प्यार बस तुमसे Ch. 3

विधि बच्चा आपको पसंद करती है

Posted by Ira Rajput • Feb 16, 2026 01:17 PM

तभी वह शख्स अपनी ऊंची पहाड़ी से नीचे उतरता है और लंबी-लंबी डग भरते हुए अपनी चमचमाती काली गाड़ी की तरफ बढ़ जाता है। उसके चेहरे पर एक अजीब सी कठोरता थी। उसको अपनी तरफ आता देख वहां तैनात दर्जनों बॉडीगार्ड्स अलर्ट हो जाते हैं और उसके सम्मान में सिर झुकाकर पीछे-पीछे चलने लगते हैं। जैसे ही वह करीब पहुँचता है, एक बॉडीगार्ड फुर्ती से कार का दरवाजा खोलता है। वह शख्स बिना कुछ कहे शान से कार की पिछली सीट पर बैठ जाता है। ड्राइवर तुरंत इंजन स्टार्ट करता है और गाड़ी धूल उड़ाती हुई आगे बढ़ जाती है, जबकि उसके पीछे बॉडीगार्ड्स की गाड़ियों का पूरा काफिला एक सुरक्षा घेरे की तरह चल देता है।

कुछ देर के सफर के बाद, उस शख्स की कार एक बहुत ही खूबसूरत और विशाल मेंशन के सामने आकर रुकती है। मेंशन का गेट खुलते ही सामने एक बड़ा बगीचा और फव्वारा नजर आता है, जिसके मुख्य द्वार पर सोने के अक्षरों में 'सिंघानिया मेंशन' लिखा था। वह शख्स कार से निकलता है। उसके जूतों की आवाज (टक-टक) सन्नाटे को चीर रही थी। वह सीधा मेंशन के अंदर कदम रखता है और बिना रुके सीढ़ियों से ऊपर जाने लगता है, तभी पीछे से एक भारी और गूँजती हुई आवाज आती है...

"रुक जाओ एकांश!"

वह शख्स आवाज सुनकर वहीं थम जाता है। उसके कंधे थोड़े तन जाते हैं। वह धीरे से पीछे की तरफ मुड़ता है, तो देखता है कि उसके सामने एक 81 साल के बुजुर्ग आदमी खड़े हैं, जिनकी आँखों में आज भी पूरे खानदान को संभालने वाला अनुशासन था।

(जी हाँ, ये शख्स कोई और नहीं हमारी स्टोरी के हीरो एकांश बाबू हैं। एकांश "ओके" बोलता है और अपने दादाजी की तरफ बढ़ जाता है।)

एकांश: "दादाजी मुझे लेट हो रहा है, हम बाद में बात करेंगे।" एकांश के लहजे में थोड़ी बेरुखी थी। वह फिर से जाने के लिए पीछे मुड़ ही रहा था कि दादाजी ने टोक दिया।

ये उस शख्स के दादाजी, विक्रम प्रताप सिंघानिया थे। दादाजी सख्त लहजे में बोले, "एकांश, हमें अभी और इसी वक्त आपसे कुछ जरूरी बात करनी है।" और वे बिना जवाब का इंतजार किए अपने स्टडी रूम की तरफ बढ़ जाते हैं। जी हाँ दोस्तों, ये शख्स कोई और नहीं हमारी स्टोरी के हीरो एकांश बाबू हैं। एकांश ने एक गहरी सांस ली, "ओके" बोला और अपने दादाजी के पीछे कमरे में चला गया।

कुछ देर बाद रूम में...

दादाजी अपनी पुरानी नक्काशीदार सोफे पर बैठे थे और उनके ठीक सामने एकांश बैठा था। कमरे का तापमान जैसे गिर गया हो, एकांश का खतरनाक औरा कमरे की हर दीवार पर महसूस हो रहा था। कमरे में छाई उस अजीब सी और भारी खामोशी को तोड़ते हुए दादाजी बोले, "एकांश, हमने तुम्हारी शादी तुम्हारी बचपन की दोस्त रूही से तय कर दी है। हमें उम्मीद है कि तुम्हें हमारे इस फैसले से कोई परेशानी नहीं होगी। आखिर तुम दोनों बचपन से एक-दूसरे को जानते हो और बहुत अच्छे दोस्त भी हो। हमें पूरा यकीन है कि रूही तुम्हें बहुत पसंद करती है... और शायद तुम्हारे दिल में भी उसके लिए जगह है।"

दादाजी थोड़ा रुके और फिर बोले, "वैसे भी तुम दोनों की शादी का वादा सालों पहले दोनों परिवारों ने मिलकर कर दिया था। अब वक्त आ गया है उस वादे को निभाने का। हमें उम्मीद है एकांश, कि तुम अपनी ज़िद छोड़कर हमें निराश नहीं करोगे।"

