The Haunting Murders Ch. 1

The Haunting Murders - Chapter 1

Posted by Simran Ansari • Mar 15, 2025 11:35 AM

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"हम लोग इस वक्त हैं, ठीक उसी घर के बाहर; जहां से पिछले कुछ दिनों में ही एक के बाद एक तीन लाशें बरामद हुई हैं और यह वाली लाश तो उस घर के अंदर से बरामद हुई है जो कि इतने दिनों से खाली और सुनसान पड़ा है।" - हाथ में माइक पकड़े हुए वह लड़की, जो कि एक न्यूज़ रिपोर्टर लग रही थी, अपने सामने खड़े कैमरामैन के कैमरा में देख कर बोल रही थी।

तभी एक पुलिस जीप वहां पर आ कर रुकी और एक लंबा चौड़ा हैंडसम सा दिखने वाला नवयुवक इंस्पेक्टर जीप से उतरा, पुलिस की वर्दी उस पर खूब जंच रही थी, उस की पर्सनालिटी पर और उसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि पुलिस की वर्दी बनी ही है उस के लिए; उस के साथ ही एक और इंस्पेक्टर जो कि शायद उसका जूनियर था उस के साथ ही जीप के दूसरी तरफ से बाहर निकला और वह दोनों एक साथ ही उस बोलती हुई न्यूज़ रिपोर्टर के कैमरे के सामने से निकल गए।

और जितना सुनसान, वीरान व खाली वह उस जगह के बारे में दिखा रही थी या फिर बता रही थी वह उस वक्त देखने में तो वह जगह बिल्कुल भी वैसी नहीं लग रही थी, वहां पर काफी हलचल थी और लगभग दो-तीन न्यूज़ चैनल वालों की गाड़ियों के साथ,अब तो पुलिस की जीप और एक एंबुलेंस उस जगह पर नजर आ रही थी, देख कर अंदाजा लगाया जाए तो लगभग 30 - 35 लोगों की भीड़ तो इकट्ठा थी उस वक्त वहां पर,

"कई लोगों का तो यह भी मानना है कि यह जगह हॉन्टेड है और इसीलिए इस घर को कोई नहीं खरीदता और जो मर्डर हो रहे हैं, वह सारे भी साधारण मर्डर नहीं है क्योंकि मरने वालों के शरीर पर किसी तरह का कोई निशान नहीं मिलता पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी अभी तक पहले मर्डर की कोई बात सामने नहीं आई है कि अगर यह सारे मर्डर है तो खूनी मर्डर कर कैसे रहा है, और इस जगह पर ही क्यों?" - उसी तरह एक दूसरा न्यूज़ रिपोर्टर कैमरे के सामने खड़े हो कर अपने माइक पर बोला

"हटवाओ मयंक, इन लोगों को यहां से क्या नौटंकी लगा रखी है, हर चीज का सर्कस बना देते हैं।" - न्यूज रिपोर्टर्स की यह बातें जब इंस्पेक्टर नीरज के कानों में पड़े तो वह दांत पीसते हुए अपने जूनियर सब इंस्पेक्टर मयंक से बोला

"रिलैक्स सर, अपना काम ही तो कर रहे हैं वह सब भी, जैसे कि हम अपना काम करने आए हैं।" - मयंक नीरज के कंधों पर हाथ रखता हुआ बोला तो नीरज ने पीछे मुड़कर उसे घूर कर एक नज़र देखा तो नी मयंक ने उसके कंधे पर से अपना हाथ हटा लिया और बोला - "ठीक है, हटवाता हूं!" और इतना बोलते हुए वहां से अपने कॉन्स्टेबल के पास चला गया था।

और नीरज भी तेज कदमों से उस तरफ बढ़ गया जहां की लाश होने की खबर मिली थी।

यह सब तो वहां पर हो रहा था लेकिन वहां से कुछ दूर दूरी पर, उसी घर की बाउंड्री वॉल से एक बाहर के पेड़ के पीछे छिपी दो जोड़ी आंखें काफ़ी देर से इन सब पर, और वहां पर हो रही सभी हरकतों पर नजर रखे हुए थी और शायद उन सब के वहां से चले जाने के इंतजार में भी थी। वह दोनों काफी दूरी से नज़र रखे हुए थे इसलिए वहां मौजूद लोगों की बातें और हर किसी की शक्ल तो साफ दिखाई नहीं दे रही थी फिर भी जितना वह समझना चाहते थे उतना तो समझ आ ही रहा था उन दोनों को;

