Trapped in your heart Ch. 3

धोखे की शुरुआत

Posted by unicorngirl ✔️ • Sep 05, 2025 02:02 PM

तलाक...

विक्रांत के कदम लड़खड़ा गए थे। वह हैरान नजरों से राही को देख रहा था। उसे उम्मीद नहीं थी, कि राही उससे तलाक मांगेगी ।उसके चेहरे पर विश्वास साफ नजर आ रहा था।

“ हां तलाक । मुझे तुमसे तलाक चाहिए।” राही ने अपने धोखेबाज पति के सामने दृढ़ता से खड़े रहते हुए उससे तलाक की मांग करते हुए कहा।

राही को अच्छी तरह से याद है, कि जब वह 7 महीने की प्रेग्नेंट थी तब से ही विक्रांत उसे धोखा देता आ रहा है। अपनी फैसले को मजबूत करने के लिए राही को विक्रांत का धोखा याद करना पड़ा था। जिसे वह कभी याद नहीं करना चाहती थी। उसने विक्रांत के सामने खुद को मजबूत दिखाने की पूरी कोशिश की थी । लेकिन यह बात तो राही का दिल ही अच्छी तरह से जानता था, कि तलाक के पेपर विक्रांत को देते समय उसकी क्या हालत थी।

विक्रांत के हाथों में डिवोर्स पेपर थे। वह हैरानी से उन पेपर को देख रहा था । राही मजाक नहीं कर रही थी। उसे सच में डिवोर्स चाहिए था। पहले जब राही ने उसे डाइवोर्स के लिए कहा था, तो उसे लगा शायद वह मजाक कर रही है। कल रात की वजह से राही नाराज है। जिस वजह से वह विक्रांत से यह कह रही है। लेकिन अब तो शक की कोई गुंजाइश ही नहीं रह गई थी। उसे यकीन था, कि राही पूरी जिंदगी में कभी भी उसे तलाक देने के बारे में तो नहीं सोचेगी।

विक्रांत राही को छोड़ना नहीं चाहता था। अपने धोखे के बावजूद भी वह राही को अपनी पत्नी के रूप में चाहता था। विक्रांत ने राही को वह सब कुछ दिया, जो उसके लिए जरूरी था। एक आरामदायक जिंदगी। एक ऐसी जिंदगी जिसका सपना शायद हर लड़की देखती होगी। इतने सबके बावजूद भी राही उससे तलाक मांग राही है।

हालांकि विक्रांत यह बात अच्छी तरह से जानता था, कि राही कभी भी कोई फिजूल खर्ची नहीं करती थी। वरना बाकी लड़कियां तो विक्रांत के गोल्ड कार्ड का बहुत अच्छे से इस्तेमाल करना जानती थी । लेकिन एक राही ही थी, जिसने विक्रांत के पैसों में कभी कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया था।

विक्रांत हैरान नजरों से राही को देखता है और कहता है, “ तुम मजाक कर रही हो ना ? यह तलाक के कागजात नकली है ना ? तुम झूठ बोल रही हो ना? देखो अगर यह सिर्फ इसीलिए है, क्योंकि मैं किसी और के साथ था। तो वह बात इतनी इंपोर्टेंट नहीं है। तुम एक काम करो तुम शॉपिंग पर क्यों नहीं जाती हो?

शायद तुम्हें कुछ खरीदना होगा। महंगे कपड़े, जूते, ज्वैलरीज जो भी तुम चाहो। चाहे तो अपनी किसी फ्रेंड को भी ले जा सकती हो। लेकिन अगर यह डिवोर्स एक मजाक है, तो मुझे बिल्कुल भी हंसी नहीं आ राही है।”

राही ने अपना चेहरा नॉर्मल रखते हुए विक्रांत से कहा, “ तुम डिवोर्स पेपर पर मेरे साइन देख सकते हो । मैंने पहले ही इस पर साइन कर दिए हैं। और हां यह डाइवोर्स पेपर नकली नहीं है। और ना ही कोई मजाक है । बल्कि मजाक तो तुमने मेरी जिंदगी का बना कर रखा हुआ है।

लेकिन तुम्हारी किए हुए मजाक में मैंने अपनी जिंदगी के 10 साल बहुत अच्छे से हंसते हुए बिताएं हैं। अब मुझे अपनी जिंदगी थोड़ी सीरियस हो कर जीनी है। इसलिए मुझे तुमसे बस डाइवोर्स चाहिए।”

