शाह को रिझाना है - Chapter 3
एक घंटे बाद कोहिनूर एक कमरे में बैठी हुई थी। उसका चेहरा हताशा से भरा हुआ था। आँखें रो-रोकर सूज चुकी थीं, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी थी।
यह कमरा यहाँ की लड़कियों का ग्रीन रूम था। यहाँ मेकअप से लेकर साज-सिंगार का सारा सामान रखा गया था—वाहियात से वाहियात कपड़ों के साथ-साथ, चेहरे को संवारने के लिए एक से एक चीजें।
लेकिन कोहिनूर का ध्यान इनमें से किसी पर नहीं था। वह आईने में अपने टूटे हुए अक्स को देख रही थी। उसकी जिंदगी एक चुनौती बन चुकी थी। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती आज की रात थी। आज की रात से ज़्यादा मुश्किल उसके लिए और क्या हो सकता था? वह अभी तक अठारह साल की भी नहीं हुई थी, और आज रात उसकी बोली लगने वाली थी।
कोहिनूर के साथ बैठी लड़की, जो अपने चेहरे पर ब्लश लगा रही थी, ने कोहिनूर को देखकर कहा,
"अरे ओ कोहिनूर, तू तो बहुत खूबसूरत लग रही है। तेरे बालों में सजा ये फूल तेरी खूबसूरती को और बढ़ा रहा है।"
उस लड़की का नाम जोया था।
जोया की बात सुनकर कोहिनूर की आँखों से आँसू और तेज़ बहने लगे। उसने बेरहमी से अपने आँसुओं को पोछा और माथे से वह फूल नोचकर निकाल दिया। इससे उसके बाल भी बिखर गए—जिन्हें अभी-अभी राबिया ने सँवारा था। उसने वह फूल जोया की ओर फेंकते हुए कहा, "मुझे कोई शौक नहीं है खूबसूरत दिखने का। तुम इसे लगा सकती हो। तुम वैसे भी बहुत खूबसूरत हो, बस इसे लगाकर थोड़ी और लगोगी, जिससे लोग..."
उसका चेहरा मेकअप की मोटी परत के नीचे छिपा हुआ था, जिस पर माई के हाथों की उंगलियों के निशान धँस चुके थे। लेकिन आँखों का क्या? आँसुओं की वजह से वे लाल आँखें छिपाना मुश्किल हो रहा था।
उसके आँसू, उसका दर्द, उसकी तकलीफ़ें, और उसकी मर्ज़ी—ये सब यहाँ कोई मायने नहीं रखते थे। वह बचपन से ये सब देखती आ रही थी। माई लड़कियों को खरीदती थी और ‘आश्रय’ देने के नाम पर उनसे गलत काम करवाती थी। उसका मकसद सिर्फ़ पैसा था—जितना हो सके उतना पैसा। जैसे वह सारा पैसा उसके साथ ऊपर जाएगा।
तभी वहाँ राबिया आ गई। राबिया और चंदा—दोनों ही माई की चमचियाँ थीं। चंदा को लगता था कि माई के बाद इस कोठी की मालकिन वही बनेगी, और राबिया को लगता था कि जब चंदा कोठी संभालेगी, तो अगली हुकूमत उसी की होगी। इसीलिए, जहाँ चंदा सिर्फ़ माई के तलवे चाटती थी, वहीं राबिया माई और चंदा दोनों के इशारों पर नाचती थी। यूँ कह लो कि वह दोनों की गुलाम थी।
राबिया, कोहिनूर के होठों पर लाली लगाते हुए कहती है,
"कोहिनूर, आज रात तुम्हें ठीक से पेश आना होगा क्योंकि ये इस शहर के बहुत बड़े रईस Mister सभरवाल की बर्थडे पार्टी है। तुम्हें पता है वहाँ बहुत बड़ी-बड़ी हस्तियाँ आएंगी। इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता कौन-सी लड़की को कौन ले गया। लेकिन अगर तुम्हें चुना गया, तो बहुत ऊँची कीमत मिलेगी।"
कोहिनूर, आईने में राबिया को देखकर हैरान रह गई। यह लड़की इस बात पर खुश कैसे हो सकती थी? सच में, उसने इस काम को अपनाया हुआ था, और इसी को ही दुनिया मान बैठी थी। उसके लिए कोई फ़र्क नहीं पड़ता था कि इस काम में इंसानों का सौदा हो रहा है, जैसे कि वे कोई सामान हों। उसका काम सिर्फ़ मर्दों को खुश करना था।
राबिया, कोहिनूर को पूरी तरह से तैयार करके मुस्कुरा कर कहती है,
"लो, तुम भी तैयार हो गई और बाकी सब भी। चलो अब चलने की तैयारी करो। आज की रात शानदार होनी चाहिए। एक भी लड़की खाली हाथ घर नहीं आनी चाहिए।"
जोया, राबिया से पूछती है,
"राबिया, क्या वहाँ Mister खुराना भी आएंगे? वो जो पिछली बार पार्टी में आए थे..."
