डरावनी भूतिया कहानियां Ch. 3

सिरकटी दुल्हन, भाग- 3

Posted by Mamta Meena • Dec 22, 2025 03:12 AM

कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे सिर के ऊपर खड़ा हुआ है। यह महसूस होते ही मैंने अपना कंबल हटाकर जैसे ही देखा, तो मेरी आंखें फटी की फटी ही रह गईं। मेरी सांस गले में अटक गई। मैं चाहते हुए भी नहीं चिल्ला सकता था। उस वक्त मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा था कि मैं जो कुछ देख रहा हूं, वह कोई हकीकत है या फिर कोई डरावना सपना।

क्योंकि मेरे सिर के ऊपर वही डरावनी चुड़ैल खड़ी हुई थी। उसके सिर्फ धड़ थे और सिर नहीं था। अब तक जो मुझे लग रहा था कि वह मेरे मन का भ्रम हो सकता है, आज मुझे साफ दिखाई दे रहा था। उसके सिर बिल्कुल भी नहीं थे और वह मेरे सिरहाने पर खड़ी हुई थी। उसके एक हाथ में बड़ा ही धारदार चाकू था, जिससे ऐसा लग रहा था जैसे खून टपक रहा हो।

अब यह देखकर तो मैं बहुत ज्यादा घबरा गया। मुझे लग रहा था कि शायद आज यह जो कोई भी डरावनी आत्मा है, यह मुझे जिंदा नहीं छोड़ेगी। आज यह मुझे मार डालेगी। मुझे अपनी आंखों के सामने अपनी मौत नजर आने लगी। तभी वह आत्मा मेरी खाट के चारों तरफ चक्कर लगाने लगी थी। उसकी पायल और हाथ की चूड़ियों के बजने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी और जो धारदार चाकू था, उससे भी खून टपक रहा था।

मैं यह देखकर थर-थर कांपने लगा था। उस चांदनी रात में मुझे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। जब अपनी आंखों के सामने मौत दिखाई दे और वह भी इतनी भयानक रूप से, तो दिल पर क्या गुजरती है, यह तो वही समझता है जिस पर यह गुजरी हो। मुझे तो बस ऐसा लग रहा था कि अभी यह सिरकटी दुल्हन मुझे मार देगी, अभी मार देगी।

लेकिन वह मेरे चारों तरफ घूमते ही जा रही थी। तो घबराते हुए मैं मन ही मन अपने जो घर के कुल देवता हैं, जिनकी हम पूजा करते थे, जो और भी देवी देवता हैं, सबको मन ही मन में याद करने लगा। तभी मेरी खाट के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए वह दुल्हन फिर से आंगन के गेट की तरफ चली गई। मैं उसे जाते देखता रहा, फिर वह हमेशा की तरह सड़क पर जाकर चलते हुए जंगल के पास कच्चे रास्ते पर जाकर न जाने कहां गायब हो गई।

परन्तु यह सबकुछ देखकर मैं इतना ज्यादा घबरा गया था कि मेरे तो जैसे सोचने समझने की शक्ति ही खत्म हो गई थी। अभी कुछ देर पहले मैंने जो कुछ देखा था, जो भयानक देखा था, वह क्या था, मैं खुद भी नहीं समझ पा रहा था। वह सिरकटी दुल्हन आखिर हमारे घर रोज क्यों आती है? कितनी भयानक और उसके हाथ में वह चाकू। यह सोचकर दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी।

परंतु अब मैंने सोच लिया कि नहीं, मैं इस तरह चुप नहीं बैठूंगा। गांव में यह जो बातें सुनाई दे रही हैं, दुल्हन की मौत की, उनके पीछे कोई ना कोई कारण तो है और रोजाना इस सिरकटी दुल्हन का हमारे घर के सामने घूमना, हमारे घर को घूरना, यहां पर आना, यह सब कुछ पहले मन का भ्रम लगता था, लेकिन यह हकीकत है और मुझे नहीं लगता कि यह ठीक है। कुछ ना कुछ तो गलत होने वाला है।

वैसे पहले मैं इन सब बातों को अंधविश्वास और बेफिजूल समझता था, लेकिन अब तो अपनी आंखों से एक बार नहीं, ना जाने कितनी बार मैंने इस सच्चाई को देख चुका था, जिस पर यकीन करना पहले मेरे लिए मुश्किल था, लेकिन अब मुझे यकीन था, समझ में आ गया था कि आखिर गांव में यह घटनाएं क्यों घट रही हैं।

ऐसे में मैंने सोच लिया कि अपने होते हुए मैं अपनी बहन के साथ कुछ भी गलत नहीं होने दूंगा, चाहे उसके लिए मुझे अपनी जान ही दांव पर क्यों ना लगानी पड़ जाए। घर में शादी की तैयारी चल रही थी, घर वालों को कुछ बताऊंगा, तो वे लोग और भी ज्यादा घबरा जाएंगे, जिसकी वजह से सोच लिया कि उन्हें कुछ बताना ठीक नहीं होगा।

मेरी बहन की शादी में सिर्फ दो दिन बाकी थे और अब मुझे हर पल यही चिंता सता रही थी कि अगर मैं इसी तरह चुप रहा, तो वह दिन भी दूर नहीं जब गांव की और दुल्हनों की तरह मेरी बहन का सिर भी धड़ से अलग मुझे दिखाई देगा। इसलिए मैं यही सोच रहा था कि क्या करूं, क्या करूं।

