मिले ना मिले हम🍁🍁 उसने सिर्फ शरीर छुआ था… अब वो दिल की हर दीवार तोड़ना चाहता है।" Ch. 2

मिले ना मिले हम - Chapter 2

Posted by Beautiful stories ( R Mann) • Feb 12, 2025 05:19 PM

दफ़्तर में काम करते-करते तेजस खन्ना ने कलाई पर बंधी रोलेक्स की घड़ी पर वक्त देखा। बहुत टाइम हो चुका था। आज रात के लिए प्रीति के साथ उसका खेल फिक्स था। वह अपनी रिवॉल्विंग चेयर से उठा, अपना कोट पहना और सीधे 'होटल ब्लू मून' के लिए निकल गया।

यह शहर का सबसे आलीशान पाँच सितारा होटल था, जो असल में तेजस का ही साम्राज्य था। वहाँ उसका एक पर्सनल प्रेसिडेंशियल सुइट हमेशा बुक रहता था।

तेजस, प्रीति के पहुँचने से पहले ही वहाँ पहुँच चुका था। उसने एक हॉट शावर लिया, अपनी सिल्क की नाइट-रॉब पहनी और इत्मीनान से सोफे पर बैठकर अपने लैपटॉप पर काम करने लगा।

तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। तेजस ने उठकर दरवाज़ा खोला।

सामने प्रीति खड़ी थी। बेहद रिवीलिंग, ब्लैक शॉर्ट वन-पीस ड्रेस में उसका पूरा बदन जैसे छलक रहा था।

"मैं... अंदर आ जाऊँ, सर?" प्रीति ने अपनी पलकें झुकाकर मदहोश आवाज़ में कहा।

"आ जाओ, मैं तुम्हारी ही वेट कर रहा था..." तेजस की  आँखों में **** की चमक कौंध गई।

दोनों अंदर आए। तेजस सोफे पर बैठ गया। प्रीति बिना वक्त गंवाए वाइन काउंटर की तरफ बढ़ी और दो गिलास में डार्क रेड वाइन उड़ेल दी। वह गिलास लेकर तेजस के पास आई और उसकी नशीली आँखों में देखते हुए बैठ गई।

"यहाँ बैठो, मेरी जान... मेरी गोद में," तेजस ने हुकुम दिया।

प्रीति खिलखिलाती हुई उसकी गोद में बैठ गई। उसने एक घूँट शराब तेजस के होठों से लगाई और फिर खुद भी पी लिया। "मैं ना जाने कब से इस वक्त का इंतज़ार कर रही थी..." प्रीति ने फुसफुसाते हुए गिलास साइड में रखा।

उसने अपने दोनों हाथ तेजस की गर्दन में डाले और अपने सुर्ख होठ सीधे तेजस के होठों पर टिका दिए।

अगली सुबह जब धूप की किरणें खिड़की से छनकर बेड पर पड़ीं, तो प्रीति की आँखें खुलीं।

कमरे में तेजस नहीं था। मगर साइड टेबल पर एक 'ब्लैंक चेक' (Blank Cheque) पड़ा था, जिस पर तेजस खन्ना के दस्तखत थे।

चेक को देखते ही प्रीति के बदन का सारा दर्द और थकान पल भर में रफूचक्कर हो गई। उसकी आँखों में बेहिसाब लालच चमक उठा।

"अरे बाप रे! अगर ऐसा चेक हर रात मिले... तो मैं तो रोज़ इसके बिस्तर पर नीलाम होने को तैयार हूँ!" प्रीति ने खुद से कहा। उसने जल्दी से चेक उठाया, अपने बिखरे कपड़े पहने और होटल से निकल गई।

सोमवार को जब प्रीति ऑफिस पहुँची, तो उसने बेहद बन-संवरकर तेजस के केबिन के चक्कर काटे। उसने अपनी अदाओं से तेजस को फिर से रिझाने की पूरी कोशिश की।

मगर तेजस ने उसकी तरफ एक नज़र उठाकर भी नहीं देखा! वह अपने लैपटॉप में बिज़ी रहा, जैसे प्रीति नाम की कोई लड़की उसके वजूद में ही ना हो।