राबिया सिर हिलाते हुए कहती है,
"हाँ, सुना है कि वो भी आ रहे हैं। मुझे पता है कि तुम उनके लिए इतनी बेचैन क्यों हो। और देखना, वो तुझे ही चुनेगा। तेरे अलावा उसे किसी और में मज़ा ही नहीं आता।"
तभी सरिता भी वहाँ आ जाती है और हँसते हुए कहती है,
"और मुझे पता है, मुझे वहाँ वो हीरा व्यापारी Mister गोयल चुनेगा।"
अचानक से वहाँ का माहौल हँसी-मज़ाक में बदल जाता है और सब एक-दूसरे के कस्टमर का नाम लेकर चिढ़ाने लगते हैं। लेकिन इन सबके बीच कोहिनूर बिल्कुल पत्थर की तरह बैठी हुई थी। उसे इन सब बातों से कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था। तभी राबिया ने अपने ऊपर से दुपट्टा हटाकर अपनी चोली को थोड़ा और नीचे करते हुए, अदाओं के साथ खुद को आईने में देखते हुए कहा, "तुम्हें कोई भी चुने, लेकिन मुझे पता है. वहाँ एक ही शख्स है जिसे अपना शिकार बनाना है. शाह।"
जोया और सरिता दोनों की आँखें अचानक बड़ी हो जाती हैं और मुँह खुले के खुले रह जाते हैं। दोनों एक साथ बोलती हैं,
"शाह? शाह?"
जोया खुशी से उछलते हुए कहती है,
"क्या सच में इस पार्टी में शाह भी आ रहे हैं?"
सरिता तो लगभग कुर्सी पर बेहोश होते हुए कहती है,
"शाह! वो पार्टी में आ रहे हैं, ये सुनकर ही मेरा बीपी हाई हो गया है। अरे कोई मुझे पानी ला दो। कहीं खुशी के मारे मैं बेहोश ना हो जाऊँ। और अगर शाहू ने मुझे चुन लिया, तो मैं तो मर ही जाऊँगी।"
सरिता ने बात मज़ाक में कही थी और इसे सुनकर जोया को हँसी भी आ रही थी। लेकिन राबिया ने गुस्से में उसे देखते हुए कहा,
"गलती से भी मरने का ख्याल अपने दिल में मत लाना। क्योंकि अगर तुम मर गई ना, तो माई तुम्हारी लाश को क़ब्र से निकाल कर अपने पैसे वसूल करेगी।"
सरिता ने मुँह टेढ़ा करते हुए कहा,
"क़ब्र में तो तुम जाओगी। मैं तो श्मशान जाऊँगी। जहाँ तक बात रही मरने की, तो शाह की बाहों में मौत आ जाए तो जन्नत नसीब होगी। Hi मेरा शाह, एक बार मेरी तरफ़ देख तो ले।"
जोया उसकी इस नौटंकी पर उसके सिर पर हल्का सा मारते हुए कहती है,
"चुप कर! देखना तो दूर की बात है, वो तो अपनी नज़रें तक नहीं उठाता। कितनी बार महफ़िलों में देखा है उसे, रिझाने की भी कोशिश की है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो बंदा सिर्फ़ जिस्म देखकर अट्रैक्ट होता है।"
सरिता जल्दी से बोलती है,
"अरे तो बताओ ना मुझे क्या करना चाहिए, कैसे पटाऊँ उसे? क्या करूँ कि उसकी बाहों में गिर जाऊँ।"
सारी लड़कियाँ यही सब बकवास बातें कर रही थीं, जिसे सुनने में कोहिनूर को जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। वह बस एक ही बात सोच रही थी—उसे किसी भी हाल में इन सबसे बाहर निकलना है। वह इस सब का हिस्सा नहीं है।
तभी चंदा वहाँ आ जाती है और सब की बातें सुन लेती है। वह गुस्से में उन सबको देखती हुई कहती है,
"शाह का नाम लिया नहीं कि तुम लोगों की लार टपकने लगी। पर याद रखना, आज रात तुम लोग किसी के ऊपर भी लाइन मार लो, लेकिन शाह की नज़र सिर्फ़ और सिर्फ़ कोहिनूर पर होनी चाहिए।"
कोहिनूर कसकर अपनी आँखें बंद कर लेती है और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो जाती है। वह गुस्से में चंदा की तरफ़ देखते हुए कहती है,
"मेरे बारे में ऐसी बातें करना बंद करो! मैं किसी के सामने परोस देने वाला बटर चिकन नहीं हूँ। इंसान हूँ, और मैं इस घटिया काम के लिए कभी राज़ी नहीं थी। ना ही कभी रहूँगी। ना तो मैं तुम जैसी हूँ और ना ही कभी बनूँगी। इसीलिए मुझे अपने जैसा समझने की गलती मत करना।"
सब को कोहिनूर का रवैया पहले से ही पता था, इसीलिए किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। यहाँ तक कि चंदा ने भी मुस्कुरा कर उसकी बात को उड़ाते हुए कहा,
"फिर शुरू हो गया तुम्हारा ये ज्ञान देना। जानती हो ना, तुम्हारे इस उपदेश का यहाँ किसी पर कोई असर नहीं होगा। तो भाषण देने के बजाय चुपचाप जाकर अपने कपड़े क्यों नहीं बदलती हो?"
