Love at first sight Ch. 3

हल्दी और तेजस के ताने - Chapter 3

Posted by Ishqi Singhal • Jun 08, 2025 05:49 PM

वृंदा भी सब कुछ याद करके एक बार फिर गिल्ट से भर चुकी थी उसे रोना आ रहा था अपनी बेवकूफी पर अपनी गलतियों पर

उसने खुद को संभाला और उठ कर शीशे के सामने चली गई

एक एक करके वो सारे गहने उतार रही थी

करीब 2 घंटे बीत चुके थे उसे इस कमरे मै बंद हुए पर उसके घरवालों को उससे कोई मतलब नहीं था कि वो इतनी देर क्यों लगा रही है

ना किसी ने आकर ये पूछा कि उसे लड़का कैसा लगा क्योंकि यही शास्त्री परिवार की लड़कियों को संस्कार दिए जाते हैं जो लड़का परिवार पसन्द करे उसे ही परमेश्वर बना लो बिना एक भी पलटवार सवाल जवाब के

और वृंदा एक बार गलती करके आज तक पछता रही है तो उसे दोबारा ये गलती नहीं दोहरानी थी उसे लगा था कोई अजनबी आयेगा और उसे अपने साथ ले जाएगा

पर किस्मत ने यहां भी उसका साथ छोड़ दिया और उसकी जिन्दगी मै फिर से जाना पहचाना शक्श आ गया

वो अपने इयरिंग्स निकाल रही थी कि अचानक उसका फोन बज उठा

उसने फोन स्क्रीन देखी जिस पर अननोन नंबर से फोन आ रहा था उसका दिल एकदम से धक से रह गया क्योंकि अक्सर उसे ऐसे नंबर से यतीक्ष फोन करता है और उससे मिलने की जिद करता है

उसने अपनी बढ़ती धड़कनों को नजरअंदाज किया और अपने बाल खोलने लगी जिन मै खूबसूरत पिन लगी हुई थी

एक बार फिर उसका फोन बज उठा उसने झुंझला कर फोन उठाया और कान से लगाया

तो सामने से जिस की आवाज आई एक पल के वृंदा का वो हाथ कांप गया जिससे उसने फोन पकड़ा था

" हेलो मेरी होने वाली अर्धांगिनी कैसी हो "

तेजस के मुंह से ऐसे शब्द सुन कर वृंदा की सांसे अटक चुकी थी

कुछ पल जवाब ना मिलने पर तेजस ने कहा

" मैने सुना है अपनी पसंदीदा औरत को फोन पर उसकी सांसों से पहचान लेना चाहिए पर मैं कैसे करूं ये तुम तो सांस ही नहीं ले रही कहीं एलियन तो नहीं हो hmm बिना सांस लिए जिंदा रह सकती हो?"

वृंदा को तेजस की बात पर चिढ़ मच रही थी उसने हल्के गुस्से मै कहा

"पहली बात सब्र नाम की भी कोई चीज होती है, और दूसरा आपको मेरा नंबर कहा से मिला "

तेजस जो अपने ऑफिस के केबिन मै बैठा था चेयर से सर टिका कर आंखे बंद करते हुए बोला

"  कितने अर्शे बाद तुम्हारी वही गुस्से वाली आवाज सुनी है "

वृंदा ने उसे फिर से तेज आवाज मै कहा

" मेरे सवाल का जवाब दीजिए मेरा नंबर कहा से मिला "

तेजस हंसते हुए बोला

" तेजस राजवंश नाम है मेरा मैं जो चाहूं वह कर सकता हूं तो तुम्हारा नंबर निकाल पाना तो बहुत छोटी सी बात है मिस वृंदा शास्त्री और मेरी होने वाली अर्धांगिनी "

वृंदा ने गुस्से मै दांत भींच लिए पर कुछ कहा नहीं

वही अब तेजस की तरफ भी खामोशी थी.. उसने कुछ पल ठहर कर आखिर वो सवाल पूछ ही लिया जो किसी नुकीले कांटे की तरह उसके दिल मै चुभ रहा था....

