MISTER AMEERZADA - Chapter 3
राघव ने आज अपना पूरा मन बना लिया था कि वह अपनी जान दे देगा। पत्नी की बेवफ़ाई के बाद उसकी ज़िंदगी में कुछ भी नहीं बचा था। वह एक लानत भरी ज़िंदगी जी रहा था। राघव जैसे ही आगे बढ़ा और नदी के पास पहुँचा, अचानक 15-20 गाड़ियाँ आकर उसे घेर लेती हैं।
यह देखकर राघव हैरान और डर गया था। पर उसने सोचा, वह तो मरना ही चाहता था, उसे डरने की क्या ज़रूरत? उन काली गाड़ियों में बैठे सभी लोगों के हाथों में बड़ी-बड़ी बंदूकें थीं। सबने एक जैसे कपड़े पहने हुए थे, बॉडीगार्डों जैसे।
राघव ध्यान से सब देख रहा था। तभी उसने देखा कि उन काली गाड़ियों में से एक सफ़ेद गाड़ी थी। सभी काली गाड़ियों के बीच सफ़ेद गाड़ी उसे हैरान कर रही थी। उस सफ़ेद गाड़ी से एक हल्के क्रीम रंग की साड़ी पहनी हुई औरत निकली। वह किसी नेता जैसी लग रही थी, उसका ओरा बहुत पावरफुल था। जैसे ही वह औरत बाहर आई, चार-पाँच गार्ड उसके पीछे चलने लगे। पर उसने अपने दाहिने हाथ से उन्हें रुकने का इशारा किया और राघव की ओर बढ़ने लगी।
राघव को कुछ समझ नहीं आ रहा था। यह औरत कौन थी? ये गार्ड कौन थे? ये सब उसे क्यों घेर कर खड़े थे? वह तो अपनी ज़िंदगी खत्म करने आया था, फिर यह सब क्या हो रहा था? वह औरत राघव के सामने आकर खड़ी हो गई और उसे ऊपर से नीचे तक देखने लगी। राघव सवालिया निगाहों से उसे देखता रहा। उसकी आँखों में आँसू थे। जब राघव अपनी ससुराल से निकला था, तब हल्की बारिश हो रही थी और वह बेसुध चलता हुआ आया था, जिससे उसके घुटनों तक कीचड़ लगा हुआ था।
राघव ने जल्दी से अपनी शर्ट की बाजू से आँसू पोछे और औरत की ओर देखकर कहा,
"जी जी मैडम जी, आप... आप कौन हैं?"
वह औरत राघव की ओर देखकर बोली,
"क्या हुआ? तुम मरना चाहते हो?"
यह सुनकर राघव हैरान हो गया और बोला,
"आ... आ...आपको कैसे पता चला कि मैं यहाँ मरने के लिए आया हूँ?"
राघव की अटकती हुई जुबान देखकर औरत हल्की मुस्कान के साथ बोली,
"मैं अच्छी तरह जानती हूँ कि तुम अपनी पत्नी को उसके बॉयफ्रेंड राहुल के साथ देखने के बाद यहाँ मरने आए हो।"
यह सुनकर राघव और भी हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह बड़ी हस्ती उससे इतने कैज़ुअल तरीके से कैसे बात कर रही है? उसे कैसे पता चला कि वह अपनी पत्नी की बेवफ़ाई के कारण यहाँ आया है? यह तो कल रात की बात थी! कहीं यह बात पूरे शहर में तो नहीं फैल गई? राघव के मन में यही डर था।
पर औरत राघव को सोचता हुआ देखकर बोली,
"तुम्हें ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हारी पूरी जन्मकुंडली मेरे पास है। तुम्हारा पूरा नाम राघव है और तुम्हें 3 साल की उम्र में किसी अनाथ आश्रम में छोड़ दिया गया था। तब से तुम लोगों का झूठा खाकर जैसे-तैसे ज़िंदगी जी रहे हो। अनाथ आश्रम में तुम्हें एक टाइम खाना मिलता था। तुम वहीं रहे और धीरे-धीरे बड़े होते गए। तुमने पास की एक चाय की टपरी पर काम करना शुरू कर दिया था। जो थोड़ी-बहुत आमदनी होती थी, उससे तुम आश्रम के गरीब बच्चों की मदद करते थे। फिर एक दिन तुम्हारी ज़िंदगी में सरिता आई। सरिता को तुम पहली नज़र में पसंद आ गए थे। सरिता आज़ाद ख़यालों की लड़की थी। उसे मौज-मस्ती और पार्टी करना बहुत पसंद था। पर उसके मन में डर था कि शादी के बाद उसका सब कुछ छूट जाएगा और वह ससुराल नहीं जाना चाहती थी। पर जवान होने के कारण घर में नहीं रह सकती थी। इसीलिए उसने तुम्हें अपना मोहरा बनाया, तुम्हें अपने प्यार के जाल में फँसाया, तुमसे शादी की और तुम्हें घर जमाई बना दिया। तुम सरिता से दिल से प्यार करने लगे थे, पर उसके घर में तुम्हारी क्या औक़ात थी, यह तुम्हें पता चल गया था। शादी के 2 साल बाद तुम मेहनत-मज़दूरी पर ही अटके रहे, सरिता की ख़्वाहिशें पूरी नहीं कर सके। उसने फिर से अपने एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर को हवा देना शुरू कर दिया, अपने कॉलेज वाले बॉयफ्रेंड राहुल से बातचीत बढ़ाने लगी। और शायद तुम्हें नहीं पता है, तुम्हारी बीवी शादी से पहले भी राहुल के साथ कई बार सो चुकी है।"
यह सुनकर राघव ने दोनों हाथ कानों पर रख लिए और जोरों से चीखा,
"यह सब झूठ! ऐसा नहीं हो सकता है! ऐसा नहीं हो सकता है! वह मुझे इतना बुरी तरह से धोखा नहीं दे सकती है! नहीं दे सकती है!"
