Revenge of Desire - Chapter 1
काली हवेली के बाहर…
रात जैसे ज़मीन पर उतर आई थी। आसमान पूरी तरह काला, बिना चाँद के, बिना सितारों के—जैसे रोशनी ने इस जगह से किनारा कर लिया हो।
सूखे पेड़ों की टेढ़ी-मेढ़ी शाखाएँ हवाओं के साथ ऐसे हिल रही थीं, मानो किसी अनदेखे खतरे की ओर इशारा कर रही हों। हवेली का विशाल लोहे का दरवाज़ा जंग खा चुका था, और हर झोंके के साथ उससे एक खड़खड़ाहट की आवाज़ उठती—धीमी, मगर बेचैन कर देने वाली।
तभी…
वहाँ कुछ मौजूद हुआ।
कोई आकृति नहीं, कोई साया नहीं—लेकिन एक एहसास। जैसे हवा का एक हिस्सा बाकी हवा से अलग हो गया हो। वातावरण अचानक और भारी हो गया। ठंडी हवा एक पल को थम-सी गई।
दरवाज़े के सामने वो अदृश्य ताकत ठहर गई।
कुछ क्षणों तक बस सन्नाटा रहा… फिर बिना किसी स्पर्श के—
दरवाज़ा अपने आप चरमराता हुआ खुलने लगा।
धीरे-धीरे… जैसे सदियों की नींद से जाग रहा हो।
अंदर से गहरी, बासी हवा का झोंका बाहर आया, जिसमें सीलन, धूल और पुराने राज़ों की गंध मिली हुई थी।
वो अदृश्य मौजूदगी दरवाज़े के पार अंदर दाखिल हो गई।
अंदर कदम रखते ही फर्श पर जमी धूल हल्की-सी उड़ने लगी—जैसे किसी ने अभी-अभी वहाँ चलकर उसे छेड़ा हो।
हॉल विशाल था।
ऊँची छत… दीवारों पर उखड़ा हुआ पलस्तर… और बीच में लटका एक पुराना झूमर, जो बिना किसी वजह के हल्का-हल्का हिल रहा था।
उस अदृश्य ताकत ने जैसे चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई।
दीवारों पर लगे पुराने चित्र—कुछ राजाओं के, कुछ औरतों के—उनकी आँखें अंधेरे में भी चमकती-सी लग रही थीं। ऐसा लगता था जैसे वे सब उसी मौजूदगी को देख रहे हों… पहचान रहे हों।
एक पल के लिए झूमर पूरी तरह स्थिर हो गया।
फिर अचानक—
तेज़ी से हिलने लगा।
नीचे फर्श पर परछाइयाँ अजीब आकार लेने लगीं। जैसे कोई अनजाना खेल शुरू हो चुका हो।
वो ताकत आगे बढ़ी।
सीढ़ियों की तरफ़।
हर कदम के साथ लकड़ी की सीढ़ियाँ हल्की-सी चरमराईं, जबकि वहाँ कोई दिख नहीं रहा था।
ऊपर जाते हुए… दीवारों से जैसे फुसफुसाहटें टकराईं।
बहुत धीमी… लगभग सुनाई न देने वाली…
पर उनमें बेचैनी थी। चेतावनी थी।
ऊपर पहुँचकर वो ताकत एक पल को रुकी।
लंबा, अंधेरा गलियारा सामने फैला था। दोनों तरफ़ बंद दरवाज़े… कुछ आधे खुले, कुछ पूरी तरह सड़े हुए।
हवा अब और ठंडी हो चुकी थी।
पर उस ठंड में भी एक अजीब-सी गर्माहट घुलने लगी थी—जैसे हवेली उस मौजूदगी को पहचान रही हो… उसका स्वागत कर रही हो।
धीरे-धीरे वो अदृश्य शक्ति उस गलियारे में आगे बढ़ी।
हर दरवाज़े के पास से गुजरते हुए जैसे वो अंदर झाँकती… कुछ तलाशती…
और फिर—
वो सबसे आखिरी दरवाज़े के सामने आकर रुक गई।
वही कमरा…
जिसके अंदर एक नई कहानी शुरू होने वाली थी।
जैसे रात का अंधेरा उसमें घुलकर उसी का हिस्सा बन गया हो। सदियों से वीरान यह हवेली अपने भीतर न जाने कितने राज़ और कितनी परछाइयाँ समेटे बैठी थी। बाहर हवाओं की सनसनाहट थी, खिड़कियों के टूटे शीशों से छनकर आती ठंडी हवा अंदर कमरे में अजीब-सी खामोशी के साथ गूंज रही थी।
ऊपर की मंज़िल का सबसे बड़ा कमरा — आलिशान, मगर डरावना। दीवारों पर लटके पुराने पेंटिंग्स धुंधले पड़ चुके थे, फर्श पर मोटा कालीन बिछा था, और बीच में रखा था एक भव्य बिस्तर। बिस्तर पर गहरी लाल और काली मखमली चादरें, जैसे किसी की साँसों से गर्म हो रही हों।
