आअह्ह्ह्........ (Forced wife) - Chapter 2
आज भारद्वाज मेंशन को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
हाल में नीलिमा, नरेन की माँ, तैयारियों का जायज़ा ले रही थीं, जबकि कौशल्या, नरेन की दादी, मुहूर्त की जल्दी के बारे में चिंतित थीं। कौशल्या ने नीलिमा से नियति के बारे में पूछा, जो सो रही थी। कौशल्या ने जूही को नियति को जगाने के लिए भेजा। नियति, जो शादी के लिए तैयार होने वाली है, को तैयार होने के लिए एक लाल जोड़ा दिया गया। जूही ने नियति को दुल्हन के जोड़े में तैयार किया, हालाँकि नियति को उस आदमी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी जिससे वह शादी करने जा रही थी।
अब आगे
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नियति और जूही दोनों नीचे आ जाती हैं और जब वे हाल में पहुँचती हैं तो सभी लोगों की नजर उन पर जाती है और पूरे के पूरे भारद्वाज परिवार के नौकर और पूरा भारद्वाज परिवार वहाँ पर मौजूद था,
बाकि वहाँ पर किसी भी मेहमान को नहीं बुलाया गया था। मेहमान के नाम पर बस एक दो लोग ही थे।
नीचे आते ही नियति को सीधा मंडप में बैठा दिया जाता है और जैसे ही वह मंडप में बैठती है तो पंडित जी वहाँ पर ऑलरेडी शादी की रस्में शुरू करने के लिए तैयार बैठे थे। वह उसके बैठते ही वहाँ पर मंत्र शुरू कर देते हैं।
इस शादी की एक खास बात थी, इस शादी में कोई दूल्हा नहीं था, बस अकेली दुल्हन थी जो चुपचाप सारी रस्म निभा रही थी। उस दुल्हन के चेहरे पर कोई भी इमोशन नहीं था,
ना ही वह यह सवाल कर रही थी कि दूल्हा कहाँ पर है।
ना हि उसकी नजर दूल्हे को ढूंढने में लगी हुई थी, वह बस पंडित जी जैसे-जैसे उसको बता रहे थे, वैसे-वैसे किया जा रही थी।
वहीँ वहाँ पर जितने भी लोग थे, वे कुछ भी नहीं बोल रहे थे, ना ही किसी ने यह सवाल उठाया कि दूल्हा कहाँ पर है।
ये अनोखी शादी कैसे बिन दूल्हे के होने लग रही है?।
शादी में दूल्हा नहीं होगा तो शादी कैसे होगी,
कोई भी यह सवाल नहीं कर रहा था बस चुपचाप सभी लोग बिना दूल्हे वाली इस शादी को देखने लग रहे थे।
दूसरी तरफ
एक बड़े से प्राइवेट ग्राउंड में एक प्राइवेट जेट नीचे उतरता है। उस जेट के नीचे उतरते ही वहाँ पर बहुत सारे बॉडीगार्ड आ जाते हैं और उनमें से एक बॉडीगार्ड जा करके उस जेट का गेट खोल देता है।
जैसे ही उस बॉडीगार्ड ने जेट का गेट खोला तो उस में से एक आदमी बाहर आता है और वह आदमी बाहर निकाल कर इधर-उधर देखने लगता है। उस आदमी ने अपने हाथों में बैसाखी पकड़ी हुई थी और वह वैसाखि के सहारे ही चल रहा था, लेकिन उस आदमी का औरा इतना खतरनाक था कि कोई भी उसके सामने ज़ुबान नहीं निकाल पा रहा था और उसका रुतबा सब कुछ जाया कर रहा था कि वह कितना पावरफुल इंसान है।
वह आदमी अभी इधर-उधर देख ने ही लग रहा था तभी उसके पास एक आदमी आता है और वह कोई और नहीं बल्कि उस बैसाखी वाले आदमी का असिस्टेंट है जिसका नाम पंकज है। वह उस आदमी के पास जाते हुए अपने एक मुस्कान के साथ कहता है,
"वेलकम टू इंडिया सर।"
पंकज ने उस आदमी को ग्रिट किया, लेकिन उस आदमी ने कुछ भी नहीं कहा, बस वह अपनी भारी आवाज में कहता है,
"जल्दी से हमें घर जाना है।"
इतना कहकर अगले ही पल वहाँ पर उसके सामने कार रुक जाती है। वह उस कार के अंदर बैठ जाता है।
और तभी की तभी वे सभी कारें भारद्वाज मेंशन के लिए निकल जाते हैं और भारद्वाज मेंशन के सामने जाते हुए कार रूकती है। कार का गेट खुलते ही पंकज उस आदमी को मेंशन के अंदर ले जाता है।
इधर यह सख्स मेंशन के अंदर जाता है वहीँ मेंशन के अंदर पंडित जी नियति से शादी के रस्म करवा रहे थे और अब बारी आती है मंगलसूत्र, सिंदूर की।
