Rebirth: pyar ya mout? - Chapter 3
"अपनी आत्मा बेच दी?"
नायरा के होंठ बमुश्किल हिले। ठंडी हवा उसके चारों ओर चक्कर काट रही थी, जैसे कोई अदृश्य ताकत उसे छूने की कोशिश कर रही हो।
अविक की आँखें गहरी, डरावनी, और दर्द से भरी हुई थीं।
"हाँ, नायरा," उसने धीरे से कहा। "तुम्हें खोने के बाद… मैंने खुद को हमेशा के लिए अंधेरे के हवाले कर दिया।"
नायरा ने धीरे-धीरे कदम पीछे लिए।
"मतलब… तुम अब इंसान नहीं रहे?"
अविक हँसा, लेकिन उसकी हँसी में कड़वाहट थी।
"नहीं।"
फिर वह एकदम शांत हो गया और धीरे से आगे बढ़ा।
"मैं अब एक श्रापित आत्मा हूँ, जो इस दुनिया में अटका हुआ है। मैंने अंधकार से सौदा किया, ताकि मैं वापस आ सकूँ… ताकि मैं तुम्हारा इंतज़ार कर सकूँ।"
नायरा की धड़कन तेज़ हो गई।
"कैसा सौदा?"
अविक ने धीरे से अपनी हथेली खोली। वहाँ एक काली आकृति थी, जो किसी जीवित छाया की तरह हिल रही थी।
"मैंने अपनी आत्मा एक छायादेव को सौंप दी थी। बदले में, उसने मुझे इस दुनिया में वापस आने दिया… जब तक कि मैं तुम्हें वापस नहीं पाता।"
नायरा काँप उठी।
"छायादेव?"
"हाँ," अविक ने गहरी साँस ली। "वो एक ऐसी शक्ति है, जो हर इंसान के सबसे गहरे डर में रहती है। वही मेरी आत्मा का मालिक है, और उसने मुझसे एक वादा लिया है…"
नायरा ने डर से निगल लिया।
"कैसा वादा?"
अविक ने उसकी आँखों में देखा—गहरी, अंधेरी, दर्दभरी आँखें।
"कि मैं तुम्हें अपना बना लूँगा। इस बार कोई हमें जुदा नहीं कर सकेगा, नायरा। न समय, न मौत… और न ही तुम्हारी किस्मत।"
अंधकार का इशारा
ठीक उसी पल, हवा और भी ठंडी हो गई। चर्च की घंटियाँ एक बार फिर बजने लगीं, लेकिन इस बार उनकी आवाज़ भयानक थी—जैसे वे किसी अदृश्य शक्ति के प्रभाव में हों।
"टन्न… टन्न… टन्न…"
नायरा के रोंगटे खड़े हो गए।
कुछ सही नहीं था।
फिर अचानक, चर्च के पीछे की झाड़ियों में कुछ हिला।
नायरा ने एक परछाई को सरकते हुए देखा—लंबी, काली, बिना आकार की…
"वो आ गया," अविक ने फुसफुसाकर कहा।
"क… कौन?" नायरा की आवाज़ काँप गई।
अविक ने उसकी कलाई पकड़ ली।
"छायादेव," उसने धीरे से कहा। "अब तुम्हारा भी हिसाब करने आया है।"
नायरा ने जोर से सिर हिलाया। "मैं… मैंने उससे कुछ नहीं माँगा!"
