Revenge of Desire Ch. 3

Revenge of Desire - Chapter 3

Posted by Moon Star • Aug 25, 2025 11:58 PM

रिवा झटके से उठ बैठी। ब्रेस्ट पर हाथ रखे, पसीना माथे से ढलक रहा था। आँखें खोलीं तो सामने वही पुराना लकड़ी का छत, वही लंबी खिड़की और पर्दों से आती हल्की सी सुबह की धूप। उसने हड़बड़ाकर चारों ओर देखा—कमरा वही था, उसकी अपनी हवेली का पुराना रूम।

*"ये… सपना था?"*

उसके होंठ बुदबुदाए। लेकिन दिल की धड़कन अब भी तेज़ थी। उसे साफ़ महसूस हो रहा था कि अभी थोड़ी देर पहले कोई उसके बेहद पास था। उसकी साँसों में अब भी वही अजीब-सी गर्माहट बसी थी। रिवा ने पानी की बोतल उठाई, दो घूँट पिए और चेहरा आईने में देखा।

आईने में वही रिवा शाह खड़ी थी—लंबे खुले बाल, हल्की-सी उलझन आँखों में और होंठों पर बेचैनी का निशान। उसने गहरी साँस ली और खुद को झटका दिया, *"नो! ये सपना था, और कुछ नहीं।"*

वो तेजी से उठी, वार्डरोब खोला और अपने फेवरेट आउटफिट की ओर बढ़ गई। उसने काला क्रॉप टॉप निकाला, जिसके किनारे पर सिल्वर की चमक थी, और साथ में नीली हाई-वेस्ट पेंट। एक-एक कपड़ा पहनते हुए वो खुद से बड़बड़ाती रही, *"डर से कुछ नहीं होता… और अगर वो कोई सच में था भी, तो… वो कौन हो सकता है?"*

कपड़े पहनकर उसने शीशे में खुद को देखा। होंठों पर हल्की लिप-ग्लॉस, आँखों में हल्की काजल की लाइनिंग और गले में चेन—पूरी तरह तैयार। उसने बालों को झटककर कहा,

*"कौन कहेगा मैंने रात भर डरावना सपना देखा था?"*

उसने बैग उठाया और जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला, हवेली का हाल दिखाई दिया। बड़ा-सा हॉल, ऊँची छतें और दीवारों पर लगी पुरानी पेंटिंग्स। लेकिन आज वहाँ रौनक थी।

दो सहेलियाँ पहले से ही वहाँ खड़ी थीं—रिया और तन्वी। दोनों हँसते हुए किसी बात पर ठहाके मार रही थीं।

"ओ हो, हमारी क्वीन आ ही गई!" रिया ने इशारा किया।

"आज तो किसी रैम्प वॉक से उतरकर आ रही लग रही है।" तन्वी ने छेड़ा।

रिवा ने हँसते हुए बाल झटक दिए, "देखो भई, कॉलेज है, कोई गाँव का मेला नहीं। ड्रेसिंग तो करनी ही पड़ेगी।"

तीनों की हँसी पूरे हॉल में गूँज उठी। तभी अचानक पीछे से किसी की आवाज़ आई—

"Wow… मेरी बेटी तो बिल्कुल मॉडल लग रही है।"

सबकी नजरें दरवाज़े की तरफ़ मुड़ीं। वहाँ उसकी माँ खड़ी थी। लंबे खुले बाल, वेस्टर्न ड्रेस—फ्लोरल शॉर्ट ड्रेस और हाई हील्स में। रिवा की माँ हमेशा की तरह जवान और स्टाइलिश लग रही थीं।

"मॉम!" रिवा दौड़कर उनसे गले मिली।

माँ ने हँसते हुए उसे कसकर पकड़ लिया और बोलीं, "यार, तुमसे एक शिकायत है।"

रिवा ने आँखें सिकोड़ लीं, "क्या?"

"इतनी हॉट लग रही हो कि लोग कहेंगे, ये बेटी है या बहन?"

रिया और तन्वी हँसते-हँसते लोटपोट हो गईं। रिवा ने शर्माते हुए मुँह बना लिया, "मॉम, आप भी ना…"

माँ ने उसके गाल पर हाथ रखा और अचानक गंभीर हो गईं।

"बेटा… तुम्हें याद है ना, मैंने कल क्या कहा था?"

रिवा चौंकी, "क्या?"

"आज कॉलेज में किसी से झगड़ा मत करना।"

रिवा ने भौंहें चढ़ाईं, "लेकिन क्यों? मतलब मैं किसी से लड़ने थोड़ी जाती हूँ।"

माँ ने गहरी साँस ली और उसकी आँखों में देखकर बोलीं,

"तुम्हारे डैड ही आकर तुम्हें सब समझाएँगे। तब तुम्हें सब पता चल जाएगा। अभी बस इतना याद रखो—आज के दिन कुछ भी ऐसा मत करना जो मुसीबत खड़ी करे।"

रिवा थोड़ी देर माँ की आँखों में देखती रही। माँ के चेहरे पर हल्की-सी चिंता की झलक थी।

*"डैड? और झगड़ा? आखिर ये सब चल क्या रहा है?"* उसने मन ही मन सोचा।

फिर उसने नटखट अंदाज़ में हँसते हुए कहा, "ओके मॉम… आज कोई फाइट नहीं। लेकिन अगर कोई खुद ही लड़ाई के लिए आगे आ जाए, तो?"

माँ ने हल्की मुस्कान दी, "फिर भी… इस बार तुम पीछे हट जाना।"

रिवा ने होंठ काटे और हाँ में सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखों में वही जिद थी। *"देखते हैं, आज क्या होता है।"*

उसने बैग कंधे पर डाला, सहेलियों को इशारा किया, "चलो, कॉलेज चलते हैं। आज मज़ा आएगा।"

हॉल में उसकी हँसी गूँज गई, लेकिन पीछे खड़ी माँ की आँखें कुछ और कह रही थीं—जैसे उन्हें पहले से अंदाज़ा हो कि कॉलेज में आज रिवा के सामने कौन-सी **तूफानी टक्कर** आने वाली है।

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