My unknown billionaire husband - Chapter 1
एक सात-सितारा लग्ज़ीरियस होटल के कमरे में सन्नाटा पसरा था। थोड़ी-बहुत आवाज़ केवल वहाँ मौजूद लड़की की हील्स की थी, जो उसकी चहलकदमी से पैदा हो रही थी। अन्विका राठौर, एक पर्सनल स्टाइलिस्ट, मुंबई के फेमस बिज़नेसमैन, रुद्रांश मारवा को ग्रूम कर रही थी। वो एक अवार्ड फ़ंक्शन में जाने वाले थे।
अन्विका लगभग बाईस वर्ष की थी; दुबली-पतली, गोरी, दिखने में मासूम और खूबसूरत। उसके कमर को छूते भूरे लहराते बाल थे, जिन्हें उसने बेतरतीब ढंग से सेट किया था। वो खोई-खोई और उदास लग रही थी।
अचानक, काम करते हुए उसके हाथ काँप उठे, जब उसने रुद्रांश की ठंडी आवाज़ सुनी।
“ये क्या किया तुमने? मेरी शर्ट... तुमने इसे खराब कर दिया? ध्यान कहाँ है तुम्हारा?” वो बहुत गुस्से में था।
रुद्रांश की आवाज़ सुनकर उसे होश आया। वो हड़बड़ाकर बोली,
“मुझे... मुझे बहुत माफ़ करना सर। मैंने... मैंने ये जानबूझकर नहीं किया।”
अन्विका ने देखा कि उसने गलती से रुद्रांश की शर्ट पर हेयरस्प्रे कर दिया था, जिससे उसके महंगे सफ़ेद शर्ट पर पीले-काले रंग के धब्बे पड़ गए थे।
रुद्रांश की शर्ट देखने के बाद अन्विका की नज़र उसके चेहरे पर गई। उसकी खूबसूरत गहरी काली आँखों में बेइंतेहा गुस्सा था, मानो वो अभी उसकी जान ले लेगा। ग़लती भी तो उसकी ही थी। कोई इंटर्न भी ध्यान से काम करता, जबकि उसे तो ये काम करते हुए काफी टाइम हो गया था।
रुद्रांश कुछ कहता, उससे पहले उसकी नज़र अचानक अन्विका के गले पर गई, और उसकी आँखें सिकुड़कर छोटी हो गईं। अन्विका के कॉलरबोन पर एक छोटा सा लाल-भूरा तिल था; जो आग की लपटों की शेप में था। पहली नज़र में वो किसी टैटू जैसा लग रहा था।
रुद्रांश का ध्यान अन्विका के तिल पर लगा था, तभी अन्विका ने हल्की, काँपती आवाज़ में कहा,
“मुझे पता है मैंने ये दूसरी बार किया है। पर एक्स्ट्रा शर्ट मौजूद है, please आप चेंज कर लीजिये।”
“तो तुम्हें एहसास है कि तुमने मेरी दूसरी शर्ट भी बर्बाद कर दी है।” रुद्रांश ने सिर हिलाकर कहा और फिर वहाँ रखी दूसरी शर्ट की ओर देखा।
पहले वो उस पेस्टल पिंक शर्ट को पहनने वाला था, पर अन्विका ने अपनी हड़बड़ाहट में उसे नीचे गिरा दिया था और वो उसकी हील्स के नीचे आकर खराब हो चुकी थी।
“I am so sorry, please मुझे माफ़ कर दीजिये।” अन्विका ने फिर कहा। इतनी देर में वो न जाने कितनी बार रुद्रांश से माफ़ी माँग चुकी थी, जबकि वो अच्छे से जानती थी कि उसने जो नुकसान किया है, उसके लिए "माफ़ करना" जैसा शब्द बहुत छोटा था।
अन्विका ने रुद्रांश की ओर देखा, तो वो अपने क़दम उसकी ओर बढ़ा रहा था। अन्विका घबरा गई थी। तभी रुद्रांश ने उसके कान के पास आकर धीमी आवाज़ में कहा,
“तो तुम चाहती हो कि मैं आज पूरी रात तुम्हारे साथ इस कमरे में बिताऊँ? इसलिए तुम ये उल्टी-सीधी हरकतें कर रही हो?” बोलते हुए उसकी गर्म साँसें अन्विका को अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थीं, जिससे उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा था।