दादाजी की बात सुन कर एकांश के चेहरे पर एक डरावनी 'एवल स्माइल' आ जाती है। उसकी आंखों में एक ऐसी चमक थी जिसे दादाजी समझ नहीं पाए। एकांश ने बहुत चालाकी से उस मुस्कान को छुपाया और अपनी नजरें उठाकर दादाजी की तरफ देखा। अपनी गर्दन को धीरे से 'हां' में हिला कर वह बोला, "ठीक है दादाजी... अगर आपकी यही मर्जी है, तो मैं तैयार हूं।"

इतना बोलकर वह वहां से उठा और बिना पीछे मुड़े रूम से बाहर चला गया। एकांश के बाहर जाते ही दादाजी ने एक संतोष भरी मुस्कान के साथ अपना फोन निकाला और किसी खास शख्स को कॉल मिलाने लगे।

वहीं एकांश के आलीशान कमरे में...

एकांश अपने रूम में दाखिल होते ही सीधा वॉशरूम में चला जाता है। इस वक्त उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, वह पूरी तरह पत्थर जैसा लग रहा था। यह समझ पाना नामुमकिन था कि वह शादी के लिए खुश है या उसके दिमाग में कोई खौफनाक योजना चल रही है। कुछ समय बाद वॉशरूम का दरवाजा खुलता है और वह अपनी कमर पर एक व्हाइट टॉवल लपेटे, अपने बालों को सुखाते हुए बाहर निकलता है। उसका कसरती बदन (Muscular Body) उसकी मेहनत की गवाही दे रहा था। वह सीधे अपने विशाल क्लोसेट में चला जाता है।

थोड़ी देर बाद वह एक सफ़ेद कड़क शर्ट, फिटेड ब्लैक पैंट और ब्लैक लेदर शूज पहनकर बाहर आता है। इस लुक में वह किसी राजा से कम नहीं लग रहा था—बेहद हैंडसम और उतना ही घातक। वह कमरे के एक बड़े से शीशे के सामने खड़ा होकर अपने बाल सेट करने लगता है। शीशे में खुद को देखते हुए वह कुछ गहराई से सोच रहा था।

अचानक उसके चेहरे पर फिर से वही डरावनी 'एवल स्माइल' लौट आती है। वह आईने में अपनी ही परछाई को देखकर धीमी आवाज में बोलता है, "फाइनली जान... तुम अब हमेशा-हमेशा के लिए मेरी होने वाली हो। कोई भी ताकत तुम्हें मुझसे दूर नहीं रख सकती।" और फिर वह पूरे कमरे में जोर-जोर से हंसने लगता है। उसकी हंसी इतनी डरावनी थी कि कोई कमजोर दिल वाला उसे सुन ले तो डर से कांप जाए।

आखिरी बार खुद को आईने में निहार कर, उसने सोफे पर रखा अपना ब्लैक कोट उठाया और कमरे से बाहर निकलकर नीचे हॉल की तरफ बढ़ गया। वहां डाइनिंग टेबल पर पूरा परिवार नाश्ते के लिए इकट्ठा था। जैसे ही एकांश की आहट हुई, सबकी निगाहें उसकी तरफ मुड़ गईं, लेकिन एकांश ने सबको पूरी तरह इग्नोर किया और सीधा मेंशन के दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा।

तभी पीछे से एक 50 साल की बेहद शालीन औरत ने उसे आवाज दी, "अंश!"

आवाज सुन कर एकांश के कदम रुके तो सही, पर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह रुखे स्वर में बोला, "मॉम लेट हो रहा है, मैं ब्रेकफास्ट बाहर ही देख लूंगा।" और बिना उनकी बात सुने वह तूफानी रफ़्तार से घर से बाहर निकल गया।

पीछे खड़ी वह महिला, जो कि एकांश की मॉम गायत्री सिंघानिया थीं, अपने बेटे की इस बेरुखी से मायूस हो गईं। उनकी आँखों में उदासी साफ़ दिख रही थी।

उनको ऐसे परेशान और मायूस देख कर, एक 55 साल के रोबीले आदमी (एकांश के पापा) उनके पास आए और उनके कंधे पर हाथ रखकर बोले, "गायत्री, परेशान मत हो। तुम्हें तो पता है ना उसे अपने काम और अपने उसूलों से कितना प्यार है। वह छोटा बच्चा नहीं है, बाहर खा लेगा। आप चलो और ब्रेकफास्ट कर लो, सब आपका वेट कर रहे हैं।"

गायत्री ने भारी मन से "हां" में गर्दन हिला दी और टेबल की तरफ बढ़ गईं।

चलो जानते है सिंघानिया फैमिली के बारे में ........

"दोस्तों, एकांश ने रूही से शादी के लिए हाँ तो कर दी है, पर उसकी आँखों में किसके लिए दीवानगी है? क्या वो 'जान' रूही ही है या फिर कोई और? 😈

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