The Past- एक खौफनाक साया Ch. 3

The Past- एक खौफनाक साया - Chapter 3

Posted by Anjali Pandey • May 22, 2026 08:48 AM

रात के उस खौफनाक तांडव के बाद जब सुबह की पहली किरण 'इम्पीरियल हाइट्स' की 12वीं मंजिल की टूटी हुई खिड़कियों से अंदर आई, तो फ्लैट का नजारा किसी युद्ध के मैदान जैसा था। चारों तरफ कांच के बारीक टुकड़े बिखरे पड़े थे। हवा में अभी भी उस साये के आने से पैदा हुई बर्फ की हल्की सी महक और सीलन घुली हुई थी।

​डॉ. अद्वैत सोफे के पास फर्श पर ही बैठा हुआ था। उसकी आँखों में पूरी रात एक पल के लिए भी नींद नहीं आई थी। उसने अपनी कलाई पर बंधी उस राजपूती लिबास के टुकड़े की पट्टी को थोड़ा ढीला किया। पट्टी हटाते ही उसकी धड़कन एक पल के लिए रुक गई। त्वचा पर उभरा वह कटी हुई तलवार का निशान अब और गहरा और गाढ़ा लाल हो चुका था, जैसे कोई पुराना जख्म सदियों बाद अचानक हरा हो गया हो। एक डॉक्टर होने के नाते वह जानता था कि ऐसा कोई भी स्किन पिगमेंटेशन या घाव रातों-रात बिना किसी मेडिकल वजह के नहीं बन सकता।

​उसने सोफे की तरफ देखा। रुद्रप्रिया अभी भी सो रही थी। सुबह की रोशनी में उसका चेहरा किसी संगमरमर की मूरत जैसा बेदाग और अलौकिक लग रहा था। धूल और सूखे खून के दागों के बावजूद उसकी राजसी गरिमा साफ झलक रही थी। उसके माथे का वह स्वर्ण मुकुट अब सोफे के बगल में टेबल पर रखा था, जिसे अद्वैत ने रात को खुद वहाँ रख दिया था ताकि उसे आराम मिल सके।

​अद्वैत उठ खड़ा हुआ। उसकी हड्डियों में थकावट और बदन में दर्द था। वह जैसे ही वॉशरुम की तरफ बढ़ने लगा, उसके फोन की वाइब्रेशन ने सन्नाटे को तोड़ा। फोन फर्श पर कांच के टुकड़ों के बीच पड़ा थरथरा रहा था। अद्वैत ने स्क्रीन देखी—यह अस्पताल के सीनियर चीफ डॉ. गांगुली का फोन था।

​अद्वैत ने फोन उठाया और कान से लगाया, "हेलो, डॉ. गांगुली..."

​"अद्वैत! तुम कहाँ हो? कल रात की नाइट शिफ्ट के बाद तुम बिना किसी को बताए अस्पताल से चले गए? यहाँ पुलिस आई हुई है!" डॉ. गांगुली की आवाज में घबराहट और गुस्सा साफ था।

​अद्वैत का दिल तेजी से धड़कने लगा, "सर, क्या हुआ? पुलिस क्यों आई है?"

​"कल रात बेसमेंट के मुर्दाघर में वॉर्डब्वॉय जग्गू की मौत हो गई है। और मौत कोई आम नहीं है अद्वैत... पुलिस का कहना है कि उसकी गर्दन को किसी ने मैन्युअली 180 डिग्री तक घुमा दिया है, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। लेकिन सबसे अजीब बात जानते हो क्या है? पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट कह रही है कि जग्गू के शरीर का तापमान माइनस 5 डिग्री तक गिर गया था, जैसे वह किसी फ्रीजर में हफ्तों से बंद हो! और सीसीटीवी फुटेज... कल रात ठीक 1:50 बजे अस्पताल की पूरी बिजली चली गई थी, लेकिन बैकअप कैमरे में सिर्फ तुम्हारी कार को पूरी रफ्तार से बाहर निकलते देखा गया है। पुलिस तुमसे पूछताछ करना चाहती है!"

​अद्वैत के पैर कांपने लगे। जग्गू की मौत की बात सच थी। वह साया सिर्फ एक साया नहीं था, वह जान ले रहा था। "सर... मैं... मैं कुछ देर में अस्पताल आता हूँ। मेरी तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी, इसलिए मैं निकल आया था," अद्वैत ने झूठ बोला और फोन काट दिया।

​वह अभी इस झटके से संभल भी नहीं पाया था कि तभी उसके फ्लैट के दरवाजे की इंटरकॉम घंटी बजी। ट्रिंग... ट्रिंग...

​अद्वैत चौकन्ना हो गया। उसने दबे पांव जाकर इंटरकॉम का रिसीवर उठाया, "हाँ, कौन?"

