Deal of hearts - Chapter 1
चौहान मैंशन का विशाल हॉल सुनसान था। दीवारों पर लगी पुरानी पेंटिंग्स, क्रिस्टल की झूमर की चमक और गहरे लाल कालीन पर पड़ती रोशनी सब कुछ इस घर की शान और ताक़त दिखा रही थी। लेकिन उस समय वहाँ सिर्फ़ एक ही शख़्स था जिसकी मौजूदगी हर कोने को भारी बना रही था – Vanya Chauhan।
काले रंग के बिज़नेस सूट में बैठी Vanya के चेहरे पर एक ठंडी कठोरता थी। उसकी आँखें इतनी गहरी और सख़्त थीं जैसे सामने वाले का क़त्ल बिना हथियार के कर दें। वो किसी आम इंसान की तरह नहीं, बल्कि एक शेरनी की तरह अपनी कुर्सी पर बैठी थी – जिस पर दुनिया झुकती है।
Vanya के हाथों में कॉफ़ी का कप था, लेकिन उसकी नजरें Ritika पर टिकी थीं, जैसे वो उसके हर फीलिंग, हर डर को पढ़ सकती हो। उसका हर मुस्कुराना, हर झुकना, और हर पल Ritika के लिए खतरे जैसा महसूस हो रहा था।
दरवाज़ा खुला। अंदर आई Ritika Singh।
साधारण सलवार-कुर्ते में, चेहरे पर मासूमियत और आँखों में डर और गुस्से का मिश्रण। उसके कदम भारी थे, लेकिन उसकी ठोड़ी ऊँची थी। वो जानती थी कि उसकी family की हालत खराब है, लेकिन वो खुद टूटने वाली नहीं।
Ritika ने अपने हाथ अपने सामने मोड़ लिए, जैसे खुद को संभाल रही हो।
“मैं इसे झेल लूंगी… किसी भी हाल में। लेकिन मैं डरने वाली नहीं। ये महल या जेल… फर्क सिर्फ़ perception का है।”
“तो तुम आ ही गईं…” – Vanya ने ठंडी आवाज़ में कहा, जैसे वो पहले से जानती हो।
“बैठो।”
Ritika ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।
“मैं बैठने नहीं आई। मुझे जवाब चाहिए – तुमने मेरे पापा के बिज़नेस में क्यों दख़ल दिया?”
Vanya हल्की हँसी हँसी।
“दख़ल? ओह Ritika, मैंने तो सिर्फ़ तुम्हारे पापा का क़र्ज़ चुका दिया। 50 करोड़ का छोटा सा favor… और बदले में मैं सिर्फ़ एक चीज़ चाहती हूँ।”
Ritika की साँस अटक गई।
“क्या?”
Vanya अपनी कुर्सी से उठी, धीरे-धीरे उसके करीब आई। उसकी ऊँची हील्स संगमरमर पर गूंज रही थीं। Ritika का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उसके कदम इतने confident थे कि Ritika को पहली बार असली डर महसूस हुआ – डर, लेकिन एक अजीब curiosity के साथ।
“ये कौन है… और इतनी ताक़त कैसे रखती है?” Ritika ने खुद से पूछा।
और क्यों दिल का एक अजीब हिस्सा उसे देखने के बाद बेचैन हो गया है?
Vanya उसके बिल्कुल पास आकर रुकी।
“तुम।”
Ritika का चेहरा सुन्न पड़ गया।
“क्या मज़ाक है ये?”
Vanya ने Ritika की ठुड्डी पकड़कर ऊपर उठाया। उसकी पकड़ सख़्त और हुकूमत से भरी थी।
“ये मज़ाक नहीं है, Ritika। ये तुम्हारी नई ज़िंदगी की शुरुआत है। तुम मुझसे शादी करोगी। और अगर मना किया… तो तुम्हारा परिवार सड़क पर आ जाएगा।”
Ritika की आँखें भर आईं। गुस्सा और बेबसी उसके पूरे जिस्म में काँप रही थी।
“ये ज़बरदस्ती है! ये शादी नहीं, ये सौदा है। तुम मुझे कैद कर रही हो।”
Ritika ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन Vanya की ताक़त और confidence ने उसे रोक दिया। वो पहली बार महसूस कर रही थी कि इस दुनिया में उसके पास अपनी कोई ताक़त नहीं है।
“मैं कभी हार नहीं मानूँगी… पर क्या मैं सच में उसके सामने खड़ी रह पाऊंगी?” Ritika ने खुद से कहा।
“क्या मेरे पास कोई रास्ता है… या मैं बस मजबूरी में उसकी दुल्हन बन जाऊँगी?”
