Gangster love story (दर्द से मोहब्बत तक का सफर ) - Chapter 2
भाग - 2 शिवा ओर आहूजा का आमना सामना
वरून ने जैसे ही कहा कि हम पहुच गये हैं
आगे
कार एक तेज चरचराहट के साथ एक बड़ी सी बिल्डिग के सामने रूकी, कार के रूकते है कार से शेरा निकला और उसने शिवा की तरफ का गेट खोला, तो वही दूसरी और से सार्थक निकला वो दोनों जैसे ही कार से निकले वरून कार लेकर पार्किग एरिया में कार पार्क करने चला गया , ओर वो लड़का अपने सनग्लासेज के पीछे से सामने खड़ी उस बड़ी सी इमारत को देखा जो अपने पूरे रोब से खड़ी थी, बिल्डिंग के बाहर शिवा, सार्थक,शेरा खड़े थे , ओर उस बिल्डिंग के ऊपर बड़े बड़े अक्षर में लिखा था K. K corporation ।
उस लड़के ने एक भरपूर नजर उस बिल्डिंग पर डाली ओर अपने कोर्ट के बटने को बंद करते हुए अपने लम्बे लम्बे कदम लेता हुए आगे चलने लगा, उसी के साथ वो दूसरा लड़का सार्थक भी अपने एटिट्यूड के साथ उस लड़के के पीछे पीछे चलने लगा, ओर उसके पीछे शेरा, वो तीनों जैसे जैसे आगे बढ़ रहे थे,
तीनों जैसे ही उस बिल्डिंग के अंदर गये सभी लोगों की नजरे उन्हें ही देखे जा रही थी, खास तो पर लड़कियो
की ,जब उनकी नजर शिवा पर गई तो सभी लड़किया अपनी आखो से ही शिवा को स्कैन करने लगी,अब वो लड़किया भला शिवा को स्कैन क्यो ना करे ( थ्री पीस सूट आयु 30 पर 25 के उम्र के लड़को को पूरी टक्कर दे सकता है बाॅडी देख कर ही बताया जा सकता है कि जीम में अच्छी खासी मेहनत कि गई हैं अपनी बाॅडी पर, लम्बाई 6 फिट रंग दूध की तरह गोरा आखे गहरे समुद्र जितनी गहरी नीली आखे एक हाथ में एक महंगी घड़ी दूसरे हाथ में महादेव का कडा़ ,पैरो में महंगे जूते कुल मिला कर कातील लग रहा था ,रास्ते में दिखने वाले एम्पलाइज उन तीनों लड़को को ही देखे जा रहे थे, चाहे लड़के हो या लड़कियां, क्योंकि उन तीनों की पर्सनैलिटी ओर शख्सियत ही कुछ ऐसी थी कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए, अधिक लड़कियों की नजर तो आगे चल रहे उस हैंडसम से लड़के पर ही टिकी हुई थी, वो दिखने मैं ही इतना खुबसूरत था अइ वो ना चाहते हुए भी हर लड़की का सपना होता था, वो लड़का तो उन लड़कियों का ड्रिम मैन था,जिसके सपने अक्सर लड़कियां देखती थी, लेकिन वो लड़की तो इन सब से दूर हार्ट लेस एक्सप्रेशन लैस था, वो लडकियों से एक दूरी पर रहना पसंद करता था, उसका मानना था कि लड़कियां उसकी ओर उसके पैसे ओर रूतबे की वजह से उसकी ओर आकर्षित होती है ओर ये सच भी था, हर लड़की उसे पाने का ना सिर्फ सपना देखती थी बल्कि उससे मिलने वाली लग्जुरियस लाइफ भी जीने का सपना देखती थी,
जैसे जैसे वो आगे जा रहा था उसका वो रोब और ओहदा देखने वाला था , यू ही नहीं मुम्बई के लोग उसे शिवा भाई के नाम से जानते हैं ।
