My professer is my husband - Chapter 1 कॉलेज का पहला दिन
दिल्ली, सुबह का खुशनुमा वक़्त…।
हल्की सुनहरी धूप पूरे आसमान में फैल चुकी थी। सड़क पर लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। कहीं बच्चे स्कूल के लिए तैयार हो रहे थे तो कहीं बड़े अपने काम पर जाने की जल्दी में थे। उसी दिल्ली शहर की एक शांत और खूबसूरत कॉलोनी में एक छोटा लेकिन बेहद प्यारा घर था। वो घर ना ज्यादा बड़ा था और ना ही बहुत छोटा, लेकिन देखने में बहुत खूबसूरत और सुकून देने वाला था। घर के बाहर छोटे-छोटे पौधे लगे हुए थे जिन पर सुबह की ओस की बूंदें चमक रही थीं। अंदर से घर और भी ज्यादा सुंदर लग रहा था। हर चीज़ करीने से सजी हुई थी, जिससे साफ पता चलता था कि इस घर में रहने वाले लोग बहुत प्यार से रहते हैं।
किचन में एक लगभग पैंतालीस साल की महिला नाश्ता बना रही थी। चेहरे पर सादगी, आँखों में अपनापन और होठों पर हल्की मुस्कान थी। वो और कोई नहीं बल्कि प्रिया की माँ सुमन मेहरा थीं। सुमन जी पूरे घर का बहुत अच्छे से ध्यान रखती थीं। तभी उन्होंने आवाज़ लगाई—
“प्रिया…! जल्दी नीचे आओ बेटा, कॉलेज का समय हो गया है।”
ऊपर कमरे से तुरंत एक मीठी सी आवाज़ आई—
“जी मम्मी… आती हूँ।”
ये आवाज़ थी हमारी कहानी की प्यारी और मासूम सी हेरोइन प्रिया की।
प्रिया उन्नीस साल की बेहद खूबसूरत लड़की थी। गोरा रंग, लंबे घने कथई रंग के हल्के कर्ली बाल, बड़ी-बड़ी कथई आँखें जिनकी लंबी मुड़ी हुई पलकें उसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती थीं। गुलाबी होंठ, मासूम सा गोल चेहरा और चेहरे पर ऐसी सादगी कि कोई भी एक बार उसे देखे तो उसकी मासूमियत पर फिदा हो जाए। उसकी हाइट लगभग 5.6 थी और उसकी मुस्कान किसी का भी दिन अच्छा कर सकती थी।
घर में प्रिया के पापा राजेश मेहरा भी रहते थे जिनकी उम्र लगभग पचास साल थी। वो बहुत शांत और समझदार इंसान थे। साथ ही प्रिया का छोटा भाई नितिन मेहरा, जो सोलह साल का था, पूरे घर की जान था। ये छोटा सा परिवार एक-दूसरे के साथ बहुत खुश रहता था।
कुछ ही देर बाद प्रिया अपना बैग लेकर सीढ़ियों से नीचे उतरी। उसके चेहरे पर आज अलग ही चमक थी क्योंकि आज उसके कॉलेज का पहला दिन था। नीचे आते ही वो सीधे किचन में गई और पीछे से आकर सुमन जी को गले लगा लिया।
प्रिया ने खुशी से मुस्कुराते हुए कहा—
“मम्मी…! आज मेरे कॉलेज का पहला दिन है। मैं आज बहुत ज्यादा खुश हूँ।”
सुमन जी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा—
“हाँ-हाँ, खुश रहो… लेकिन ज्यादा मस्ती मत करना। मन लगाकर पढ़ाई करना और किसी मुसीबत में मत फँस जाना।”
सुमन जी की बात सुनकर प्रिया मन ही मन सोचने लगी—
“मम्मी… मैं मुसीबत में नहीं फँसती, मुसीबत खुद मेरे गले पड़ जाती है।” 😂
वो यही सब सोच ही रही थी कि तभी बाहर से स्कूटी के हॉर्न की आवाज़ आई ।
ये थी प्रिया की सबसे अच्छी दोस्त पायल शर्मा। पायल भी देखने में बहुत खूबसूरत थी। हल्का सावला रंग, लंबे भूरे सीधे बाल, हल्की भूरी आँखें और चेहरे पर प्यारी सी मासूमियत। उसकी उम्र लगभग बीस साल थी और वो हमेशा प्रिया के साथ ही रहती थी।
पायल ने बाहर से जोर से आवाज़ लगाई—
“प्रिया…! जल्दी आ, कॉलेज के पहले दिन ही लेट हो जाएंगे।”
प्रिया ने जल्दी से कहा—
“आ रही हूँ बाबा…!”
