Force marriage Ch. 3

Force marriage - Chapter 3

Posted by Sonam Gupta • Jul 16, 2025 09:08 PM

चैप्टर 3

कुमुद की बात सुनकर करन एक डेविल स्माइल करता है और अपना चेहरा बेहद मासूम बनाकर कहता है,

"ठीक है लिटिल खरगोश, कोई बात नहीं, तुम्हे मेरी बात माननी है या नहीं ये तुम्हारे ऊपर है। आखिर में मै किसी को मजबूर कैसे कर सकता हूं, कोई भी बात मानने के लिए, है ना लिटिल खरगोश! वैसे भी मै तो बहुत ही शरीफ हूं। पर लिटिल खरगोश मैने ना, तुम्हारे लिए एक छोटी सी फिल्म तैयार की है, देखोगी ना मेरी प्यारी लिटिल खरगोश।"

करन की इतनी मासूमियत को देखकर वे हैरान रह जाती हैं कि कैसे कोई इंसान इतना जल्दी अपना रंग बदल सकता है, जो कुछ देर पहले उससे इतनी घटिया बातें और घटिया हरकते कर रहा था। कुमुद आगे कुछ और सोच पाती, तभी उसे अपने कानों में किसी की आवाज सुनाई देती है,

"पापा, दीदी, प्लीज मुझे बचाओ। प्लीज मुझे छोड़ दो। मुझे क्यूं यहां पर बांध कर रखा हुआ है।"

ये आवाज़ सुनते ही कुमुद जल्दी से अपनी नज़रे उठाकर देखती है तो बड़े से टीवी स्क्रीन पर उसे एक वीडियो दिखाई दी, जिसमे उसका भाई पंकज जो केवल (16 साल) का था, वे कुर्सी पर बंधा हुआ था और उसके चारो तरफ करन के बॉडीगार्डस उसके ऊपर गन ताने खड़े हुए थे।

ये देखकर कुमुद का दिल सहम जाता हैं, क्यूंकि अगर उसे किसी से सबसे ज्यादा प्यार था, तो वे अपने भाई से ही था। वे तुरंत करन की तरफ़ देखते हुए कहती है,

"ये क्या बेहूदा हरकत है तुम्हारी? क्यूं इस तरह बांध कर रखा है, तुमने मेरे भाई को? अगर उसे कुछ हुआ ना, तो मै तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगी।"

"ओ ओ लिटिल खरगोश, अब मैंने क्या किया। तुम्हारा भाई है। तुम उसे जिन्दा रखना चाहती हो या नहीं, ये सब तो तुम्हारे ऊपर डिपेंड करता है। जब तक तुम मेरी कही गई बातों को चुपचाप मानती रही, तब तक तो तुम्हारे भाई को कुछ भी नहीं होगा। लेकिन अगर तुमने मेरी बात मानने से इंकार किया तो, कब, क्या हो जाए, तुम्हारे भाई को, ये मुझे भी नही पता।"

फिर उसके कान के पास जाकर अपनी डरावनी आवाज में उससे कहता है,

"ये भी हो सकता है कि, तुम्हारा भाई जिंदा ही ना बचे।"

करन की बात सुनकर कुमुद बहुत डर जाती हैं और तुरन्त चिल्लाते हुए कहती है,

"नही, नही, नहीं, मेरे भाई को तुम कुछ भी नहीं करोगे। तुम्हे जो भी करना है, मेरे साथ करो। मैं तुम्हारी सारी बात मानूंगी। तुम्हारी जो भी दुश्मनी है, तुम मुझसे निभाओ, लेकिन प्लीज मेरे भाई को छोड़ दो। इन सब में उसे बीच में मत लाओ।"

"गुड डिसीजन लिटिल खरगोश। वैसे भी मै कहा तुम्हारे भाई को बीच में ला रहा हूं। वे तो तुम खुद मुझे मजबूर कर देती हो, ये सब कुछ करने के लिए। अब चलो, जल्दी से इन पेपर पर साइन करो।"

कुमुद के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था। उसे अपने भाई को बचाने के लिए करन की बात माननी पड़ी। वे अपने कांपते हाथो से पेन लेती है और उन पेपर पर साइन कर देती हैं।

उसके साइन करते ही करन के चेहरे पर एक जीत भरी मुस्कान आ जाती हैं। वही कुमुद के आंखो से आंसू का एक कतरा बह कर उसके गालों पर आ जाता हैं। उसे अपने दिल में बहुत दर्द हो रहा था।