" क्या तुम अब भी अपने  उस घमंडी आशिक के कांटैक्ट मै हो "

यतीक्ष का जिक्र होते ही वृंदा की आंखो मै पानी भर आया और उसने अपनी कांपती आवाज मै कहा

" हा "

उसे लगा शायद यह हां सुन कर तो तेजस उससे रिश्ता करने से मना कर देगा क्योंकि वह खुद अपने परिवार को जाकर यह नहीं बता सकती कि उसे तेजस से शादी नहीं करनी है

तेजस से क्या अब तो उसे लगता है वह किसी के काबिल नहीं है उसे किसी की जिंदगी में जाकर उसकी जिंदगी तबाह नहीं करनी चाहिए

वही तेजस कुछ पल खामोश रहा और अगले ही पल एक मजाकिया अंदाज में बोला

"  बस आखरी 3 दिन उसके बाद तो तुम मेरे पास रहोगी मैं भी देखता हूं तुम्हारा वह आशिक तुमसे कैसे बातें करता है बेटा  "

वृंदा ने हैरानगी से अपने फोन की तरफ देखा क्या वह सच में तेजस से ही बात कर रही है क्या डिलीट इंसान है उसने अपने सर पर हाथ मारते हुए कहा

"  शिव कहां फंसा दिया "

तेजस ने हंसते हुए कहा

" शिव को क्यों कोस रही हो उनका तो काम है दो प्रेमियों को मिलाना वैसे भी तुम उस छछूंदर से प्यार नहीं करती थी वह तुम्हारा एक बचपना था तुम्हारी एक छोटी सी गलती जिसे तुम्हें भूल जाना चाहिए और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए तुम्हें लग रहा है मैं तुम्हें लेक्चर दे रहा हूं पर बेटा जी मैं तुम्हें रियलिटी बता रहा हूं अगर समझना है तो समझो नहीं समझना है तो भी इसमें मेरा कोई घाटा नहीं है पर शादी तो मैं तुमसे ही करूंगा "

वृंदा ने एक बार अपनी आंखों को गोल-गोल घुमाया ताकि वह तेजस की इन उटपटांग बातों ओर बेवजह के तानों को हजम कर सके और फिर एक लंबी सांस छोड़ते हुए बोली

" तो बस यही बता दीजिए कि क्यों मुझसे शादी करनी है, जबकि आपको पता है मैंने पहले क्या-क्या गलतियां की है ऊपर से मैं आप पर हाथ भी उठाया था क्या आप उसका बदला लेना चाहते हैं। "

तेजस ने पेट पकड़ कर जोर-जोर से खिलखिला कर हंसते हुए कहा

"रही बात तुमसे शादी क्यों कर रहा हूं तो ये मै शादी के बाद बताऊंगा तब तक चलाती रहो अपने छोटे से दिमाग को क्या पता तुम्हे खुद पता चल जाए "

और दूसरा तुम पिद्दी सी दिखने वाली लड़की तुम्हें लगता है तुम्हारे उन सुखी लकड़ी जैसे हाथों में इतना दम है कि मुझे एक चींटी काटने जितना भी दर्द हुआ होगा सीरियसली कहां मैं कहां तुम और कहां तुम्हारा हाथ एक बार खुद सोच कर  देखो तुम्हारी बात में कोई लॉजिक बन रहा है और

वृंदा ने आंखें टिमटिमाते हुए एक पल सोचा और उसके सामने 6  फुट लंबा तेजस आ गया और वह कहां 5 फुट 2 इंच फिर उसने अपने हाथ को देखा उसने तीन-चार बार हाथ को घुमा घुमा कर देखा फिर उसे महसूस हुआ शायद तेजस सच बोल रहा था तेजस के गाल  आधा हिस्सा ही उसका हाथ कर कवर कर सकता था

पर फिर वृंदा ने मुंह मोड़ते हुए कहा

"दर्द तो जरूर हुआ होगा मैंने उंगलियों के निशान देखे थे आपके चेहरे पर "

तेजस ने भी फुल एटीट्यूड में कहा

" सपने में देखे होंगे बेटा जी "

वृद्धा को समझ आ चुका था बहस में वह  चिराग से कभी नहीं जीत सकती है

इसलिए उसने सबसे आसान तरीका अपनाते हुए उसके फोन को कट कर दिया और एक चैन की सांस लेते हुए बोली

"  क्या मुझे पूरी जिंदगी ऐसे इंसान के साथ बितानी है "

"अभी उसको महसूस नहीं हो रहा था कि सिर्फ इस 15 - 20 मिनट के कॉल के लिए ही सही पर वह अपनी जिंदगी में चल रही परेशानियों को भूलकर किसी छोटी बच्ची की तरह उसके साथ जिद्द कर रही थी ना उसे अपने कम खूबसूरत होने की इन सिक्योरिटी हो रही थी ना अपने अतीत का दर्द सता रहा था वह बस चिराग से बहस कर रही थी उसे पल को जी रही थी जो जीना वह कब का भूल चुकी थी"

Next morning...