कुछ ही देर में वहां की भीड़ छंटने लगी और एक-एक कर के लोग भी उस जगह से जाने लगे और फिर आखिर में घर के दरवाजे और जिस जगह पर लाश मिली थी, वहां आसपास सील करने के बाद दोनों पुलिस इंस्पेक्टर भी जिस जीप से आए थे उसी में बैठ कर वापस चले गए।

पूरी तरह से तसल्ली हो जाने और एक एक इंसान को वहां से जाते हुए देख लेने के बाद, आखिर वह दो लोग भी पेड़ के पीछे से निकल कर बाहर आए और उस घर की बाउंड्री वॉल की तरफ बढ़ने लगे।

हां, अब इस वक्त क्योंकि रात काफी हो चुकी थी और अब उन दोनों के अलावा वहां पर दूर-दूर तक कोई और नज़र भी नहीं आ रहा था, तो अब यह घर बिल्कुल उस न्यूज़ रिपोर्टर के बताए अनुसार सुनसान वीरान और काफी हद तक भूतिया भी लग रहा था।

इसलिए उस घर की तरफ बढ़ते हुए उस लड़की का गला डर के मारे काफी सूख चुका था और उस के कदम आगे नहीं बढ़ रहे थे, लेकिन उस के साथ जो लड़का था वह इस तरह से वहां पर चल रहा था जैसे कि अपने घर के बगीचे में टहल रहा हूं उस की आंखों में डर या घबराहट दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रही थी अगर कुछ दिख रहा था तो जैसे कुछ नया जानने की चाहत और उत्साह!

"चल छोड़ यार मोहित अब इतनी रात हो गई है चलते हैं यहां से" - उस अजीब से दिखने वाले वीरान घर के सामने खड़ी वो लड़की इधर उधर चारों तरफ एक नज़र मारती हुई अपने साथी मोहित से बोली

"क्यों तुझे भी भूतों से डर लगता है क्या तृषा डार्लिंग ? " मोहित तृषा का मज़ाक उड़ाते हुए बोला जो कि उस पुराने से घर की थोड़ी टूटी फूटी सी बाउंड्री वॉल के चारों तरफ घूम घूम कर जैसे कुछ ढूंढ रहा था या फिर शायद अंदर झांकने की कोशिश कर रहा हो।

"तुझे पता है ना भूत वूत नहीं होते, बकवास ना कर!" - तृषा उस की बात पर लापरवाही से बोली क्योंकि मोहित उसे हमेशा ही डराने की कोशिश करते रहता था और मज़ाक भी!

"तो फिर क्या डर है तुझे, जो बार-बार वापस चलने को बोल रही है।" - मोहित दीवार पार करने के लिए इधर-उधर कोई बड़ा पत्थर ढूंढता हुआ बोला

"यहां सब का आना मना है और ऊपर से अभी जो यहां लाश मिली थी उसके बाद तो पुलिस किसी भी वक्त आ धमकती है यहां, शायद अभी फिर से वापस आ गए तो पकड़े जाएंगे मोहित तेरी इन हरकतों की वजह से..." - तृषा उसे समझाती हुई बोली

"वही तो पता करना है यार कि आखिर लाश यहां आई कैसे जब हमें अंदर जाने में इतनी मुश्किल हो रही है।" - बोलते हुए मोहित थोड़ी दूर पर दीवार से लगे एक बड़े से पत्थर पर चढ़ गया

"नो मोहित प्लीज स्टॉप , कभी तो मेरी बात सुना कर यार! " - तृषा उसे रोकते हुए बोली लेकिन मोहित कहां सुनने वाला था वह अब तक दीवार से उस पार हो चुका था।

क्रमशः

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