दिल की हिफ़ाज़त: एक बॉडीगार्ड का प्यार Ch. 1

The bodyguard Bride - Chapter 1

Posted by Arohi Gupta (मुस्कान) • Apr 13, 2025 01:37 AM

मुंबई…

एक शहर जो कभी नहीं रुकता।

जहाँ दिन भी भागते हैं और रातें भी।

जहाँ हर मोड़ पर कोई न कोई अपनी किस्मत से जूझ रहा होता है —

किसी की आँखों में उम्मीद की चमक होती है, तो किसी की मुस्कान में छुपा होता है टूटा हुआ दिल।

साल का वही मौसम था — जब समंदर और आसमान मिलकर शहर को भिगोने लगते हैं।

बिल्डिंग के पीछे का वो छोटा-सा गार्डन, जो आम दिनों में वीरान रहता था,

आज बारिश की बूंदों से भीगता हुआ कुछ ज़्यादा ही जिंदा लग रहा था।

बारिश की हल्की बूंदें पत्तों पर गिरतीं, फिर पत्तों से टपक कर मिट्टी से मिल जातीं।

और मिट्टी की वो भीनी खुशबू — वो थी जैसे कोई पुरानी याद फिर से ज़िंदा हो गई हो।

"इनायत! अंदर आ जाओ बेटा, बारिश तेज़ हो रही है..."

नैनी की आवाज़ गूंजी।

लेकिन उस आवाज़ से बेख़बर एक छोटी-सी परछाई, गीली घास पर नंगे पाँव दौड़ रही थी।

सफेद फ्रॉक, जो अब हल्की कीचड़ से स्याह हो गई थी।

बारिश में भीगते बाल, और हाथ में एक किताब — "Papa said, princesses don’t cry."

मगर उस किताब के विपरीत उसकी आँखों में आँसू थे।

भीगे हुए, खामोश, और बहुत गहरे।

"अगर मम्मी होतीं... तो मुझे आज अकेले स्कूल नहीं जाना पड़ता..."

उसने आसमान की तरफ देखा, जैसे वो बादलों से कोई जवाब माँग रही हो।

नैनी उसके पास आई और उसका हाथ पकड़ लिया —

"बेबी, प्लीज़ चलिए अब... बीमार पड़ जाएंगी आप..."

इनायत ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की —

"आंटी प्लीज़... बस पाँच मिनट और... मम्मी से थोड़ी बातें करनी हैं..."

वो जानती थी कि उसकी माँ वहाँ नहीं हैं।

पर बारिश में भीगते हुए, उसे लगता था कि माँ की रूह उसके आस-पास है।

हर बूंद में जैसे मम्मी की आवाज़ घुली हो — "राजकुमारी, मुस्कुराओ न…"

"क्या हुआ हमारी इनायत राजकुमारी को?"

एक भारी, पर बहुत स्नेहभरी आवाज़ आई।

इनायत ने पलट कर देखा —

सामने खड़े थे दादू — R.K. मल्होत्रा।

उम्र की रेखाएँ उनके चेहरे पर साफ थीं,

पर उनकी चाल और आँखों में आज भी वही रुतबा था —

जिसने मल्होत्रा एंपायर को बनाया था।

इनायत भाग कर उनके सीने से लग गई —

"दादू... मुझे बारिश में और रहना है..."

आर. के. मल्होत्रा ने उसे गोद में उठाया।

उसके गाल पर एक प्यार भरा चुंबन दिया और बोले —

"पर बेटा, अगर आप बीमार पड़ गईं, तो आपके दादू को अच्छा नहीं लगेगा ना...?"

इनायत ने धीरे से सिर हिलाया,

"मुझे अच्छा लगता है, दादू... जब मैं बारिश में होती हूँ, तो लगता है जैसे मम्मी मेरे साथ हैं..."

कुछ पल के लिए आर. के. मल्होत्रा की आँखें भी नम हो गईं।

उन्होंने अपनी पोती को और कसकर सीने से लगा लिया।

"आपकी मम्मी तो आपके अंदर हैं, बेटा… आपकी हर मुस्कान में।

लेकिन अभी आपको स्कूल जाना है, और दादू की राजकुमारी अगर स्कूल नहीं गई तो सारे अंकल लोग क्या कहेंगे?"

इनायत मुस्कुरा दी, और फिर चुपचाप नैनी के साथ चल पड़ी।

पीछे मुड़कर उसने एक बार फिर आसमान की तरफ देखा —

शायद वो बूंदों में माँ का प्यार ढूंढ रही थी।

---

मल्होत्रा हवेली —

एक भव्य, राजसी हवेली — जिसके हर कोने में शाही अंदाज़ था,

लेकिन दीवारों में जो बातें कैद थीं, वो उतनी ही ज़हरीली।

रघुवीर मल्होत्रा का छोटा सौतेला भाई — शिवराज मल्होत्रा —

जो दिखता तो धार्मिक और सौम्य था,

पर दिल में मल्होत्रा एंपायर को हथियाने की आग सुलग रही थी।

उसकी बीवी — भावना मल्होत्रा —

हर किसी के सामने इनायत को दुलार देती,

पर अकेले में उसके मनोबल को तोड़ने की हर कोशिश करती।

"राजकुमारी बन गई है ये छोटी सी बच्ची...

सारी दौलत की अकेली वारिस!"

भावना ने तंज कसते हुए अपने बेटे युवराज से कहा।

"माँ, चिंता मत करो। वक़्त आने दो...

दादाजी के जाते ही हम सब कुछ अपने नाम करवा लेंगे।

इस छोटी बच्ची से कौन डरता है?"

युवराज ने ठहाका लगाया।

"डरना चाहिए…"

किआरा ने धीमे से कहा।

सबका ध्यान उसकी ओर गया।

"क्यों?" — भावना ने चौंक कर पूछा।

"क्योंकि इनायत भले ही अभी बच्ची है…

लेकिन उसके पास दादू का दिल है।

और वो दिल ही इस घर की चाबी है।"

शिवराज ने किआरा की तरफ देखा और मुस्कुराया —

"तुम्हारी यही समझदारी तुम्हें सबसे आगे ले जाएगी।

जारी रखो उसे दोस्ती का दिखावा करना…"

किआरा ने सिर हिलाया और मुस्कुराई —

पर वो मुस्कान मासूमियत से कोसों दूर थी।

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स्कूल की बस में बैठी इनायत, खिड़की से बाहर बारिश को देख रही थी।

उसकी गोद में वही किताब थी —

"Papa said, princesses don’t cry."

लेकिन उसका दिल जानता था —

राजकुमारियाँ भी रोती हैं… बस चुपचाप।

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