क्या प्यार करोगे मुझसे? Ch. 1

क्या प्यार करोगे मुझसे? - Chapter 1

Posted by Divya yadav • Oct 11, 2025 04:17 PM

💔

"कोई तो होता जिससे मैं भी अपने दिल की बात कहती

पर ये तो मुमकिन ही नहीं!"

"कभी कोई मुझे भी अपनी बाहों में भरकर इकरार करता

पर ये सब तो मेरे ख्वाब हैं हसीं!"

"नहीं चाहिए साथ किसी का अब इस ज़िन्दगी में

क्योंकि कोई साथ निभाये मेरा, ये तो कभी होगा ही नहीं!"

"पहले परिवार ने मुँह मोड़ लिया मुझसे रिश्ता भी तोड़ लिया

जब साथ नहीं कोई अपना तो अब गैरों की भी कोई गुंजाइश बाकी रही नहीं!"

:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

उस खाली सी सड़क पर एक लड़की पैदल चली जा रही थी। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। पर आँखों में जैसे कोई दर्द था जो बाहर आने को बेताब थे। उसकी वो खूबसूरत सी कत्थई आँखें एकटक खाली सड़क को बस एकटक देख रही थी।

सफेद कलर का फूल लेंथ सूट पहना हुआ था उसने और उसका लाल दुपट्टा हवे में लहरा रहा था। उसके काले लंबे बाल बार बार उसके खूबसूरत चेहरे पर आ रहे थे पर उस लड़की को उनसे भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी।

अचानक उस लड़की के कदम रूक गए। जब उसकी नज़र सामने से आती एक स्पोर्ट्स कार पर पड़ी। वो तेज़ी से आगे बढ़ रही थी। अगले ही पल वो लड़की बीच सड़क पर उस गाड़ी के सामने खड़ी हो गई।

वो गाड़ी उस लड़की के एकदम पास आ कर तेज़ी से रुकी। उस लड़की ने हेडलाइट के कारण अपने हाथों से अपना चेहरा कवर कर लिया था।

उस गाड़ी का दरवाज़ा झटके से खुला और एक लड़का गुस्से से बाहर आया। उस लड़के ने गुस्से में उस लड़की की बाह पकड़ी और खींच के उसके गाल पर थप्पड़ मार दिया।

अचानक से हुआ क्या उस लड़की को कुछ भी समझ नहीं आया पर वो एकटक नज़रों से उस लड़के को देखने लगी।

उस लड़के ने गुस्से में अपने दाँत पिसते हुए कहा। "अगर मरने का इतना ही शौक चढ़ा है ना? तो कहीं और जा कर मरो समझी।" इतना कह कर उस लड़के ने उस लड़की को साइड में धकेल दिया। वो लड़की लड़खड़ा कर साइड में गिर गई। वो लड़का वापस अपनी गाड़ी में आ बैठा।

उस लड़के के बगल में एक लड़की बैठी हुई थी उसने तुरन्त उस लड़के के गाल पर हाथ फेरते हुए कहा! "बेबी तुम्हारे लिए इतना गुस्सा ठीक नहीं।"

उस लड़के ने खुद को नॉर्मल किया और हल्की स्माइल के साथ अपने बगल में बैठी लड़की की तरफ देखा तो वो भी मुस्कुरा दी। लड़के ने गाड़ी स्टार्ट की और वहां से चला गया।

वहीं सड़क पर पड़ी लड़की वैसे ही पड़ी थी। उसकी आँखों से आंसु निकल कर गाल पर आ गए। पर उसके चेहरे पर अब भी कोई भाव ना था। उसने बड़ी ही बेदर्दी से अपने आंसु पोछे और खड़ी हो गई। उसे पता ही नहीं था। की उसे जाना कहां है। वो बस ऐसे ही खाली सड़को पर चले जा रही थी।

वो लड़की ज्यादा दूर नहीं चली थी। जब किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वो लड़की झटके से पलटी तो सामने उसी की हम उम्र लड़की खड़ी थी। उसे देखते ही वो लड़की उससे लिपट गई।

