Virtual Heartbeat Ch. 3

कॉम्प्लिकेटेड- Chapter 3

Posted by JAYA SAHANI • May 13, 2025 07:14 AM

थाईलैंड में रॉनी अपने सीनियर लीडर के कॉल के बाद से ही लड़की को ढूँढ़ने के काम में जुट गया था। उसने बाकी लोगों को भी इस काम में लगा दिया था। रॉनी यहाँ एन्जॉय करने आया था, पर उसके नसीब में यह नहीं था। वह अपना 100% देने को तैयार हो गया था। उसने अपने आदमियों को फोटो शेयर करते हुए कहा, "यह लड़की कहीं भी हो, किसी भी हाल में हो, मुझे चाहिए... मतलब चाहिए!"

उसके आदमियों ने सबसे पहले भारत में तलाश शुरू कर दी थी क्योंकि लड़की की शक्ल-सूरत और नाम से वह भारतीय लग रही थी। इसलिए उन्होंने हर जगह उसकी तलाश शुरू कर दी थी।

लंदन के लेगेसी हॉस्पिटल में रात का समय था। बाला ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठा था। उसका दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा था क्योंकि वह हमेशा अपने बॉस के हिसाब से चलता था। पर आज वह मजबूर था। वह अपने मालिक के होश में आने का इंतज़ार कर रहा था। डॉक्टर जितनी बार आते, वह उतनी बार पूछता, "कब उन्हें होश आएंगे?" डॉक्टर एक ही बात कहते, "अभी हम कुछ नहीं कह सकते। आप बस भगवान से प्रार्थना कीजिए कि उन्हें जल्दी होश आ जाए। हम तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।"

बाला बाहर कुर्सी पर बैठा अपने मोबाइल को देख रहा था। उसके पास दो मोबाइल थे, जिनमें से एक उसने बंद कर दिया था। वह मन ही मन बोला, "मैं यहाँ से कहीं नहीं जा सकता। कहीं ऐसा न हो कि दुश्मनों को पता चल जाए कि मैं और मेरे बॉस यहाँ मौजूद हैं। कहीं उन्हें मौका न मिल जाए!"

यह सोचकर वह परेशान होने लगा और खुद से वादा किया, "जब तक बॉस को होश नहीं आ जाता, मैं यहाँ से कहीं नहीं जाऊँगा। मेरे बॉस बहुत जल्द होश में आएँगे, वह ठीक हो जाएँगे। उसके बाद बहुत लोगों से बदला लेना है!"

रात 1:00 बजे वार्ड में कुछ डॉक्टर आए जो दिखने में बहुत सीनियर लग रहे थे। उनकी उम्र लगभग 55-60 वर्ष होगी। जैसे ही वे दरवाजे तक पहुँचे, बाला ध्यान से उन्हें देखने लगा। बाला उनसे बात करने ही वाला था कि वे डॉक्टर अंदर चले गए। बाला दरवाजे पर खड़ा होकर अंदर की तरफ देख रहा था। वहाँ एक छोटा-सा काँच का दर्पण लगा हुआ था। डॉक्टर अंदर जाकर चेकअप कर रहे थे।

काफी देर तक दोनों डॉक्टर पेशेंट का चेकअप करते रहे। जब वे दोनों बाहर निकले तो बाला सामने खड़ा हो गया और हाथ जोड़ते हुए बोला, "डॉक्टर, कैसे हैं मेरे बॉस? और कब तक ठीक हो जाएँगे? प्लीज़ कुछ तो बताइए?"

उनमें से एक डॉक्टर ने कहा, "आप पेशेंट के क्या लगते हैं?"

