Married to his madness Ch. 2

ACP's Relentless Love - Chapter 2

Posted by Shadow Author 24 • Nov 29, 2025 10:23 AM

तो आदर्श मुंह बनाते हुए उससे बोला !" क्या भाभी आप भी ना जीजू की तरह मुझे चिढ़ा रही है , ये नहीं की अपनी बहन को यहां मेरे पास मंडप में लेकर आए , आपको पता है ना आज इस दिन को लाने के लिए उसको अपना बनाने के लिए मैंने कितने पापड़ बेले हैं  , क्या कुछ नहीं किया आज के इस दिन को लाने के लिए मैंने , फिर भी आप इस तरह बात कर रही हैं।

उसकी बात सुनकर अंजना मुस्कुरा उठी , वो उसकी बात का जवाब देती , कि तभी जीजू अपना गला खखारते हुए आदर्श की तरफ झुकते हुए उसके कान में बोले!" लीजिए साले साहब अब बातें बनाना छोड़िए , आपका इंतजार खत्म हुआ , (आदर्श की आंखों में असंमजता देख) सामने देखो साले साहब फलक से उतरकर परी आ रही है आपकी होने के लिए,  देखिए तो सही कितनी प्यारी लग रही है आपकी आराध्या!

अपने जीजू की बात सुनकर आदर्श ने धड़कते दिल के साथ अपनी नजर घूमाकर सामने सीढिंओ की तरफ देखा तो एक पल के लिए उसकी सांसे थम सी गई और नजरे आराध्या पर रुक गई , लाल रंग के लहंगे और पूरी तरह से दुल्हन के लिवाज में आज सजी-धजी आराध्या इस वक्त उसे आसमान से उतरी हुई परी की तरह लग रही थी , जो सिर्फ उसके लिए ही इस दुनिया में आई थी , जैसे-जैसे आराध्या उसकी तरफ बढ़ रही थी वैसे-वैसे आदर्श को अपनी दुनिया बदलती हुई महसूस हो रही थी। अपनी जिंदगी में अपने हमसफर के आने की खुशी उसके दिल को गुदगुदा रही थी , आज से उसकी जिंदगी में एक ऐसा इंसान शामिल होने वाला था , जो कि सिर्फ उसकी ही और सिर्फ उसकी ही रहेगी , जिस पर सिर्फ उसका हक होगा जो सिर्फ उसकी होगी , उसका प्यार उसकी आराध्या आज हमेशा के लिए उसकी जिंदगी में आ रही थी अब से वो सिर्फ अपनी आराध्या के लिए जिएगा और उसकी आराध्या सिर्फ उसके लिए , दोनों जिंदगी भर हमेशा एक साथ रहेंगे , दोनों का अपना एक घर होगा ,जिसमें उनके अपने हसीन लम्हे होंगे , उनकी अपनी फैमिली होगी , उनके अपने बच्चे होंगे , यही सोचकर उसके दिल में अलग सी हलचल होने लगी थी ।

सोचते हुए वो अपनी नज़रें झुका कर शर्माहट में मुस्कुराने लगा , वही उसकी इस मुस्कुराहट को देखकर आराध्या चिढ़ गई  , तभी जीजू मुस्कुराते हुए धीरे से  उसके कान में बोले!" ओहो कोई तो रोक लो लड़के को मोहब्बत में पगला गया  है ये , क्या हुआ साले साहब क्या सोचकर मुस्कुरा रहे हो , मुझे भी बताओ ना , तो हम भी तुम्हारी हंसी में शामिल हो जाए ।

तो आदर्श ने मुस्कुराते हुए ना मैं अपना सर हिला दिया !क्या जीजू आप भी ना ऐसा कुछ भी नहीं है कहते हुए उसने जैसे ही आराध्या की तरफ देखा , तो उसकी आग उगलती आंखों को देख साथ ही उसके चेहरे पर बेइंतहा गुस्सा देखा आदर्श की हंसी गायब हो गई और उसकी सिटी पट्टी गुम हो गई , वो अपनी जगह पर सिमट गया ... फिर धीरे से अपनी भाभी अंजना जो कि अभी भी उसके पास बैठी हुई थी और मुस्कुराकर अपनी बहन को देख रही थी उनके कान में उनसे बोला!" भाभी ये आज आपकी बहन बम का गोला क्यों बनी हुई है , ऐसा लग रहा है किसी भी वक्त बस फट ही जाएगी और इसकी आंखों को देखो कैसे आग ऊगल रही है , क्या कुछ हुआ है क्या जो ये तीखी मिर्ची इतनी गुस्से में है।

