Raktbandhan:The Devil’s Bride Ch. 1

Raktbandhan: The Devil’s Bride - Chapter 1 "रक्त की पहली रात"

Posted by Queen 👑 Of Darkness • Aug 01, 2025 08:02 PM

एपिसोड 1: "रक्त की पहली रात"

"शादी के मंडप में सात फेरों के बाद जब सब मुस्कुरा रहे थे…अद्या की रूह काँप रही थी — क्योंकि उसका दूल्हा… इंसान नहीं था।"

अद्या के कानों में शहनाई की धीमी, बोझिल धुन गूँज रही थी। यह धुन उसके दिल पर पड़ते हुए हथौड़े की तरह महसूस हो रही थी, जो उसके हर स्पंदन के साथ एक भयावह भविष्य की भविष्यवाणी कर रही थी।

मंडप में बैठी, लाल जोड़े में, वह खुद को एक जीवंत लाश की तरह महसूस कर रही थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य एक ऐसी बलि का हिस्सा बनना था जो उसे हमेशा के लिए ख़त्म कर देगी। उसकी आँखें नीचे झुकी हुई थीं, ताकि वह उस चेहरे को न देख पाए जो उसके सामने अग्नि की परिक्रमा कर रहा था — वियान। वह जानती थी कि अगर उसने एक पल के लिए भी उसकी आँखों में देखा, तो वह पूरी तरह से बिखर जाएगी।

वियान की परछाई तक में एक अजीब, डरावनी ख़ामोशी थी। जब उसने अद्या के हाथ को थामा, तो अद्या को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी कलाई को बर्फ़ में जमा दिया हो, उसकी हथेली में कोई गर्माहट नहीं थी, बल्कि एक ठंडी, बेजान ऊर्जा थी जो सीधे उसकी आत्मा तक पहुँच रही थी।

यह स्पर्श किसी प्रेम का नहीं, बल्कि एक शैतानी जकड़न का था, जो उसके अस्तित्व को धीरे-धीरे मिटा रहा था। अद्या को याद आया, उसके पिता ने कल रात रोते हुए उससे कहा था, "बेटी, इस शादी से हमारा कर्ज़ उतर जाएगा।" उस समय उसे लगा था कि वह अपने परिवार के लिए एक बड़ा त्याग कर रही है, लेकिन अब उसे एहसास हो रहा था कि यह त्याग नहीं, बल्कि एक बलि थी। उसके माता-पिता ने एक इंसान को नहीं, बल्कि एक शैतान को अपनी बेटी सौंपी थी, और बदले में अपनी वित्तीय समस्याओं से मुक्ति की उम्मीद कर रहे थे।

जैसे ही सात फेरे पूरे हुए और वियान ने उसकी माँग में सिंदूर भरा, अद्या के सिर में एक अजीब सी लहर दौड़ी। यह लहर ख़ुशी की नहीं, बल्कि दर्द और भय की थी। सिंदूर की लालिमा उसे ख़ून की तरह महसूस हुई, जैसे किसी ने उसके मस्तक पर उसके भविष्य का ख़ून लिख दिया हो। वह हक़ीक़त से दूर होती जा रही थी।

बारात बहुत शाही थी, लोग वियान की शान-ओ-शौकत की तारीफ़ कर रहे थे, लेकिन कोई नहीं जानता था कि ये बारात शैतानों के स्वागत का जश्न मना रही थी। कोई नहीं जानता था कि यह कोई साधारण शादी नहीं, बल्कि रक्तविवाह था — एक शापित बंधन, जो इंसान और डेमन के बीच स्थापित हो रहा था।

विदाई के बाद, जब अद्या वियान की गाड़ी में बैठी, तो हवेली की दिशा में जा रही थी, जिसकी दीवारों से चीखने की आवाज़ें आ रही थीं। वियान ने गाड़ी में एक भी शब्द नहीं कहा। उसकी ख़ामोशी ने अद्या को और भी ज़्यादा डरा दिया। वह अपनी मुट्ठी कसकर पकड़े हुए थी, उसके नाखून उसकी हथेली में गड़ रहे थे, लेकिन दर्द का कोई एहसास नहीं हो रहा था। उसके शरीर में एक अजीब सी सुन्नता थी, जैसे उसके भीतर का जीवन धीरे-धीरे ख़त्म हो रहा हो।