उसे कभी भी अपने मां बाप का प्यार नसीब नहीं हुआ, जो एक बच्चे के लिए बहुत जरूरी होता है। लेकिन उसे एक उम्मीद थी कि उसे अपने पति का प्यार और रिस्पेक्ट जरुर मिलेगा।

लेकिन उसकी ये आखिरी उम्मीद भी टूट गई। वे ये सब सोच ही रही थी कि तभी उसके कानो में करन की आवाज दुबारा आई,

"कहा खो गई लिटिल खरगोश। वैसे तुम्हारे आंखो में ये आंसू देखकर मुझे बहुत सुकून मिल रहा है। पर ये तो अभी शुरुआत है, तुम चिन्ता मत करो लिटिल खरगोश मै आगे चल कर तुम्हे रोने की बहुत वजह दूंगा। तुम्हारे आंखो में आंसू कभी कम नहीं होने दूंगा, आई प्रॉमिस लिटिल खरगोश।"

ये सब कहते हुए करन के आंखो में कुमुद के लिए नफरत साफ दिख रही थी, जिसे देख ऐसा लग रहा था कि इस नफरत की आग में करन कुमुद को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा। कुछ देर करन कुमुद को अपनी नफ़रत और घिन्न भरी नजरो से देखने के बाद उसके बालो को पीछे से पकड़ कर कहता है,

"अब चलो, मै कपड़े भेजवाता हूं, उसे चुप चाप पहन कर तैयार हो जाओ। अब हम पूरे रीति रिवाज से शादी करेंगे।"

ये बात सुनकर कुमुद पूरी तरह से शॉक रह जाती है और अपने बालो को छोड़वाते हुए कहती है,

"आप पागल हो गए हैं। मैने कर तो दिया साइन। अब आप क्यू मुझसे शादी करके उस पवित्र रिश्ते का अपमान करना चाहते हैं, जब की आप मुझे पत्नी मानते ही नहीं। प्लीज शादी जैसे पवित्र बंधन का मजाक मत बनाइए।"

"इसलिए तो बोल रहा हूं लिटिल खरगोश शादी करने के लिए। मुझे मालुम है लड़कियो के लिए शादी बहुत बड़ी चीज़ होती हैं और मै भी तुमसे शादी कर के तुम्हे अंदर से तोड़ना चाहता हूं। अब तुम्हारा मुंह नही खुलना चाहिए लिटिल खरगोश, चुपचाप कपड़े पहन कर रेडी हो जाओ, वरना तकरीफ तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे भाई को भी झेलनी पड़ेगी।"

अपने भाई का नाम आते ही कुमुद चुप हो जाती हैं, क्यूकी वो अपनी वजह से किसी भी हाल में अपने भाई को कोई तकलीफ़ नहीं होने देना चाहती थी। वे करन के कुछ और कह पाती, तब तक करन अपने तेज कदमों से कमरे के बाहर चला जाता हैं।

करन के बाहर जाते ही कुमुद ने जो आंसू बहने से रोके हुए थे, वे बह जाते है और वे वही फर्श पर लेट कर जोर जोर से रोने लगती हैं। उसे उसके दिल मे बहुत दर्द हो रहा था। उसके मन मे बहुत सारे सवाल थे।

कि क्यों कोई उससे प्यार नहीं कर सकता? क्यू सब उसे सिर्फ़ दर्द ही देने पर लगे हुए हैं? इतना बोल वे और ज्यादा रोने लगती है। कुछ देर यू ही रोने के बाद कुमुद अपने आंसू पोंछेते हुए कहती है,

"नही कुमुद तू कमजोर नहीं पड़ सकती। तुझे अपने भाई के लिए स्ट्रॉन्ग बनना होगा। जब तेरे अपनो ने तेरे साथ इतना गलत किया, तब तू नही टूटी, तो ये तो फिर भी बाहर वाला है जिसे मैं जानती तक नहीं। मै इस तरह नही टूट सकती। तू इतनी कमज़ोर नही हो सकती कुमुद, की कोई भी बाहर वाला इस कदर तुझे तोड़ सके। उसे तुझसे शादी करनी है ना तो वही सही, उसे तुझे तोड़ना है ना तो उसे भी कोशिश कर लेने दे। अरे जो अन्दर से इतना खुद टूटा हुआ है उसे कोई और कितना तोड़ेगा, शायद मेरे नसीब में कभी खुशियां थी ही नहीं।"

इतना बोल वे व्यंग्य से मुस्कुरा देती हैं, जैसे की वे खुद का ही मजाक बना रही हो।

100%