तू जख्म तू ही मरहम Ch. 3

तू जख्म तू ही मरहम - Chapter 3

Posted by Author Dream Girl✍️. • Apr 02, 2026 02:09 PM

तुम जैसी दो कौड़ी की लड़की को मैं बहुत अच्छे से जानता हूं, तुम यह सब तमाशा पैसे लेने के लिए ही कर रही हो। तो तो सीधे-सीधे बोल दो। तुम्हें कितने पैसे चाहिए, अंश ने पंछी की तरफ देखकर रूड वॉइस में कहा"

पंछी ने अंश की तरफ घूरते हुए देखा। और गुस्से में चिल्लाते हुए कहा" भाड़ में गए आप और भाड़ में गया आपका वह दो कौड़ी का पैसा, आपके पास इतना पैसा है आप हर चीज पैसों से खरीदते हैं। लेकिन थोड़ा सा तमीज पैसों से खरीद लेना चाहिए, तो आज आपके पास बहुत सारा तमीज होता। जिन्हें इंसान से बात करने के भी तमीज नहीं है।

अब तुम गांव की गवार मुझे तमीज सिखाओगी। अंश ने दांत पीसते हुए कहा"

आपको जो समझना है समझिए इसे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। वैसे आपको एक बात बता दे जब आप हमारे गांव आ ही गए हैं। तो हमारे गांव में एक बहुत ही अच्छी पाठशाला है। आप वहां जाकर अपना दाखिला कर लीजिए, और थोड़ा तमीज संस्कार वहां सब कुछ जाकर पढ़ लीजिएगा। पंछी ने मुस्कुराते हुए कहा" और वहां से दौड़ते हुए भाग गई,

अंश ने पीछे से आवाज लगाते हुए कहा" तुम गवार लड़की कहां भाग रही हो। मैं तुम्हें देख लूंगा छोडूंगा नहीं मैं तुम्हें, अंश के चेहरे पर इस वक्त गुस्सा था।

पंछी ने उसके अहंकार को ललकार दिया था। और यही अंश से बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसका इगो जो हर्ट हो गया था। एक गांव की लड़की उसे चार बातें सुन कर चली गई थी।

अंश अभी भी वैसे ही खड़ा उसे तरफ देख रहा था। जिधर से पंछी गई थी। क्योंकि उसके दिल में तो बेज्जती की आग जलने लगी थी। और उसे अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हो रही थी। वह बदले की आग में बेचैन होने लगा था।

अंश कभी भी अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाता था। जिसने भी आज तक अंश की बेज्जती की थी। अंश ने उसका नाम और निशान मिटा दिया था। यही वह अब पंछी के साथ भी करने की सोच रहा था। क्योंकि बिना बदला लिए उसे चैन नहीं आने वाला था।

अंश ने दांत भींचते हुए कहा" तुम दो कौड़ी की लड़की तुम्हें तो मैं देख लूंगा। जब तक मैं तुमसे अपनी बेइज्जती का बदला नहीं लूंगा। ना तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा। तुमने अंश ठाकुर की बेज्जती की है। अब देखो लड़की मैं तुम्हारे साथ क्या करता हूं। तुमने आज अंश ठाकुर की बेइज्जती नहीं की बल्कि, इतना कहते हुए अंश रुक गया।

अंश क्या कर रहा है यार चलना हमें लेट हो रहा है। तु क्यों उस लड़की के पीछे पागल हो रहा है। उस लड़के ने अंश की तरफ देखते हुए कहा"

तो अंश ने उसकी तरफ घूरते हुए कहा" क्या कहा मैं उसके पीछे पागल हो रहा हूं, देव खुराना अपनी बातें सोच समझ कर कहां करो, यह मत भुलो तुम किसके सामने खड़े हो।

देव अंश का चाइल्ड फेड्स था। जिसका स्वभाव अंश से बिल्कुल अलग था। जहां अंश अपने दुश्मनो से बदला लेने के बाद शैतानों की तरह हंसता था। तो वही देव बिना वजह अपना दांत फाड़ता रहता था।

हां जानता हूं मैं एक डेविल के सामने खड़ा हूं, अब चलो भी यहां ऐसे ही खड़े रहने का इरादा है। देव ने अंश की तरफ देखते हुए कहां"

तो अंश ने उसकी तरफ घूरते हुए कहा" इस बार अगर वह लड़की तुम्हारी कार के सामने आई, तो बिना सोचे समझे उसे उड़ा देना। अगर तुमने कार रोकने की कोशिश भी की, तो उसके बाद मैं तुम्हें अपने हाथों से जान से मार दूंगा।

देव ने अंश की तरफ देखा। फिर उसने अपने हाथ जोड़कर अंश की तरफ जोड़ते हुए कहा" ठीक है मेरे बाप जी जैसे आपकी इच्छा में आपकी आज्ञा का पालन करूंगा। लेकिन फिलहाल के लिए आप यहां से चलिए हमें काफी लेट हो गया है।

