My triple husband's - Chapter 3
उर्मी की आंखें खुलीं तो धूप की एक हल्की किरण उसके चेहरे पर आ पड़ी थी। उसका चेहरा अभी भी एक अलग ही गला कर रहा था। धूप की रोशनी में और भी ज्यादा चमक रहा था। उसने करवट बदलनी चाही। पर जैसे उसकी पूरी देह दर्द से कराह उठी। "आह…" उसके होंठों से एक अनचाहा दर्द उभरा।
उसने नज़रें घुमाईं तो देखा उसके दोनों पति… विराज और कियान उसी के ऊपर सोए हुए थे। वो हल्की सी घबराई बहुत धीमे से खुद को खींचती हुई उठी। उसे उठने में भी मुश्किल हो रही थी। कमर में अजीब सा दर्द हो रहा था। वो अपनी साड़ी और ब्लाउज की ओर देखने लगी। हाथ कांपते हुए उसने उन्हें पहना और कदमों में डगमगाहट के साथ वहाँ से भाग निकली।
विराज की आंखें कुछ देर बाद खुलीं। कमरा खाली था।
उर्मी वहां नहीं थी। विराज के चेहरे पर कोई रिएक्शन नहीं थे जैसे यह सब कुछ उसके लिए नॉर्मल सी चीज हो। ना कोई रिग्रेट ना कोई सुकून कुछ भी नहीं दिख रहा था। वह अभी भी शर्टलेस था उसकी मस्त पर्सनालिटी दिख रही थी। क्या अट्रैक्टिव बाइसेप्स इसी से पता चलता है कि वह जिम में कितना टाइम रहता होगा।
वो उठता है। धीरे-धीरे कियान की ओर देखता है जो अब भी नींद में था। फिर बिना कुछ बोले वहां से चला जाता है। क्योंकि यह रूम कियान का ही था।
उर्मि जैसे ही अपने कमरे में आई दरवाजा बंद किया और दरवाजे के सामने घिसकर कर वहीं पर बैठ गई। उर्मी का रो-रोकर बुरा हाल था। "कान्हा जी…" उसकी आवाज़ टूटी हुई थी। "ये कैसा प्यार है? शादी तो जीवन भर साथ निभाने का वादा होता है न यहां तो बस तन का सौदा हो गया
मन का कोई मोल नहीं। क्यों भेजा आपने मुझे इस नरक में?
क्यों?"
वो सिसकियों में डूबी थी, पर उसकी आंखों में अब आंसू नहीं। अपने कान्हा जी से शिकायत थी और टूटा हुआ उसका विश्वास। क्या कुछ नहीं सोचा था उसने अपनी लाइफ के बारे में और कहां आ चुकी है।
उसने नज़रें कमरे की ओर उठाईं। तो एक पल के लिए वह उसमें खो ही गई। कमरा तो जैसे किसी राजकुमारी के लिए सजा हो। हर चीज़ उसकी पसंद की। गुलाबी पर्दे, किताबें, म्यूज़िक बॉक्स, फेयरी लाइट्स। पर सब अब उसे खाली और दिखावा लग रहा था। "क्या इस कमरे का प्यार मेरे लिए था? या बस दिखावा?"
वो लड़खड़ाते हुए अपने वॉशरूम की तरफ बढ़ी। आंखें सूज गई थीं। चेहरा फीका पड़ चुका था। बाल भी बिखरे हुए थे और मेकअप भी। वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी।
[कुछ देर बाद]
नहा कर बाहर आई। लाल रंग की एक बेहद प्यारी, सादगी भरी साड़ी पहन ली। जो की बहुत ही ज्यादा प्यारा लग रहा था उसकी बॉर्डर गोल्डन जोड़ी का वर्क था। काफी लग्जरियस और एक्सपेंसिव साड़ी लग रही थी। गले में भारी सा मंगलसूत्र, माथे पर सिंदूर। पैरों में बिछुए और कांच की चूड़ियां। नई-नवेली दुल्हन का रूप था। और इन सब के पीछे कुछ खाली सा लग रहा था तो उसके चेहरे की खुशी जो नजर नहीं आ रही थी।
वो आईने में खुद को निहारती है। "क्या ये मैं हूं? या किसी और की बनाई हुई एक परछाई?"