हवेली के क़रीब पहुँचते ही, अद्या को लगा जैसे वो किसी क़ब्रिस्तान में आ गई है। हवेली की पुरानी, स्याह दीवारें चीख रही थीं, उनकी दरारों से सदियों का दर्द और अनकही कहानियाँ बह रही थीं। जैसे ही वो हवेली के दरवाज़े से अंदर आई, एक अजीब सी, घुटन भरी गंध ने उसके फेफड़ों को भर दिया। यह लोबान की गंध थी, लेकिन उसमें मांस और सड़े हुए फूलों की दुर्गंध भी मिली हुई थी, जो उसके मन में एक भयानक छवि बना रही थी।

वियान ने बिना कुछ कहे उसे एक कमरे में धकेल दिया। वह कमरा सिर्फ़ एक दीये की लौ से जगमगा रहा था, लेकिन उसकी परछाई हर कोने में ख़ौफ़ पैदा कर रही थी, जैसे वहाँ परछाइयाँ नहीं, बल्कि किसी अज्ञात शक्ति की आँखें थीं जो उसे देख रही थीं।

अद्या को उस कमरे में लाल चुनरी ओढ़े बैठा दिया गया। उसके मन में कई सवाल थे, लेकिन उसका गला सूख चुका था, और होठों से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, अद्या का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे वह इस डरावने सच से बचना चाहती हो। लेकिन जब उसने आँखें खोली, तो वियान को अपने सामने खड़ा पाया।

वह धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा, उसकी चाल में कोई इंसानियत नहीं थी, बल्कि जानवरों जैसी भूख थी, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार के क़रीब आ रहा हो। उसने अपनी उँगलियों से उसकी चुनरी को धीरे-धीरे उठाया, जैसे कोई पर्दा हटा रहा हो, जिसके पीछे एक ख़तरनाक राज़ छुपा हो। अद्या की आँखें डर से भर गईं, वह अपनी जगह से हिल भी नहीं पा रही थी, जैसे किसी अज्ञात शक्ति ने उसे जकड़ रखा हो।

“डरो मत अद्या,” वियान की आवाज़ में कोई दया नहीं थी, बल्कि लावा था, जो उसकी हर बात को जलाकर राख कर रहा था, “यह पहली रात नहीं… यह तुम्हारा पहला इम्तिहान है।”

अद्या के होंठ काँपने लगे। वह समझ नहीं पा रही थी कि वह किस इम्तिहान की बात कर रहा है। वियान ने उसकी चुनरी पूरी तरह से हटा दी और उसके गले में अपना हाथ डालकर उसे अपनी ओर खींच लिया। उसका स्पर्श एक ठंडी, बेजान जकड़न की तरह था।

"मुझे तेरे खून की पहली बूँद चाहिए… वरना तू मेरी नहीं होगी, और मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूँगा।"

यह सुनकर अद्या की साँसें अटक गईं। उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया। उसने वियान के चेहरे को देखा। उसकी आँखें लाल हो रही थीं, और उसके होंठों पर एक ऐसी शैतानी मुस्कान थी, जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी। उसने एक धारदार, काली ब्लेड निकाली, जिस पर अजीबोगरीब निशान बने हुए थे।

"ये ब्लेड नहीं… ये वही है जिससे मेरी माँ ने ख़ुद को मारा था। और आज, इससे मैं तुझे अपना बनाऊँगा..."

