डायन (एक प्रेम कथा) (Complete) Ch. 3

डायन (एक प्रेम कथा) - Chapter 3

Posted by Mamta Meena • Dec 09, 2025 09:43 PM

शहर से जैतपुर का सफर बस से लगभग दो-तीन घंटे का था जैतपुर पहुंचते-पहुंचते  उन्हें शाम के 5:00 बज चुके थे,गर्मियों का मौसम था इसलिए अभी तक धूप खिली हुई थी,,,,,

जैतपुर पहुंचकर रिया ने वहां के एक घर में जाकर अपना परिचय दिया और उसकी फ्रेंड जनकु के बारे में जानकर उस घर के एक बुजुर्ग आदमी ने उन्हें अंदर बुला कर चारपाई पर बैठने के लिए कहा और खुद दूर कुर्सी पर बैठ गए,,,,,,

फिर वह बुजुर्ग व्यक्ति रिया और जनक नंदिनी की तरफ देखते हुए बोला बेटा तुम पत्रकार हो तो यहां किस काम से आई हो,,,,,,

शायद वह पिछली बार गांव की पाइप लाइन बनने के 6 महीने बाद ही टूट गई थी उसके बारे में खबर लेने आई हो ना,,,,,,

अच्छा किया बेटा आ गई अरे सरकार भी कैसे काम करती है बड़े-बड़े वादे करती है और देखो वोट मांगने तो ऐसे आ जाती है,,,,,,

बड़ी मुश्किल से जाकर पाइप लाइन लगी थी पानी का थोड़ा सुख मिला था गांव में लेकिन 6 महीने भी ना हुए और टूट गई पाइपलाइन अब फिर से बही पानी की किल्लत है बह बुजुर्ग उनकी तरफ देखते हुए बोला,,,,

यह सुन कर जनक नंदिनी हसते हुए बोली अरे नहीं बाबा नहीं हम तो किसी और काम से आए हैं,,,,,,

तभी उस बुजुर्ग आदमी ने अंदर आवाज देते हुए कहा बहू जल्दी से कुछ चाय नाश्ता लेकर आओ,,,,,

तब उस बुजुर्ग आदमी ने हैरानी से उनकी तरफ देखते हुए कहा फिर किस काम से आई हो बेटा,,,,,

,

तब रिया ने बोली बाबा हम यहा कुछ जरूरी काम से आए हैं और आपसे भी कुछ मदद चाहिए,,,,,,

यह सुनकर वह बुजुर्ग व्यक्ति बोला मैं कुछ समझा नहीं बेटा,,,,,

तब रिया बोली बाबा हमने सुना है कि यहां गांव से बाहर सुनसान इलाके में एक हवेली है और लोगों का कहना है कि बहा डायन का वास है,,,,,,

जबकि हमको ऐसा नहीं लगता, हमें लगता है कि यह सिर्फ लोगों का मन का वहम है और कुछ नहीं यह डायन भूत प्रेत पिशाच ऐसा कुछ नहीं होता और जरूर हवेली में कोई ना कोई राज छुपा हुआ है इसलिए हम उस हवेली के बारे में जानने के लिए यहां आए हैं,,,,,

रिया के मुंह से उस हवेली के बारे में सुनकर उस बुजुर्ग के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी और वह घबराते हुए बोला ना बेटा ना उस हवेली की तरप ना जाइयो ना, वरना बह डायन तुम्हें भी जिंदा नहीं छोड़ेगी ,,,,,

तब तक एक औरत घूंघट डाले हाथ में चाय के प्याले और नाश्ते में कुछ  बिस्कुट नमकीन ले आई और रखकर अंदर चली गई,,,,,

तब उस बुजुर्ग आदमी ने रिया और जनक नंदिनी की तरफ चाय का प्याला बढ़ाते हुए कहा लो बेटा चाय पियो,,,,

फिर चाय की चुस्की लेते हुए रिया बोली क्यों बाबा आप को भी लगता है क्या कि बहा डायन का वास है,,,

