भेड़िया
एक बड़े से घने जंगल में…
वह सिर्फ भागे जा रही थी। उसे रास्ता नहीं पता था । लेकिन उसके पैर रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वो बदहवास सी भागे जा रही थी। उसके कपड़े भी कई जगह से फट गए थे। और चेहरे पर पसीना उतर आया था।
बाल हवा में लहरा रहे थे और पैरों में रफ्तार कम नहीं हो रही थी। वह जंगल में अंधेरे में कहीं भागती जा रही थी। उसे बस इस अंधेरे से बाहर निकलना था। उसे रोशनी की तलाश थी। पर रोशनी उसे कहीं नजर ही नहीं आ रही थी।
अचानक से भागते भागते उसके पैर एक पत्थर से टकरा जाते हैं और वह जमीन पर गिर जाती है। उसने बहुत मुश्किल से अपने आप को संभाला और अपनी जगह पर खड़ी हुई। वह फिर से भागने के लिए आगे बढ़ रही थी, कि तभी वह किसी के चौड़े सीने से टकरा गई। उसकी आंखें एकदम डर से बड़ी हो गई और वह हैरानी से उस शैतान को देखने लगी । जिसकी आंखों में सिर्फ उसे हैवानियत नजर आ रही थी।
उसके पूरे चेहरे पर खून लगा हुआ था और वह शैतानी हसी हंस रहा था। उसके मुंह से भी खून टपक रहा था । यह कोई इंसान नहीं है, यह एक भेड़िया है और वह भेड़िया उसका शिकार करने के लिए आगे आ रहा है । कहने के लिए तो वह एक इंसानी रूप में है । लेकिन उसके चेहरे पर जो दहशत थी, वह देख कर कोई भी उसे शैतान ही समझेगा।
अचानक से उस लड़की को अपने आसपास का जंगल छोटा होता हुआ नजर आ रहा था। और उसे ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे उसके पीछे भागने के लिए जगह ही नहीं है।
उस लड़की को अपने आसपास कहीं पर भी रास्ता नजर नहीं आ रहा था। वह यहां कैद हो गई थी। वह जल्दी से यहां से निकलना चाहती थी । इसके लिए वह अपने हाथों से रास्ता तलाश करने लगती है। पर अगले ही पल कोई उसके बालों को पकड़ कर अपने सामने कर लेता है।
वह लड़की देखती है, तो सामने वही भेड़िया हैवान खड़ा है और अपनी लाल आंखों से उसे घूरते हुए देख कर कहता है, “ तुम मेरी कैद से कभी नहीं निकल सकती हो।”
और इसी के साथ बिस्तर पर सो रही इश्क के मुंह पर पानी का एक फवारा आ जाता है।
इश्क अपने बिस्तर पर उठ कर बैठ जाती है और जोरो से सांस लेने लगती है। उसका शरीर गीला हो गया था और उसके बालों से भी पानी टपक रहा था । वह हैरान नजरों से अपने सामने खड़ी अपनी मां को देखती हैं, जो गुस्से में अपने दोनों हाथ कमर पर रखते हुए कहती है, “ किससे बच रही है तू सपने में ? कौन है जो तुझे सपने में किडनैप कर रहा है ?”
इश्क ने जोरों से सांस लेते हुए अपनी मां को देख कर कहा, “ वह भेड़िया फिर मेरे सपने में आ गया था।”
इश्क की मां ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा, “ पता नहीं कौन सा भेड़िया है ? जो बार-बार तेरे सपने में आ जाता है। जिसका खुद का दिमाग ठिकाने पर नहीं है। पता नहीं वह लोगों के दिमाग का इलाज कैसे करती है? किसने तुझे बना दिया साइकैटरिस्ट। जिसे यह तक पता नहीं है, कि 9:00 बजने वाले हैं। और उसे अस्पताल जाना है”
इश्क की नजर जैसे ही घड़ी पर जाती है वह चिल्लाते हुए कहती है, “ मां आपने मुझे उठाया क्यों नहीं ? मुझे हॉस्पिटल जाना है। एक नया कैस आया है। मुझे कल रात ही उसके बारे में पता चला था। ओह गॉड में आज अपने नए केस के लिए पहले दिन ही लेट हो जाऊंगी..।”
इश्क भागते हुए बाथरूम में घुस जाती है और जल्दी से तैयार होने लगती है। पता नहीं कैसे वो ठंडे पानी से नहा कर जल्दी से आधे घंटे में तैयार हो गई । क्योंकि उसे अगले आधे घंटे में ही हॉस्पिटल पहुंचना था। उसके बाल अभी भी गीले थे ।
वह गिले सूखे बालों के साथ ही बाहर डाइनिंग टेबल पर आती है और पराठे को अपने हाथों में रोल करने लगती है । इश्क की मां ने जल्दी से कहा, “ अरे आराम से बैठ कर नाश्ता तो कर ले।”
लेकिन इश्क ने आधा पराठा लगभग अपने मुंह में भरा और उसे चबाते हुए ही अपनी मां से कहने लगी, “ नहीं बहुत लेट हो जाएगा।”
