Devil's Crazy Love - Chapter 3
इधर रियांश तो उस पियक्कड से बचता हुआ एक कमरे के सामने आ गया और अहान को कोसने लगा, “ये भी ना जाने कैसे नर्क में ले आया है मुझे, आज के बाद कभी बात नही करूँगा तुझसे।” उसे रोना भी आ रहा था और अहान पर गुस्सा भी आ रहा था।
तभी वो पियक्कड उसे आता हुआ दिखा जिसे देख रियांश बुरी तरह डर गया। इस कॉरिडोर में इस वक्त कोई था भी नही। वो जल्दी से कमरे का दरवाजा खोल अंदर ही घुस गया।
अंदर सोफे पर बैठा सिद्धार्थ वाइन का गिलास मुहँ से लगाए हुए था। उसने निगाह उठाकर दरवाजे की तरफ देखा तो रियांश को देखकर उसकी नजरें उसी पर ठहर गईं।
रियांश ने जब उसे देखा तो ओर भी डर गया। वो तुरंत अपने कान पकडते हुए बोला, “सॉरी, मैं जानबूझकर नही आया, एक गुंडा मेरे पीछे पडा हुआ है, आप मुझे कुछ देर यहीं रहने दो, प्लीज़।”
उसकी ऐसी डरी हुई मासूम सूरत देखकर सिद्धार्थ के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई। वो सोफे पर से उठा और उसकी तरफ बढ गया। उसे अपनी तरफ आता देख रियांश की साँसे अटक गईं, वो पीछे होने लगा और दीवार से सट गया। सिद्धार्थ ने उसके करीब आकर दीवार पर हाथ टिकाए और उस पर हल्का सा झुकते हुए बोला, “कुत्ते से बचकर शेर की गुफा में आए हो प्यारे!”
रियांश ने हैरानी से आँखें बडी कर लीं। सिद्धार्थ उसके चेहरे पर झुका तो रियांश ने चेहरा तिरछा कर आँखें मींच लीं। ये देख सिद्धार्थ तिरछी मुस्कान चेहरे पर लाते हुए बोला, “इस शेर को तुमसे ज्यादा कुछ नही चाहिए, बस कुछ पल के लिए एक छोटा सा प्यार भरा अहसास, जो शायद तुम्हारे सिवाय कोई नही दे सकता।” ये कहते हुए वो गंभीर और उदास हो गया।
रियांश ने फिर भी उसकी तरफ नही देखा और ना ही आँखें खोलीं। उसकी हालत तो आसमान से गिरे खजूर में अटके जैसी हो गई थी। सिद्धार्थ के मुहँ से आती शराब की स्मैल भी उसका जी खराब कर रही थी। सिद्धार्थ ने रियांश के गाल पर हल्के से हाथ रख उसका चेहरा अपनी तरफ किया। रियांश की आँखें बंद थीं और उसके गुलाबी होंठ कांप रहे थे। उन्हें देख सिद्धार्थ का दिल मचल उठा, उसने अपने होंठ रियांश के होंठों पर रख दिए।
रियांश की आँखें खुलीं और हैरानी से बडी हो गईं। उसने सिद्धार्थ के सीने पर हाथ से दबाव बनाकर उसे दूर करने की काफी कोशिश की लेकिन सिद्धार्थ जैसे स्ट्रोंग बंदे के सामने उसकी एक ना चली।
सिद्धार्थ ने रियांश की कमर पर अपने हाथ लपेटकर उसे अपनी बाहों में जकड लिया था।
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यहाँ बाहर अहान भी रियांश को ढूंढता हुआ उस कमरे के बाहर तक आ गया था।
“कहाँ चली गई मेरी रिया?..मेरे यार, कहाँ है तू?” वो चारों ओर देखने लगा तभी उसकी नजर सामने से आते वरूण पर पडी जो लडखडाता हुआ वहीं आ रहा था। वो अहान को ही ढूंढ रहा था। उसे देख अहान का दिमाग बुरी तरह खराब हो गया, “ये ऐडा फौकट में ही मेरे पीछे पडा है, अभी अगर इससे भिडूंगा तो रिया को नही ढूंढ पाऊँगा, क्या करूँ?” वो जल्दी से वहाँ लगे एक पर्दे के पीछे छिप गया।
जारी है.......