डायन (एक प्रेम कथा) (Complete) Ch. 1

डायन (एक प्रेम कथा) - Chapter 1

Posted by Mamta Meena • Dec 09, 2025 09:40 PM

रिया रिया यह में क्या सुन रही हूं कि तुम जैतपुर गांव जा रही हो उस भूतिया हवेली के बारे में जानने के लिए,,,,,,,,

यह सुनकर रिया अपनी अलमारी में कुछ ढूंढते हुए बोली हां मां मैं और जनकू आज ही वहां के लिए रवाना हो रहे है,,,,,,,,

यह सुनकर उसकी मां परेशान होते हुए बोली रिया तुम्हें मैंने बताया था ना की जैतपुर गांव की उस हवेली में जाना खतरों से खाली नहीं है,,,,,,,,

जो भी आज तक उस हवेली में गया है जिंदा वापस नहीं आया,यह तुम जानती हो ना तो फिर सब कुछ जानते हुए भी उस हवेली में क्यों जाना चाहती हो,,,,,,,,,रिया की मां प्रेमा ने गुस्से में रिया से कहा,,,,,,,,

यह सुनकर रिया बोली ओहो मां आप भी ना मा कैसी बातें करती हो ऐसा वहां कुछ नहीं है और वैसे से पापा सच कहते हैं कि आप बिल्कुल नहीं बदली हो अब भी बिल्कुल गांव की ही हो, इन सब अंधविश्वासों को मानती हो,,,,,,,,,

यह सुनकर रिया की मां बोली देखो रिया तुम चाहे जो समझो लेकिन मैंने बोल दिया तुम वहां पर नहीं जाओगे,,,,,,,,

तब रिया कुछ कहती उससे पहले ही,,,,,,,,,क्या हुआ भाई मां बेटी में किस बात को लेकर बहस चल रही है,,,,,,, रिया के पापा सुरेंद्र ने अंदर आते हुए कहा,,,,,,,,

अपने पापा को अंदर आते देखकर रिया उसके पास जाकर बोली देखो ना पापा मां मुझे जैतपुर जाने से मना कर रही है,,,,,,,,,

और आप तो जानते ही हो ना पापा कि मैं अपने काम को लेकर कितनी सीरियस हूं,,,,,,,,

और पापा आप तो जानते हो ना पिछली बार जब मैंने अहमदपुर  के उस जंगली दुर्ग का पर्दाफाश उसकी सच्चाई उसका रहस्य सबके सामने लाई थी तो खुद कलेक्टर साहब ने अपने हाथों से मुझे सम्मानित किया था,,,,,,,,

यह सुनकर रिया के पापा मुस्कुराते हुए बोले हमारी बेटी है ही इतने काबिल इस बात में कोई शक की गुंजाइश ही नहीं है,,,,,,,

यह सुनकर रिया बोली लेकिन पापा मां का कहना है कि  जैतपुर की उस हवेली में डायनों का बास है जबकि मैं इन बातों को नहीं मानती,,,,,,,,

क्योंकि पापा यह डायन भूत प्रेत पिशाच कुछ नहीं होता लोगों के मन का वहम होता है और कुछ नहीं आपको पता है ना अहमदपुर के जंगल में स्थित उस दुर्गे के बारे में भी ऐसी ही अफवाह फैली हुई थी,,,,,,,,,

जिसकी वजह से सब लोग वहां जाने से डरते थे, लोगों का मानना था कि वहां भूत पिचास रहते हैं जो भी वहां जाता है जिंदा वापस नहीं आता,,,,,,,,,

लेकिन पापा वहां की सच्चाई कुछ और थी जिससे लोग अनजान थे और उसी सच्चाई का पता लगाने के लिए जब मैं सावधानी से बिना किसी की नजर में आए उस दुर्ग में गई,,,,,,,,

तब बहां जाकर मुझे पता चला कि वहां कोई भी भूत पिसाच नहीं है,  बलिक वह कुछ कुख्यात लुटेरे है जो लोगों को भूत पिशाच के नाम से डराते हैं,,,,,,,,