फिर उसने जल्दी से सुमन जी को बाय कहा और अपना बैग लेकर बाहर आ गई। वो जाकर पायल की स्कूटी पर बैठ गई और मुस्कुराते हुए बोली—
“मुझे इतने प्यार से मत देख मेरी दोस्त, अब स्कूटी चला वरना सच में लेट हो जाएंगे।”
पायल ने गुस्से से उसकी तरफ देखा और बोली—
“हाँ, तुझे अभी याद आया कि लेट हो जाएंगे। तेरी वजह से कॉलेज के पहले दिन ही हमारी इज्जत खराब होने वाली है।”
प्रिया हँसते हुए बोली—
“अरे मेरी प्यारी दोस्त… सामने देखकर गाड़ी चला। कहीं एक्सीडेंट हो गया ना तो तेरे बिना मेरा कुछ नहीं होगा और मेरे बिना तेरा भी कुछ नहीं होने वाला। और हाँ… मेरे बिना कॉलेज जाने की सोच भी मत, वरना तेरे सारे राज़ तेरी मामी को बता दूँगी।”
पायल ने तुरंत स्कूटी की स्पीड बढ़ाते हुए कहा—
“साली… मुझे ब्लैकमेल करती है। जा, कल से तुझे लेने नहीं आऊँगी।”
प्रिया ने तुरंत पीछे से उसे गले लगाते हुए कहा—
“यार गुस्सा क्यों हो रही है… सॉरी ना। आगे से लेट नहीं करूँगी, पक्का।”
पायल ने थोड़ा नखरा दिखाते हुए कहा—
“ठीक है… इस बार छोड़ रही हूँ, अगली बार नहीं।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए उसके गले में हाथ डालकर कहा—
“तू ना मेरी सबसे अच्छी दोस्त है। I love you मेरी जान…”😊
पायल ने अचानक ब्रेक लगाते हुए कहा—
“अब ज्यादा मस्का मत मार। कॉलेज आ गया है, जल्दी उतर वरना सच में लेट हो जाएंगे।”
दोनों जल्दी से कॉलेज के अंदर गईं। पायल स्कूटी पार्क करने चली गई जबकि प्रिया अपना बैग चेक करने लगी कि कहीं कुछ भूल तो नहीं गई। तभी उसकी नज़र कॉलेज कैंपस पर पड़ी। लगभग सारे स्टूडेंट्स अपनी-अपनी क्लास में जा चुके थे।
तभी पीछे से पायल आई और बोली—
“क्या देख रही है?”
प्रिया ने रोने जैसी शक्ल बनाकर कहा—
“हम सच में लेट हो गए हैं…”
पायल ने माथा पकड़ लिया और बोली—
“ये सब तेरी वजह से हुआ है।”
फिर दोनों जल्दी-जल्दी भागते हुए क्लास के अंदर पहुँचीं। अंदर जाते ही उन्होंने देखा कि प्रोफेसर पहले से क्लास में मौजूद थे और बोर्ड पर कुछ लिख रहे थे। दोनों वहीं दरवाज़े पर रुक गईं।
प्रोफेसर ने पलटकर दोनों को देखा, फिर अपनी घड़ी की तरफ देखा और बोले—
“पहले ही दिन लेट…?”