अविक मुस्कुराया। "लेकिन मैं तुम्हें माँग चुका हूँ, नायरा। और अब वो तुम्हें लेने आया है।"
छायादेव का आगमन
अचानक, अंधेरा और गाढ़ा हो गया।
नायरा ने देखा—चर्च की दीवारों पर अजीब-सी आकृतियाँ उभरने लगीं, जैसे कोई अंदर से बाहर आने की कोशिश कर रहा हो।
फिर, अंधेरे में से दो चमकती लाल आँखें उभरीं।
एक गहरी, भयानक आवाज़ आई—"समय पूरा हुआ, अविक। अब इस लड़की को सौंप दो।"
नायरा की साँसें थम गईं।
"अविक, ये क्या है?" उसने घबराकर पूछा।
अविक ने धीरे से उसकी कलाई पर उंगलियाँ फेरीं।
"तुम मेरी हो, नायरा," उसने फुसफुसाया। "अब हमेशा के लिए।"
और फिर… उसने नायरा को अंधेरे की ओर खींच लिया।
नायरा की धड़कनें तेज़ हो गई थीं।
अविक ने उसकी कलाई पकड़ रखी थी, और अंधेरे से झांकती लाल चमकती आँखें धीरे-धीरे नज़दीक आ रही थीं।
"समय पूरा हुआ, अविक," छायादेव की गहरी, डरावनी आवाज़ गूँजी। "उसे मेरे हवाले करो।"
नायरा ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की। "अविक, मुझे जाने दो!"
लेकिन अविक की पकड़ और मज़बूत हो गई। "अब तुम मेरी हो, नायरा।"
तभी—
"अविक, उसे छोड़ दो!"
एक भारी आवाज़ ने माहौल को कंपा दिया।
नायरा चौंककर उस दिशा में देखी—
एक लंबे कद का आदमी चर्च के दरवाज़े के पास खड़ा था।
उसकी आँखों में गहरी चमक थी, चेहरे पर हल्की दाढ़ी, और कंधों तक लंबे काले बाल हवा में उड़ रहे थे।
उसने काली जैकेट पहनी थी, और उसकी उँगलियों में एक अजीब-सा कड़ा था, जिस पर कोई रहस्यमयी मंत्र उकेरा हुआ था।
अविक ने धीरे से नायरा की कलाई छोड़ी और उस आदमी की तरफ देखा।
"रुद्र…"
"रुद्र?" नायरा फुसफुसाई।
रुद्र ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में चिंता और दृढ़ता थी।
"डरो मत, मैं तुम्हारी मदद करने आया हूँ," उसने कहा।
छायादेव की लाल आँखें क्रोध से चमक उठीं। "यह इंसान यहाँ क्या कर रहा है?"
अविक ने रुद्र की तरफ कदम बढ़ाया। "तुम यहाँ क्यों आए हो?"
रुद्र मुस्कुराया। "तुम्हारी काली दुनिया की सच्चाई उजागर करने।"
रुद्र कौन है?
नायरा का दिमाग सवालों से भर गया।
"यह आदमी कौन है? और इसे अविक और छायादेव के बारे में सब कैसे पता है?"
रुद्र ने जेब से एक ताबीज निकाला और नायरा की ओर बढ़ा दिया।
"इसे पकड़ो, ये तुम्हारी रक्षा करेगा," उसने कहा।
जैसे ही नायरा ने ताबीज छुआ, अचानक हवा में हलचल होने लगी। चर्च की घंटियाँ और तेजी से बजने लगीं।
अविक पीछे हट गया, जैसे उसे किसी चीज़ से जलन हो रही हो।
छायादेव की गहरी आवाज़ गूँजी—"रुद्र! तुम फिर से हमारी राह में आ रहे हो।"
रुद्र ने ठंडी नज़रों से उसे देखा।
"हाँ, क्योंकि तुम्हारी जगह अंधेरे में है। नायरा का नहीं।"
अविक का क्रोध
अविक की आँखों में गहरा अंधकार फैलने लगा।
"नायरा मेरी थी, मेरी है और मेरी ही रहेगी!" उसने गुर्राकर कहा।
रुद्र हँस पड़ा। "वही पुराना पागलपन। तुमसे तुम्हारा प्यार छीन लिया गया था, अविक… लेकिन क्या तुमने कभी सोचा कि असली गुनहगार कौन था?"
अविक ने गुस्से से उसे घूरा। "क्या मतलब?"
रुद्र ने धीरे से कहा—"जिससे तुमने सौदा किया… वही तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन है, अविक। छायादेव ने ही तुम्हें श्रापित किया।"
छायादेव की लाल आँखें तेजी से चमक उठीं।
"चुप रहो!"