"इतना कुछ हो गया फलक! और तुने मुझे बताना भी जरूरी नहीं समझा। अगर तेरे घर वालो ने तुझे निकाल दिया तो तु मेरे पास क्यों नहीं आई?" उस लड़की ने फलक को खुद से दूर कर के सवाल किया।

"मेरे सगे माँ बाप ने मुझे घर से निकाल दिया नैना! तु बता मैं किस पर भरोसा करूं। अपनी जान देने के सिवाय मेरे पास और.....!" इससे आगे फलक कुछ कहती नैना ने जोर से उसके गाल पर थप्पड़ जड़ दिया और उसे झंझोरते हुए बोली। "होश में रह कर बात कर फलक! तु तो ऐसी कभी नहीं थी। फिर एक इंसिडेंट.....!"

फलक ने गुस्से में नैना का हाथ झटक दिया और बोली। "वो सिर्फ इंसिडेंट नहीं था। नैना! मेरा बलात्कार हुआ है। जबरदस्ती हुई है मेरे साथ। मैने आवाज उठाना चाहा तो मेरे अपने माँ बाप ने मुझे घर से निकाल दिया। क्योंकि उनकी सो कॉल्ड इज्जत कम हो रही थी। इसमें मेरा क्या कसूर नैना! मेरा क्या कसूर! मैने क्या गलत किया नैना? क्या?" कह कर फलक वहीं घुटनों के बल बैठ कर रो पड़ी।

फलक को ऐसे देख नैना की भी आँखें भर आई। उसने नीचे घुटनों पर बैठ कर फलक को अपने सीने से लगाते हुए कहा। "तेरी कोई गलती नहीं है फलक! इसलिए ऐसा कोई कदम मत उठा। जिससे उस हैवान की हिम्मत बढ़ जाए। हम लड़ेंगे। तुझे इंसाफ जरूर मिलेगा। मैं दूंगी तेरा साथ।"

"सच में?" फलक नैना से अलग हुई और उसकी आँखों में देख कर उसने उससे सवाल किया। तो नैना ने हां में अपनी मुंडी हिला दी। फिर उसे उठा कर वो पास में ही मौजूद अपनी गाड़ी के पास ले गई।

"तुम्हें कैसे पता। इन सब के बारे में और तुम यहां कैसे?" फलक ने गाड़ी में बैठते ही नैना से सवाल किया।

आयुष का कॉल आया था। उसने मुझसे कहा। की मैं कैसे भी कर के उसकी दीदी को ढूंढ लूं और उनकी हेल्प करूं।

"आयु....!" फलक धीरे से बड़बड़ाई।

"हां आयु! और तु उसी आयु को छोड़ इतना बड़ा गुनाह करने चली थी। तु जानती है वो तुझसे कितना प्यार करता है?" नैना ने फलक को समझाते हुए कहा। तो फलक ने अपना सिर झुका लिया। एक उसका भाई ही तो था! जो उसे सपोर्ट करता था। पर वो आज कुछ नहीं कर पाया। उसके माँ बाप ने उसे कमरे में बंद जो कर दिया था। वैसे भी वो बारह साल का बच्चा क्या ही कर सकता था?

फलक को यूं चुप देख अब नैना भी खामोश हो गई और कुछ ही देर में उनकी गाड़ी एक बड़े से घर के सामने आ कर रुकी।

फलक यूं नैना के घर जाने में हिचकिचा रही थी। पर नैना उसे खींच कर अपने साथ अंदर ले गई।

नैना ने फलक को हॉल में बिठाया और खुद अपने मॉम डैड के रूम में चली गई। कुछ देर बाद नैना हल्की स्माइल के साथ उसके सामने आई और उसे अपने साथ अपने कमरे में ले गई।

"तेरे मम्मी पापा मुझे यहां रखने के लिए राजी हो गए?" फलक के इस सवाल पर नैना एक पल उसे देखती रही फिर उसने धीरे से ना में अपना सिर हिला दिया।

फलक कुछ पल नैना के चेहरे को देखती ही रह गई। जब उसके अपने माँ बाप ने उसे नहीं रखा तो फिर गैरो से उम्मीद करना उसके लिए बेफिजूल ही है।

To be continue:-

100%