SHAKTI - A most dengerous woman - Chapter 3
(राजकुमारी रश्मि के कदम वहीं जम गए। उन्होंने सर झुकाकर कहा: "वो मैं, रानी मां... महल घूम रही थी।"
महारानी मधुमति ठहरकर बोलीं: "महल घूमने की इजाजत आपको किसने दी? बताइए।" राजकुमारी रश्मि शांत रहीं।)
अब आगे.....
महारानी मधुमति ने गुस्से से राजकुमार कार्तिक की तरफ देखा और पूछा: "और आप? आप कहां गए थे राजकुमारी के साथ?"
राजकुमार कार्तिक ने कहा: "मैं... रानी मां, राजकुमारी को वापस लेने गया था।"
महारानी मधुमति ने पूछा: "आपको कैसे पता कि राजकुमारी रश्मि वहां गई हैं?" राजकुमार कार्तिक ने कहा: "वो राजकुमार आदित्य ने मुझे बताया।"
महारानी मधुमति ने अब राजकुमारी रश्मि की तरफ देखकर पूछा: "क्या राजकुमार आदित्य ने आपको वार्निंग नहीं दी थी राजकुमारी?" राजकुमारी रश्मि ने अब महारानी मधुमति की तरफ देखकर कहा: "वो रानी मां, मैं बस महल घूमना चाहती थी इसलिए...।"
महारानी मधुमति ने गुस्से से कहा: "हमने जो सवाल पूछा है आपसे, उसका जवाब दीजिए राजकुमारी!!! क्या राजकुमार आदित्य ने आपसे यह नहीं कहा था कि महल में आप इधर-उधर मत घूमिए? बताइए!!!"
राजकुमारी रश्मि ने जवाब दिया: "हां, कहा था!" महारानी मधुमति ने आगे पूछा: "तो आपने उनकी बात क्यों नहीं सुनी?" राजकुमारी रश्मि डर गईं, और बाकी सब राजकुमार और राजकुमारियां भी कांप उठे।
राजकुमारी रश्मि ने जवाब दिया: "हां कहा था!!"
"तो आपने उनकी बात क्यों नहीं सुनी??" महारानी मधुमति ठहड़ उठी। राजकुमारी रश्मि डर गई साथ में बाकी सब राजकुमार और राजकुमारियां भी कांप उठे।
महाराजा राजबीर सिंह ने कहा: "राजकुमारी रश्मि आपको ऐसे बिना बताए इधर उधर घूमना नहीं चाहिए!! यह महल भुलभुलैया से भरा हुआ है!! अगर आप गुम जाती तो क्या होता? ज्यादातर तो आप अगर उस सुरंग के पास पहुंच जाती तो...."
महारानी मधुमति ने उन्हें आगे की बात बोलने नहीं दिया और कहा: "राजकुमारी रश्मि!! हम आपको आदेश देते हैं कि आप अब से महल में इधर उधर नहीं घूमेंगी, सिर्फ अपने कमरे में ही रहेंगी!! आपको हमारी बात समझ आई।"
राजकुमारी रश्मि ने हां में गर्दन हिला कर कहा: "हां मैं समझ गई रानी मां!! आप जैसा कहेंगी मैं वैसा ही करूंगी।"
महारानी मधुमति ने कहा: "अच्छा हुआ कि आप हमारी बात समझ गई!! अब आप अपने कमरे में जाइए।"
राजकुमारी रश्मि अपने कमरे में चली गई और साथ में बाकी सब राजकुमार और राजकुमारियां भी अपने कमरे की तरफ बढ़ गए। महारानी मधुमति ने दासियों को भी जाने को कह दिया। जब सब चले गए तब महारानी मधुमति ने महाराज से पूछा: "आपको क्या जरूरत थी इतने लोगों के सामने उस सुरंग के बारे में बात करने की?? आपको पता है न अगर किसी को उस सुरंग के बारे में पता चल गया, अगर यह खबर बाहर चली गई तो क्या होगा?? ज्यादातर तो हमें यह डर है कि कहीं कोई उस सुरंग की तरफ चला न जाए!! अगर कोई वहां एक बार जाएगा तो वहां से कोई भी लौट कर वापस नहीं आ पाएगा।"
महाराज राजबीर ने कहा: "हमारे मुंह से गलती से वो बात निकल गई।"
महारानी मधुमति ने कहा: "आप अपनी जवान सम्भल कर बात किया करिएगा महाराज!! कहीं यह न हो कि किसी को हमारे प्लान के बारे में पता चल जाए!!"