पंडित जी नियति से कहते हैं,
"अपने गले मे अपने पति के नाम का मंगलसूत्र पहन लो और अपनी मांग में सिंदूर भर लो।"
नियति कुछ भी नहीं कहती है, वह अपने हाथों से ही अपने मंगलसूत्र को अपने गले में पहन लेती है और अपने हाथों से ही अपनी मांग भर लेती है।
जैसे ही नियति ये रस्म पूरी करती है तो पंडित जी उसको बोलते हैं,
"ये शादी संपूर्ण हुई, अब तुम नरेन भारद्वाज की धर्मपत्नी बन चुकी हो।"
पंडित जी ने जैसे ये कहा तो नियति कुछ भी नहीं करती है, बस वह पत्थर सी बनी बस चुपचाप बैठी हुई थी।
इधर शादी संपन्न होते ही गेट से वह सख्स अंदर एंट्री करता है। उस की नजरे सबसे पहले नियति पर ही जाती जो मंत्रीमंडप में दुल्हन बनी बैठी हुई थी,
जिसके चेहरे पर कोई भी इमोशन नहीं थे।
वह एक मूर्ति की तरह लग रही थी और उसके गले में मंगलसूत्र और मांग में किसी के नाम का सिंदूर पड़ चुका था, जो बिना दूल्हे के ही किसी की पत्नी बन चुकी थी।
नियति को इस हालत में देखकर उस आदमी की आँखें एकदम से कठोर हो जाती हैं और वह अपनी सख्त आँखों से नियति को देखता है, उसके भाव देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसको इस शादी को देख कर के खुशी नहीं हुई।
रात के वक्त
नियती अभी भी दुलहन के जोड़े में थी और अब रात हो चुकी थी और नियति के साथ जूही भी बैठी थी, दोनों रुम में बैठी हुई थी,
कुछ समय बाद जूही नियति को एक रूम के बाहर लेकर आती है और वे दोनों उस रूम के दरवाजे को खड़ा देख रही थी। वहीँ नियति की साँस तो अटकी हुई थी।
नियति उस दरवाजे को देखती है और अगले ही पल वह जूही का हाथ कस कर पकड़ते हुए बोलती है,
"जूही मैं नहीं जाऊँगी अंदर, मुझे नहीं जाना, मुझे बहुत डर लग रहा है,,
पता नहीं मैं कैसे ये सब करूँगी।"
नियति की बात सुनकर मिस्टी उसको डांस बनाते हुए बोलते, "अंदर तुम्हें जाना पड़ेगा नियति, इसके अलावा तुम्हारे पास कोई और ऑप्शन नहीं है और आज से ये तुम्हारा रूम है। अब तुम अंदर जाओ।" जूही की बात सुनकर नियत मुँह बना लेती है और उसके चेहरे पर ड्रेस आप चालक रहा था और वह डरते हुए बोलती है, "जूही तुम जानती हो ना मुझे कितना डर लगता है उनसे, उनकी एक बार मैंने आवाज़ ही सुनी थी, उनकी आवाज़ बेहद डरावनी अभी तो मैंने उनको देखा भी नहीं है, जब देखूंगी तो पता नहीं मेरा क्या हाल होगा।" तभी नियति को जूही समझते हुए कहती है, "नियति अब तुम मेरी भाभी बन गई हो और तुमने भाई से शादी की है तो तुम्हें उनके साथ ही रहना होगा और यही तुम्हारा रूम है और अब उनकी आवाज़ तो क्या तुम्हें उनका चेहरा भी दिन रात देखना पड़ेगा और उनके साथ एक ही रूम में तुम्हें रहना होगा।"
जूही की बात सुनकर नियति बेहद डर जाती है और वह डरते हुए उस दरवाजे को देखने लगती है।
नियती को बेहद ज्यादा डर लग रहा था और नियति की शादी अब भारद्वाज परिवार के मालिक से हो चुकी थी। नियति ने अब तक अपने मालिक को नहीं देखा था, उसने बस उसकी एक बार आवाज़ ही सुनी थी जिसको सुनते ही नियत के हाथ पैर कांपने लग गए थे,
लेकिन अब उसने उससे शादी कर ली थी और उसको उसके साथ रहना था, जिसकी शक्ल तक नियति ने नहीं देखी थी। नियत यहाँ पर सालों से रहती आई है, लेकिन उसने कभी भी अपने मालिक का चेहरा नहीं देखा था, उसने सिर्फ सबके मुँह से यही सुना था कि वह बहुत ही ज्यादा खड़ूस है, इसलिए नियति कभी भी भूल से भी उसके सामने नहीं आना चाहती थी और जब नियति ने उसकी आवाज़ सुनी थी तो नियति के हाथ पैर फूल गए थे।
लेकीन अब नियती को उस शख्स के साथ रहना था जिसकी आवाज़ से वह इतना डर चुकी थी। अब वह उस की वाइफ बन चुकी थी और उस आदमी के साथ उस को एक रूम के अंदर ही रहना था।