औरत बोली,
"हम जानते हैं कि तुम दुखी हो, पर तुम्हें सच का सामना करना चाहिए। तुम्हारी बीवी ने तुम्हें तलाक़ दे दिया है क्योंकि वह जल्द ही राहुल से शादी करने वाली है। और तुम्हारा क्या, राघव? अपनी बीवी की बेवफ़ाई जानने के बाद तुम यहाँ जान देने आ गए।"
राघव की हैरानी की कोई सीमा नहीं थी। वह हाथ जोड़कर बोला,
"आप हैं कौन? भगवान के लिए बता दीजिए! आप हैं कौन? और आपको मेरी ज़िंदगी के बारे में इतना सब कुछ कैसे पता है? आखिरकार आप हैं कौन? क्यों आप मुझे गरीब का मज़ाक उड़ा रही हैं? क्या मेरी बीवी के अफ़ेयर के चर्चे पूरे शहर में फैल गए? और आप... आप को तो मैंने कभी नहीं देखा! आप हैं कौन? और मेरे बारे में आप इतना सब कुछ कैसे जानती हैं?"
औरत बोली,
"हम कौन हैं, यह हम तुम्हें ज़रूर बताएँगे। फ़िलहाल हम यहाँ तुमसे एक रिक्वेस्ट करने के लिए आए हैं।"
यह सुनकर राघव हैरान हो गया। आज तक लोगों ने उसे ठुकराया था, गालियाँ दी थीं। पर यह इतनी बड़ी हस्ती उससे रिक्वेस्ट करने आई है?
राघव हैरत से देखने लगा और बोला,
"मैडम जी, आप हैं कौन और आप मुझसे क्या चाहती हैं?"
औरत ने कहा,
"हम तुमसे तुम्हारी ज़िंदगी चाहते हैं। हम तुमसे तुम्हारी पहचान चाहते हैं। तुम्हें अपनी यह पहचान भूलनी होगी और आज के बाद जो पहचान मैं दूँगी, तुम्हें उसी के साथ ज़िंदगी जीनी होगी।"
राघव पूरी तरह से हैरान और परेशान हो गया। उसे समझ आ गया था कि औरत मज़ाक नहीं कर रही थी। वह कैसी पहचान और कैसी ज़िंदगी देने की बात कर रही थी? राघव का दिमाग तेज़ी से चलने लगा। वह बोला,
"आप कहना क्या चाहती हैं? प्लीज़ मुझे साफ़-साफ़ बताइए।"
गायत्री जी ने उसकी ओर देखकर कहा,
"हमारा नाम गायत्री रघुवंशी है और हम अविनाश रघुवंशी की माँ हैं।"
राघव ध्यान से सुन रहा था और बोला,
"लेकिन मैडम जी, आपके नाम से और आपके बेटे के नाम से मेरा क्या लेना-देना?"
गायत्री रघुवंशी बोलीं,
"लेना-देना है राघव, बहुत बड़ा लेना-देना है। इसीलिए हम यहाँ तुम्हारे पास आए हैं, तुम्हारी मदद मांगने के लिए। हम तुम्हें सब कुछ समझाएँगे, उसके लिए तुमको हमारे साथ चलना होगा।"
ऐसा कहकर गायत्री रघुवंशी ने अपने आदमियों को इशारा किया। उन आदमियों ने जल्दी ही राघव के कपड़ों से कीचड़ साफ़ किया, उसे गाड़ी में बिठाया और एक सुरक्षित जगह ले गए। राघव बाहर की भागती-दौड़ती ज़िंदगी देख रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये लोग कहाँ से आ गए और उसे मरने से क्यों रोका।
दूसरी ओर, सरिता राहुल के साथ पूरी रात बिताने के बाद सुबह 10 बजे सोकर उठी और चिल्लाई,
"राघव, मेरे लिए चाय लेकर आओ।"
आखिर वह औरत कौन थी और उसे राघव की ज़िंदगी क्यों चाहिए थी? जानने के लिए बने रहिए दोस्तों।