My secret billonaire - Chapter 2
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शादी हो जाने के बाद रिया को अजीब सा अहसास हुआ।
उसने अभी अभी एक ऐसे आदमी से शादी की जो अजनबी है। अपने पति की व्हीलचेयर को सीढ़ियों से नीचे धकेलते हुए उसे अचानक याद आया । “वैसे, मुझे तुम्हारा नाम भी नही पता । ”
“ आरव सिंघानिया ”, उसने शांत आवाज में कहा।
रिया की आखें बड़ी हो गई। “तुम आरव सिंघानिया हो ? सिंघानिया परिवार के सबसे बड़े बेटे ?
आरव ने उसके चेहरे पर हैरानी देखी ओर हँसा , उसकी हँसी में मजाक था।
“क्या बात है? अब जब तुम्हे पता चला कि तुम ने नाकाम याब आदमी से शादी की है जिसे सब नाकामयाब समझ ते है , तो तुमे अब पछतावा हो रहा है? ”
सिंघानिया परिवार के सबसे बड़े बेटे की कहानी पुरे शहर में मशहूर थी। उसकी माँ की उसे जन्म देते समय मौत हो गई थी ओर उसके पिता ने दुसरी शादी कर ली थे। बाद में, एक कार दुर्घटना में आरव को लकवा मार गया , जिससे वो एक असफल व्यक्ति बन गया।
जब उसकी सौतेली माँ ने एक बेटे को जन्म दिया , तो उसे सिंघानिया परिवार में अनदेखा किया जाने लगा। उसकी दादी अंबिका सिंघानिया ने उसका साथ दिया ओर उसकी रक्षा की थी।
आरव की नजर में कोई भी समझदार लड़की उसके जैसे आदमी से शादी करने को तैयार नहीं होगी, जब तक की उसे पैसे की चाह ना हो । वह सिर्फ विकलांग ही नहीं वह सिंघानिया परिवार का बेकार बेटा था।
उसे पुरा यकीन था रिया अपना मन बदले गी । वो उसके चेहरे पर पछतावा देखने के लिए तैयार था।
हालांकि, उसे जे देखकर हैरानी हुई कि वो उसकी तरफ दया जा तिरस्कार से नहीं देख रही रही थी।
उसने आगे बढ़ कर उसका हाथ थाम लिया । “मैनें तुमे पहले ही बता दिया है। एक बार मैंने अपना फैसला कर लिया, तो मुझे उसका पछतावा नहीं होगा। अब जब हमारी शादी हो गई है तो में यही चाहूंगी की तूमे एक असली घर मिले एक ऐसा घर जिस में प्यार हो। ”
“क्या सच में ?आरव की आवाज में शक था , तो देखते हैं। ”
उसे उस पर विश्वास नहीं था । वो जे देखना चाहता था, की वो कबतक दिखावा कर सकेगी।
एक कार आके उनके सामने रुकी “चलो चलें, ” आरव ने कहा । रिया रुक गई । उसने कहा तुम मुझे कहा लै जा रहे हो?