तभी धीरे से दरवाज़ा खुलता है। “नॉक-नॉक… मिसेज कियान…”
वो मुड़ती है। दरवाज़े पर वही मुस्कुराता हुआ चेहरा।
कियान। सफेद शर्ट, गले में सटल चेन, और हाथ में एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स। तो इनके बारे में बात करते हैं मुंबई के फेमस सुपरस्टार। काफी सारी फिल्में और बहुत सारी सीरीज में काम किया है और काफी फेमस है। "क्या मैं अंदर आ सकता हूँ…वाइफी..? कियान ने स्माइल करते हुए पूछा।
उर्मी कुछ नहीं कहती। बस नज़रें झुका लेती है। कियान धीरे-धीरे चलता हुआ उसके पास आता है। उसके सामने ज़मीन पर बैठ जाता है। उर्मी थोड़ा अनकंफरटेबल लगने लगा तो वह पीछे जाने लगती है। "रील लाइफ में मैंने बहुत बार लड़कियों को गिफ्ट दिया है। पर रीयल लाइफ में पहली बार दिल से किसी को कुछ दे रहा हूँ।" बड़े ही रोमांटिक अंदाज में वो बोल रहा था।
वो गिफ्ट बॉक्स उसकी गोद में रख देता है। "ओपन करो ना… प्लीज़?"
उर्मी हल्के हाथों से बॉक्स खोलती है। उसमें एक प्यारा सा डायमंड सेट था। जिसे देखकर उर्मी की आंखें बड़ी-बड़ी हो जाती है। क्योंकि यह बहुत लग्जरियस और महंगा लग रहा था। वो कुछ कहना चाहती है। पर बोल नहीं पाती।
कियान उसकी ओर देखता है, बेहद नरमी से। वो धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उर्मी की उंगलियाँ पकड़ता है।उर्मी की पलकों से एक आंसू गिरता है। और कियान उसे अंगूठे से बहुत धीरे से पोछ देता है।
"वाइफी क्या कल बहुत वाइल्ड हो गया था मैं, मैं सच में ऐसा नहीं होना चाहता था आई एम रियली सॉरी…"
वो फुसफुसाता है, "तुम मेरी फर्स्ट लव हो… और वादा करता हूँ, लास्ट भी…"
वो उसका हाथ अपने होंठों से छूता है। कोई हड़बड़ी नही, बहुत ही धीरे और सॉफ्ट टच से बस एक साफ-सुथरी मोहब्बत से। उर्मी अब भी कुछ नहीं बोल रही। लेकिन उसकी उंगलियाँ अब कियान के हाथ से नहीं हट रही थीं।
कियान ने बहुत धीरे से उसके चेहरे की ओर झुकते हुए उसके होंठों पर एक हल्का सा सॉरी किस करता है। हां हां बस स्किन टच है। ना कोई जबरदस्ती ना कोई जल्दबाज़ी बस एक छोटा सा एहसास। "आई एम सॉरी…" उसने बेहद प्यार से फुसफुसाते हुए कहा, "अपने हस्बैंड को माफ कर दो वाइफी…"
उर्मी अब भी कुछ नहीं बोली। उसकी पलकें नीचे झुकी थीं। और कियान थोड़ा परेशान सा उसे देखता रहा। लेकिन फिर वह बिना कुछ कहे मुस्कुराने की कोशिश करता है और पीछे हट जाता है। "ठीक है… तुम जल्दी आ जाना नीचे ब्रेकफास्ट के लिए। और हाँ… आज तुम्हारी फर्स्ट रसोई भी है ना?"
उसने जाते-जाते फिर से उसका माथा प्यार से छूते हुए कहा।
दरवाज़ा बंद हो चुका था, लेकिन उर्मी अब उसकी दी हुई डायमंड नेकलेस को गोदी में रखकर निहार रही थी।
"कान्हा जी…" उसने धीरे से खुद से कहा, "ये कौन सा कन्फ्यूजन है...? ये खुद को समझता क्या है?"
