His Unwanted Dulhan Ch. 1

His Unwanted Dulhan - Chapter 1

Posted by Simran Ansari • Aug 01, 2025 10:21 PM

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इंदौर शहर के बहुत ही अच्छे पाॅश इलाके में बने हुए बड़े खूबसूरत "दीवान विला" की रौनक ही आज लग लग रही थी क्योंकि शाम के इस वक्त रंग बिरंगी रोशनी से नहाया हुआ वह महंगे सफेद मार्बल से बना हुआ विला कुछ ज्यादा ही जगमगा रहा था और वैसे ही सुनहरी सफेद और हर रंग की रोशनी उस विला के संगमरमर के फर्श पर बिखरी पड़ी थी।

विला के मुख्य द्वार पर रंग-बिरंगी फूलों की मालाओं से सजा हुआ एक भव्य तोरणद्वार था, जहां से अंदर आते ही मेहमानों को मानों एक अलग ही दुनिया में आऊ करने का एक्सपीरियंस हो रहा था। उस विला बगीचे के हर कोने में सफेद और सुनहरे रंग की रोशनी झिलमिला रही थी। हवा में गुलाब और मोगरे की खुशबू तैर रही थी, जो माहौल को और भी सुगंधित बना रही थी।

मेन गेट पर लाल रंग के गुलाब के फूलों से सजा हुआ बड़ा सा दिल बनाकर दीवार में दोनों साइड पर लगा हुआ था और बीच में वाइट कलर के फूलों से उस पर लिखा हुआ था –

"आरांश weds तारा"

उसी विला के अंदर जाने पर हाॅल एरिया में बीचों-बीच एक बड़ा सा मंडप बना हुआ था, जो चारों ओर से लाल और सुनहरे रेशमी कपड़ों और फूलों से सजा हुआ था। मंडप के चारों खंभो पर चमचमाते लटकन और बेलों की सजावट थी। आस-पास के पेड़ों पर रंग-बिरंगी लाइटें और फूलों की लड़ियां झूल रही थीं, जो रात होने पर माहौल को और भी जादुई बना रही थी। मेहमान भी आज होने वाली उस भव्य शादी में शामिल होने के लिए धीरे-धीरे इकट्ठा हो रहे थे, उनकी हंसी और बातचीत का शोर भी वहां गूंज रहा था।

मंडप के आसपास परिवार के सारे लोग खड़े थे और बीच में रखे हुए अग्नि कुंड में आग जल रही थी और पंडित जी वहां पर किनारे बैठे हुए थे और बेल-पत्र से गंगाजल लेकर मंडप के चारों ओर छिड़कते हुए मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे।

"दूल्हा और दुल्हन को बुलाइए! शादी का मुहूर्त हो गया है।" - इतना बोलकर पंडित जी दोबारा से पहले की ही तरह मंत्र उच्चारण में लग गए और उनकी बात सुनकर साइड में बैठी हुई दोनों औरतों ने एक दूसरे की तरफ देखा और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई।

उनमें से एक ने पंडित जी की तरफ देखते हुए कहा, "हां, हम लेकर आते हैं।"

इतना बोलकर वो दोनों घर में अलग-अलग तरफ बने हुए दो कमरों की तरफ गई और कुछ एक-दो मिनट के बाद ही दो लड़कियों के साथ बीच में चलती हुई बहुत ही खूबसूरत सी दुल्हन वहां से बाहर आई और वह काफी खुश लग रही थी उसके चेहरे की खुशी बता रही थी कि वह अपनी शादी में बहुत ही ज्यादा खुश है और उसकी वह खुशी की चमक उसके चेहरे को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी दुल्हन ने गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था जिस पर मल्टी कलर एंब्रॉयडरी वर्क था और माथापट्टी और बाकी सारी ज्वेलरी भी पिंक और मल्टी कलर की थी जो कि उसके लहंगे के साथ बहुत अच्छे से मैच हो रही थी और उसका बहुत ही प्यारा मैचिंग दुल्हन वाला ब्राइडल मेकअप किया गया था।

उसके साथ दो लड़कियां चल रही थी जिन्होंने उनके कान में कुछ कहा जिस की वजह से दुल्हन हंसने लगी और वह दोनों लड़कियां भी आपस में बात करती हुई हंस रही थी और वह दुल्हन को लेकर मंडप तक आईं और फिर उसे मंडप में बिठाते हुए उनमें से एक ने कहा, "तारा अब हंसना बंद कर, ऐसे दांत दिखाएंगी ना तो सब तुझे बेशर्म दुल्हन बोलेंगे। थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन शर्माने की एक्टिंग ही कर ले, यार!"