उस बिस्तर पर लेटी थी एक लड़की।
**निर्वस्त्र अवस्था में।**
उसका गोरा चमकता बदन चाँदनी की रौशनी में और भी निखर रहा था। काले, लहराते बाल उसके चेहरे और कंधों पर बिखरे हुए थे। उसकी टाँगें हल्की-सी फैलीं, हाथ ढीले-ढाले तकिए पर टिके, और उसका उभार हर साँस के साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहा थे । नींद गहरी थी, मगर बेचैनी उसके होंठों की हल्की हरकत से साफ झलक रही थी। होंठों पर एक दम गहरे लाल रंग कि लिपस्टिक थी ,
कमरे में सन्नाटा था, लेकिन उस सन्नाटे के बीच अचानक… **एक आहट।**
फर्श पर जैसे किसी ने धीरे से कदम रखा हो। मगर वहाँ कोई दिखाई नहीं दिया।
एक अदृश्य शक्ति धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी।
उसका कोई चेहरा नहीं था, कोई आकृति नहीं। सिर्फ़ एक मौजूदगी—भारी, गहरी, और रहस्यमयी। कमरे की हवा अचानक और ठंडी हो गई। झूमर हल्का-सा हिला, खिड़की का परदा सरसराया।
वो शक्ति बिस्तर तक पहुँची।
चादर पर एक लहर उठी… जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे छुआ हो। लड़की नींद में ही करवट बदल गई। उसकी नंगी पीठ अब पूरी तरह से चाँदनी में नहा गई।
अचानक…
वो अदृश्य छुअन उसके होंठों को छू गया।
पहले हल्के से, जैसे कोई बर्फ़ का टुकड़ा वहाँ रख दिया हो। फिर उस छुअन में एक अजीब गर्मी घुल गई। लड़की ने अनजाने में होंठों को भींच लिया।
वो छुअन धीरे-धीरे उसके चेहरे से सुराही जैसी गर्दन की तरफ़ सरकने लगी।
उसकी साँसें भारी हो गईं।
गर्दन पर जैसे किसी ने अपनी उंगलियाँ फिराईं हों, वहाँ से सिहरन उसकी पूरी रीढ़ में दौड़ गई। नींद में डूबी उसकी बदन बिस्तर पर करवटें बदलने लगी।
कमरा और भारी हो चुका था।
झूमर अब तेज़ी से हिल रहा था, परदों से आती हवा मानो अदृश्य शक्ति की साँसों जैसी लग रही थी।
अब वो छुअन उसके ब्रेस्ट के बीच तक उतर आया।
वो जगह जहाँ उसकी साँसों की धड़कन सबसे साफ़ सुनाई दे रही थी।
एक पल को वो स्पर्श रुक गया—जैसे कोई निहार रहा हो, महसूस कर रहा हो।
लड़की की आँखे फड़की।
उसके हाथों ने बिस्तर की चादर कसकर पकड़ ली।
और फिर अचानक—
उसकी नींद टूटी।
उसकी आँखें खुलीं।
चारों तरफ़ अंधेरा और सन्नाटा।
मगर दिल धड़कने लगा तेज़।
क्योंकि उसे महसूस हो रहा था—**कोई है यहाँ।**
वो अदृश्य स्पर्श अब भी था।
उसका यक़ीन पक्का था कि किसी ने उसके नंगे उभारों को छुआ है।
उसने साफ़ महसूस किया कि जैसे **कोई उसके ब्रेस्ट को हाथों में लेकर दबा रहा हो।**
उसका गला सूख गया।
चेहरे पर पसीना छलक आया।
आँखें डर और चाहत के बीच काँप रही थीं।
उसने एक झटके से करवट ली।
पर सामने… सिर्फ़ खाली हवा थी।
कोई नहीं।
मगर उसका शरीर बता रहा था कि कोई है।
हर नस, हर साँस उस छुअन की गवाही दे रही थी।
उसके होंठ काँप उठे।
वो डर और सिहरन के बीच फँस गई।
चाहत की एक महीन लहर भी उसके अंदर उठ रही थी, जिसे वो खुद समझ नहीं पा रही थी।
वो आँखें फैलाए कमरे के हर कोने को देख रही थी, लेकिन सामने अब भी कुछ नहीं।
और तभी…
फिर वही दबाव।
उसका खुले बदन पर किसी अदृश्य हाथ का स्पर्श—
जिसे वो महसूस कर सकती थी, मगर देख नहीं पा रही थी।