वे लोगों के डर का फायदा उठाकर रात को आने जाने वाले राहगीरों को लूटते हैं और मारकर उस जंगल में फेंक देते थे,,,,,,,,

क्योंकि जिससे लोगों को यह लगे कि भूत पिशाच ने उसे मार दिया है , यहां तक कि वह लोग जंगली जानवरों का शिकार कर उनके खाल, सिंग आंखें आदि को भी बेच देते हैं और लोगों को यही लगता है कि यह सब कुछ भूत पिशाच ने किया है,,,,,,,,

उन लुटेरों की सच्चाई किसी को पता न चल जाए, इसलिए वह लुटेरे जो भी उस जंगल में दुर्ग के आसपास जाता उसे मार देते,,,,,,,,,

जिस की वजह से लोग वहां जाने से डरने लगे और वो लुटेरे अपना सारा लूट का माल उस दुर्ग में रखते, क्योंकि उस दुर्ग में उनका चोरी का माल सुरक्षित था,,,,,,,,,

पापा उन लुटेरों की वजह से पूरे जिले में लुटेरों का आतंक छाया हुआ था, पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रही थी चारों तरफ डर का माहौल फैला हुआ था,,,,,,,,,

लेकिन जब मैंने उस दुर्ग में रहने वाले लुटेरों का पर्दाफाश कर लोगों को यह बताया था कि उस दुर्ग में कोई भूत पिशाच नहीं है बल्कि  कुछ कुख्यात लुटेरों का काम है,,,,,,,,

सारी सच्चाई सामने आने पर लोगों को तब ज्ञात हुआ कि सच्चाई क्या है जबकि लंबे समय से तो लोग एक अंधविश्वास में ही जी रहे थे,,,,,,,

तब आप ही जानते हैं ना पापा कि मेरा कितना नाम हुआ था और लोगों में फैला बह डर भी दूर हो गया,,,,,,,

यह सुनकर रिया के पापा सुरेंद्र बोले हां बेटा तुम सही कह रही हो यह भूत पिशाच कुछ नहीं होता बस लोगों के मन का वहम अंधविश्वास होता है और कुछ नहीं,,,,,,,,

लेकिन तुम तुम्हारी मां की बातों पर ध्यान मत दो तुम्हें तो पता है बेटा तुम्हारी मां तो बस वहीं कुछ सड़ी गली बातें दोहराती रहती है,,,,,,,, रिया के पापा ने रिया का हौसला बढ़ाते हुए कहा,,,,,,,,

यह सुनकर रिया की मां प्रेमा बोली देखिए जी मैं सही कह रही हूं, जैतपुर की उस हवेली के बारे में कोई झूठी अफवाह नहीं है एक सच्चाई है, वहां जाना खतरों से खाली नहीं है,,,,,,,

मेरी मां बताती थी मेरे नाना जी के बारे में मेरे नाना जी भी जंगल गए थे किसी काम से और आते वक्त रात हो गई तो लोगों का कहना है कि वह तो हवेली में जाते देखे गए थे और वे वापस लौट कर कभी नहीं आए,,,,,रिया की मां प्रेमा अपने अतीत में खोते हुए घबराते हुए बोली,,,,,,,,

यह सुनकर रिया के पापा सुरेंद्र खींचते हुए बोले

देखो प्रेमा तुम बार-बार वही बातें मत दोहराया करो,,,,,,,

अरे हम जानते हैं कि जैतपुर में तुम्हारा ननिहाल है और तुम बचपन से ही अपनी मां के साथ वहां रही हो,,,,,,,

और सच यह है कि वहां के लोगों की बात सुन सुन के तुम्हारा भी दिमाग खराब हो गया है और वहां के लोगों की तरह तो तुम को भी लगता है कि वहां डायन रहती है,,,,,,,