अपनी सहेली की यह बात सुनकर दुल्हन जो अब तक खुश थी और हंस रही थी, मुस्कुरा रही थी वह एकदम ही शांत हो गई और सीरियस चेहरा बनाने की कोशिश करने लगी जो कि उसके लिए शायद काफी मुश्किल था।

उस्सकी सहेलियां भी दोनों उसके साइड में बैठ गई और उसने अपने राइट साइड पर हल्का सा झुक कर वहां बैठी हुई लड़की के कान में कहा, "अरे यार! अदिति, क्या करूं मैं पहली बार ही शादी हो रही है ना इसलिए एक्साइटमेंट की वजह से बस थोड़ी सी खुश हूं लेकिन अब मैं स्माइल नहीं करूंगी। वैसे भी मम्मी बोलती है ज्यादा हंसो तो फिर नज़र लग जाती है और फिर बाद में उतना ही रोना भी पड़ता है!"

फिलहाल अभी बाकी लोग दुल्हन और उसकी सहेलियों से थोड़ा दूर पीछे होकर बैठे हुए थे इसलिए उनकी बात और किसी को सुनाई नहीं दी लेकिन फिर भी अदिति ने धीरे से तारा के कंधे पर हाथ मारते हुए कहा, "चुप कर तू! कुछ भी बकवास मत कर ऐसा कुछ नहीं होता, वह आंटी बस तुझे ऐसे ही समझाने के लिए बोलती हैं लेकिन हां अभी थोड़ी देर के लिए अपनी एक्साइटमेंट को कंट्रोल कर ले बस कुछ देर की ही बात है। ऐसे अच्छा नहीं लगता ना, दांत दिखाती हुई दुल्हन, तेरी सारी फोटोस भी वैसी ही आएंगे फिर!"

अदिति की बात सुनकर तारा का मुंह बन गया और वह अपनी जगह पर सीधी होकर बैठ गई और इधर-उधर देखने लगी, वह अपने दूल्हे का इंतजार कर रही थी जो कि अब तक नहीं आया और इस बात से इरिटेट होकर उसने दोबारा अपनी फ्रेंड से कहा, "यार अदिति! यह आरांश जी कहां रह गए। बताओ दुल्हन रेडी हो गई है दूल्हा ऐसा भी क्या रेडी हो रहा है। लगता है वह मुझसे भी ज्यादा एक्साइटेड है जो अब तक तैयार ही नहीं हो पाए।"

इतना बोलते हुए तारा फिर से अपने चेहरे पर हाथ रख कर हंसी तो इस बार दूसरी साइड पर बैठी हुई उसकी बड़ी बहन प्राची दीदी ने उन दोनों को डांटते हुए कहा, "चुप करो तुम दोनों और तारा तुम 2 मिनट शांत नहीं बैठ सकती क्या? सबकी नज़रें तुम पर ही हैं और फिर भी तुम ऐसे..."

अपनी बहन की डांट सुनने के बाद तारा दोबारा से अपनी जगह पर एकदम सीधा होकर बैठ गई और उसने धीमी आवाज में कहा, "सॉरी दीदी! मैं तो बस बात कर रही थी, अब नहीं करूंगी।"

इतना बोलकर वह फिर से सामने की तरफ ही देखने लगी लेकिन आदत से मजबूर वह ज्यादा देर तक सीरियस और सीधा होकर बैठ नहीं पाई और फिर से सिर्फ घूम कर इधर-उधर चारों तरफ देखने लगी, अभी तक उसका दूल्हा मंडप में नहीं आया था इस बात को सोचकर वह थोड़ी सी बेचैन भी हो रही थी लेकिन फिलहाल अभी उसने यह बात किसी और से नहीं कही।

वहीं दूसरी तरफ, हमारे दूल्हे यानी कि आरांश को बुलाने के लिए उसकी मां और बड़ी बहन निवेदिता गई हुई थी लेकिन आरांश ने दरवाजा तक नहीं खोला और ना ही कमरे के अंदर से वह उन दोनों की बात का कोई जवाब दे रहा था।

उसकी मां ने दरवाजा खटखटाते हुए बाहर से कहा, "आरांश दरवाजा खोलो बेटा! फेरों का वक्त हो गया है! क्या कर रहे हो तुम अभी तक!"

