एक विवाह ऐसा भी - Chapter 3
पलक - आप...आप दोबारा शादी क्यों नहीं कर लेते?”
आज उसे अपनी इस कमी का एहसास फिर से बहुत शिद्दत से हो रहा था। वो उसकी कमीज़ के बटनों को देखते हुए, वह वही सवाल दोहरा रही थी जो वो उससे कई बार बोलती जा रही थी।
पलक की बात सुनकर अचानक, से अनिरुद्ध को अपने चेहरे की नसें उभरती हुई महसूस हुई,
अनिरुद्ध - आज फिर किसी ने तुम्हारा दिमाग खराब कर दिया है , गुस्से से भरी नजरों से घूरते हुए उसके हाथों की गिरफ्त पलक के बाजुओं पर सख्त करते हुए वो बोला, पलक जब भी ये बात करती अनिरुद्ध का पारा हमेशा यूंही गर्म हो जाता था,
पलक नम पलकों से - तो फिर कब तक आप इस हक़ीक़त को झूठ लाएंगे, कम से कम आपके शादी करने से में आपकी औलाद को तो देख सकूंगी, क्या आपका दिल नहीं चाहता की आपके बच्चे हो, कब तक आप मेरी इस खामी के साथ समझौता करेंगे, मुझे पता है आपको भी बच्चे की ख्वाहिश है जिसे मैं कभी भी पूरा नहीं कर सकती , आपके शादी करने से कम से कम आपको बाप बनने की खुशी तो नसीब होती, पलक अनिरुद्ध की आंखों में देखते हुए बेबसी से बोली,
अनिरुद्ध पलक को झटकते हुए अपने गुस्से को कन्ट्रोल करते हुए बोला - अच्छा होता मैं यहां आया ही नहीं होता , पलक को एक नज़र देख अनिरुद्ध गुस्से से वहां से जाने लगा ,
पलक को अचानक से अनिरुद्ध के गुस्से का एहसास होने लगा वो जल्दी से उसके पीछे जाकर उसे उसकी कलाई से पकड़ते हुए रोका
पलक - आप ,,,,आप मुझसे गुस्सा हो गए हैं ,, अनिरुद्ध के यूं गुस्सा होने से तो पलक की हमेशा से जान जाती थी,
अनिरुद्ध - तुम्हें मेरी इतनी ही परवा होती तो यूं बकवास नही करती, अनिरुद्ध उसे देख अपनी कलाई छुड़ाते हुए गुस्से से वहां से चला गया,
ओर वो बेबसी से उसे जाता देखती रही, मगर आज जिस तरह से उस औरत ने उसे उसकी कमी का एहसास कराया था उसका दिल तड़प कर रह गया था, ओर ये पहली बार नहीं था आज दिन कोई ना कोई उसे उसकी इस कमी का एहसास करवा ही देता था, उसे पता था अनिरुद्ध का दिल भी बच्चों के लिए तड़पता है लेकिन वो इस बात को जाहिर भले ही ना करता हो लेकिन पलक को महसूस तो होता ही था, तभी वो अक्सर अनिरुद्ध को दूसरी शादी का कहती रहती थी, ओर हर बार कि तरह अनिरुद्ध का बर्ताव ऐसा ही रहता था, ओर हर बार की तरह एक बार फिर पलक ने अनिरुद्ध को गुस्सा दिला दिया था,
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बहुत प्यारी लग रही हो शादी के लाल जोड़े में सजी नंदिनी आईने के सामने बैठी घबरा रही थी जब पलक नंदिनी के पास आकर उसे दुल्हन के रूप में सजी देख कर बोलने लगी, पलक की बात सुनकर नंदिनी की आंखें एक बार फिर भरने को आई,
पलक - अरे नहीं नहीं ऐसा मत करना वरना इतने घंटों की मेहनत सब बर्बाद हो जाएगी , ओर ऐसे रोते नहीं है गुड़िया, ये वक्त तो हर लड़की के जीवन में आता है, हर लड़की को इस एहसास से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन जब जीवन साथी का साथ मिल जाए तो हर मुश्किल आसान नजर आती है, ओर मुझे पता है साहिल ओर उनका परिवार हमेशा तुम्हारा ख्याल रखेंगे, वो सब तुम्हें इतना प्यार देंगे की तुम्हे हमारी कमी भी महसूस नहीं होगी, ओर सबसे ज्यादा प्यार तो साहिल करेंगे, उनके प्यार से तो हमारी गुड़िया हमें भी भूल जाएगी,
पलक नंदिनी को ध्यान भटकाने के लिए कहने लगी तो नंदिनी के गालों पर हया की लाली छाने लगी, तभी सिमी वहां आते हुए तपाक से बोली
