साजन बेइंतहा इश्क सीजन 2 Ch. 1

साजन बेइंतहा इश्क सीजन 2 - Chapter 1

Posted by Riya Sharma • Apr 10, 2025 10:19 PM

मुंबई…

यह नहीं कहा जा सकता कि मुंबई छोटा शहर है; मुंबई तो बहुत बड़ा शहर है। यहाँ किसी को ढूँढ पाना असंभव सा होगा!

जहाँ दो लोग मिलकर जुदा हुए थे, वही शहर क्या ले आएगा दो लोगों को करीब? क्या होगा जब अतीत की यादें होंगी सबके सामने?

कहानी तो वही है, बस बदलेंगे किरदारों के नाम और चेहरे।

मुंबई…

शाम का समय था…

हर तरफ़ सड़कों पर भीड़भाड़ थी। मुंबई के रोड पर रात का ट्रैफिक कम थोड़ा ना था। चारों तरफ़ के ट्रैफिक को देखकर एक काली कार में बैठी लड़की ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा,

“ओफ़्फ़ो! ये कब क्लियर होगा मॉम, डैड? हमें लेट हो जाना है।”

इतना बोल उस लड़की ने सामने देखा जहाँ आगे की सीट पर एक औरत और एक आदमी बैठे हुए थे। इतना बोलकर उसने अपने बगल में देखा जहाँ एक लड़की बैठी हुई थी, जो एकटक खिड़की से बाहर देख रही थी।

“इसे ये ट्रैफिक पसंद आ गया लगता है, है ना मॉम?”

लड़की की बात सुनकर आगे बैठे आदमी ने कहा,

“कैसी-कैसी बातें आती हैं आपके दिमाग में प्राची?” उसने हल्का सा पीछे प्राची को देखते हुए कहा।

उस औरत ने उस आदमी की बात सुनी तो उसने कहा,

“क्या हुआ अक्षय जी? कोई बात नहीं, बच्चियाँ हैं, दोनों बहनें हैं, ऐसे ही बातें करती हैं।”

अक्षय जी: “तुम नहीं समझ रही मेरी बात युवानिका। माना बच्ची है, लेकिन ऐसे कौन बोलता है?”

युवानिका ने मुस्कुराते हुए पीछे देखा, तो उनकी नज़र उस लड़की पर गई जो अभी भी सब से बेखबर होकर बाहर की ओर देख रही थी। “सांझ, बाहर क्या है ऐसा बेटा?”

युवानिका की आवाज़ सुनते ही सांझ ने देखा और कहा,

“कुछ नहीं मॉम, बस देख रही थी। सुबह से लोग इधर-उधर भागते फिरते हैं, लेकिन ये कुछ मिनटों का ट्रैफिक उन्हें रेस्ट देता है।”

“ओये! रेस्ट नहीं देता, लेट करवाता है।” प्राची ने तिरछा बैठकर सांझ को देखते हुए कहा।

“हाँ, जानते हैं, इस ट्रैफिक की वजह से लेट होता है, लेकिन वो हमारे हाथ में है। हमें मालूम होता है ना कि हर जगह ये सिग्नल होता है, तो हमें टाइम से पहले आना चाहिए। यू नो, ये हमारी ही सेफ्टी के लिए बनाए जाते हैं। सोचो ये ना हो तो कितने एक्सीडेंट रोज़ हों, इस चौराहे पर हमेशा भीड़ लगी रहेगी, पैदल चलने वालों को बड़ी प्रॉब्लम होगी।”

“बस कर सांझ, बस कर! मेरा सर दर्द कर गया इतना ज्ञान लेकर। वैसे मॉम, डैड, इसे बिज़नेस फील्ड में नहीं, समाज कल्याण विभाग में होना चाहिए!” इतना बोल प्राची ने सांझ को एक नज़र देखा, जो कि वापस बाहर देख रही थी। “इसका कुछ नहीं हो सकता, इतनी सी है ये अभी, लेकिन देखो इसे… मुझसे बड़ी लगती है, इतनी लंबी क्यों हुई तुम?”