यह सुनकर वह बुजुर्ग बोला लगता नहीं है बेटा, वहां सच में ही डायन का वास है,,,,,,,

आज तक जो भी उस तरफ गया है जिंदा वापस नहीं आया है और शाम के 7:00 बजे के बाद तो उस तरफ जाने वाले गांव के रास्ते को ही बंद कर दिया जाता है जिससे गलती से कोई उस तरफ जा भी ना पाए,,,,,

अगर तुम उस हवेली के लिए यहां पर आई हो ना तो बेटा तो वापस लौट जाओ बरना अपनी जान गवाने के सिवा कुछ ना मिलेगा तुम दोनों को बहां पर बह डायन तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेगी,,,,,,

यह सुनकर रिया मुस्कुराते हुए बोली लेकिन आप लोगों को कैसे पता कि वहां पर डायनों का बास है आपने कभी डायनों को देखा है क्या ,,,,,,

यह सुनकर वह बुजुर्ग व्यक्ति उनकी तरफ देखते हुए बोला हां बेटा बहा सच में ही डायनों का वास है कई बार गांव के लोगों के साथ-साथ मैंने भी उस हवेली में से चीखने चिल्लाने रोने और घुंगरू की आवाजें आती सुनी है,,,,,,

यह सुनकर जनक नंदिनी घबराते हुए रिया से बोली मैंने कहा था ना रिया उस हवेली में डायन है,,,,,लेकिन तुम मेरी बात मानती ही कहां हो,,,,,

देखो रिया अभी वक्त है वापस चलते हैं,शहर जाने वाली बस हमें मिल जाएगी और अंधेरा होते होते हम अपने घर पहुंच जाएंगे,,,,,,

क्यों बेवजह अपनी जान यहां रहकर मुसीबत में डालें और वैसे भी भला यह बाबा झूठ थोड़ी ना वोलेंगे ,,,,,,

यह सुनकर रिया बोली तुम तो जानती ही हो ना जनकु मैं यह सब कुछ नहीं मानती और उस हवेली के बारे में पता लगाकर ही रहूंगी,,,,,,

तब जनकू घबराते हुए बोली अब और क्या पता लगाना है अरे भला यहां के लोगों से बेहतर उस हवेली के बारे में कौन जानता होगा,,,, चलो यहां से चलते हैं,,,,,,

यह सुन कर रिया बोली ठीक है तुम घबराओ मत लेकिन मुझे कुछ वक्त सोचने के लिए दो,,,,,,,

तब रिया उस बाबा से बोली बाबा आपको कब से मेरा मतलब आप सब गांव वालों को कब से लगता है कि उस हवेली में डायन रहती है,,,,,,,

और बह हवेली भी तो किसी की धरोहर होगी कोई तो मालिक होगा उस हवेली का तो क्या आप हमें विस्तार से इस बारे में बताएंगे ,,,,,,,,,

रिया की बात सुनकर वह बुजुर्ग बोला बेटा इसके पीछे भी एक बड़ी ही लंबी और मनहूस कहानी है यह सुनकर रिया बोली कैसी कहानी,,,,,, रिया हैरानी से उस बुजुर्ग की तरफ देखते हुए बोली,,,,,

तब वह बुजुर्ग बोला बेटा एक ऐसी कहानी जिसने उस हवेली को एक भूतिया हवेली बना कर रख दिया कभी उस हवेली में भी चहल-पहल हुआ करती थी,,,,,,

यह सुन कर रह रिया बोली बाबा आप हमें विस्तार से बताइए ना उस हवेली के बारे में,,,,,,

फिर मैं बुजुर्ग बोला ठीक है बेटा यह कहकर वह अपने अतीत में खोता हुआ बोला बेटा आज से लगभग 75 साल पहले जब मैं लगभग 5 साल का था, तब उस हवेली में ठाकुर अभय प्रताप का राज था,,,,,,

यह कहकर उस बुजुर्ग ने जो कहानी बताई वह इस प्रकार है,,,,,

ठाकुर अभय प्रताप के पिता ठाकुर जगजीवन प्रताप की मौत के बाद  ठाकुर अभय प्रताप  ने उस हवेली का राज संभाला था, इस पूरे गांव पर और आसपास के कई गांवों पर ठाकुर का राज था,,,,,,,