लेकिन रुद्र ने नज़रें नहीं झुकाईं।
"तुमने अपनी आत्मा बेची थी, अविक," रुद्र ने आगे कहा, "लेकिन बदले में क्या पाया? सिर्फ अंधेरा, सिर्फ दर्द… और अब तुम वही दर्द नायरा को देना चाहते हो?"
नायरा हिल गई।
"क्या अविक का प्यार सिर्फ एक जुनून बन चुका है?"
अविक के चेहरे पर दर्द और गुस्से की लकीरें उभर आईं।
"नायरा मेरी है!" उसने जोर से कहा।
रुद्र ने एक कदम आगे बढ़ाया।
"नायरा का कोई मालिक नहीं है, अविक। प्यार ज़ंजीर नहीं होता, उसे बाँधा नहीं जा सकता।"
अविक की आँखों में नायरा के लिए प्रेम और अजीब-सा दर्द झलक रहा था।
लेकिन छायादेव अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था।
"बहुत हो गया!"
अचानक, वह धुंधली परछाईं एक बड़े दैत्य के आकार में बदलने लगी। उसकी लंबी काली उँगलियाँ नायरा की ओर बढ़ने लगीं।
"नायरा अब मेरी है!"
भागने का रास्ता
रुद्र ने तुरंत एक तांत्रिक मंत्र पढ़ा और ज़मीन पर एक सफेद घेरा बना दिया।
"नायरा, अंदर आओ!"
नायरा झट से उस घेरे में कूद गई।
छायादेव की उँगलियाँ जैसे ही घेरे को छूने वाली थीं, वह अचानक एक ज़ोरदार चीख के साथ पीछे हट गया।
"नहीं!!"
रुद्र मुस्कुराया। "पुराने मंत्र अब भी तुम्हारे लिए खतरा हैं, छायादेव।"
अविक ने गुस्से से देखा।
"ये मत समझना कि तुम जीत गए, रुद्र। नायरा मेरी थी और मेरी ही रहेगी।"
रुद्र ने नायरा की ओर देखा।
"यह सिर्फ शुरुआत है, नायरा। तुम्हें अब सच और झूठ के बीच खुद फैसला लेना होगा।"
नायरा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
क्या वह अविक की भावनाओं को समझेगी? या रुद्र सही कह रहा है—कि अविक सिर्फ अंधेरे का गुलाम बन चुका है?
रुद्र ने नायरा की कलाई पकड़कर उसे चर्च के बाहर खींच लिया। हवा अभी भी भारी और ठंडी थी, लेकिन वह अब छायादेव के अंधेरे से थोड़ी दूर आ चुकी थी।
अंदर, अविक अब भी क्रोध में तड़प रहा था।
"तुम मुझे नायरा से अलग नहीं कर सकते, रुद्र!" उसने गरजकर कहा।
रुद्र ने पलटकर देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी दृढ़ता थी।
"अगर तुम्हें वाकई नायरा से प्यार था, तो तुम उसे एक बंदिश नहीं, आज़ादी देते, अविक।"
छायादेव की गहरी हँसी गूँजी। "हा...हा...हा... यह लड़की मेरे अंधेरे में आने से नहीं बच सकती, रुद्र! चाहे तुम कितने भी तंत्र-मंत्र कर लो।"
रुद्र ने एक ताबीज नायरा की ओर बढ़ाया। "इसे पकड़ो। जब तक यह तुम्हारे पास रहेगा, छायादेव तुम्हें छू नहीं पाएगा।"
नायरा ने कांपते हाथों से ताबीज लिया।
अविक ने एक गहरी साँस ली। उसकी आँखें दर्द से भरी थीं, लेकिन वह वहाँ से हिला नहीं।
"तुम जा सकती हो, नायरा। लेकिन याद रखना... तुम एक दिन खुद लौटकर मेरे पास आओगी।"
नायरा का दिल धड़क उठा। वह यह शब्द सुनकर अजीब-सी बेचैनी महसूस कर रही थी।
रुद्र ने उसका हाथ कसकर पकड़ा। "चलो!"