उसकी भाभी अंजना ने जब उसकी बात सुनी तो उसे ज़ोर की हंसी आ गई , पर उसने मुंह पर हाथ रख अपनी हंसी को रोक लिया और धीरे से आदर्श के कान में बोली!" देवर जी अब बम का गोला कहो या तीखी मिर्ची जो भी है,  अभी से आपको ही झेलना है इसे वैसे भी आपको ही तो बड़ा शौक चढ़ना ना आग से खेलने का खतरों के खिलाड़ी बनने का , तो लो हमने आपको बम ही थमा दिया , अब खेलते रहना जिंदगी भर इसके साथ , रही बात तिखी मिर्ची की , तो तीखा भी आपको बहुत पसंद है ना , घर में सबसे ज्यादा तीखा आप ही खाते हो तो अब इसे भी आप ही झेलना ।

तो आदर्श धीरे से उनसे बोला !" भाभी एक बात बताओगी ,,, अंजना ने उसकी तरफ देखा। तो आदर्श फिर से बोला !" आप इतनी स्वीट इनोसेंट भोली भाली कैसे हो , जबकि आप ये बहन इतनी नकचड़ी है , ऐसा क्यों , आप दोनों में इतना डिफरेंस क्यों है , मतलब आप सब से इतना प्यार से पेश आती हो , कितने प्यार से बोलती हो ऐसा लगता है जैसे मुंह से फूलों की बारिश हो रही हो , आपकी बोली भी चाशनी में डूबे हुए रसगुल्ले की तरह लगती है, वही आपकी ये बहन एकदम नकचड़ी किसी से सीधे मुंह से बात भी नहीं करती बोलती है तो ऐसी लगती है जैसे आग ऊगल रही हो , तो अंजना मुस्कुरा कर धीरे से उससे बोली !" अब हम क्या कर सकते हैं देवर जी , इतिहास गवाह है इस बात का घर की बड़ी बेटी जितनी सीधी शादी भोली भाली होती है ना छोटी उतनी ही बिंदास नकचढ़ी और गुस्सेल होती है , अब मैं भोली भाली तो आपके भाई के नसीब में आ गई और बच गई मेरी नकचड़ी बहन जिझसे प्यार भी आपको हुआ और जो आपके हिस्से में आ गई ,  पर क्या कर सकते हैं अब आपकी किस्मत में शायद यही तीखी मिर्ची लिखी थी , अब तो भगवान ही आपको बचाए , मैं तो चली कह कर मुस्कुराते हुए आदर्श के बगल से उठकर एक तरफ कुर्सी पर बैठ गई , वही आदर्श ने अंजना की बात सुनकर अपना थूक निकलते हुए गले को तर किया और फिर चोर नजर से आराध्या को देखा जो गुस्से में उसे देखते हुए उसकी तरफ बढ़ रही थी , ये देख आदर्श अपनी नज़रें झुका कर चुपचाप बैठ गया।

आराध्य को उसकी मां मंडप में ले आई तो आदर्श के जीजा जी ने भी आगे आकर आदर्श को मंडप में खड़ा कर दिया। तभी अंजना वरमाला ले आई आराध्या और आदर्श एक दूसरे के सामने खड़े थे। बस फर्क इतना था जहां आदर्श की आंखों में आराध्या के लिए प्यार था , तो वही आराध्या की आंखों में आदर्श के लिए गुस्सा था। तभी अंजना ने दोनों के हाथ में वरमाला को थमा दिया, मंडप में दो पंडित थे, एक वर पक्ष से तो एक वधू के पक्ष से। तभी वधू पक्ष के पंडित जी आराध्या से बोले!" आराध्या बेटा वरमाला पहनाओ आदर्श को , तो आराध्या ने वरमाला को अपनी मुट्ठियों में भिंच लिया और गुस्से भरी नजरों से आदर्श की तरफ देखा, ये देख आदर्श मुस्कुरा दिया , वही रिश्तेदार आराध्या को आदर्श को वरमाला ना पहनाते हुए देख असमंजस से उसे देखने लगे साथ ही आपस में बातें बनाने लगे, तभी अंजना ने हल्का सा अपना हाथ आराध्या के हाथ से छुआ दिया। जिस पर आराध्या की गुस्से भरी नजर अंजना की तरफ घूम गई।

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