इससे पहले कि रुद्रांश अन्विका के और करीब आता, अन्विका ने अपना हाथ उसकी छाती पर रखा और उसे खुद से थोड़ा दूर कर दिया।
अपनी हड़बड़ाहट में अन्विका ने फिर ग़लती कर दी थी। उसने रुद्रांश को जिस तरह से धक्का दिया था, उसके बाद तो ऐसा लग रहा था कि उसकी ज़िंदगी और प्रोफ़ेशन का आखिरी दिन होने वाला है। वो घबराकर पीछे हटने लगी, कि उसका सिर पीछे की दीवार से टकरा गया।
अन्विका ने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं। तभी रुद्रांश ने उसके पास आकर कहा,
“Relax, मैं तुम्हें एक और मौका दे रहा हूँ, पर ये तुम्हारा आखिरी मौका होगा। अगर तुमने इसके बाद कोई गड़बड़ की, तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा।”
रुद्रांश ने उसे एक और मौका दिया था। ये सुनते ही अन्विका की आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं, मानो वो किसी तरह का सपना देख रही हो। उसके सामने मौजूद शख्स रुद्रांश मारवा था; सब जानते थे कि उसके सामने एक ग़लती किसी भी इंसान की आखिरी ग़लती होती थी; उसके बाद वो उसे कहीं काम करने के लायक नहीं छोड़ता था। उसने आज किसी की दो ग़लतियों को माफ़ कर दिया था; ये किसी करिश्मे से कम नहीं था।
रुद्रांश दूसरी ओर पलटकर शर्ट बदल रहा था, तो अन्विका खोई हुई आँखों से उसे देख रही थी। वो दिखने में बिल्कुल फ़िट था: लगभग 6 फ़ीट 1 इंच लंबा, मस्कुलर बॉडी, हल्का गोरा रंग, खूबसूरत गहरी काली आँखें और शानदार चेहरे के जानलेवा तेवर, ऐसा लग रहा था कि उसे ऊपर वाले ने फ़ुर्सत से बनाया था।
अन्विका को देखते हुए रुद्रांश ने गहरी साँस ली और तेज आवाज़ में कहा,
“मैडम, आपके पास सिर्फ़ 20 मिनट का टाइम है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सच में तुम मुझे यहाँ रोकना चाहती हो?”
“न...नहीं।” अन्विका ने हड़बड़ाकर कहा और जल्दी से दौड़कर रुद्रांश की स्टाइलिंग के लिए लग गई।
इस बार अन्विका काफी अलर्ट होकर काम कर रही थी; उसके पास ग़लती करने का कोई मौका नहीं था। लगभग 15 मिनट में उसने रुद्रांश को पूरी तरह तैयार कर दिया था।
रेडी होने के बाद रुद्रांश खुद को मिरर में देख रहा था, तो अन्विका की नज़रें उन दो शर्ट्स पर थीं, जो उसने बर्बाद कर दी थीं।
रुद्रांश जाने ही वाला था, तभी अचानक अन्विका ने धीमी आवाज़ में पूछा,
“इन शर्ट्स की कीमत कितनी होगी? मुझसे ग़लती हुई है, तो मैं भुगतान करना चाहती हूँ।”
उसकी बात सुनकर रुद्रांश के चेहरे पर तिरछी मुस्कराहट आ गई। वो उसकी ओर पलटा और सिर हिलाकर बोला,
“Interesting, तो तुमने ईमानदारी दिखाई और अपनी ग़लती को मान लिया। ख़ैर, अच्छा है। मुझे वो लोग पसंद हैं जो बिना झूठ बोले अपनी ग़लती को मान लेते हैं। तो तुम इन शर्ट्स के पैसे देना चाहती हो?”
अन्विका ने हाँ में गर्दन हिलाई, तो रुद्रांश बोला,
“ठीक है, तो फिर पाँच लाख ट्रांसफर कर देना।”
जैसे ही अन्विका ने पैसे सुने, उसकी आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं। दो शर्ट्स की कीमत इतनी ज़्यादा?
