Obbsesion of billionaire - Chapter 3
लेकिन जब एक परिवार ने इस तरह से रात के अंधेरे में झलक को उसके सगे माँ-बाप के द्वारा फेंकते हुए देखा... ।।।
तो वह तुरंत उसके पास आ गए! तब उसके माँ-बाप ने उससे सवाल पूछा?
तब उस परिवार ने उसे, झलक के सगे माँ-बाप यानी कि मिस्टर ईशान ओबेरोय से पूछा भी था कि यह आप क्या कर रहे हैं? यह आपकी नवजात बेटी है! जो की अभी-अभी पैदा हुई है।
सभी को इस बात के बारे में पता चल चुका था कि ओबेरोय परिवार में दो बेटियों ने जन्म लिया है। क्योंकि ओबेरोय परिवार शहर का जाना-माना प्रतिष्ठित परिवार था।
अब जैसे ही ओबेरॉय परिवार रंगे हाथ पकड़े गए! ईशान ओबेरोय... और श्रीमती नैना ओबेरोय... दोनों ने यह देखा तो दोनों थोड़ा सकपका गए थे।
और कुछ पल सोचते हुए, तब अचानक नैना ने उस छोटी सी, नन्ही सी झलक को अपनी गोद में लेकर उस परिवार की बीवी यानी स्नेहा शर्मा को देते हुए बोली, "यह लड़की हमारे लिए किसी काम की नहीं है।"
"हम बस इसे यहाँ फेंकना चाहते हैं। लेकिन अगर तुम इसे लेना चाहते हो तो ले सकते हो! हम तुम को दे सकते हैं।"
अब जैसे ही नैना यह कहा...
उस शर्मा परिवार की आँखों में चमक आ गई थी। क्योंकि उन लोगों की तो कोई औलाद ही नहीं थी और काफी अरसे से वह कपल औलाद के लिए तरस रहे थे, तड़प रहे थे।
और अब जैसे ही नन्ही सी झलक स्नेहा की गोदी में आई तो उनकी आँखें भर आती हैं। और उसने उसे खुशी से गले से लगा लिया था।
लेकिन नैना अपनी सगी माँ बड़ी ही नफ़रत से उस छोटी सी बच्ची को घूर कर देख रही थी।
हालाँकि मिस्टर सौरभ शर्मा के दिमाग में यह सवाल भी आया था कि अचानक से एक छोटी सी बच्ची से इन्हें इतनी नफ़रत क्यों हो गई है? ऐसा क्या हुआ है? लेकिन फिलहाल उन्होंने अपनी पत्नी की आँखों की खुशी देखी... तो इसीलिए उन्होंने यह बात उनसे पूछना ज़रूरी नहीं समझा था।
और अब झलक मिस्टर और मिसेज़ शर्मा के परिवार में पलने लगी थी।
मिस्टर एंड मिसेज़ शर्मा ने झलक को लेने के बाद उसी रात वह शहर छोड़ दिया था।
मिस्टर सौरभ शर्मा ने जब झलक को गोद लिया तो! उसके ठीक छह साल बाद स्नेहा शर्मा प्रेग्नेंट हो गई थी।
और कहीं ना कहीं उन्होंने झलक को अपने लिए हमेशा से शुभ माना था कि उसके शुभ कदम पड़ते ही उनके घर में बच्चा जन्म लेने वाला था।
तो वह बहुत ज़्यादा खुश थी। और उन्होंने कभी भी झलक और अपने बेटे में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया था।
और वह अपने बेटे और बेटी की परवरिश अच्छे से करने लगी थी।
कुछ सालों बाद...
और जब झलक तकरीबन सोलह साल की हुई, तब स्कूल से लौटते समय उनका एक भयानक एक्सीडेंट हो गया था।
मिस्टर एंड मिसेज़ शर्मा ने झलक को बचाने के लिए अपनी जमापूँजी दाँव पर लगा दी थी।
अपनी सारी जमा पूँजी उस पर खर्च कर दी थी! लेकिन जब हॉस्पिटल में उसकी माँ और पिता किसी का भी खून झलक से मैच नहीं हुआ! तब हॉस्पिटल वालों को उन पर शक हुआ!