सांझ: “रहने दो।” इतना बोल सांझ मुस्कुराई और बाहर देखते हुए बोली, “फ़ाइनली सब फिर बिज़ी हो जाएँगे।”

अक्षय जी ने सांझ की बात सुनी तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने कहा,

“बिलकुल, तुम दोनों मां-बेटी एक जैसी हो, सांझ और युवी।”

युवी ने जैसे ही सुना तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने अपना सिर सीट से लगाया और आँखें बंद कर ली। अतीत की धुंधली यादें उसे आज भी परेशान कर रही थीं। युवी को आँखें बंद करते ही युवान की बात याद आ गई जब उसने उससे कहा था,

“हमारी बेटी बिलकुल तुम्हारी जैसी होगी।”

युवी को देखकर युवी ने भी उसी तरह से कहा,

“और बेटा बिलकुल तुम्हारे जैसा।”

युवान: “बट मुझे तो बेटी चाहिए।”

युवी: “नहीं, पहले बेटा होगा, जो हमेशा मेरी साइड होगा।”

युवान: “तो फिर क्यों ना दोनों हो जाएँ?” इतना बोल दोनों एक-दूसरे के गले लग गए।

“ये तो आपने बिलकुल सही कहा डैड, मॉम और सांझ बिलकुल एक जैसी हैं, और आप और मैं एक जैसे।” इतना बोल प्राची हँसने लगी।

प्राची के हँसने की आवाज़ सुनकर युवी ने अपनी आँखें खोल ली थीं। वो अपने अतीत को भूलकर आगे तो बढ़ गई थी, लेकिन कहते हैं ना यादें कभी पीछा नहीं छोड़तीं। युवी ने अपनी गर्दन को खिड़की के बाहर निकाला और बाहर देखने लगी। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।

थोड़ी ही देर में अक्षय जी ने गाड़ी को लाकर एक बहुत बड़ी होटल के आगे खड़ा किया। सब लोग कार से बाहर आ गए थे। सांझ भी बाहर आ गई थी। उसने बहुत प्यारी नीली रंग की ड्रेस पहनी हुई थी, और उसके कमर तक आते बाल आज प्राची की बदौलत छोटे से लग रहे थे, क्योंकि प्राची ने उसके बालों को कर्ली किया हुआ था।

सब लोग अंदर जा ही रहे थे कि तभी प्राची ने कहा,

“आज तो इस सांझ के चक्कर में लेट हो गए, ऊपर से इस मुंबई का ट्रैफिक! पक्का माहिरा गुस्सा हो रही होगी।”

“मेरी वजह से आप लेट हैं, आप झूठ तो न बोलें दी।” सांझ ने इतना ही कहा था कि तभी अक्षय जी ने हँसते हुए कहा,

“जाओ, वो रही माहिरा सामने।”

प्राची और सांझ ने माहिरा को देखा और उसके पास चली गईं।

माहिरा, जो कि अपने होने वाले पति के साथ बैठी हुई थी, उसने जैसे ही प्राची को देखा तो उठकर उसके गले लगते हुए कहा,

“ये लो अब आ रही हो तुम?”

प्राची: “क्या करूँ यार, ये सांझ को रेडी करने में लगी थी।”

सांझ ने प्राची की बात सुनकर उसे देखा और माहिरा के बगल में बैठे लड़के के पास आकर बैठते हुए कहा,

“सच बोलो दी कि आपने चार बार कपड़े चेंज करने के बाद फ़ाइनली ये ड्रेस पहना है?”

सांझ की बात सुनकर सब हँसने लगे। प्राची ने उसे देखा और कहा,

“अच्छा बेटा! तुझे तो हम बताते हैं घर चल! वैसे अजीत जीजू आप बताओ… कौन ज़्यादा सुंदर लग रही है?” प्राची ने अजीत को देखकर कहा।

अजीत ने तीनों को देखा और मन में सोचा क्या बोलूँ? इतना बोल अजीत ने कहा,

“ये तुम तीनों से मेरे तीन रिश्ते हैं, एक बहन है, एक साली है, और घरवाली है! तो सिम्पल है, तुम तीनों अच्छी लग रही हो।”

अजीत की बात पर सब मुस्कुराए तो माहिरा ने कहा,

“क्यों ना डांस किया जाए?”

माहिरा ने अजीत को देखा। तब तक प्राची ने दोनों का हाथ पकड़ा और उसे डांस फ़्लोर पर ले आई जहाँ पहले से ही सब लोग डांस कर रहे थे।

सांझ एक साइड खड़ी हुई सब को देख रही थी। जितनी सुंदर वो बाहर से थी, उतना ही सुंदर उसका दिल था। सांझ ने इधर-उधर देखा तो उसकी नज़र एक छोटे से बच्चे पर गई जो चेयर पर बैठा कुछ देख रहा था। सांझ ने उसे हेलो कहा और जैसे ही जाने को हुई कि उसका दुपट्टा खिंचने लगा। सांझ ने पीछे मुड़कर देखा तो एक लड़का खड़ा हुआ था, जिसकी घड़ी में सांझ का दुपट्टा उलझ गया था। सांझ ने एक नज़र उस लड़के को देखा और जल्दी से अपना दुपट्टा खींचकर वहाँ से चली गई। सांझ के ऐसे करने से उस लड़के ने तुरंत पीछे देखा तो वहाँ कोई नहीं था।

तो वहीं प्राची डांस करके थक गई थी। उसने युवी के पास बैठते हुए कहा,

“सच में डांस करने में मज़ा बहुत आता है।” इतना बोल प्राची ने जल्दी से एक कदम चेयर से नीचे रखा और जाती हुई सांझ का हाथ पकड़ लिया।

सांझ: “क्या हुआ दी?”

