His innocent obsession Ch. 1

कॉल सेंटर गर्ल

Posted by unicorngirl ✔️ • Oct 14, 2025 06:45 AM

नाइट क्लब मरीना...

क्लब के एक प्राइवेट एरिया में दो ब्लैक कलर के कपड़ों में बॉडीगार्ड खड़े थे और सोफे पर एक शख्स बैठा हुआ था। वे दोनों बॉडीगार्ड एक दूसरे को देखते हैं और फिर उस सोफे पर बैठे हुए आदमी को देखकर एक बॉडीगार्ड कहता है।

“ बॉस, मीटिंग का टाइम हो गया है। सामने वाली पार्टी ने दो बार फोन कर दिया है। उन्हें क्या कहना है? आप मीटिंग में आ रहे हैं या नहीं ।”

सोफे पर बैठा हुआ वह शख्स अपने सामने रखे हुए ड्रिंक का ग्लास उठाता है और उसे झटके से खत्म करते हुए वापस टेबल पर पटकते हुए अपनी लाल और नशीली आंखों से उस बॉडीगार्ड को गुस्से में देखता है और एक सर्द आवाज के साथ उससे कहता है, “ लगता है तुम नए हो यहां पर। इसीलिए तक्षक राणा के साथ सवाल जवाब करने की हिम्मत रख रहे हो।”

दूसरा बॉडीगार्ड जल्दी से सामने आता है और उस पहले बॉडीगार्ड को पीछे करते हुए अपना सर झुकाता है और तक्षक को देखते हुए कहता है, “ सॉरी बॉस, ये सच में आज ही आया है काम पर। इसलिए पता नहीं, कि आपके साथ कैसे बात करनी है। मैं इसकी तरफ से माफी मांगता हूं। वह क्या है ना सामने वाली डीलर पार्टी ने दो बार फोन कर दिया है। और वे लोग आपका इंतजार कर रहे हैं। वे लोग पैसा लेकर लोकेशन पर पहुंच गए हैं और आपके आने का इंतजार कर रहे हैं।”

तक्षक अपनी जगह से खड़ा होता है और घूर कर उस पहले बॉडीगार्ड को देखते हुए कहता है, “ आज से तुम्हारी ड्यूटी मेरे गार्डन में लगी। जहां पर तुम फूलों की देखभाल करोगे। क्योंकि तुम्हारे चेहरे पर जो डर है, वह तक्षक का बॉडीगार्ड बनने लायक नहीं है।”

उस बॉडीगार्ड की हालत खराब हो गई थी। सच में उसके माथे पर पसीना आ गया था, जब तक्षक ने उसे घूर कर देखा। उसने जल्दी से अपना पसीना पोंछा और हां में सर हिलाया। तक्षक अपने हाथों में वाइन की बोतल लेता है और प्राइवेट एरिया से निकल जाता है।

वह क्लब से बाहर निकलने ही वाला होता है, कि तभी एक शख्स उससे टकरा जाता है। क्योंकि तक्षक ने ड्रिंक की हुई थी, इसलिए वह थोड़ा संभल नहीं पाया और लड़खड़ा गया। उसके हाथों में जो वाइन की बोतल थी, उसमें से थोड़ी सी वाइन छलक कर सामने वाले के कपड़ों पर गिर जाती है।

पर वह लड़का जो सामने तक्षक से टकराया था, शायद किसी बड़े बाप की बिगड़ी हुई औलाद थी। उसने तुरंत खुद को संभाला और अगले ही पल तक्षक का गिरेबान पकड़ कर उसे गुस्से में कहने लगा, “ साले देखता नहीं है क्या? अंधा हो गया है? तूने मेरी इतनी महंगी जैकेट खराब कर दी।”

तक्षक की निगाहें सर्द हो गई थीं। उसने अपने गिरेबान को देखा, जिसे उस लड़के ने पकड़ा हुआ था, और अगले ही पल पूरे क्लब में सन्नाटा छा जाता है। म्यूजिक बंद हो गया था और जो लोग अपनी जगह पर नाच रहे थे, वे अपनी जगह पर ही रुक गए थे। सबके चेहरे पर डर और माथे पर पसीना आ गया था, क्योंकि एक गन शॉट की आवाज ने वहां के मस्ती भरे माहौल को डरावना कर दिया था।