जिस समय ठाकुर अभय प्रताप ने राज संभाला था उस समय उसकी उम्र यही  26- 27 होगी,,,,,,,

ठाकुर अभय प्रताप के पिता ने उसका रिश्ता बचपन में ही अपने दोस्त की बेटी गायत्री के साथ तय कर दिया था,,,,,,,,

गायत्री के माता-पिता की बचपन में ही मौत हो चुकी थी इसलिए गायत्री का लालन-पालन भी ठाकुर अभय प्रताप के साथ उसी हवेली में हुआ था,,,,,,,

अभय  प्रताप के माता-पिता ने यह तय किया था कि जब गायत्री जवान हो जाएगी ,तब गायत्री और अभय प्रताप दोनों का पूरे रिती रिवाज से विवाह कर दिया जाएगा,,,,,,,

बही गायत्री और अभय प्रताप सिंह भी दोनों साथ-साथ  खेलकूद कर बड़े हुए थे, दोनों अच्छे दोस्त थे और यह दोस्ती जवान होने के बाद प्यार में बदल गई थी,,,,,,

अपने वादे के मुताबिक दोनों के जवान होने पर अभय प्रताप के पिता जी ठाकुर जगजीवन प्रताप ने अभय प्रताप के जन्मदिन पर सभी के सामने उन  दोनों की शादी की  तिथि तय कर दी,,,,,,,

और सब लोगों के सामने 1 महीने की अगले महीने की पूर्णिमा को दोनों की शादी का शुभ मुहूर्त निश्चित कर दिया,,,,,,,

लेकिन ठाकुर अभय प्रताप और बाईसा गायत्री के विवाह  की घोषणा करने के चार-पांच दिन बाद ही एक रहस्यमई ढंग से ठाकुर अभय प्रताप के पिता जगजीवन प्रताप की छत से गिरकर मौत हो गई,,,,,,,

उसकी मौत के बाद ठाकुर अभय प्रताप और सभी लोगों को बहुत दुख हुआ,,,,,,

 लेकिन अचानक छत से गिरने से हुई मौत को सभी ने एक हादसा मान लिया सभी को यही लग रहा था कि शायद ठाकुर जगजीवन प्रताप गलती से छत पर से पैर फिसल कर गिर गए लेकिन सच्चाई कुछ और थी,,,,,,,

जैतपुर के ठाकुर अभय प्रताप के पिता जगजीवन प्रताप बहुत ही भले मानुष थे,,,,,,

अपने पिता की मौत के बाद ठाकुर अभय प्रताप ने अपने विवाह की तिथि को आगे बढ़ाना चाहा,,,,,,,

लेकिन अपने राज ज्योतिष के कहने पर उसने तिथि को नहीं बढ़ाया,,,,,,

क्योंकि राज ज्योतिष का कहना था कि इस विवाह के मुहूर्त जैसा शुभ मुहूर्त 12 साल तक आप दोनों के लिए कोई भी मुहूर्त शुभ नहीं है,,,,,,,

और आपके पिताजी की इच्छा थी कि आप दोनों का विवाह इसी शुभ मुहूर्त को होना चाहिए,,,,,,

आपके पिताजी तो आपका विवाह उसी समय आज से लगभग चार-पांच साल पहले ही कर देना चाहते थे जब राजकुमारी बाईसा गायत्री 18 बरस की हुई थी,,,,,

लेकिन पंचांग के अनुसार इस शुभ मुहूर्त जैसा शुभ मुहूर्त नहीं था इसलिए तुम्हारे पिताजी ने इस समय शुभ मुहूर्त में तुम्हारा विवाह होने के लिए इतना लंबा इंतजार किया है,,,,,,,

क्योंकि 75 साल में एक बार यह तिथि और यह पूर्णिमा आती है, और इस मुहूर्त में जो बंधन एक बार बंध जाता है वह सात जन्मों के लिए हजार जन्मों के लिए एक हो जाता है,,,,,,,

अपने राज ज्योतिष की बात सुनने के बाद अपने पिता की इच्छा का मान रखने के लिए ठाकुर अभय प्रताप ने अपनी और राजकुमारी गायत्री के विवाह की तिथि को आगे नहीं बढ़ाया,,,,,,

100%