8 am...

आज वृंदा की मेहंदी और हल्दी की रस्म हो रही थी

वृंदा ने येलो नेट की सारी पहनी थी और बालों को खुला छोड़ रखा था

वृंदा की एक कॉलेज फ्रेंड ने आज वृंदा को तैयार किया था

बिना शक को सुंदर लग रही थी पर उसके चेहरे पर खुशी नहीं झलक रही थी वो पाटे पर बैठी थी और उसके सामने उसकी मां शकुंतला बैठी थी , वो अपने घर मै होने वाली एक पारंपरिक रश्म कर रही थी जिसमें हल्दी वाले दिन सबसे पहले दुल्हन को पहली बार चूड़ा पहनाया जाता है... और साथ ही राजवंश मेंशन से चिराग को लगाई हुई हल्दी का इंतजार भी

जो जल्द ही खत्म हुआ हल्दी आने के बाद एक एक कर के मिहिका सपना शकुंतला और बाकी मोहल्ले की औरतों ने वृंदा को हल्दी लगाना शुरू किया

सब ने बस चुप चाप मुस्कुरा कर हल्दी लगाई थी पर शकुंतला ने उसके गाल को कस कर दबाते हुए जाड़ भींचते हुए दबी आवाज मै कहा

" थोड़ा मुस्कुरा दोगी तो खून नहीं घट जाएगा तुम्हारा मोहल्ले वाले वैसे ही कम ताने देते हैं क्या भगोड़ी बोल कर जो तुम उन्हें एक और मौका दे रही हो?"

उसके ऐसा करने से वृंदा की हल्की सी कराह निकल गई पर उसने अपने आशुओं को रोक लिया और जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करने लगी

उसकी मां को अपनी बेटी की नहीं बल्कि समाज की परवाह थी ! पर वृंदा को अब इन सब की आदत हो गई थी तो उसने कुछ नहीं कहा

सपना भी इतराते हुए आई और उसके गालों पर हल्दी लगाते हैं बोली

" दी ये उबटन लगाने से गोरे हो जाते हैं तो आप इस रश्म के बाद भी अच्छे से खुद लगा लेना क्या पता थोड़ी सुंदर दिख जाओ "

उसका ये ताना कैसे बाकी रह सकता था पर वृंदा अब भी शकुंतला की बातों मै अटकी थी इसलिए उसने कुछ नहीं कहा बस हा मै सर हिला दिया

उसकी फ्रेंड आयशा ने उसके कान मै धीरे से कहा

" सारे घरवाले जल्लाद है तू यहां कैसे ऐसे भोली भाली रह गई है किस पर गई है , कही कचरे के डब्बे से तो नहीं उठा के लाए तुझे ?"

उसके इस बात पर वृंदा हल्के से हंसते हुए बोली पता नहीं पर बताओ तो ऐसा ही करते हैं जैसे वहीं से उठाकर लाए हो

वह दोनों बातें कर ही रही थी कि वृंदा का फोन बज उठा और उन नंबर को देखकर वृंदा चिढ़ते हुए बोली

"  अब भी चैन नहीं है क्या इनको, अब तो शादी की  रस्में भी शुरू हो चुकी हैं "

उसके ऐसे बनते बिगड़ते भाव को देखकर आशा हंसते हुए बोली तो तो जीजू का फोन है ले चल बात कर उसने फोन उठाते हुए जबरदस्ती वृंदा के कान से लगा दिया

उसके ऐसा करते ही वृंदा ने धीमी आवाज में कहा

" जी कहिए "

तेजस उसकी प्यारी सी आवाज सुनकर मन ही मन खुश होते हुए बोला वह इतनी इज्जत

फिर उसने अपना गला सही करते हुए कहा

"कम से कम जितने दिन शादी की रस्में  चल रही है अपने उसे चिपकु आशिक से दूर रहना तुम और उसके बाद का मैं खुद संभाल लूंगा वैसे भी उसके नाम की  हल्दी लगाने की इच्छा तुम्हारी मैंने पहले ही खत्म कर दी है तो खुन्नस में आकर उसके पास मत चली जाना "

वृंदा ने कस कर अपनी मुट्ठियां भींच ली और अपने मन मै कहा

" मै तो इनके ताने सुन कर ही खत्म हो जाऊंगी "

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