तभी मुझे अपने एक दोस्त की याद आई जो ऐसी बातों पर भरोसा करता था और हम लोग कॉलेज में उसका मजाक बनाया करते थे। उनके पापा एक माने हुए पंडित थे, ऐसी बातों के बारे में वह बता सकते थे। इसलिए अब मुझे लगने लगा कि शायद वहां से मुझे सब कुछ पता चल सकता है।

मैं अपनी बहन की जान को खतरे में नहीं डाल सकता, यह सोचकर मैंने सबसे शहर जाने के बारे में बोला, किसी काम का बहाना लगा दिया, बोल दिया कि मेरे बहुत सारे दोस्त हैं जिनमें से कुछ दोस्तों को कार्ड नहीं दे पाया था, इसलिए उनको शादी का कार्ड भी देना है और साथ में और भी बहुत सारे काम हैं। ऐसे ही शादी के काम का बहाना लेकर मैं शहर चला गया।

वैसे अपने उस दोस्त को कॉल करके मैंने पहले ही बता दिया था कि मैं आ रहा हूं और उसके पापा से मुझे कुछ काम है, जिसकी वजह से मैं उसके घर पर पहुंच गया और वहीं पर उसके पापा भी मुझे मिल गए थे, जो सुबह शाम शहर का एक बड़ा देवी मां का मंदिर था, वहां पर पूजा अर्चना करते थे, एक माने हुए पंडित थे।

जब मैं वहां पर पहुंचा, तो मुझे परेशान देखकर वह बोले, क्या हुआ बेटा? तो मैं घबराते हुए कुछ बोल नहीं पा रहा था। मेरे दोस्त ने मुझे अंदर ले जाकर बिठाया और उस वक्त बस वही बातें मेरे दिलो दिमाग में घूम रही थीं और घबराते हुए मैंने फिर अपने दोस्त के पापा को सारी बात बता दी।

मेरी बात सुनकर उन्होंने मेरे सामने ही बैठकर एक चंद्राकार जैसा आटे का चित्र बनाया, उसके बीच में कुछ इत्र वगैरह, कुछ पूछी चीजें रखीं जो भगवान की पूजा में काम आती हैं, देवी मां के मंदिर में काम आती हैं और फिर कुछ मंत्र बोलते हुए मेरे सिर पर हाथ रखा और अपनी आंखें बंद करके कुछ ध्यान किया।

कुछ देर बाद उन्होंने आंखें खोली और मेरी तरफ देखते हुए बोला, बेटा तुम्हें कोई फिर भ्रम नहीं हो रहा है, तुम्हें वह सिरकटी दुल्हन सच में ही दिखाई दे रही है और यह तुम्हारी बहन की किस्मत समझो या फिर तुम्हारे जो घर के कुल देवता हैं, उनका साथ समझो कि वह सहरूप तुम्हें दिखाई दे रही है, क्योंकि तुम्हें तुम्हारे घर के कुल देवता संकेत दे रहे हैं अपनी बहन की जान बचाने का।

क्योंकि वह जो औरत तुम्हें घूमती हुई दिखाई देती है, जो दुल्हन, जो एक सिर कटी दुल्हन है, जो एक भटकती हुई आत्मा है, अपनी अधूरी शादी के लिए भटकती हुई आत्मा जो इस तरह किसी भी लड़की की शादी होते हुए नहीं देख सकती।

यह सुनकर मैंने और मेरे दोस्त ने हैरानी के साथ एक दूसरे की तरफ देखा, तो मेरे दोस्त के पापा ने मुझे बहुत सारी बातें समझाईं और बताया कि इन सब से मैं छुटकारा कैसे पा सकता हूं। जैसे ही मैंने उसकी बातें सुनीं, मैं थर-थर कांपने लगा गया, मुझे बहुत ज्यादा घबराहट होने लगी कि क्या मैं सच में ऐसा कर पाऊंगा। क्योंकि उन्होंने जो करने के लिए मुझे बोला था, वह बहुत ज्यादा भयानक और डरावना था। यह सुनकर ही मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा था, तो मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं खुद कैसे यह सब कुछ कर पाऊंगा।

लेकिन अब सब कुछ जानकर सारी सच्चाई सामने आने पर मैं अपनी बहन की जिंदगी खतरे में नहीं डाल सकता था। मैं अपनी बहन की जान बचाने के लिए कुछ भी कर सकता था, इसलिए मैंने सोच लिया था कि नहीं, जो होगा देखा जाएगा, अगर मेरी जान भी जाएगी तो चली जाए, लेकिन मैं अपनी बहन की जान खतरे में नहीं डाल सकता।

उस वक्त मेरे दोस्त के पापा ने बोल दिया कि बेटा तुम्हें जो करना है, आज ही करना है, क्योंकि कल की रात तुम्हारी बहन के साथ वही सब कुछ होगा जो गांव की और दुल्हनों के साथ हुआ है। और अगर तुमने जो मैंने बोला है, वह नहीं किया, तो यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होगा, इस गांव में कभी कोई शादी नहीं हो पाएगी। सिर्फ मौत का तांडव मचेगा, चारों तरफ मातम खेलेगा और दुल्हन की डोली उठने से पहले उसकी अर्थी उठ जाएगी। यह बातें सुनकर मैं बहुत ज्यादा डर गया, फिर बाजार में से कुछ खरीदारी की और अपने घर आ गया।

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