सिमी - हां जैसे आप अनिरुद्ध जीजू के प्यार में हम सब को भूल जाती हो क्यों दी सही कहा ना,
सिमी की बात सुनकर पलक झेंप सी गई वहीं सिमी ओर नंदिनी पलक को इस तरह देखकर दोनों खिलखिला कर हंस दी,
पलक अपनी झेंप मिटाने के लिए सिमी को डपटते हुए बोली - शर्म नहीं आती अपनी बड़ी बहन से ऐसा कहते हुए,
सिमी - मुझे क्यों आएगी शर्म जब आप लोगों को यूंही कहीं भी रोमेंस करते शर्म नहीं आती, वैसे भी रोमेंस के लिए कमरे होते हैं रसोई नहीं,
सिमी का इशारा रात वाली हरकत पर था जिसे समझ कर पलक तो मानों डूब मरने को होने लगी,
सिमी - वैसे यूं शर्माना नहीं चाहिए, वो कहते हैं न जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म ,
पलक - रूक सिमी की बच्ची तुझे में बताती हूं बहुत बोलने लगी है, ये बोल पलक सिमी को मारने उसके पीछे जाने लगी , वहीं सिमी पलक का इरादा समझकर तुरंत वहां से भाग गई , ओर उसे इस तरह से भागते देख नंदिनी एक बार फिर हंस दी, ओर सिमी के जाने के बाद पलक खुद भी हंस दी, तभी सिमी दरवाजे से सिर निकाल कर बोली
सिमी - वैसे में जिस काम से आई थी वो तो आपने भुलवा ही दिया, नंदिनी दीदी को जल्दी से नीचे लाइए, सब इंतजार कर रहे हैं, ओर ये कहते ही एक बार फिर सिमी भाग गई , ओर एक बार फिर वो दोनों हंस दी, लेकिन किसे पता ये हसीं कब तक उनके जीवन में बनी रहेगी?,,,,,
पलक नंदिनी को लेकर बाहर आई तो सिमी ओर कुछ ओर लड़कियां नंदिनी के साथ हो ली, ओर फिर वो सभी नंदिनी को लेकर जयमाल के लिए साहिल के साथ स्टेज़ पर खड़ा कर दिया, ओर फिर एक के बाद एक कब जयमाल हुआ, फोटो लिया गया, कब उन्हें मंड़प में ले जाया गया, कब शादी की सभी विधियां हुई, कब कन्या दान हुआ कब फेरे हुए ,कब सिंदूरदान हुआ कब साहिल ने नंदिनी को मंगलसूत्र पहनाया पता ही नहीं चला,
लेकिन इन सभी रस्मों में नंदिनी ने किस तरह से अपने आंसू रोके थे ये वही जानती थी , लेकिन अब जब विदाई का समय आया तो वो खुद को रोक नहीं पाई ओर ओर सभी के गले लगकर फूट फूटकर रोने लगी, मां पापा भाई बहन सभी की आंखों से आंसू बहने लगे, नंदिनी अपने साथ साथ सभी को रूलाने लगी थी, अनुज से तो ये सब बर्दाश्त ही नहीं हो रहा था,तभी वो वहां से जाने लगा जब अनिरुद्ध ने उसे थाम लिया,ओर अनुज अनिरुद्ध को देखकर अनिरुद्ध के सीने से लग कर रोने लगा, आंसू तो अनिरुद्ध की आंखों में भी थे, आखिर इस घर के सभी बच्चे उसके लिए बहुत एहमियत रखते थे, वो किसी को भी दुःखी नहीं देख सकता था खास कर नंदिनी ओर सिमी को, वो दोनों ही उसे बहुत अज़ीज़ थी,
नंदिनी जो कबसे मां के गले लगकर खुद तो रो रही थी साथ में सभी को रूला भी रही थी, पलक हिम्मत करके नंदिनी के पास आकर उसे मां से अलग कराया, जो अब सू-सू कर के रोएं जा रही थी ,
() पलक ने सभी को देखा तो सभी उसका इशारा समझ कर वहां से चले गए, अब वहां नंदिनी पलक ओर सिमी ही रह गए, ओर बाकि लोग मेहमानों को देखने के लिए चले गए, )
पलक - बस करो नंदिनी ओर कितना रोना है ऐसे तो तुम अपनी तबियत खराब कर लोगी,
सिमी - ओर क्या आपके इस तरह रोने से आपका मैकअप खराब हो जाएगा, ओर खराब मैकअप कि वजह से लोग आपको देखकर कहीं डर ही ना जाए, सिमी ने ये बात बहुत धीरे से कहीं थी जिसे सिर्फ पलक ओर नंदिनी ने ही सुना ओर सिमी की ये बात सुनकर पलक उसे घूरकर रह गई,