घर उसने कहा अब हम शादीशुदा है तो , हम साथ ही रहेंगे।
घर इस शब्द से रिया क दिल तेजी से धड़कने लगा । इससे उसे उस घर की याद आ गई जिसमें वो विवान के साथ रहती थी - जिसे बनाने के लिए उसने कड़ी मेहनत की थी।
लेकिन अब जब उसकी शादी आरव से हो चुकी थी, तो उसे पता था उसे अपने अतीत से नाता तोड़ ना होगा ।
गहरी सास लेते हुए , वह उसकी तरफ मुड़ी ओर बोली, “मुझे कुछ काम निपटने है। क्या तुम अपना नंबर ओर पता मुझे दे सकते हो ? जैसे ही काम पूरा हो जायेगा, में वह आ जाऊँगी । ”
“ तुम नहीं चाहती में तूम्हे लिफ्ट दूँ।? "
“ नहीं, ऐसी कोई बात नही", उसने शांति से कहां।
“ मैं खुद ही चली जाऊँगी। मैं तुम्हें परेशान नही करना चाहती। "
उसने कोई बहस नहीं की । अपना पता ओर नंबर उसे दे दिया, वो कार में बैठ कर चला गया।
आधे घंटे बाद, रिया उस अपार्टमेंट के सामने खड़ी थी। जहाँ वो कभी विवान के साथ रहती थी।
वो अंदर गई और हर चीज को ध्यान से देखा- जहां लगी हर
चीज़ को उसने बड़े ध्यान से चुना था।
लेकिन, अब सब कुछ उसे जेल जैसा लग रहा था। बिना कुछ सोचे समझे , वो सजावट की तरह बढ़ी , ओर सब कुछ उखाड़ कर सब कुछ कुड़ेदान में फेंक दिया।
उसने नये सिरे से शुरूआत करने का फैसला किया था, और
अब उसे अतीत को पीछे छोड़ना था, चाहे उसे कितना भी दुख क्यों ना हो।
उसने अपना समान समेंटना शुरू कर दिया। अपने विचारों में खोई हुई, उसे किसी के कदमों की आवाज सुनाई नही दी।
विवान, खुद को रोक नहीं पाया, दरवाजे पर खड़ा रहा, ओर हैरानी से देखता रहा। “रिया, तुम ये क्या कर रही हो? "
“ रिया क्या तुम पागल हो गई हो? " उसने निराशा से पुछा "मैं तो बस थोड़ी देर के लिए गया था, और तुम ऐसे बर्ताव कर रही हो? "
उसने तेजी से साँस ली, अपने गुस्से पर काबू पाने की कोशिश की, और बोला, “मैं तुम्हें एक घंटे का समय दे रहा हूँ। सब कुछ वापस वही रखदो जो जहाँ था! "
रिया ने बेफिक्र होकर समान समेटा और धीरे से उसकी तरफ मुडी। उसका चेहरा शांत था मानो वह कोई अजनबी हो।
उसके होठों पर हलकी सी हँसी आ गई और उसने जवाब दिया , "विवान ,क्या तुम्हें समझ नहीं आया? एक बार जो चीज़ खो जाए , तो हमेशा के लिए चली जाती है। वो फिर कभी वैसी नहीं हो सकती। "
विवान ने गुस्से से कहा,“ आखिर तुम कहना क्या चाहती हो? "
"हमारी शादी के दिन, तुमने मुझे वहाँ अकेला छोड़ दिया, मेरी गरिमा और मिन्नतों को नजरअंदाज कर दिया। क्या तुम्हें अंदाजा है मुझे कैसा लगा होगा? विवान क्या तुम ने कभी मेरे बारे में सोचा? मुझे अपमानित किया गया, और फिर तुम्हें लगता है कि में बस गुस्से में हुँ ? "
उसने पलकें नही झपकाईं, उसकी आँखों में देखती रही, उसके अंदर दबा गुस्सा उमड़ आया, उसकी आँखे धुंधली हो गई और आँसु बहने लगे ।
उसे इस हालत में देखकर , विवान को उसे देख कर एक पल के थोड़ा पछतावा हूँआ, लेकिन जल्दी ही गयब भी हो गया।
सालों से, उसने उसे बार बार चोट पहूँचाई थी और उसने उसे हर बार माफ़ कर दिया था लेकिन इस बार क्या हो गया।
उसे यकीन था कि उसके मनाने पर वो मान जाएगी , ठीक वैसे जैसे हमेशा से करती रही है। आखिरकार उनके बीच हमेशा से यही चलता रहा था।
“रिया, मैं समझ गया तुम परेशान हो, लेकिन तुम्हें ऐसा नही करना चाहिए। देखो, तुम ने हमारे घर की क्या हालत बना दी
है। "