साइकेटरिस्ट डॉक्टर इश्क शर्मा.. 26 साल की एक खूबसूरत लड़की है। जिसने अभी-अभी अपनी साइकैटरिस्ट की पढ़ाई कंप्लीट की है। उसे बचपन से ही पढ़ने का शौक था। और खास कर के उसे लोगों का दिमाग पढ़ने का शौक था।
इसीलिए उसने फैसला किया, कि वह एक साइकैटरिस्ट बनेगी। उसे बचपन से ही इस बारे में जानने में बहुत इंटरेस्ट था, कि लोग कैसे सोचते हैं ? क्या देखते हैं ? और जो देखते हैं उसका उनके दिमाग पर कैसा असर पड़ता है? कोई व्यक्ति अगर दुखी होता है, या फिर गुस्सा होता है, या फिर रोता है, या नफरत और प्यार करता है। तो उसके दिमाग का इन सब का कैसा प्रभाव पड़ता है ? उसे इन सबको जानने का बचपन से ही बहुत ज्यादा शौक था।
यह बात तो वह पहले से ही जानती थी, कि फिलिंग्स किसी भी इंसान को समझने का सबसे बेस्ट जरिया होता है । लेकिन उनका दिमाग उनकी फिलिंग्स को कम या ज्यादा कर देता है।
कुछ लोग होते हैं, जो दुख में रोते हैं । तो कुछ मुस्कुरा देते हैं । कुछ लोग होते हैं, जो गुस्सा होने पर गुस्सा करते हैं। लेकिन हंसते भी हैं। प्यार करना या फिर प्यार को समझना, मारना, पीटना यह सब चीजे हमारे दिमाग की पैदाइश होती है।
क्योंकि दिल इन सब से अलग होता है। दिल सिर्फ महसूस किया जाता है । लेकिन दिमाग हर चीज को महसूस करने से पहले वह उन्हें परखता है। बस इसीलिए इश्क ने एक मनोवैज्ञानिक बनने का डिसीजन लिया था। उसने इसके बारे में छोटे से छोटा अध्ययन भी किया है। और उसकी प्रेक्टिस के दौरान ही उसे अपनी लाइफ के बहुत अच्छे-अच्छे एक्सपीरियंस कैस भी मिले हैं।
डॉ इश्क इस समय इंदौर के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल मैं एक साइकैटरिस्ट की पोस्ट पर काम करती है । और यहां उसे ज्वाइन किए हुए अभी सिर्फ दो महीने ही हुए हैं। इससे पहले वह प्रैक्टिस के दौरान अपने सीनियर्स के साथ दिल्ली हॉस्पिटल में प्रेक्टिस किया करती थी। पर जब उसे अपने ही शहर के अस्पताल से जॉब का ऑफर मिला, तो उसने इसे एक्सेप्ट कर लिया था।
अपनी गाड़ी से उतरकर इश्क सीधे रिसेप्शन एरिया पर जाती है। जहां पर मुस्कुराते हुए रिसेप्शनिस्ट नेहा उसका वेलकम करती है, “ गुड मॉर्निंग डॉक्टर…”
रिसेप्शनिस्ट के पास पहुंचकर इश्क अपना बैग रिसेप्शन काउंटर पर रखती है और नेहा को मुस्कुराते हुए गुड मॉर्निंग विश करती है। वह पेन उठाती है और वहां पर रखे रजिस्टर में उसकी आज की एंट्री कर रही थी।
रिसेप्शनिस्ट नेहा ने धीरे से इश्क के कानों में झुकते हुए कहा, “ आज पूरे 5 मिनट लेट है .. तो प्लीज 10:05 का टाइम डालिए।”
इश्क ने घूरते हुए रिसेप्शनिस्ट को देखा और फिर हंसने लगी। दरअसल नेहा और इश्क एक दूसरे के साथ काफी कंफर्टेबल होकर बात किया करते थे। इसका एक रीजन यह भी था, कि नेहा और इश्क एक ही सोसाइटी में रहते थे। और इसीलिए अक्सर उनकी बातें हुआ करती थी। कहने के लिए वह दोस्त तो नहीं थे। लेकिन दोस्त से कम भी नहीं थे।
इश्क ने वापस पेन को रजिस्टर में रखते हुए कहा, “ यार सच बताऊं नेहा आज मैं घोड़े बेचकर सो रही थी। नहीं नहीं घोड़े नहीं पूरे घोड़े का अस्तबल बेचकर सो रही थी । मुझे इतनी गहरी नींद लगी थी, कि मुझे होस ही नहीं रहा, कि आज सुबह मेरा एक केस है।”
“ अगर आपने अपने सारे अस्तबल के घोड़े बेच दिए हैं और अब आप नींद से जाग कर फ्रेश फील कर रही है , तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता देती हूं कि डॉक्टर इश्क आपका पेशेंट आपका इंतजार कर रहा है।”
नेहा ने भी एक शरारती मुस्कान के साथ इश्क को देखते हुए कहा। तो इश्क की आंखें एकदम से बड़ी हो जाती है और वह घबराते हुए कहती है, “ क्या कब से..?”
“ यही कोई आधे घंटे से..।” नेहा ने भी बेफिक्री के साथ कहा और इश्क के हाथों में पेशेंट की फाइल रख दी । इश्क अपना सर पीट लेती है। वह जल्दी से अपना बैग लेती है और तुरंत लिफ्ट की तरफ चली जाती है। उसे जल्दी से अपने फ्लोर पर पहुंचना था। एक साइकैटरिस्ट होने के नाते वह लेट नहीं हो सकती थी और तब तो बिल्कुल भी नहीं, जब पेशेंट पहले से ही उसका इंतजार कर रहा हो।