ये बायोलॉजी की क्लास थी और दोनों पहली क्लास मिस कर चुकी थीं।
दोनों ने शर्मिंदगी से सिर झुका लिया। प्रोफेसर ने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी। दोनों चुपचाप जाकर आखिरी बेंच पर बैठ गईं और जल्दी से अपने नोट्स निकालकर लिखने लगीं।
कुछ देर बाद पहली क्लास खत्म हो गई।
तभी दोनों की नज़र सामने बैठी एक लड़की पर पड़ी और अगले ही पल दोनों खुशी से उछल पड़ीं।
“अरे… तू यहाँ…?” दोनों ने एक साथ कहा।
वो लड़की थी उनकी बचपन की दोस्त श्रुति मिश्रा।
श्रुति भी उन्हें देखकर हैरान रह गई। अगले ही पल तीनों एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी से चिल्लाने लगीं। तीनों बिल्कुल पागलों 😂 की तरह हँस रही थीं। पूरे क्लास के बच्चे उन्हें देखकर मुस्कुरा रहे थे।
जब उन्हें एहसास हुआ कि सब लोग उन्हें ही देख रहे हैं तो तीनों तुरंत सीधी होकर अपनी सीट पर बैठ गईं और धीरे-धीरे हँसने लगीं।
कुछ देर बाद दूसरी क्लास शुरू हुई।
जैसे ही प्रोफेसर क्लास के अंदर आए, पूरी क्लास खासकर लड़कियाँ जोर-जोर से चीखने लगीं। कारण भी साफ था… सामने खड़ा इंसान इतना ज्यादा हैंडसम था कि कोई भी उसे देखकर एक पल के लिए रुक जाए।
प्रोफेसर ने गंभीर आवाज़ में कहा—
“साइलेंट।”
और अगले ही पल पूरी क्लास शांत हो गई।
ये थे केमिस्ट्री प्रोफेसर और बड़े बिजनेस टायकून शान ओबेरॉय।
सत्ताईस साल के शान ओबेरॉय बेहद आकर्षक पर्सनालिटी के मालिक थे। गोरा रंग, गहरी काली आँखें, काले घने बाल, 6.4 इंच हाइट और मजबूत शरीर। उनकी पर्सनालिटी ऐसी थी कि कोई भी उन्हें एक बार देखकर नजरें हटाना भूल जाए।
शान सर ने पढ़ाना शुरू किया, लेकिन पढ़ाते-पढ़ाते उनकी नज़र बार-बार प्रिया पर जा रही थी। वो हल्का सा मुस्कुरा भी रहे थे, लेकिन उन्होंने इस बात को किसी के सामने जाहिर नहीं होने दिया।
दूसरी तरफ प्रिया भी उन्हें ध्यान से देख रही थी। उसके चेहरे पर उलझन साफ दिखाई दे रही थी।
पायल ने उसे घूरते हुए पकड़ लिया और धीरे से बोली—
“क्या देख रही है? माना सर बहुत हैंडसम हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तू उन्हें लगातार घूरती रहे। ज्यादा मत देख… नजर लग जाएगी।”
प्रिया ने तुरंत धीरे से गुस्से में कहा—
“मैं घूर नहीं रही। बस… मुझे ऐसा लग रहा है कि मैंने सर को कहीं देखा है।”
पायल ने हँसते हुए कहा—
“तेरे सपनों में आए होंगे सर, तभी देखा होगा।”
प्रिया ने आँखें नचाते हुए कहा—
“बकवास बंद कर। ऐसा कुछ नहीं है। सर मेरे सपनों में क्यों आएंगे?”
पायल ने मुस्कुराकर कहा—
“ये तो तुझे ही पता होगा कि तूने इन्हें कहाँ देखा है।”
अब सवाल ये था कि आखिर प्रिया ने शान को कहाँ देखा था…?
और क्यों शान, प्रिया को देखकर मुस्कुरा रहा था…?
आखिर इतना बड़ा बिजनेसमैन एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनकर क्यों पढ़ा रहा था…?
इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ते रहिए — “My Professor Is My Husband” 💕
By Hayat Khan 💗😍
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