फिर भी अंदर से कोई जवाब नहीं आया और ना ही उस कमरे का दरवाजा खुला तो वो दोनों ही बहुत परेशान हो गईं।

आरांश की मां, ममता जी ने अपनी बेटी निवेदिता की तरफ़ देखते हुए कहा, "देख ना यह क्या करने पर तुला है तेरा भाई! सारे मेहमान आ गए हैं यहां तक दुल्हन भी तैयार होकर मंडप में आ गई है और पता नहीं क्या चलता रहता है इस लड़के के दिमाग में?"

यह बात बोलते हुए ममता जी बहुत ही ज्यादा परेशान लग रही थी और उनकी बात सुनकर निवेदिता ने कहा, "मम्मी देखिए! इसमें पूरी तरह से तो गलती आरांश की भी नहीं है क्योंकि आप लोगों ने ही उसे मजबूर किया है यह शादी करने के लिए नहीं तो..."

निवेदिता की बात सुनते ही ममता जी एकदम भड़कते हुए बोली, "नहीं तो क्या अकेला रह रहकर वह भी मर जाता एक दिन, यही चाहती है क्या तू अपने भाई के लिए, तूने देखा नहीं उसने अपनी हालत कैसी कर ली है और उसके लिए यह ज़रूरी था इसीलिए हमने इतना जोर दिया है नहीं तो अब तक हमने भी तो कुछ नहीं बोला था। आखिर और कितना वक्त चाहिए उसे इन सब से निकलने के लिए सारी जिंदगी तो नहीं अकेला रह सकता है ना और वैसे भी हम उसका भला चाहते हैं। कोई दुश्मन नहीं है हम उसके।"

यह बात बोलते हुए ममता जी की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू अपने चेहरे पर रख लिया और किसी तरह अपने आंसू रोकने की कोशिश करने लगी।

अपनी मां की बात सुनकर और उन्हें ऐसे इमोशनल होते देख कर निवेदिता ने अपनी मां का हाथ पकड़ते हुए कहा, "हां मम्मी मुझे पता है और मैं भी यही चाहती हूं कि आरांश की लाइफ में कोई आए जो उन्हें उनकी डार्कनेस से निकालकर वापस रोशनी में ले आए और मुझे पता है तारा भाभी ये बहुत अच्छे से कर पाएंगी इसीलिए मैं भी चाहती हूं उनकी शादी हो लेकिन अगर भाई राजी हुए थे तो फिर ऐसा क्यों कर रहे हैं?"

इतना बोलते हुए निवेदिता ने एक गहरी सांस ली और फिर दरवाजे की तरफ मुड़ गई और दोबारा दरवाजे पर हाथ मारते हुए तेज आवाज में बोली, "आरांश दरवाजा खोलो, मुहूर्त का टाइम हो रहा है।"

इतना बोलते हुए निवेदिता ने बार-बार दरवाजे पर अपना हाथ मारा, जिससे की तेज़ आवाज़ हुई।

उसके इस तरह दरवाजा खटखटाना की आवाज कमरे के अंदर भी जा रही थी और शायद बाहर बैठे लोगों को भी सुनाई दे रही थी इसलिए सभी उस तरफ देखने लगे थे।

To Be Continued

क्या कहना चाहती है निवेदिता और आरांश क्यों नहीं आ रहा है मंडप में? और वो आएगा या फिर नहीं क्या लगता है आप लोगों को बताइए कमेंट में वह आएगा या फिर नहीं और कैसी लगी आपको हमारी प्यारी तारा, एकदम चमकती हुई सी है ना, अपने नाम की तरह वैसे देखते हैं उसकी ये चमक कब तक रह पाती है?

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