तेजस खन्ना का यही  असूल था—**वह किसी भी लड़की को सिर्फ एक रात के लिए याद रखता था। उसके बाद उसकी कीमत चुकाता, और फिर उसकी तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखता था।**

प्रीति का दिल अपमान की आग में जल उठा। तभी उसके गुपचुप फोन पर उसी रहस्यमयी आदमी की कॉल आई।

"काम नहीं हुआ..." प्रीति ने चिढ़कर कहा।

"क्यों? तुम तो रात भर उसके साथ थी ना?" सामने से सवाल आया।

"हाँ थी! मगर आज उसने मेरी तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखा... जैसे मैं उसके लिए कोई सड़क का कचरा हूँ!"

सामने वाला शख्स कुछ देर खामोश रहा, फिर एक ज़हरीली हँसी हँसा, "कोई बात नहीं। तुम उसके ऑफिस में ही अपनी जगह बनाए रखो। धीरे-धीरे उसे ज़हर की तरह अपनी आदत बनाओ... अगर उसे तुम में दिलचस्पी नहीं बची है, तो उसकी मदद करो।"

"कैसी मदद?" प्रीति ने नासमझी में पूछा।

"देखो... उसे हर रात एक नई लड़की चाहिए," फोन पर उस आदमी ने अपनी साज़िश का जाल बुना, "तुम उसके लिए नई-नई लड़कियाँ ढूँढने और उन्हें उसके बिस्तर तक पहुँचाने में उसकी मदद करो।

दूसरी तरफ, तेजस का पर्सनल सेक्रेटरी (PA) **राहुल शर्मा**—जो कॉलेज के दिनों से उसका सबसे सच्चा और खास दोस्त था—तेजस के इस रवैये से हमेशा दुखी रहता था।

चाहे राहुल तेजस के कहने पर उसके सारे अय्याशी के काम करता था—उसके लिए लग्जरी होटल्स बुक करना, लड़कियों को महंगे गिफ्ट्स या फूल भेजना... मगर वह हमेशा तेजस को समझाने की कोशिश करता था।

शाम को जब तेजस ने अपनी ड्रिंक का गिलास उठाया, तो राहुल ने गंभीर होकर कहा, "तेजस... मैं दिल से चाहता हूँ कि तेरी ज़िंदगी में कोई ऐसी लड़की आए... जो सिर्फ तेरी रूह से प्यार करे। जो तुझे बदल दे, और तेरी इस भटकती ज़िंदगी में सुकून और सच्चा प्यार भर दे।"

तेजस ने एक कड़वी, बेपरवाह हँसी हँसी, "राहुल... तू आज भी बच्चा ही रहा! यह बात नामुमकिन है। मैं किसी से कभी प्यार नहीं कर सकता... और कोई मुझसे प्यार क्यों करेगी? अगर किसी को मुझसे प्यार होगा, तो वो सिर्फ मेरी इस बेहिसाब दौलत से होगा। जो मुझे चाहिए, वह मुझे एक औरत से सिर्फ एक रात में मिल जाता है... दोबारा मुझे उसकी शक्ल देखने की भी इच्छा नहीं होती।"

राहुल ने मुस्कुराते हुए तेजस के कंधे पर हाथ रखा, "कोई बात नहीं मेरे भाई... देखना, कोई ना कोई तो तेरी ज़िंदगी में ऐसी ज़रूर आएगी... जिसकी चाहत तू बार-बार करेगा, और जिसके आगे तेरा यह सारा घमंड ढह जाएगा!"

* **आखिर प्रीति और उस गुप्त आदमी का असली प्लान क्या है?

* **और जब इस अय्याश, बेपरवाह रईस 'तेजस खन्ना' की ज़िंदगी में कदम रखेगी—सीधी-साधी, अपने उसूलों पर मिटने वाली संस्कारी लड़की 'तपस्या'... तो क्या होगा?**

* **क्या राहुल की भविष्यवाणी सच होगी? क्या तपस्या, तेजस के इस काले साम्राज्य और उसकी **** को सच्चे प्यार में बदल पाएगी?**

मिज़ाज रईस और एक संस्कारी लड़की की टक्कर होती है…।

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