अंश ने देव को पूरी तरह से इग्नोर किया। और फिर कार के अंदर आकर बैठ गया। देव भी ड्राइविंग सीट पर आकर बैठा, और उसने कार को ऊपर दौड़ा दिया।

देव ने ड्राइव करते हुए अंश की तरफ देखते हुए कहां" अंश तुझे इस गांव में आना था। तो तू अकेले ही आ जाता मुझे साथ लेकर आने की क्या जरूरत थी। वह डॉक्टर बच गया और तेरे झांसे में हर बार में ही फंस जाता हूं,

अंश ने देव की तरफ घूरते हुए कहां" ज्यादा मत बोल तू अच्छे से जानता है। मैं यहां क्यों आया हूं यहां हमारे दादा-दादी की पुश्तैनी हवेली है। और यह दादा दादी की इच्छा थी। तभी मैं यहां इतने सालों बाद आया हूं। वरना मुझे भी कोई शौक नहीं है। इस गांव में कदम रखने का, जमाना बदल गया दुनिया कहां से कहां पहुंच गई, पर इस गांव में सब कुछ वैसा का वैसा ही है।

अच्छा अंश तुझे याद है तू लास्ट बार इस गांव में कब आया था। देव ने अंश की तरफ देखते हुए कहा"

तो अंश ने अपना सर हां में हिलाते हुए कहा" मुझे अच्छे से याद है। मैं इस गांव में कब आया था। और मैं भूल कैसे सकता हूं। इस गांव से मेरी एक बहुत बुरी यादें जुड़ी है। बस इसलिए मैं इस गांव में दोबारा कदम नहीं रखना चाहता था। अंश ने सामने की तरफ देखते हुए बिना किसी भाव के कहां"

अंश के चेहरे के एक्सप्रेशन इस वक्त पूरी तरह से बदले हुए थे। देव उसके एक्सप्रेशन को नोटिस कर रहा था। देव अच्छे से जानता था कि अंश इस गांव में कभी नहीं आना चाहता था। लेकिन दादा-दादी की जीद की वजह से आज अंश को गांव आना पड़ा था। अंश को गुस्से में देखकर देव ने फिर कोई सवाल नहीं किया।

वहीं दूसरी तरफ पंछी, पंछी की तरह चहकते हुए एक घर के आंगन में अपना पहला कदम आहिस्ता से रखा। और इधर-उधर देखते हुए अंदर की तरफ जाने लगी। उसने अपनी एक उंगली को अपने दांतों के बीच में दबा रखा था।

पंछी का घर ज्यादा बड़ा नहीं था। छोटा सा आंगन था जहां सामने तुलसी का पौधा लगा हुआ था। वही तुलसी के पौधे के सामने एक चारपाई रखी हुई थी। बस घर में तीन रूम थे और एक छोटा सा किचन हर सामान सलीके से रखा हुआ था।

राम जी आज हमें बचा लेना, अगर हमें बाबा ने देख लिया तो वह हमें पक्का डांट लगाएंगे। पंछी ने खुद से बुदबुदाते हुए कहा" और घर के अंदर आंगन की तरफ बढ़ने लगी। वह जल्दी-जल्दी घर के अंदर आई, और फिर अपने रूम में आकर एक बेड पर बैठ गई,

पंछी ने गहरी सांस लेते हुए कहा" जान बचे सो लाखों पाए लौट के बुद्धू घर को आई, फिर उसने अपने सर पर हाथ मारते हुए कहा" लेकिन हम तो बुद्धू नहीं है।

पंछी का रूम बहुत छोटा था। बस एक छोटा सा एक पलंग, सोने जितना भी कंफर्टेबल नहीं होगा उसका बेड था। एक तरफ लकड़ी की छोटी सी अलमारी थी। और दूसरी तरफ छोटा सा टेबल और उसके ठीक सामने छोटा सा आईना लगा था।

तभी पंछी को किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। और किसी ने पंछी को जोर से आवाज लगाया। इस आवाज को सुनकर पंछी दुबककर अपने बेड से उठकर खड़ी हो गई। उसने इधर-उधर देखते हुए खुद से कहा" लगता है बाबा आ गए,

उसने इधर-उधर देखा और जल्दी से पलंग पर कूद गई, और उसने अपने ऊपर तक कंबल लपेट लिया। और सोने का नाटक करने लगी।

एक आदमी ने पंछी के रूम में कदम रखा। और सामने पंछी पलंग पर सोई हुई थी। उसे सोते हुए देखकर उस आदमी ने मुस्कुराते हुए अपना चेहरा ना हिलाया और रूम के अंदर आ गया।

वह आदमी पंछी के सिरहाने के पास आकर बैठ गया। और फिर उन्होंने पंछी के सर पर हाथ फेरते हुए कहा" पंछी गुड़िया हम जानते हैं। आप सो नहीं रहे हो आप बस सोने का नाटक कर रहे हो। चलिए अब जल्दी से उठिए बाबा को आपसे बहुत सारी बातें करनी है। क्या पता यह मौका फिर दोबारा हमें मिले ना मिले।

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