

अन्य को चुप कराते हुए वह लड़का, जिसका नाम शोभित था, कहता है, "चुप हो जाओ, वर्ना मैं किस कर लूँगा।"

"मना किसने किया है?" अन्य उसके सटते हुए कहता है।

शोभित अन्य को पैशनेट किस करने लगता है और पाँच मिनट बाद अलग हो जाता है। अन्य उससे अलग होकर उसे बाय बोलकर अपने क्लास चला जाता है।

शोभित एक पच्चीस साल का लड़का है। वह एक बिज़नेस मैन है। वह इस स्कूल का एक ट्रस्टी भी है। अन्य के जाने के बाद वह भी अपने काम पर चला जाता है।

अगले भाग में जारी...

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