Billionaire 's obsessed love - Chapter 2
अब आगे:-
एक बहुत ही सुंदर सा विला था। जिसका गेट बहुत बडा था। इसमे महाराजा गेट लगा था। यह गेट की तरह के गेजेट से जुडा था। बाॅडीगार्डस की बहुत बडी फौज हमेशा इसकी सुरक्षा करती थी।
इस गेट को पार कर बहुत ही बडा गार्डन था जिसमे तरह तरह के फूल पौधे लगे थे। साथ ही साथ कुछ फलो के पेड भी थे। इसके एक और गेस्ट हाउस भी था जिसके साथ सर्वेट क्वार्टर भी था।
एक ओर बडी सी नर्सरी थी जिसमे साग सब्जी और फूल तथा अलग अलग तरह के हर्ब भी थे। साथ ही साथ वहा पर दस डाॅग हाउस भी था जिसमे अलग अलग नस्ल के वेल ट्रेंड डाॅग रहते थे।
साथ ही एक तरफ घोडो को रखने का अस्तबल भी बना था।
उस लाॅन को पार कर एक बहुत ही आलीशान और खुबसूरत बंगला था जो सफेद रंग का था। उसकी दीवारे एलिगेंट थी। दीवारो पर रोमन ढंग का कसीदाकारी की गई थी।इसकी छत पर अलग अलग देशो से लाए गए झूमर लगे थे। साथ ही साथ अलग अलग लाइट भी थी।
यह बाहर की तरह ही अंदर से भी बहुत सुंदर था।इसी विला के डायनिंग हाल मे लगभग सत्तर वर्षीय बुजुर्ग बैठे थे जो आज भी दिखने मे पचास साल के आदमी जैसे लगते है। यह बुजुर्ग आदमी और कोई नही अतिशय के दादा जी प्रीतम खुराना है। यह एक रोबीले व्यक्ति है।
उनके साथ ही उनकी वाइफ प्रीति भी बैठी है जो लगातार हाल की सीढियो की तरफ देख कर कहती है -" लगता है कि आज अति नही उठा है। इतनी देर तक तो वह नही सोता ,फिर आज क्या हो गया, कही वो बीमार तो नही है ,हे मेरे कृष्णा मेरे बच्चे का हमेशा ख्याल रखना। मै जाकर देख कर आती हू।"
वह जब तक जाती ,तभी सामने किचेन से अपने आफिस सूट के उपर से एप्रन पहनकर अतिशय आता दिखा। उसके दोनो हाथो मे खाने से भरा बाउल था और उसके पीछे से सर्वेटंस ट्राॅली मे खाना लेकर आ रहे थे।
अतिशय सबसे पहले अपने हाथ मे पकडा बाउल को डायनिंग टेबल पर रख देता है। फिर वह अपने दादा जी के पास जाकर पैर छूकर आर्शीवाद लेता है।
अतिशय-" दादा जी ,आर्शीवाद दीजिए कि आपका पोता आपका नाम चारो कोनो मे फैला सके, उसे बिजनेस मे तरक्की मिले।"
प्रीतम जी झुक कर उसके माथे को हल्का उठाकर उसपर किस कर कहते है-" मेरा बच्चा सबसे टाप पर रहे। वह इतनी उचांई छुए जो किसी ने ना छुए हो।"
अतिशय उसका हाथ पकड़कर अपने माथे पर रखते हुए कहता है कि " जब तक आपका हाथ मेरे सिर पर है ,तब तक मुझे तरक्की करने से कोई नही रोक सकता। आप तो पारस पत्थर हो जिसे छु लो वही कुंदन बन जाए। आप तो किसी की भी किस्मत संभाल सकते है।"
प्रीतम-" बहुत हो गया मेरी तारीफ करना। जब आदमी मे खुद का टैलेंट भी होता है, तभी वो तरक्की करता है।किसी चूहे को शेर नही बना सकते है। अब तू मेरे पैरो के पास से उठकर इस कुर्सी पर बैठ जाओ। "
अतिशय-" यह तो मेरी फेवरेट जगह है। यह तो मेरा स्वर्ग है ,पर पता नही क्यो आप मुझे अपने स्वर्ग मे रहने देना नही चाहते ।" यह बात उसने एक मासूम बच्चे की तरह जिद करते हुए बोल रहा था। अभी वह बहुत क्यूट पांडा की तरह लग रहा था।
उसकी बात सुनकर उसकी दादी उससे कहती है -" अति मेरा बच्चा ,तू अपने दादा जी को छोड और मेरे पास आ जा।ये अब सठिया गए है। इन्हे हर बात मे प्राब्लम होती है। अभी के समय जब बच्चे अपने माम डैड की भी इज्जत ना करते ,यह हमारी इतनी इज्जत करता है"
अतिशय उसके पैरो को भी छु कर कहता है -" ये जगह भी मेरा स्वर्ग है। मै तो अपनी पूरी लाइफ भी ऐसे बीता सकता हू। पर मै जानता हू कि आप लोग चाहते है कि मै बहुत तरक्की करू तो मेरा आफिस भी जाना जरुरी है। पर उसके बाद का सारा समय केवल आप लोग के लिए है।"
प्रीति-" सिर्फ हमारा नही, तूने जो इतने सारे जानवरो को पाल रखा है ,उसके पास ही तो समय बिताता है।"
अतिशय-" वह जानवर नही मेरे दोस्त है।आप बता नही क्यो उन्हे पसंद नही करती।"
प्रीति-" तुझे अब बीवी के साथ समय बिताना चाहिए, शादी कर लेनी चाहिए। पर ,तू उन फिटेमूंह के साथ रहता है। पता नही जीते जी तेरी शादी देख भी पाऊगी या नही।"
अतिशय-" दादी ऐसी बात करोगी तो बात नही करुगा। आपको कुछ भी नही होगा। आप के लिए कुछ भी कर सकता हू। आप यही चाहती है ना कि मै शादी कर लू। तो ठीक है,पर मुझे इसके लिए दो महीने का वक्त चाहिए। अब यह सब बात छोड़कर यह खाकर बताइए कि यह खीर कैसा बना है" यह बोलकर वह एक चम्मच खीर उठाकर उसे मूंह मे डालता है। फिर वह प्रीतम को भी खिलाता है।
प्रीतम भी उसे अपने हाथ से खिलाने लगे। कुछ ही देर मे सारा ब्रेकफास्ट फिनीश हो गया।वह फिर से प्रीतम और प्रीति को प्रणाम करते हुए निकल गया।
अगले भाग मे जारी....
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