तब मिस्टर शर्मा ने उन्होंने साफ़-साफ़ बता दिया था कि झलक उनकी बायोलॉजिकल सगी बेटी नहीं है, बल्कि उन्होंने उसे गोद लिया है।
पता नहीं कैसे यह बात झलक तक भी पहुँच चुकी थी।
क्योंकि जिस वक़्त डॉक्टर उसे ट्रीट कर रहे थे, तब आपस में नर्स इस बारे में डिस्कशन कर रही थीं। तब झलक ने उन दोनों नर्सों की बातें अनजाने में सुन ली थी।
उस एक पल में ही उसकी दुनिया पलट गई थी।
वेल, अच्छे ट्रीटमेंट के बाद, अब लकीली झलक बच चुकी थी। और जैसे ही बचकर वह वापस घर आई! घर आकर उसने अपने माता-पिता से सवाल किया? तब मिस्टर एंड मिसेज़ शर्मा ने झलक कुछ भी नहीं छुपाया था।
और उन्होंने झलक को सारा सच कह दिया था।
झलक के मन में बचपन से ही अपने असली माता-पिता के लिए एक अलग से कड़वाहट भर चुकी थी।
साथ-साथ उसके मन में एक सवाल भी था कि आखिरकार उससे ऐसी क्या गलती हुई थी जो छोटी सी बच्ची को उसके परिवार ने इस तरह से मारने की कोशिश की और फिर उसे बिना जान पहचान के एक अनजान परिवार को बिना झिझके गोद में सौंप दिया।
यह तो झलक की खुशनसीबी थी कि उसे इतना अच्छा परिवार मिला। जिन्होंने पाल-पोसकर बड़ा करा। उसकी हर ख़्वाहिश को सर आँखों पर रखा! उन्होंने अपनी औलाद और झलक में कभी कोई भी फ़र्क नहीं समझा।
कभी-कभी यह सब सोचते हुए झलक काफी इमोशनल हो जाती थी।
झलक ने ठान लिया था कि अब वह इस परिवार का साथ कभी भी नहीं छोड़ेगी! और जितना प्यार इस परिवार से उसे मिला है, उतना ही प्यार वह इस परिवार को करेगी। और अपनी ज़िम्मेदारी से कभी भी किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेगी।
वेल... झलक अपने छोटे भाई के साथ राजी-खुशी अपना जीवन बिताने लगी थी।)
लेकिन झलक के हँसते-खेलते परिवार को किसी की नज़र लग गई। जब झलक अट्ठारह साल की हुई, तब उसके जन्मदिन की एक छोटी सी पार्टी मिस्टर एंड मिसेज़ शर्मा ने अपने घर पर रखी।
और केक लेने के लिए जैसे ही मिस्टर सौरभ शर्मा घर से बाहर गए और जब वह केक शॉप से केक लेकर घर की ओर लौट रहे थे... तभी अचानक उन्हें एक बड़ी सी गाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी थी।
और आनन-फ़ानन में उन्हें उस कस्बे के छोटे से हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। वहाँ जाकर उनका ट्रीटमेंट.. हुआ. लेकिन बाद में पता चला कि वह कोमा में चले गए हैं! और उसके इलाज के लिए इन्हें बड़े शहर में शिफ़्ट करवाना होगा।
अब झलक के पास कोई और रास्ता नहीं था। झलक जिसने अभी-अभी नई-नई जवानी की दहलीज पर क़दम रखा था, अचानक से इतना बड़ा एक्सीडेंट होने पर उसका पूरा परिवार बिखर सा गया था। झलक अपने माता-पिता को बेहद प्यार किया करती थी।
अब झलक ने डिसीज़न ले लिया था कि चाहे उसे कुछ भी करना पड़े! लेकिन वह अपने पिता को कुछ नहीं होने देगी! और इतना पैसा कमाएंगी कि अपने पिता के इलाज में कोई कमी नहीं रहने देंगी।
क्योंकि अब मिस्टर सौरभ शर्मा को बहुत महँगे-महँगे इलाज की आवश्यकता थी।