चंदा वहाँ से कपड़ों के रैक पर जाती है, जहाँ बहुत सारे छोटे-छोटे कपड़े हैं। वह उनमें से एक बहुत ही छोटी सी चोली और घुटनों तक आने वाला लहँगा निकालती है और कोहिनूर के सामने रखते हुए कहती है,
"लो, इसे पहन लो।"
पर तभी चंदा के हाथ से वे कपड़े कोई अपने हाथ में ले लेता है। कोहिनूर और चंदा के साथ-साथ बाकी सभी लड़कियाँ उसकी तरफ़ देखती हैं, जहाँ वैशाली उन कपड़ों को लेते हुए कहती है,
"कोहिनूर को कुछ और दे दो, ये मैं पहनने वाली हूँ आज रात।"
कोहिनूर वैशाली को देखकर हैरान हो जाती है। चंदा ने भी पूछा,
"तुम? तुम आज रात कहाँ जा रही हो? तुम्हारा तो कस्टमर आने वाला था ना।"
वैशाली कुर्सी पर बैठते हुए, चेहरे पर फाउंडेशन लगाते हुए कहती है,
"उसकी बीवी हॉस्पिटल में है, उसको बच्चा होने वाला है। तो वो अपनी बीवी के पास है। और मुझे नहीं लगता कि आज के बाद वो कभी इस कोठे पर आएगा। अब अगर तुम्हारा भाषण देना ख़त्म हो गया है, तो जाकर बाकी की तैयारी कर लो। मैं तैयार होकर कोहिनूर को अपने साथ ला रही हूँ।"
कोहिनूर चौंक कर वैशाली को देखती है। चंदा भी हैरानी से पूछती है,
"लेकिन उसकी बीवी का तो आठवाँ महीना चल रहा था। इतनी जल्दी बच्चा कैसे हो गया?"
वैशाली ने शीशे में ही गुस्से से चंदा को देखते हुए कहा,
"अगर इतनी ही फ़िक्र है, तो हॉस्पिटल जाकर पता कर क्यों नहीं लेती कि उसके बच्चे को दुनिया में आने की इतनी जल्दी क्यों है।"
चंदा जानती थी, वैशाली से उलझने का कोई फ़ायदा नहीं, इसलिए वह वहाँ से निकल जाती है। कोहिनूर जल्दी से वैशाली के पास वाली कुर्सी पर बैठते हुए कहती है,
"ये सब क्या है। देखो, मुझे पता है ये सब अचानक नहीं हुआ। इतना तो मैं तुम्हें जानती हूँ। सच बताओ, क्या किया है तुमने?"
वैशाली ने शरारती मुस्कान के साथ कोहिनूर को देखा और धीरे से उसके कानों के पास जाकर कहा,
"मैंने उसकी बीवी को फ़ोन करके सब सच बता दिया है। और इस बात से उसे इतना बड़ा झटका लगा कि उसका लेबर पेन समय से पहले शुरू हो गया।"
कोहिनूर ने जैसे ही यह सुना, उसकी आँखें बड़ी हो गईं—लेकिन उसके दिल में एक हल्की सी खुशी भी उमड़ आई। कि इस दर्द भरी दुनिया में कोई तो ऐसा है जो अपना है। और वह कस के वैशाली के गले लग जाती है।