Vanya की आँखों में एक पल के लिए अजीब सी चमक आई – जैसे उसे Ritika की बहादुरी पसंद आ रही हो।
वो और करीब झुकी, Ritika के कान के पास फुसफुसाई –
“जेल कहो या सौदा… फर्क नहीं पड़ता। तुम मेरी बनोगी। और कोई ताक़त मुझे रोक नहीं सकती।”
Ritika ने उसकी पकड़ झटक दी।
“तुम सोचती हो पैसा और ताक़त से सब खरीदा जा सकता है? तो सुन लो, मेरा दिल कभी तुम्हारा नहीं होगा।”
Vanya ने ठंडी मुस्कान दी।
“दिल? ओह Ritika, तुम्हारा दिल मुझे नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ़ तुम्हारा नाम, तुम्हारा साथ और तुम्हारी मौजूदगी चाहिए। तुम्हें चाहो या न चाहो – तुम मेरी दुल्हन बनोगी।”
Ritika का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसने खुद को समझाया कि ये सिर्फ़ एक शुरुआत है, और वो कभी टूटेगी नहीं।
लेकिन अंदर एक अजीब सी हलचल थी – डर और नफ़रत के बीच कहीं attraction की पहली झलक।
“मैं इससे नफरत करूँ या डर… या फिर ये अजीब खिंचाव मुझे अंदर से हिला रहा है?”
Ritika के गाल पर आँसू लुढ़क आए। वो चाहकर भी चुप नहीं रह पाई।
“तुम मुझे तोड़ नहीं सकती, Vanya। मैं तुम्हें कभी accept नहीं करूँगी।”
Vanya ने उसकी आँखों में गहराई से देखा।
“Challenge accepted, Mrs. Soon-to-be-Chauhan।”
उसकी आवाज़ में इतनी ताक़त थी कि पूरे हॉल की हवा भारी हो गई।
Ritika ने अपने हाथों को आपस में दबाया। वो जानती थी कि इस रात के बाद उसकी दुनिया बदल जाएगी। जेल या महल… फर्क अब सिर्फ़ perception का था। उसके लिए ये महल भी जेल था।
और फिर उसने खुद से कहा, “मुझे मजबूत रहना होगा। चाहे कुछ भी हो, मैं कभी हार नहीं मानूँगी। ये शेरनी जितनी भी ताक़तवर हो, मैं अपनी जगह बनाने की कोशिश करूँगी।”
Ritika ने एक गहरी साँस ली। उसकी आँखों में determination की चमक थी, लेकिन दिल में डर अभी भी मौजूद था।
उस रात Ritika ने तय कर लिया – चाहे ये शादी मजबूरी हो, लेकिन वो Vanya को कभी अपने दिल में जगह नहीं देगी।
Ritika ने खुद को संभाला और अपने आँसुओं को पोंछा।
“ये रात सिर्फ़ शुरुआत है… और मैं कभी हार नहीं मानूँगी। चाहे कितनी भी ताक़त सामने हो, मैं अपनी मर्यादा और खुद की इज़्ज़त बचा कर रहूँगी।”
वो एक पल के लिए खिड़की की ओर देखी, बाहर की चाँदनी हॉल में गिर रही थी।
“इस महल में मैं फँसी हो सकती हूँ, लेकिन मेरा मन और मेरी सोच हमेशा आज़ाद रहेगी। Vanya चाहे जितना दबाव डालें, मैं अपनी सीमाओं को कभी नहीं तोड़ने दूँगी।”
Ritika की आँखों में determination की चमक और दिल में हल्की धड़कन थी – डर, गुस्सा और शायद एक अजीब curiosity का मिश्रण।
“ये सिर्फ़ शुरूआत है…और मैं अपनी कहानी खुद लिखूँगी