झलक ने अपने छोटे कस्बे के डॉक्टर की बात मानते हुए अपने पिता सौरभ शर्मा को जल्द से जल्द शहर के हॉस्पिटल में शिफ़्ट कर दिया गया।
लेकिन झलक को यह नहीं पता था कि जिस हॉस्पिटल में उसने अपने पिता को एडमिट कराया है, वह हॉस्पिटल किसी और का नहीं बल्कि ओबेरोय परिवार यानी उसके असली माता-पिता का है।
झलक आकांक्षा ओबेरोय यानी अपनी जुड़वा बहन के जैसी ही दिखा करती थी। इनफैक्ट झलक उससे भी ज़्यादा ख़ूबसूरत थी।
तब उस हॉस्पिटल की एक नर्स ने उसे आकांक्षा ओबेरोय समझकर मालिकों वाली इज़्ज़त देना शुरू कर दिया था और उसके आस-पास देखते हुए इधर-उधर बातें बताने लगी।
अब झलक थोड़ी सी हैरान हो गई कि अचानक से इन लोगों को क्या हुआ है? यह उसके साथ इतने ज़्यादा अजीब तरह से पेश क्यों आ रहे हैं।
वेल... जब एक डॉक्टर ने झलक को आकांक्षा ओबेरोय कहकर पुकारा—तब झलक की आँखें हैरानी के मारे बड़ी हो गई थीं।पहले झलक ने अपनीपालने वाली माँ से थोड़ी सी पूछताछ की! तो उसे पता चल चुका था कि उसके असली माता-पिता का सरनेम ओबेरोय था।
और नर्स की इनफ़ॉर्मेशन से उसे पता चला—यह हॉस्पिटल ओबेरोय का है। और यह भी आज उसे पता चला, आकांक्षा ओबेरोय उसकी सगी जुड़वा बहन है।
अगर वह उसकी सगी बहन नहीं होती, तो भला उसके जैसे कैसे दिखती? अब तो झलक की हैरानी काफी ज़्यादा बढ़ चुकी थी।
अगर सगे माता-पिता आकांक्षा को पाल-पोसकर बड़ा कर सकते थे, तो उसे इस तरह से खुद से जुदा करने के लिए क्यों राज़ी हो गए?
क्यों बिना झिझके उसे सड़क किनारे फेंकने के लिए तैयार हो गए थे? आखिरकार उसकी गलती क्या थी? उसने ऐसा क्या किया था कि उसके अपने सगे माँ-बाप ने उसे इस तरह से जान के दुश्मन बन बैठे!
और जब नाकामयाब हो गए और रंगे हाथों पकड़े गए, तब उन्होंने एक अनजान परिवार को झलक गोद दे दिया।
आखिर आकांक्षा की तरह वह भी उनकी अपनी औलाद थी। तो फिर उसके साथ यह नाइंसाफ़ी क्यों की गई? लेकिन अभी फिलहाल यह सारी बातें सोचने का समय नहीं था।
इसलिए अब झलक जल्द से जल्द अपने पालने वाले पिता को ठीक करना चाहती थी। क्योंकि उसके पिता ने उसे बहुत ज़्यादा प्यार दिया था।
आज तक कभी भी उसे इस बात का एहसास नहीं होने दिया था कि झलक उनकी अपनी सगी औलाद नहीं है।
वहीं उसकी माँ का रो-रोकर बुरा हाल था।
तब झलक ने उस डॉक्टर से हाथ जोड़कर रिक्वेस्ट की—कि वह बस उसके पिता को जल्द से जल्द ठीक कर दे!
अब वही डॉक्टर चौंक गई थी कि इस तरह से इतने बड़े खानदान की बेटी आकांक्षा ओबेरोय किसी और को अपना पिता क्यों कह रही थी? और जब उन्हें थोड़ी शंका पैदा हुई, तो उन्होंने सीधा मिस्टर ईशान ओबेरोय को फ़ोन कर दिया था।
और ईशान भी हॉस्पिटल वालों की यह बात सुनकर चौंक गया था कि उनकी बेटी आकांक्षा इस वक़्त हॉस्पिटल कैसे हो सकती है। जबकि इस वक़्त आकांक्षा तो उनके ठीक सामने बैठी हुई कॉफ़ी पी रही है। ।
क्या मोड़ लेगी झलक की जिंदगी जानने के लिए बने रहिए दोस्तों।