Boss to husband - Chapter 1
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दोनों नशे की हालत में सोफ़े पर बैठे हुए थे। अंबर की हालत ज़्यादा बिगड़ चुकी थी।
"मेरा बदन जलने लगा है... मुझे बहुत गर्मी लग रही है," — कहते हुए अंबर ने अपना ब्लेज़र उतारना शुरू कर दिया।
"मैं बाथरूम जाकर शावर लेती हूँ," — वह लड़खड़ाते क़दमों से खड़ी होने लगी। चलना मुश्किल हो रहा था, फिर भी किसी तरह वह बाथरूम तक पहुँच गई।
अब वेदांत को भी अजीब-सी बेचैनी महसूस होने लगी। उसका भी शरीर तप रहा था। उसने भी अपना ब्लेज़र उतार फेंका।
"तो ये सब रवि ने अंबर के लिए प्लान किया था..." वेदांत ने बड़बड़ाया, "उसे नशे में लाकर जबरदस्ती करना चाहता था।"
"हम दोनों ने वह जूस आधा-आधा पी लिया। असर थोड़ा कम है, लेकिन है तो सही।"
उसका सिर चकरा रहा था, लेकिन वह अंबर के पीछे-पीछे बाथरूम की ओर बढ़ गया। लड़खड़ाते हुए दरवाज़े तक पहुँचा और अंदर चला गया।
अंबर शावर के नीचे खड़ी थी। उसके कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे।
"तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" अंबर ने चौंकते हुए पूछा।
"पानी से तुम्हारा बदन जलना बंद हुआ?" वेदांत ने पूछा।
"नहीं..." अंबर ने धीरे से कहा। उसका एक हाथ दीवार पर टिका हुआ था ताकि वह गिर न जाए।
"यह ऐसे नहीं जाएगा," वेदांत बोला। "जो जूस रवि खन्ना ने मंगवाया था, उसमें कुछ मिला हुआ था... ये उसी का असर है।"
"तो अब क्या करें?" अंबर की आवाज़ कांप रही थी।
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अगला दृश्य
"राहुल, मिस सक्सेना को कॉल करो। अभी तक पहुँची क्यों नहीं?"
वेदांत सहगल गुस्से से बोले। "मीटिंग शुरू होने वाली है और पूरा प्रेज़ेंटेशन उसके लैपटॉप में है!"
तभी एक खूबसूरत-सी लड़की दरवाज़ा खोलकर हड़बड़ाते हुए अंदर आई।
"सॉरी सर, ट्रैफ़िक बहुत था... इसलिए देरी हो गई।"
"जल्दी से मीटिंग हॉल में पहुँचो!" वेदांत ने कहा और खुद तेज़ी से आगे बढ़ गया। राहुल और अंबर उसके पीछे चल दिए।
वेदांत सहगल, SS ग्रुप का सीईओ, डैशिंग, हैंडसम और एक घोषित प्लेबॉय। हाँ, यह अलग बात है कि वह अपने ऑफिस में कभी किसी लड़की से अफेयर में नहीं पड़ा।
बहुत-सी मॉडल्स, एक्ट्रेसेज़ और हाई-सोसाइटी लड़कियाँ उस पर जान देती थीं, और वह भी अपने दिल और पैसे दोनों में दरिया-दिली दिखाता था। मगर ऑफिस... उसके लिए एक डिसिप्लिन ज़ोन था।
पूरा ऑफिस उससे डरता था। उसके गुस्से और सख्ती की चर्चा हर जगह थी।
राहुल भाटिया और अंबर सक्सेना—दो लोग जो वेदांत के सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे। राहुल, उसका सीनियर असिस्टेंट, और अंबर, जूनियर असिस्टेंट।
जब वेदांत ने ऑफिस ज्वाइन किया था, उसी वक्त राहुल को असिस्टेंट के तौर पर रखा गया। कुछ समय बाद वेदांत के पिता एक एक्सीडेंट के बाद रिटायर हो गए, तब उन्हें एक और असिस्टेंट की ज़रूरत महसूस हुई।
अंबर, उसके डैड के पुराने असिस्टेंट की बेटी थी। सिर्फ़ एक बार में इंटरव्यू लिया गया और वेदांत ने उसे रख लिया—बिलकुल अनमने ढंग से। उसे लगा था कि एक लड़की उसका काम नहीं संभाल पाएगी।
लेकिन अंबर ने तीन साल में अपनी काबिलियत से वेदांत को गलत साबित कर दिया।
वह सिर्फ़ ऑफिस का काम ही नहीं देखती थी, बल्कि वेदांत की सोशल लाइफ़—यहाँ तक कि उसकी गर्लफ्रेंड्स से जुड़े डिटेल्स, बर्थडे गिफ्ट्स, और होटल बुकिंग्स तक—सब कुछ संभालती थी।
इन तीन सालों में वेदांत ने कभी अंबर को एक लड़की की तरह नहीं देखा। शायद यही वजह थी कि अंबर हमेशा कंफ़र्टेबल रही।
मगर अब… सब कुछ बदलने वाला था।
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