वियान ने उसकी उंगली पर कट लगाया। अद्या की चीख उसके गले में ही अटक गई। खून की पहली बूँद उसकी उंगली से निकली और वियान ने उसे अपनी जीभ पर लगा लिया। जैसे ही खून उसके होठों को छू गया, उसकी आँखें पूरी तरह से लाल हो गईं। उसकी साँसें गर्म हो गईं, जैसे उसके अंदर कोई आग भड़क रही हो।

उसी पल, अद्या की रगों में एक अजीब सा करंट दौड़ने लगा। उसका शरीर काँपने लगा। उसे ऐसा लगा जैसे उसके अंदर की कोई शक्ति जाग रही हो। उसकी आँखों के सामने एक धुँधली सी तस्वीर आई — एक पुराना महल, सैकड़ों औरतें जलती हुई, और एक देवता जो नर्क के सिंहासन पर बैठा था।

अद्या ने ख़ुद को खो दिया। उसे ऐसा लगा जैसे वो अद्या नहीं, कोई और बन गई हो। जैसे उस खून में उसकी कोई पुरानी पहचान जाग रही हो।

"अद्या नहीं... रुद्राणी..."

"तू लौटी है… मेरी रुद्राणी।"

यह आवाज़ उसके दिल में गूँज उठी। यह आवाज़ वियान की नहीं थी, बल्कि एक ऐसी आवाज़ थी जो सदियों पुरानी थी। उस रात, उनके बीच एक अजीब सा एहसास हुआ — शरीर, खून, और आत्मा का मिलन। एक ऐसा मिलन, जहाँ प्यार नहीं, सिर्फ़ शैतानी वासना और बदला था।

रात के अंतिम पहर में जब अद्या बेहोश हो गई, तो उसे एक सपना आया। एक महल जो जल रहा था, जहाँ से सैकड़ों औरतों की चीखें आ रही थीं। उसने एक देवी को देखा, जो चिल्ला रही थी।

"मैंने उसे चाहा, पर उसने मुझे शाप दिया…

मेरी औलाद राक्षसों से पैदा होगी!"

अद्या चौंक कर उठी। उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था, और… उसकी आँखों के नीचे एक लाल चिन्ह उभर चुका था — जो इंसानों में नहीं पाया जाता। वह बाथरूम में गई और शीशे में ख़ुद को देखकर सिहर गई। उसके गले पर वियान के दाँतों के निशान थे — जैसे किसी पिशाच ने उसे चूमा हो, काटा हो…

और तब उसे एहसास हुआ — उसकी शादी नहीं हुई… उसकी बलि दी गई थी।

अचानक बाथरूम का दरवाज़ा खुला और वियान अंदर आया। उसकी आँखों में अब भी वही लालच और शैतानी चमक थी।

वियान मुस्कुराता हुआ उसके पास आया और उसे धीरे से गले लगाया।

"अब तू मेरी है, अद्या…

तेरी आत्मा, तेरा खून, तेरा सब कुछ —

जब तक तू जिंदा है, मैं अधूरा हूँ…

और जब तू मरेगी, तभी मैं पूर्ण शैतान बनूँगा।"

अद्या ने डर से काँपते हुए पूछा, "तुम कौन हो?"

वियान मुस्कुराया। उसकी मुस्कान में कोई ख़ुशी नहीं, बल्कि एक गहरी, भयावह साज़िश थी। उसने अद्या के चेहरे पर अपनी उँगलियाँ फेरीं, जो बर्फ़ की तरह ठंडी थीं।

"मैं वही हूँ जिसे तुम पूजती हो… वो शैतान, जिसने तुम्हारी देवी को श्राप दिया था।और तुम… तुम वही देवी हो जो अब मेरे ख़ून की प्यासी है।"

अद्या की आँखें फैल गईं। उसे अपनी रूह में एक अजीब सी हलचल महसूस हुई। क्या वह सच में रुद्राणी थी? क्या वह सच में एक डेमन की दुल्हन थी?उसकी आँखें धीरे-धीरे लाल होने लगीं।

क्या अद्या का दूसरा जन्म हो गया है?क्या वह सच में रुद्राणी है?क्या वियान सच में शैतान है? आखिर ये कौनसा खेल है? और वियान ने क्यों बनाया है उसे अपनी दुल्हन ? ऐसा कौनसा राज है जो आगे खुलेगा? इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ते रहे रक्तबंधन: शैतान की दुल्हन एक ऐसी कहानी जो खून से लिखी है क्योंकि यहां दूल्हा आम इंसान नहीं शैतान है !

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