उसके बिगड़े हुए भाव देखकर रुद्रांश ने कहा,
“क्या हुआ? कुछ ज़्यादा ही पैसे हैं और तुम इतने नहीं दे पाओगी? देखकर लग ही रहा था। चलो ऐसा करते हैं कि तुम पैसों के बदले किसी और चीज़ से भुगतान कर दो।” बोलते हुए रुद्रांश अन्विका को चेक आउट कर रहा था।
रुद्रांश किस बारे में बात कर रहा था, अन्विका अच्छे से समझ रही थी। उसने गुस्से से अपना मुँह ढँक लिया; उसकी नज़रें नीचे थीं, तो रुद्रांश ने उसे देखकर व्यंग्य भरी मुस्कान उछाली और वहाँ से चला गया।
रुद्रांश की बातों से अन्विका अभी भी उबरी नहीं थी कि उसके मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर "माय लव" नाम फ़्लैश हो रहा था, जिसे देखकर अन्विका ने जल्दी से कॉल रिसीव किया, हालाँकि उसका दिल इस वक्त तेज़ी से धड़क रहा था।
अन्विका ने खुद को मज़बूत किया और कहा,
“हेलो सम्यक, तुम ठीक हो ना? कब से कॉल ट्राई कर रही थी। तुम्हें बिना बताए नहीं जाना चाहिए था।” सम्यक की ही चिंता के चलते आज वो ठीक से काम नहीं कर पा रही थी, वरना ऐसा नहीं था कि अन्विका लापरवाह थी या उसे आता नही था वो काफी experienced थी।
“ये मैं बोल रही हूँ, अन्वी, सम्यक की माँ।” उसकी ओर से एक औरत की भारी आवाज़ आई। वो कुछ पल रुककर बोली,
“पुलिस को उसका मोबाइल मिला है। वो पिछले चार दिन से उसे ढूँढ रहे थे... उन्हें... उन्हें लगता है कि अब वो नहीं रहा।” इतना कहकर वो औरत जोर-जोर से रोने लगी।
ये सब सुनकर अन्विका वहीं पर घुटनों के बल गिर गई। अन्विका की आँखों में आँसू थे; उसकी तो दुनिया ही ख़त्म हो गई थी। जिस इंसान से उसने बेइंतेहा प्यार किया था, जिसके साथ उसने उम्र बिताने का वादा किया था, वो उसे छोड़कर कैसे जा सकता था?
अन्विका अपने होश खो बैठी थी। कुछ ही देर में वो रोते हुए बेसुध हो चुकी थी और उसने इस हालत में खुद से बड़बड़ाते हुए कहा,
“तुम...तुम झूठे हो सम्यक मेहता! तुमने वादा किया था कि हम दोनों पूरी ज़िंदगी साथ बिताएँगे, तो तुम ऐसे मुझे बीच में छोड़कर कैसे जा सकते हो? तुमने कहा था कि हम जल्दी ही शादी करने वाले हैं...नहीं, सब झूठ बोल रहे हैं, उन्हें ग़लतफ़हमी हुई है, तुम्हें कुछ नहीं हुआ। वो झूठ बोल रहे हैं। मेरे सम्यक को कुछ नहीं हो सकता।”
उसी बेसुध हालत में अन्विका चलती हुई होटल के बाहर आ गई थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी। उसे कुछ होश नहीं था; ऐसा लग रहा था कि आज आसमान भी उसके साथ, उसके दुख में शामिल होते हुए रो रहा था। अन्विका बस एक ही बात बड़बड़ा रही थी कि उसका सम्यक उसे छोड़कर नहीं जा सकता।
अन्विका अपनी खोई हुई हालत में चल रही थी कि अचानक एक गाड़ी तेज़ गति से उसकी ओर बढ़ रही थी। उसे तो इतना भी होश नहीं था कि वो वहाँ से हट जाए। अन्विका को होश तब आया जब गाड़ी की लाइट उसकी आँखों पर पड़ी, और तब तक वो गाड़ी उसके बहुत करीब आ चुकी थी।
अन्विका चाहती तो हट सकती थी, पर लगता था कि सम्यक के जाने के बाद उसकी जीने की उम्मीद ख़त्म हो चुकी थी। वो वहीं पर खड़ी रही और गाड़ी के उसे टक्कर मारने का इंतज़ार करने लगी। जब गाड़ी उसके बिल्कुल करीब आई, वो उससे टकराने ही वाली थी कि अन्विका जोर से चिल्लाई।
To be continued...