जबकि ऐसा कुछ नहीं है ,देखना मेरी बेटी इस बात का भी पर्दाफाश जरूर करेगी, उस समय तुम्हे खुद ही पता चल जाएगा कि उस हवेली में डायन रहती है या नहीं,,,,,,,

यह सुनकर प्रेमा बोली देखिए जी मेरी बात समझने की कोशिश कीजिए,,,,,,,,

यह सुनकर सुरेंद्र बोले प्रेमा अब मुझे इस बारे में और कुछ नहीं सुनना और ना ही कोई बहस करनी है और बेहतर यही होगा कि तुम भी यह अंधविश्वास बेफिजूल की बातें अपने दिमाग में मत लाया करो,,,,,,,,,

ऐसी अंधविश्वास की बेफिजूल की बातें सुना कर हमारा दिमाग खराब करती है और खुद भी परेशान होती है अगर इन सब के बारे में सोचना छोड़ दोगी तो तुम्हारे लिए और हमारे लिए भी बेहतर होगा समझी तुम,,,,,,, यह सुनकर प्रेमा कुछ नहीं बोली,,,,,,,,

तब सुरेंद्र  रिया की तरफ देखते हुए बोले  अच्छा बेटा मैं चलता हूं ऑफिस में मुझे कुछ जरूरी काम है,हां लेकिन सावधानी से काम लेना क्योंकि तुम जो काम करती हो ना उस पर कदम कदम पर खतरा भी हो सकता है रिया के पापा ने मुस्कुराते हुए कहा,,,,,,,

यह सुन कर रिया बोली पापा आप चिंता मत कीजिए आपकी बेटी इतनी कमजोर नहीं है वह बहुत बहादुर है देखना वह कैसे  यह काम चुटकियों में कर कर आती है,,,,,, यह कहकर रिया अपने पापा के गले लग गई,,,,,,

तब सुरेंदर बाबू अपनी बेटी का गाल प्यार से थपथपाते हुए बोले ठीक है बेटा जाओ, और हां फोन पर अपने पापा को अपने खबर देते रहना तुम्हें पता है ना कि तुमसे एक पल भी दूर हमसे नहीं रहा जाता आखिर तुम हमारे जीने की वजह जो हो,,,,,, रिया के पापा ने मुस्कुराते हुए कहा,,,,,,,

तब रिया बोली ठीक है पापा,,,,,,,

यह सुनकर सुरेंद्रनाथ बोलें ठीक है बेटा अच्छा अब मैं चलता हूं ,यह कहकर सुरेंद्र बाबू अपने ऑफिस के लिए निकल गए,,,,,,,,

सुरेंद्र बाबू के ऑफिस जाने के प्रेमा फिर अपनी बेटी रिया से बोली रिया में तुम्हारी मां हूं और मुझे बेटा तुम्हारी चिंता है अपनी मां के लिए मत जाओ,,,,,,,,,

यह सुनकर रिया बोली मां प्लीज मैंने बोला ना मेरे लिए मेरे काम से बढ़कर कुछ नहीं है, मां अगर मैं इस तरह लोगों की बातें सुनकर डर गई तो फिर मुझ में और बाकी लोगों में क्या अंतर रह जाएगा, जबकि हमारा तो काम ही है लोगों के सामने सच्चाई को लाना,,,,,,,,,

यह कहकर रिया अपनी मां के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली मां आप परेशान मत हो ऐसा कुछ नहीं उस हवेली में,,,,,,,,,

आपको लगता है मां कि उस हवेली में डायनों का वास है यह सिर्फ मां आपके और लोगों के मन का वहम है और कुछ नहीं और देखना मां मैं बहुत जल्द यह सच्चाई सबके सामने भी ले आऊंगी रिया मुस्कुराते हुए बोली,,,,,,,,,

यह सुनकर प्रेमा उदास होते हुए बोली ठीक है बेटा लेकिन अगर तुम अपनी जिद पर अड़ी हुई हो और वहां जाना चाहती हो तो बेटा अकेले मत जाओ, किसी को साथ लेकर जाओ,,,,,,

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