वह लड़का जिसने तक्षक का गिरेबान पकड़ा था, वह जमीन पर पड़ा हुआ था और उसके माथे के बीचो-बीच से खून निकल रहा था। तक्षक के हाथों में एक गन थी। जैसे ही उस लड़के ने तक्षक का गिरेबान पकड़ा, तक्षक अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाया और अगले ही पल उसने कमर के पीछे से अपनी गन निकाली और अगले ही पल उस लड़के के माथे के बीचो-बीच गोली मार दी।

उस बंदे की मौत वहीं पर हो गई थी और उसकी लाश जमीन पर पड़ी हुई थी। सर के बीचो-बीच गोली लगी थी, वहां से खून निकल रहा था और उसका पूरा सर खून से भर गया था। आंखें खुल गई थीं और जबान बाहर आ गई थी।

तक्षक अपने पंजों के बल बैठता है और उसकी लाश को देखकर डरावनी तरीके से कहता है, “खिलौने से खेलने की उम्र में, बाप से पंगा नहीं लेना चाहिए।”

क्लब में एकदम शांति पसर गई थी। हालांकि बहुत सी आंखों ने तक्षक को यह मर्डर करते हुए देखा था, पर किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी, कि वह तक्षक के खिलाफ कुछ बोल सके। मैनेजर जल्दी से वहां आते हैं और तक्षक को घबरा कर देखते हुए कहते हैं, “ सर, आप क्यों परेशान हो रहे हैं? आप जाइए यहां से। मैं ये सब हैंडल कर लूंगा।”

तक्षक खड़ा होता है और उस मैनेजर के कंधे थपथपाते हुए कहता है, “ इसीलिए तो तुम्हें हड्डी देता हूं, ताकि तुम गंदगी साफ कर सको।”

तक्षक वहां से निकल जाता है और मैनेजर घबराते हुए उस लाश को देखकर परेशान होते हुए कहता है, “ अब इसका मैं क्या करूं? ये कोई छोटा-मोटा इंसान थोड़ी ना था। पॉलिटिशियन का बेटा था। एक तरफ माफिया, दूसरी तरफ पॉलिटिशियन। मतलब एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई। पर कुछ भी हो मुझे इसकी लाश इसके घर तो भेजनी ही होगी ना।”

मुंबई.. माता का मंदिर

एक लड़की जिसने चूड़ीदार सूट सलवार पहन रखा था, वह माता के मंदिर की सीढ़ियां नंगे पैर चढ़ रही थी। उसके दोनों हाथ जुड़े हुए थे और उसके खुले बाल हवा में लहरा रहे थे। और कानों में पड़ी कुंदन की बालियां हवा में इधर-उधर झूल रही थीं।

सर्दी तो नहीं लगी थी, लेकिन वह अपनी नाक को बार-बार ऊपर की तरफ खींच रही थी। शायद अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रही थी। गुलाबी लिप ग्लोज में लिपटे हुए उसके होंठ धीरे-धीरे बुदबुदा रहे थे, शायद वह कोई शिकायत कर रही थी या फिर कोई मंत्र पढ़ रही थी। अब ये तो वही जाने की मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते वक्त वह क्या कह रही थी।

जैसे ही सारी सीढ़ियां खत्म हो जाती हैं और उसे माता की प्रतिमा नजर आती है, वह गुस्से में भड़कती हुई माता की प्रतिमा के पास जाती है और अपना एक हाथ उठाकर मंदिर के घंटे को बार-बार बजाने लगती है। करीब 10 से 15 बार जब उसने मंदिर की घंटी को बजाया, उसके बाद उसने गुस्से में माता रानी को देखा और अपने दोनों हाथ गुस्से में जोड़ते हुए बोली।

“ मम्मी क्या मांगा था मैंने आपसे? मेरी छोटी सी विश आप पूरी नहीं कर सकती हैं? मतलब हद होती है, लोग आप से इतना सब कुछ मांगते हैं और बदले में आपका हाल-चाल भी नहीं पूछते हैं।

मैं तो रोज आकर आप से यही कहती हूं, मम्मी आप ठीक हो ना? आपको कोई परेशानी तो नहीं है ना? आपने ठीक से खाना खाया? आपको सर्दी तो नहीं लगी है ना? गर्मी में आपको पसीना तो नहीं आता है ना? मेरी सैलरी मिलेगी, तो मैं आपके लिए पक्का नई साड़ी लेकर आऊंगी। बस मेरी नौकरी बचाए रखना।