प्राची: “डांस कर ले।”

सांझ: “नहीं, मुझे नहीं करना।”

प्राची: “मॉम बोलो ना ये डांस करे।”

युवी ने सांझ की ओर देखा और कहा,

“प्लीज़, सांझ दी बोल रही है ना…”

सांझ ने सब को देखा और वहाँ से डांस फ़्लोर पर आ गई। उसने कुछ लड़कियों को अपने साथ लिया और डांस करने लगी।

ओ कड़ियो गुड़ किन्ने खालेया, स्वीटी

गुड़ वाली चा किन्ने पीती, स्वीटी

बुवा जी दा नाड़ा किन्ने खिचेया, हाँ

ओ खिंच के मारी किन्ने सीटी

ओह छड्डो जी छड्डो

जा के पकड़ो वो हलवाई

के जिसने गुड़ की बना दी मिठाई

ओ सबको बात है ये समझाई

सांझ एक-एक स्टेप्स बहुत अच्छी कर रही थी शादी में। जितने भी लोग आए थे, सब एक साथ उसे ही देख रहे थे।

ओ गुड़ नालो इश्क़ मिठा

ओ गुड़ नालो इश्क़ मिठा (ओए होए)

ओ गुड़ नालो इश्क़ मिठा (आए हाय)

ओ रब्बा लगे ना किसे नू जावे

ओ गुड़ नालो इश्क़ मिठा ओए

सोहणी मेरा दिल ले गयी (ओए होए)

हाए कुड़ी मेरी जान ले गयी (आए हाय)

ओ मुझको यार कोई तो बचाए

गुड़ नालो इश्क़ मिठा

“सच में ये लड़की डांस से दूर भागती है, लेकिन करती बड़ा जबरदस्त है डांस।” है ना मॉम? प्राची ने युवी के कंधे पर सिर रखते हुए सामने देखकर कहा।

युवी, जो कि कब से सांझ को देखकर मुस्कुरा रही थी, उन्होंने भी प्राची की बात पर हाँ किया और कहा,

“बिलकुल, बहुत अच्छा डांस कर रही है।”

तो वहीं डांस ख़त्म होते ही, सांझ आगे आई और अजीत और माहिरा को बीच में ले आई और इस बार एक कपल सॉन्ग चल रहा था। सांझ डांस करने में इतना गुम हो गई थी कि वो सबसे अलग एक साइड में डांस कर रही थी। तभी उधर से जा रहे एक लड़के, जिसके हाथ में ड्रिंक का ग्लास था, वो गलती से सांझ से पीछे से टकरा गया, लेकिन सांझ का ध्यान बिलकुल भी नहीं था। सांझ को जब अजीब लगा तो उसकी आँखें बड़ी हो गईं। उसने तुरंत अपने बंधे हुए बालों को खोला और इधर-उधर देखने लगी। उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी। सांझ ने अपने कदम पीछे लिए और पास में लगे पिलर से लगकर खड़ी हो गई और खुद से ही बड़बड़ाने लगी,

“ओह गॉड! ये जीप कैसे खुल गई… क्या करूँ…”

सांझ ने इतना ही कहा था कि तभी किसी ने उसके आगे अपना कोट बढ़ाया। तो सांझ की नज़र अपने सामने खड़े लड़के पर गई। तो सांझ ने चिल्लाते हुए कहा,

“तुम… तुम यहाँ भी आ गए?”

उस लड़के ने सांझ को देखा और कहा,

“ओह! तो तुम हो… झूठ लड़की…”

इतना बोल वो लड़का जैसे ही जाने को पलटा, उससे पहले ही सांझ ने उसके हाथ से उसका कोट लिया और उसे अपने हाथों पर और कंधे पर डाल लिया।

उस लड़के ने सांझ को देखा जो टेंशन में भी बहुत अच्छी लग रही थी।

“वैसे इसे तुम पहन लोगी तो ज़्यादा अच्छा लगेगा।” इतना बोल वो लड़का वहाँ से चला गया।

सांझ ने उस लड़के को देखा और खुद से कहा,

“बड़ा आया!” इतना बोल सांझ ने कोट को देखा और पहन लिया।

आगे…

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