डॉक्टर का इतना कहना था कि बाला घबराते हुए उन्हें देखने लगा और बोला, "मैं उनके बॉडीगार्ड हूँ और ये मेरे बॉस हैं।"

यह सुनकर डॉक्टर ने कहा, "आप मेरे साथ केबिन में चलिए।"

इतना कहने के बाद बाला डॉक्टर के साथ केबिन में गया। उसके चेहरे का भाव एकदम बदल गया था। वह अंदर से बहुत घबराया हुआ था कि कहीं डॉक्टर कुछ नकारात्मक बातें न कह दें। यही सब सोच वह परेशान हो रहा था। डॉक्टर चेयर पर बैठते हुए बाला को भी बैठने के लिए कहा।

केबिन में एकदम शांति का माहौल था। रात का समय था। डॉक्टर ने बाला के सामने एक फाइल रखते हुए कहा, "पेशेंट को जो आंतरिक चोट लगी है, वह किसी लकड़ी या हाथ से नहीं लगी है, बल्कि यह मज़बूत लोहे से मारा गया है। उनकी कुछ जगह पर नसें डैमेज हो गई हैं जिससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पा रहा है, जिससे पेशेंट को होश आने में वक़्त लग रहा है।"

बाला बड़े ध्यान से बातें सुन रहा था। 2 मिनट रुकने के बाद डॉक्टर ने आगे कहा, "इतना टेस्ट करने के बावजूद भी, आखिरकार जहाँ पर उन्हें चोट लगी है, ऐसा कोई टेस्ट के लिए कुछ मिल नहीं रहा है...? जैसे कि इतनी चोट लगने के बावजूद जिस हथियार से उन्हें मारा गया, उस हथियार का कुछ पार्ट अगर मिल जाता था, तो हम लोग लैब में उसे चेक कर सकते थे। बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड पेशेंट है।"

"ऐसे यह सब होने के समय तुम कहाँ थे?"

डॉक्टर का सवाल सुन बाला अंदर से घबरा रहा था, पर उसने अपने चेहरे पर यह नहीं दिखाया। हिम्मत करते हुए बोला, "डॉक्टर साहब, माना वह मेरे बॉस हैं, पर उनकी पर्सनल और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ भी है। कुछ समय वह अकेले भी बिताते हैं, और जब यह सब हुआ तब मैं वहाँ पर नहीं था।"

बाला की बातें सुनने के बाद डॉक्टर बोले, "खैर! जो भी हो, मेरा नाम Enzo है, मुझे इटली से बुलाया गया है, और आज से पेशेंट का ट्रीटमेंट मैं करूँगा।"

बाला और डॉक्टर थोड़ी देर और बात करते रहे। उसके बाद बाला केबिन से बाहर निकला और अपने बॉस की निगरानी करने लगा। कुछ देर बाद डॉक्टर वापस ऑपरेशन थिएटर में गए और पेशेंट का ट्रीटमेंट करना शुरू कर दिया। वे अपने तरीके से पेशेंट को ठीक करने की कोशिश कर रहे थे।

इधर भारत में, अल्फा इनफिनिटी कंपनी में वेदांत कटारिया अपनी सफलता की ढेरों बधाइयाँ बटोर रहा था। उसे देश-विदेश से सभी लोग बधाई दे रहे थे। आज वह बहुत खुश था। इतनी खुशियाँ मिलने के बावजूद भी, जब वह एक मिनट भी अकेला रहता तो उसके चेहरे का रंग उड़ जाता था। पता नहीं ऐसी कौन सी बात थी जो उसे अंदर से खाए जा रही थी। वह कहीं न कहीं परेशान दिख रहा था। यूँ कहा जाए तो इतनी खुशियाँ मिलने के बावजूद भी वह अंदर से कहीं न कहीं खुश नहीं दिखाई दे रहा था।

पर अपनी खुशी को बनाए रखने के लिए उसने अपने गार्ड को अपने पास बुलाया और कहा, "अगर कोई मुझसे मिलना चाहे तो उसे कह देना कि मैं इस वक़्त भारत में नहीं हूँ, क्योंकि मैं अकेला रहना चाहता हूँ।"

उसका आदेश सुनते ही उसके गार्ड ने सिर हिला दिया।

क्रमशः...

क्या रॉनी को उस लड़की का पता मिलेगा? आखिर पेशेंट कौन है जिसे अभी तक होश नहीं आया? और वेदांत कटारिया जो इतनी सफलता मिलने के बावजूद भी परेशान है? सारी गुत्थी को सुलझाने के लिए कृपया कहानी को पढ़ते रहिए। वर्चुअल हार्टबीट

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