Devil's Crazy Love - Chapter 1
डेविल स्टार क्लब (मुंबई)
ये सिटी का बहुत बडा और आलीशान क्लब था। बडे-बडे बिजनेस टायकून्स यहाँ मीटिंग करने आते थे। इस वक्त भी यहाँ के लग्ज़ीरियस रूम में एक मीटिंग चल रही थी।
“आप शायद ये नही जानते कि मेरा और मेरे डैड का बिजनेस अलग है, इसलिए इस डील में उनका जिक्र नही होना चाहिए वरना ये डील कैंसल।”
सोफे पर बैठा 28 साल का हैंडसम सिद्धार्थ अपनी ठंडी आवाज में ये सब कह रहा था। उसके साथ उसका सेकेट्री वरूण भी खडा था।
सामने एक अधेड उम्र का शख्स बैठा हुआ था जो सिद्धार्थ की तरफ देखकर हल्का सा मुस्कुराते हुए बोला, “ओके सिंघानिया साहब, आपके डैड का जिक्र अब नही होगा, बट आप प्लीज़ ये डील कैंसल मत कीजिए।”
तभी सिद्धार्थ के सेकेट्री वरूण ने कुछ कहने की इजाज़त मांगी तो सिद्धार्थ ने हल्के से सिर हिला दिया। वरूण ने सामने बैठे उस अधेड शख्स को देखकर कहा, “हाँ तो मिस्टर कटारिया, डील फाइनल करने से पहले आप जरा ये तो बताइए कि वो एंटोनियो रिज़ोर्ट आपने लिया कब था?”
इस सवाल पर कटारिया थोडा हडबडा गया। सिद्धार्ड भी ठंडी नजरों से उसे घूर रहा था, वो बोला, “व्हॉट्स रोंग विद यू मिस्टर कटारिया! आप घबरा क्यों गए?”
कटारिया जबरदस्ती मुस्कुराकर मना करते हुए बोला, “नही, वो मैं..घबरा नही रहा बस...ये सोच रहा था कि आप क्यों जानना चाहते हैं ये सब?”
वरूण हल्के से हँसकर बोला, “कमाल करते हैं आप कटारिया साहब! इस डील का मेन पॉइंट तो वो एंटोनियो रिज़ोर्ट ही है, अब उसके बारे में सवाल नही करेंगे तो क्या आपकी बीवी के बारे में सवाल करेंगे?”
उसके इस तंज पर कटारिया के जबडे भिंच गए। सिद्धार्थ ने भी वरूण को चुप रहने का इशारा किया और कटारिया से बोला, “देखो, मुझे इस डील से रिलेटिड सारी इन्फोर्मेशन चाहिए और..इस गलतफहमी में मत रहना कि अगर आप बताएंगे नही तो मुझे कुछ पता नही चलेगा, मेरे डैड से आपके कितने अच्छे रिलेशन हैं मुझे सब पता है, आपकी लालची बेटी ने कॉलेज टाईम पर मेरे आगे-पीछे कितने चक्कर लगाएं हैं ये भी मुझको अच्छे से याद है..”
कटारिया अब गुस्से में खडा होकर बोला, “इन सबमें मेरी बेटी को बीच में मत लाओ।”
सिद्धार्थ की नजरें सख्त हो गईं। वरूण तुरंत कटारिया के सामने आकर बोला, “सर किसी को बीच में नही ला रहे बल्कि जो सच है वो बता रहे हैं, और जहाँ तक हमें लगता है ये सच आप भी जानते हैं बस मानना नही चाहते। चलिए अब छोडिए इन बातों को, अगर आपको सचमुच हमारे साथ काम करना है तो ईमानदारी से कीजिए वरना यहाँ से दफा हो जाइए।” उसने कटारिया को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कटारिया ने सिद्धार्थ को गुस्से भरी लाल निगाहों से घूरा। सिद्धार्थ की नजरें भी लाल और सख्त थीं लेकिन वो खामोश था। उसकी ये खामोशी साधारण नही थी, लेकिन कटारिया इस बात से अंजान था। आखिर में वो वहाँ से चला ही गया।
उसके जाने के बाद वरूण ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा, “काम डाउन सर, ऐसे लोगों पर ज्यादा ध्यान नही देना चाहिए।”
सिद्धार्थ भी बेपरवाह होकर बोला, “मैं ध्यान दे भी नही रहा, तुम जाओ यहाँ से।”
वरूण हल्की सी नजरें सिकोडकर बोला, “व्हॉट सर?”
सिद्धार्थ उसकी तरफ देखकर थोडा तेज आवाज में बोला, “आई सेड लीव मी अलोन फोर दिस टाईम, अंडरस्टैण्ड!”
वरूण जाना नही चाहता था इसलिए मना करने लगा, “नो सर मैं...”
सिद्धार्थ ने उसे सख्त निगाहों से घूरा तो वरूण ने बेमन से सिर हिला दिया और वहाँ से चला गया। उसने दरवाजा भी बंद कर दिया।
बाहर आकर वरूण को उस कटारिया पर बेहद गुस्सा आ रहा था।
“उस बुड्ढे के कारण सर अपसेट हो गए, सोचा था यहाँ मीटिंग के बाद साथ में थोडा टाईम सर के साथ बिताऊँगा, लेकिन शायद मेरी किस्मत में ही ये सब नही है, हमेशा कुछ ना कुछ हो जाता है और सर खुद को अकेला छोड देने के लिए कह देते हैं, कभी ये नही देखते कि मैं भी तो अकेला हूँ।” आँखों में आँसू लिए वो वहाँ से चल दिया।
जारी है......