वो हल्की सी मुस्कराई। "जो भी हो… ये नेकलेस तो बहुत एक्सपेंसिव लग रहा है… और… कितना ब्यूटीफुल भी लग रहा है।
वो पहली बार थोड़ा हल्का महसूस कर रही थी।
[दूसरी ओर – वसुंधरा का रूम]
वसुंधरा ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी खुद को आखरी बार शीशे में देखती है। हल्का गुलाबी सारी कानों में मोती की बालियां, और दिखने में काफी सुडौल और परफेक्ट कोई भी देखे तो कोई नहीं बोल सकता है कि यह 50 प्लस की है।
हां हां, होगी क्यों नहीं तैयार, आज अपनी बहू के हाथों का खाना जो खाने वाली थी। तभी पीछे से एक जोड़ी मजबूत बाँहें उसे अपनी ओर खींच लेती हैं। "क्या बात है… आज इतनी सज संवर रही हो?" योगराज उसके कंधों में अपना चेहरा छुपाते हुए धीमे से कहता है।
वसुंधरा मुस्कुराती है, लेकिन एक सलीकेदार ठहराव के साथ
"हम्म… आपको लगता है हम रोज नहीं सजते?" उसने हल्के से खुद को छुड़ाने की कोशिश की। "हटिए अब, हमें नीचे जाना है… सब कुछ संभालना भी है।"
लेकिन योगराज तो यूं पकड़ कर खड़ा है, जैसे उसे कहीं जाने ही ना देना हो। "कमाल की बात है…" वो उसे गौर से देखता है, "आज भी वैसी ही लगती हो, जैसे पहली बार देखा था तुम्हें… मेरा मन कर रहा है, आज कहीं भाग चलें, जैसे पुराने दिनों में भागते थे…"
"छछछछ… जरा भी शर्म नहीं आती है?" वसुंधरा की मुस्कान अब हंसी में बदल रही थी। "अब तो आपके बेटे की शादी हो चुकी है। और आप दादा भी बन जाएगे। मैं दादी बन जाउंगी।"
योगराज धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लेता है। "दादी… कोई नहीं कह सकता तुम्हें देखकर। ओर थोड़ा रुक कर।" अगर सब कुछ ठीक चलता, तो क्रिकेट टीम अब तक फुल हो गई होती मेरी!" उसकी आंखों में शरारत थी। "लेकिन अब रिस्क है… जानेमन…"
"हो गया आपका?" वसुंधरा हंसी दबाते हुए बोली।
"अब चलिए नीचे। बहू इंतज़ार कर रही होगी।"
यह दोनों ही कपल काफी यंग लगते हैं काफी हैंडसम और परफेक्ट कपल। जब आरव पैदा हुआ था, उसी वक्त वसुंधरा के पहले पति बृजमोहन की अचानक मौत हो गई थी।
दुनिया को यही बताया गया। की आरव भी बृजमोहन का बेटा है लेकिन वह योगराज का बेटा था।
ये राज सिर्फ दो लोग जानते थे। पारो और शंकर। पारो काफी टाइम से उनके मेंशन के अंदर के कामों को संभालती थी। इस मेंशन की देखभाल करती है। अंदर का हर छोटा-बड़ा काम उसी के भरोसे है। और शंकर जो मेंशन के बाहर की सिक्योरिटी और सीक्रेट्स की परतों का रखवाला है। इन दोनों के अलावा, इस घर की असली कहानी किसी को नहीं पता।
मेंशन के बाहर भी काफी गॉड्स और सेक्रेटरी थे लेकिन किन्हीं को भी मेंशन के अंदर आने की परमिशन नहीं थी।
उर्मी धीरे से किचन की तरफ आती है। इस रेड कलर की साड़ी में और अभी उसने वह डायमंड सेट भी पहन लिया था जो कियान ने उसे गिफ्ट किया था। बाल पीछे बंधे हुए, और हाथ में चूड़ियों की धीमी खनक के साथ वो किचन में दाखिल होती है। "पारो चाची…" उसने धीमे से कहा।
"आ गई बहूरानी… बस आज तुम कुछ मत बनाओ, मैं सब समझा दूंगी… कौन सी चीनी कहां है, नमक कहां है… और हां, आज तुम्हें सिर्फ मीठा बनाना है, बाकी सब मैं देख लूंगी…" पारो ने बहुत अपनापन भरे लहजे में कहा।
उर्मी हल्का सा मुस्कुरा दी। "मीठा… ठीक है, मैं कोशिश करूंगी।"
उर्मि अब किचन में इधर-उधर करना स्टार्ट कर देती है उसे खाना बनाना बहुत अच्छे से आता था। और आज इस घर में उसकी पहली रसोई थी तो वह बहुत मन लगाकर अपना काम करना स्टार्ट कर देती है।
Hlo dear reader 💗 💫 💗.
Please follow kare jo bhi new reader Hai vah bhi follow Karen... Comment kare ..
Or please super fan's Bane ...
Read Karte rahe yah to Abhi bus shuruaat hai...love you all please support me.....