और वे दोनों अंधेरे को चीरते हुए चर्च से बाहर निकल गए।
असली लड़ाई की तैयारी
रुद्र उसे शहर से दूर एक छोटे से कुटीर में ले आया। यह जगह पुराने ज़माने के किसी गुप्त आश्रम जैसी लग रही थी।
नायरा अब भी सदमे में थी। "ये सब क्या हो रहा है, रुद्र? तुम कौन हो? और तुम्हें इन सबके बारे में इतना कुछ कैसे पता है?"
रुद्र ने गहरी साँस ली।
"मैं एक अघोरी हूँ, नायरा। मैं उन आत्माओं से लड़ता हूँ, जिन्हें अधूरी इच्छाओं ने श्रापित बना दिया है।"
नायरा का मुँह खुला का खुला रह गया। "तो तुम जानते थे कि अविक कौन है?"
"हाँ," रुद्र ने सिर हिलाया। "लेकिन जो तुम नहीं जानती, वो ये है कि… अविक अब सिर्फ एक प्यादा है। असली खेल छायादेव का है।"
"मतलब?" नायरा ने पूछा।
रुद्र की आँखें चमकीं। "छायादेव ने सिर्फ अविक से सौदा नहीं किया था… उसने तुम्हारे पिछले जन्म से ही तुम पर नज़र रखी थी।"
नायरा के हाथ से ताबीज गिरते-गिरते बचा।
"क्या?"
रुद्र गंभीर स्वर में बोला—"छायादेव को तुम्हारी आत्मा चाहिए, नायरा। अविक बस उसका जरिया है।"
नायरा ने घबराकर पूछा, "लेकिन क्यों? मैं कौन हूँ?"
रुद्र ने धीरे से कहा—"तुम सिर्फ ओविया नहीं थी, नायरा। तुम एक विशेष आत्मा हो। और छायादेव तुम्हें हमेशा के लिए अपने अंधकार में कैद करना चाहता है।"
अविक की उलझन
दूसरी तरफ, अविक अकेला चर्च में खड़ा था।
उसके भीतर अजीब सा द्वंद्व चल रहा था।
"क्या मैं सच में सिर्फ एक मोहरा हूँ?"
उसने अपने हाथों की ओर देखा। वहाँ हल्की काली लकीरें दौड़ रही थीं, जैसे कोई अंधेरा उसमें समा रहा हो।
"छायादेव…" उसने धीमी आवाज़ में कहा। "तूने मुझसे झूठ बोला?"
छायादेव की हँसी गूँजी। "झूठ और सच का कोई मतलब नहीं, अविक। तुम्हें तो बस नायरा को मेरे पास लाना है।"
अविक की आँखों में एक पल के लिए शंका झलकी।
"क्या मेरा प्यार सिर्फ एक चाल थी?"
लेकिन फिर, उसने खुद को सँभाला। "नायरा मेरी है। और मैं उसे किसी को भी नहीं लेने दूँगा।"****"
छायादेव ने मन ही मन मुस्कुराया। "यही तो मैं चाहता हूँ, अविक…"
क्या नायरा को बचाया जा सकता है?
रुद्र ने नायरा के सामने एक नक्शा रखा।
"ये क्या है?" नायरा ने पूछा।
"छायादेव का असली ठिकाना," रुद्र ने कहा। "अगर हम वहाँ पहुँच जाएँ, तो उसे हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं।"
नायरा ने हिम्मत जुटाई। "क्या मैं मदद कर सकती हूँ?"
रुद्र ने उसे ध्यान से देखा। "तुम्हें लड़ना सीखना होगा, नायरा। और सबसे पहले, तुम्हें अपने दिल की सच्चाई को पहचानना होगा।"
नायरा ने सिर झुका लिया।
"क्या मेरा दिल अब भी अविक के लिए धड़कता है?"
रुद्र ने गहरी साँस ली। "समय कम है। हमें जल्दी करना होगा, वरना अविक दोबारा तुम्हें लेने आ जाएगा।"
और वहीं दूसरी तरफ, चर्च में खड़ा अविक अब नायरा को वापस पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था।
to be continued 💫 🦋 💙