लेकिन मम्मी आपने तो मेरी ऐसी हालत कर दी है, जहां पर वे लोग मुझे इस महीने के आखिरी में नौकरी से निकालने वाले थे, वहीं पर मुझे आज कल में निकालने की बात कर रहे हैं। मतलब आप मेरी एक छोटी सी नौकरी भी नहीं बचा कर रख सकती हैं। ज्यादा नहीं कम से कम में एक क्रेडिट कार्ड तो बेचने दिया होता ना।

पूरे महीने जीरो पर कौन रहता है? आप जानती हैं मम्मी मैं एक कॉल सेंटर में काम करती हूं। वहां पर मुझे रोज़ एक नया क्रेडिट कार्ड बेचना होता है। लेकिन मैं पिछले 1 महीने से कोई सेल कर ही नहीं पाई हूं। पिछला महीना तो जैसे तैसे गुजर गया, क्योंकि मैं नई एम्पलाई थी। तो कंपनी ने मुझे एक महीने का टाइम दिया था सीखने के लिए। और उस एक महीने में भी मैंने कोई क्रेडिट कार्ड नहीं बेचा था और इस महीने तो हद हो गई है।

मतलब जो लोग मेरे बाद आए थे, वे भी 10-10 क्रेडिट कार्ड बेच कर बैठे हुए हैं और मैंने एक भी क्रेडिट कार्ड नहीं बेचा है। मुझे तो मैनेजर साहब ने बोल भी दिया है, कि अगर महीना खत्म होने से पहले मैंने एक क्रेडिट कार्ड नहीं बेचा तो वह मुझे नौकरी से निकाल देंगे। आप तो जानती हैं ना मम्मी ये नौकरी मेरे लिए कितनी जरूरी है। आप तो सब जानती हैं और सब कुछ जानती हैं।

इस समय मुझे नौकरी की कितनी जरूरत है और मैं इस नौकरी को खो नहीं सकती हूं। अगर ऐसा हुआ तो बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी। प्लीज मम्मी आपसे रिक्वेस्ट है, कि आज कैसे भी करके मेरा एक क्रेडिट कार्ड बिकवा देना। ताकि मेरी नौकरी बची रहे। महीना खत्म होने में अभी भी चार दिन बाकी हैं। इस महीने सबसे ज्यादा क्रेडिट कार्ड बेचने वाली बबीता है। पूरे महीने में 40 क्रेडिट कार्ड बेचे हैं। मैं ये नहीं कह रही हूं, मुझे बबीता से आगे जाना है। बस मेरी नौकरी बची रहे इतना कर दीजिए मम्मी।”

माता रानी से अपने दिल की बात कह कर वह लड़की हाथ जोड़ती है और पलट कर जाने ही वाली होती है, कि तभी पुजारी जी उसको देख कर मुस्कुराते हुए कहते हैं, “ फिर से अपनी मां से शिकायत कर रही थी? मयूरी बेटा…”

मयूरी मुस्कुराते हुए पंडित जी के पास आती है और हां में सर हिलाते हुए कहती है, “ और क्या करूं पंडित जी? मेरी बातें सुनने वाला यहां है ही कौन? इसीलिए अपनी मां से ही अपने दिल की बात करती हूं। मां के जाने के बाद तो यही मेरी मां है। जानती हूं ये जगत की माता है। मेरे लिए तो ये मेरी मम्मी है। बस पंडित जी किसी तरीके से इतने सारे बच्चों के बीच मम्मी तक मेरी भी आवाज चली जाए और वह मेरी नौकरी बचा ले।”

पंडित जी हंसते हुए मयूरी के हाथ में प्रसाद रखते हैं और एक कलावा उठा कर उसके हाथ में बांधते हुए कहते हैं, “ तुम फिकर मत करो बेटा। माता अपने भक्तों की हमेशा सुनती है और तुमने तो माता रानी को अपनी मां कहा है। तुम्हारी बात भी वो जरूर सुनेगी। देखना तुम्हारी नौकरी नहीं जाएगी।”

माता रानी का कलावा अपने हाथ में बंधा हुआ देख कर मयूरी मुस्कुरा देती है और प्रणाम करते हुए मंदिर से चली जाती है। जाने से पहले वह पलट कर एक बार माता रानी की उस मुस्कुराती हुई प्रतिमा को देखती है, जैसे माता की वह मुस्कुराती हुई मूर्ति मयूरी से कह रही हो, कि तुम फिकर मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं।

मंदिर से निकलकर मयूरी जल्दी से ऑटो लेती है और क्रेडिट कार्ड सेल कंपनी मैं जाती है, क्योंकि मयूरी वहां के कॉल सेंटर पर एक टेलीकॉलर की जॉब करती थी।

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