“ अपनी बकवास बंद करो। मेरा सर बहुत दर्द कर रहा है। मैं तुमसे लड़ाई करने के बिल्कुल मूड में नहीं हूं ।” विक्रांत ने लगभग राही पर चिल्लाते हुए कहा।

लेकिन राही का रिएक्शन अभी भी वैसा ही था। राही के चेहरे पर अब भी कोई भाव नहीं बदले थे। विक्रांत की आंखें सख्त हो गई । राही सीरियस थी। वह सच में उसे डिवोर्स देने की बात कह रही थी। और सच में वह उससे अलग होना चाहती थी।

विक्रांत बौखला गया। उसने चिल्लाते हुए कहा, “ तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? क्या कमी रखी तुम्हारे पास घर, गाड़ी, बंगला, पैसा ऐश ओ आराम सब कुछ है तुम्हारे पास। और क्या चाहिए ?”

राही की आंखों में आंसू आ गए थे । यह इंसान उसके जज्बातों को पैसों में तोल रहा था। शादी के 10 साल और बेवफाई के 5 साल।

पिछले 10 सालों से राही एक हाउसवाइफ की तरह विक्रांत का घर संभाल रही है। उसके बच्चे को पाल राही है। चिक्की की देखभाल और परवरिश राही अकेले करती है। जबकि विक्रांत अपनी रातें होटल के कमरे में किसी लड़की के साथ रंगीन करता रहता है। चिक्की की परवरिश में विक्रांत का हाथ नहीं है । इन सब के बावजूद भी विक्रांत ने जो किया है, उसे इस बात का बिल्कुल भी पछतावा नहीं है ।

“ मैंने तुम्हें एक आलीशान जिंदगी दी है। इतना बड़ा घर दिया है। तुम्हें पैसे, गाड़ी, लग्जरी लाइफ सब दी है। इसके बावजूद भी तुम मुझे डाइवोर्स चाहती हो ? और क्या चाहिए तुम्हें? मुझे डाइवोर्स के नाम पर ब्लैकमेल करना बंद करो । और साफ साफ बताओ, कि तुम चाहती क्या हो ?” विक्रांत ने लगभग चिल्लाते हुए राही से सवाल किया।

“ मुझे तुमसे कुछ भी नहीं चाहिए ।शिवाय डिवोर्स के….” विक्रांत का चेहरा गुस्से में भर गया था। राही अपनी बातों पर अड़ी हुई थी। मतलब वह तलाक को लेकर सीरियस थी। विक्रांत का चेहरा गुस्से में कांपने लगा था।

और उसने गुस्से में राही को देखते हुए कहा, “पागल मत बनो राही। दिमाग से काम लो। अगर नहीं सोच पा राही हो, तो मैं तुम्हें याद दिलाता हूं भूल गई हो, कि तुम कहां से आई हो? तुम एक ऐसी जगह से आई हो जहां पर पैसों के लिए तुम्हें दिन रात संघर्ष करना पड़ रहा था।

भूल गई कॉलेज के वह दिन ? जब तुम अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसे इकट्ठे कर रही थी, तब मैंने तुम्हारी मदद की थी। अगर मैं तब पैसों से तुम्हारी मदद नहीं करता, तो तुम कभी कॉलेज कंप्लीट ही नहीं कर पाती । शादी से लेकर अब तक तुम सिर्फ मेरे पैसों पर ही पलती आई हो।

तुम्हें लगता है कि मुझसे अलग होकर तुम यह जिंदगी जी सकती हो ? तुमसे शादी करके मैंने तुम पर एहसान किया है। और बदले में तुम क्या कर रही हो ? किस बात की नाराजगी है तुम्हें हां? इस बात के लिए कि मैं रातों में घर नहीं आता हूं , मेरा रिश्ता किसी और औरत के साथ है, तो इससे तुम्हें क्या फर्क पड़ता है ?

मैंने तुम्हारे लिए अपनी जिम्मेदारियां से कभी मुंह तो नहीं मोड है ना। तुम बताओ क्या मैंने कभी भी अपने बाहर चल रहे अफेयर्स की परछाई अपने घर पर पडने दी है?

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