वही सार्थक भी किसी से कम नहीं लग रहा था सफेद रंग की शर्ट ग्रे रंग की पेंट और ग्रे रंग का ही कोट, एक हाथ में घड़ी ,गले में एक लॉकेट ,( जो ज्यादा तर छुपा ही रहता है) बाडी बिल्कुल हीरो की तरह उम्र यही कोई 27 या 28 के आस पास लम्बाई 5.6 रंग गोरा आखे काली मतलब एक हैडसम मुडा़ )
आगे वो तीनों सीधा कोन्प्रेंस रूम की तरफ जा रहे थे शिवा, और सार्थक मीटिंग रूम के अंदर जाते हैं जहा पर कई सारे लोग पहले से ही मौजूद थे शिवा के अंदर आते हैं सभी लोग अपनी अपनी जगह से खडे़ हो गये सिफ एक को छोड़ कर जो की मि. आहूजा थे शिवा के आते ही उनका मुह गुस्से में लाल हो गया था पर उन्होने कुछ नहीं कहा वही शिवा मि. आहूजा को देख कर कर एक तिरछी स्माईल दी और सभी लोगों से हाथ मिला कर अपनी जगह पर बैठ गया , शिवा के बैठते ही सभी लोग भी अपनी जगह पर बैठ गये और मीटींग शुरू हुआ
सभी लोगों ने एक एक कर के अपना प्रजे़न्टेशन देना शुरु किया मि. आहूजा के असिस्टेंट ने प्रजे़न्टेशन दी और शिवा की और से सार्थक ने मीटिंग 3 घंटे तक चलती रही, जब मीटिंग ख़त्म हुई तो K. K korpreshn के मालिक ने अनाउंस किया कि ये प्रोजेक्ट शिवा की कंम्पनी को दिया जाता है ये सुनने के बाद सभी लोगों ने मिल कर शिवा और सार्थक को कोग्रेजुलेशन विश किया और बारह आ गये अब मीटिंग रूम में सिर्फ आहूजा शिवा और सार्थक थे मि. आहूजा गुस्से से तिलमिलाया हुआ था वो बोला
मि. आहूजा - जितना खुश होना हैं हो लो शिवा पर एक दिन तुम्हारी इन खुशियो को दुःख के मातम मे नहीं बदला तो मेरा नाम भी आहूजा नहीं
शिवा - तुमने ये कैसे सोच लिया कि तुम जैसा एक नम्बर का घटिया कुत्ता मेरी खुशियो को मातम में बदलने का दम भी रखता है तुम जैसे बेकार और बेगैरत कुत्ते को को तो मै अपने आस पास भी ना भटकने दू, और क्या कहा था कि मेरी खुशियो को मातम में नहीं बदला तो तेरा नाम आहूजा नही तो जा जाकर एक नया नाम खोज क्यो कि अब ये शिवा तेरी जिंदगी में काल बन कर आया है
(वही शिवा की बात सुनकर कर सार्थक अपनी हंसी 😁 को कन्टरोल किया था)
वही शिवा की बातों को सुनकर आहूजा को बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था पर अपने गुस्से को शांत कर आहूजा बोला
आहूजा - तुम्हे शायद भूलने कि बीमारी हो गई है तभी तो तुम भूल रहे हो कि एक टाईम था जब तुम्हारे पास एक कीमती चीज थी जो अब मेरे पास है और तुम तभी हार गये थे शिवा जब वो चीज मेरे पास आ गई थी
आहूजा की बात सुनकर शिवा को बहुत गुस्सा आ रहा था
सार्थक ने माहौल को गर्म होते देखा तो वो शिवा को वहा से लेकर बाहर आ गया सार्थक जानता था अगर शिवा वहा थोड़ी देर और वहा रूका तो आहूजा आज अपने भैरो पर घर जाने की हालत मे भी नहीं रहेगा इसलिए वो शिवा को लेकर बाहर आ गया ,