My triple husband's - Chapter 1
एक बहुत ही बड़ा, शानदार कमरा। सफेद मखमली बेडशीट पर बिखरी गुलाब की पंखुड़ियाँ थी। हल्की-हल्की लाइट्स की झिलमिलाहट जल रही थी।, इस आलीशान कमरे के बीचोंबीच बैठी थी उर्मी शर्मा एक 18 साल की नाजुक, मासूम और बेहद ख़ूबसूरत लड़की। आज उसकी सुहागरात थी।
लेकिन ये रात किसी एक पुरुष के साथ नहीं तीन पतियों के साथ थी। उसके होंठ काँप रहे थे, मन कांप रहा था, पर चेहरे पर एक शांत मुखौटा था।उसका दिल हर बीतते पल के साथ तेज़ धड़क रहा था । तीन लड़कों के साथ सेक्स करने की बात से ही उसकी जान जा रही थी। वह कैसे एक साथ तीनों को झेल सकती हैं। वह बार-बार अपनी सास वसुंधरा देवी की बातों को याद कर रही थी – “उर्मी, ये घर अब तेरा है। और तेरे पतियों की सेवा ही तेरा धर्म है। मुझे जल्द ही वारिस चाहिए।”
उर्मी की शादी सिंघानिया खानदान के तीन बेटों से हुई थी। विराज, कियान और आरव। मुंबई के सबसे अमीर और रहस्यमयी घरानों में से एक।सामने की दुनिया को लगता था कि ये परिवार परंपराओं में यकीन नहीं रखता । लेकिन हकीकत ये थी कि वो आज भी कई पुराने रिवाज़ निभा रहे थे, जैसे कि एक ही लड़की की शादी तीन भाइयों से कर देना।
उर्मी ने आज लाल रंग का भारी जोड़ा पहना था। चेहरे पर हल्का सा मेकअप आंखों में काजल, होंठ गुलाबी, और दिखने में काफी खूबसूरत और सुडोल थी डर, उलझन और न जाने क्या-क्या अभी उसके मन में चल रहा था।
तभी कमरे का दरवाज़ा खुला। विराज और कियान कमरे में दाख़िल हुए।दोनों बेहद हैंडसम, उनकी हाइट 6 फिट होगी। दिखने में क्या बवाल लग रहे थे।वो दोनों ही सादे लेकिन क्लासिक कपड़ों में थे।व्हाइट शर्ट, ब्लैक जींस। कियान के हेयर थोड़े बड़े थे। जो कि उसे और भी ज्यादा एक्सट्रीमली हॉट बना रहेथे।
कियान ने मुस्कुराते हुए कहा “भाई… सच में, सब्र का फल मीठा होता है। कितनी प्यारी बीवी है हमारी…”
वो उर्मी के पास आकर बैठ गया। उसकी आंखों में एक चमक थी, जैसे उसने किसी सपने को पा लिया हो। लेकिन विराज… बिल्कुल ठंडा था। उसकी आंखों में न कोई चाहत, न कोई एक्साइटमेंट दिख रही थी। बस एक सवाल उसने पूछा – “क्या तुम तैयार हो…? आरव आज नहीं आएगा। और जब तक वो तुम्हें बीवी नहीं मानेगा, तब तक हम दोनों ही तुम्हारे पति हैं।”
उर्मी कुछ बोल नहीं पाई। वो बस सिर झुकाकर बैठी रही।
और फिर उसका मन फ्लैशबैक में चला गया
[फ्लैशबैक शुरू होता है]
वसुंधरा देवी तीनों भाइयों की मां एक औरत, जो उम्र में 55 की थी, लेकिन दिखने में 30 से कम। उसके तीनों बेटे इतने हैंडसम है तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता था कि उनके मॉम डैड कितने खूबसूरत होंगे। उसके पास दो पति थे।
दुनिया जानती थी सिर्फ बृजमोहन को, लेकिन असल में उसका दूसरा पति था। योगराज। बृजेश मोहन और योगराज दोनों ही भाई थे। और दोनों की शादी क्यों वसुंधरा से हुई थी। योगराज भी एक बेहद हैंडसम थे। वो अभी 58 के थे। लेकिन दिखने में 40 इयर्स के टोल्ड हेर हैंडसम सूगर डैडी टाइप लगते थे। कोई लड़की देखे तो बस देखते ही रह जाए।
क्योंकि दुनिया की नजरों में वह अभी सिंगल है तो कल सारी लड़कियां उन पर लाइन मारती है।लेकिन हकीकत ये थी कि वो शादीशुदा था। और उसकी पत्नी वसुंधरा, उसकी दुनिया।ओर वो अपनी वाइफ से बहुत प्यार करते हैं। आरव उनका बेटा है और विराज ओर कियान बृजमोहन के। तीनों एक से बढ़कर एक। किसी को भी कंपेयर नहीं किया जा सकता था।
एक दिन योगराज ने विराज से कहा – “तुम लोगों की शादी तय कर दी गई है, बेटा।”
विराज ने बस एक ठंडी रिएक्शन के साथ कहा “आपने तय किया है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं।” वो फिर अपने ऑफिस के लिए निकल गया। वह सिंघानिया कंपनी का सीईओ था। उसकी कंपनी इंडिया की बेस्ट कंपनियों में से एक थी। मुंबई में बहुत नाम था उनका।
अब कहानी जाती है उर्मी की तरफ
उर्मी एक अनाथ थी। उसके माता-पिता एक एक्सीडेंट में मारे गए थे। उसे पाला उसके चाचा-चाची ने… लेकिन प्यार कभी नहीं दिया। बस काम करवाया, और अपमान दिया। लेकिन जैसे तैसे तो वह अपनी पढ़ाई कर रही थी।
कमल उर्मी के चाचा योगराज की कंपनी में एक छोटे से पोजीशन पर काम करता था। कर्ज़ में डूबा हुआ आदमी, जिसके पास कोई रास्ता नहीं था। उसने योगराज से लोन माँगा… और बदले में योगराज ने कहा – “अपनी भतीजी की शादी मेरे बेटों से करवा दो।”
योगराज ने कई बार उर्मी को देखा था वह बहुत शांत रहती थी पढ़ाई लिखाई में भी काफी अच्छी थी जिस वजह से उन्हें लगा कि यह परफेक्ट होगी हमारे घर की बहू।
कमल मान गया।2 करोड़ रुपये के बदले में, उसने उर्मी को बेच दिया। उर्मी की चाची सरला तो झट से उसे शादी के लिए तैयार करने लगी। उर्मी चाहकर भी विरोध नहीं कर पाई।
उसने जान लिया था। “अगर मैंने मना किया… तो शायद मेरी जान ले ली जाएगी।”
शादी दो दिन में कर दी गई।किसी को सोचने का मौका नहीं मिला।शादी सिर्फ घरवालों के सामने हुई। क्योंकि दुनिया के सामने तो वो उसे सिर्फ विराज की वाइफ बनाकर रिवील करेंगे।
अब फिर से वापस आते हैं सुहागरात की रात पर।
उर्मी की आंखें झपकती हैं।विराज अब भी खड़ा है।
कियान पास बैठा है। आरव वो नहीं आया था। उर्मी सोचती है। "कान्हा जी कहां फंसा दिया आपने मुझे अब मैं क्या बोलूं..?
To be continued.......
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