महाराज राजबीर ने हां में गर्दन हिला दिया और वह अपने कमरे में चले गए।
राजकुमारी रश्मि अपने कमरे में उदास बैठी थी, उनके चेहरे पर गहरी निराशा के भाव थे। वह खुद से बड़बड़ा रही थी: "क्यों गई मैं वहां? अगर नहीं जाती तो रानी मां से इतना कुछ सुनना नहीं पड़ता। अब मैं क्या करूं? सोचा था रानी मां को खुश रखूंगी, पर सब उल्टा हो गया मेरी एक गलती की वजह से।"
उनके मन में कई सवाल उठ रहे थे, जैसे कि राजमहल में सुरंग के बारे में महाराज राजबीर क्या कह रहे थे? क्या सच में राजमहल में सुरंग है? और कहां है वह सुरंग? राजकुमारी रश्मि की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि वह सुरंग कहां है।
वह फिर से खुद से बड़बड़ाने लगी: "कहीं वो सुरंग वहीं तो नहीं जहां राजकुमार कार्तिक ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे खींच लिया था? पर बिना जाए मैं कुछ नहीं जान सकती। और अगर मैं वहां गई, तो रानी मां मुझसे कभी बात नहीं करेंगी। इससे अच्छा है कि मैं यह सब सोचना बंद कर दूं।"
तभी उन्हें बाहर पैरों की आहट सुनाई दी। वह बाहर आईं और एक दासी को राजकुमार आदित्य के कमरे के बाहर साफ-सफाई करते देखा। राजकुमारी रश्मि को उन पर शक हुआ और वह उनकी तरफ बढ़ गईं।
"क्या आप मेरे कमरे के बाहर तक झाँक रही थीं?" राजकुमारी रश्मि ने पूछा।
दासी ने हैरानी से कहा: "नहीं, नहीं राजकुमारी! मैं तो बस साफ-सफाई कर रही थी। आपने खुद ही तो मुझे देखा है। मैं ऐसा काम नहीं करती, राजकुमारी। दया कर के ऐसी इल्जाम मुझ पर मत लगाइए।"
राजकुमारी रश्मि ने कुछ सोचते हुए कहा: "अच्छा ठीक है। शायद मुझे ही कोई गलतफहमी हुई होगी। वैसे, आपसे एक बात पूछूं?"
दासी ने तुरंत जवाब दिया: "जी राजकुमारी, पूछिए।"
"क्या मेरे कमरे के बाहर कोई खड़ा था? क्या आपने किसी को देखा?" राजकुमारी रश्मि ने पूछा।
दासी ने कहा: "नहीं राजकुमारी, मैंने किसी को नहीं देखा। मेरी नजर तो बस साफ-सफाई में थी। मैं इन सब चीजों पर नजर नहीं रखती, राजकुमारी।"
राजकुमारी रश्मि ने कहा: "अच्छा ठीक है। आप अपना काम करिए।"
राजकुमारी रश्मि की उदासी और जिज्ञासा का मिश्रण उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। वह सुरंग के बारे में जानने के लिए बेताब थी, लेकिन रानी मां की नाराजगी का डर उन्हें रोक रहा था। दासी के साथ बातचीत ने उनके शक को और बढ़ा दिया, और अब वह और भी उत्सुक हो गई थीं कि आखिर सच क्या है??
राजकुमारी रश्मि अपने कमरे की तरफ बढ़ गई, मन में कई सवाल उठ रहे थे। "मुझे ऐसा क्यों लगा जैसे कोई मेरे कमरे के बाहर खड़ा था? ज्यादातर तो मुझे ऐसा लगा जैसे रानी मां खड़ी थीं। शायद यह मेरा वहम होगा।" कहते हुए वह अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर देती है।
उधर, महारानी मधुमति ने उस दासी से पूछा: "क्या कहा तुमने राजकुमारी रश्मि से?" दासी ने सर झुकाकर जवाब दिया: "आपने जैसा कहा था, रानी साहिबा, वही बताया मैंने कि मैंने किसी को नहीं देखा।" महारानी मधुमति ने कहा: "अच्छा किया। तुम्हें इनाम जरूर मिलेगा।"
महारानी मधुमति के होठों पर मुस्कान थी और वह दासी भी बहुत खुश थी इनाम का नाम सुनकर।
To be continued.....