​नीचे रिसेप्शन से सिक्योरिटी गार्ड की कांपती हुई आवाज आई, "राणा सर... प्लीज नीचे आइए। बहुत बड़ी आफत हो गई है। हमारे हेड गार्ड, राम सिंह... वो... वो नहीं रहे।"

​"क्या? राम सिंह को क्या हुआ?" अद्वैत ने चिल्लाकर पूछा।

​"सर, आप खुद आकर देख लीजिए। पुलिस यहाँ भी आ रही है। उनका शव लिफ्ट की शाफ्ट के पास मिला है।"

​अद्वैत ने रिसीवर पटका। उसका पूरा शरीर ठंडे पसीने से नहा गया। रात को उस साये ने भागते वक्त कहा था कि वह लिफ्ट की शाफ्ट में गायब हुआ है। इसका मतलब, जाते-जाते उसने राम सिंह को अपनी हवस का शिकार बना लिया था।

​"अद्वैत..." पीछे से एक बेहद धीमी और डरी हुई आवाज आई। रुद्रप्रिया जाग चुकी थी। वह सोफे पर उठकर बैठ गई थी और उसकी नीली आँखें अद्वैत के चेहरे के खौफ को पढ़ रही थीं।

​"रुद्रप्रिया... तुम्हें यहीं रुकना होगा। बाहर पुलिस है, और वह साया... वह लोगों को मार रहा है। मेरे अस्पताल के वॉर्डब्वॉय के बाद अब मेरी बिल्डिंग के गार्ड की भी मौत हो चुकी है," अद्वैत ने उसके पास आकर घुटनों के बल बैठते हुए कहा।

​रुद्रप्रिया की आँखों से आंसू छलक पड़े, "मैंने तुमसे कहा था राणा... वह भानुप्रताप का साया है। वह तब तक नहीं रुकेगा जब तक वह हमारे प्राण नहीं ले लेता। वह अपने पीछे सिर्फ मौत और तबाही छोड़ता है। जैसे-जैसे समय बीतेगा, उसकी शक्तियां इस काल की हवाओं को सोखकर और ज्यादा बलवान होती जाएंगी। आज रात... आज रात अमावस की शुरुआत हो रही है। अगर आज रात से पहले हमने उसे रोकने का उपाय नहीं ढूंढा, तो वह पूरे नगर को श्मशान बना देगा।"

​अद्वैत ने अपना सिर पकड़ लिया। वह एक डॉक्टर था जो विज्ञान, दवाओं और सर्जरी पर विश्वास करता था। लेकिन पिछले बारह घंटों में उसने जो देखा था, उसके बाद वह तंत्र-मंत्र और श्राप की बातों को खारिज नहीं कर सकता था।

​"रुद्रप्रिया, तुम कहती हो कि तुम सूर्यगढ़ साम्राज्य की हो। क्या तुम्हें याद है कि उस तांत्रिक भानुप्रताप को रोकने का कोई तरीका उस वक्त के शास्त्रों में लिखा था? कोई ऐसी चीज जिससे उसे हमेशा के लिए बांधा जा सके?" अद्वैत ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा।

​रुद्रप्रिया ने कुछ देर सोचने की कोशिश की, उसका चेहरा दर्द से सिकुड़ गया जैसे पुरानी यादें उसके दिमाग पर हथौड़े चला रही हों। "एक... एक किताब थी। 'कालभैरव तंत्र'। भानुप्रताप ने उस किताब के पन्नों को अपने खून से लिखकर उस साये को जगाया था। मेरे पिता, महाराज सूर्यप्रताप ने उस किताब को महल के गुप्त तहखाने में एक पवित्र संदूक के अंदर बंद कर दिया था। लेकिन अब... अब वह महल कहाँ है? वह साम्राज्य कहाँ है? चारों तरफ सिर्फ ऊंचे-ऊंचे कंक्रीट के पहाड़ (इमारतें) और लोहे के रथ (गाड़ियां) हैं। मैं अपने घर को कैसे ढूंढूं?"

​अद्वैत के दिमाग की बत्ती जली। "महल... खंडहर! कल रात तुमने कहा था कि तुम्हें किसी ने भूमि की खुदाई के दौरान आजाद किया।" उसने तुरंत अपना फोन निकाला और कोलकाता के स्थानीय समाचारों को खंगालना शुरू किया।

​महज दो मिनट की सर्च के बाद उसे एक बड़ी खबर मिली। हेडलाइन थी: "कोलकाता के बाहरी इलाके 'नारायणपुर' में मेट्रो की खुदाई के दौरान मिली 400 साल पुरानी प्राचीन हवेली और गुप्त तहखाना। पुरातत्व विभाग ने जगह को अपने कब्जे में लिया।"

​खबर के साथ एक तस्वीर भी थी। तस्वीर में एक ढह चुकी विशाल हवेली का ढांचा दिख रहा था, जिसके पत्थरों पर वही नक्काशी थी जो रुद्रप्रिया के स्वर्ण मुकुट पर बनी थी।

​"यही है!" अद्वैत ने स्क्रीन रुद्रप्रिया को दिखाते हुए कहा, "क्या यह तुम्हारा महल है?"

​रुद्रप्रिया ने जैसे ही उस धुंधली तस्वीर को देखा, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। "हाँ... यही मेरे पिता का मुख्य महल था। भले ही यह अब खंडहर हो चुका है, लेकिन इसका केंद्र... वह गुप्त तहखाना अभी भी भूमि के भीतर सुरक्षित होगा। वह किताब वहीं होगी अद्वैत!"

​अद्वैत ने घड़ी देखी। सुबह के 8:30 बज रहे थे। उसके पास ज्यादा समय नहीं था। पुलिस कभी भी उसके फ्लैट पर आ सकती थी, और रात होने पर वह साया दोबारा अपनी पूरी ताकत के साथ हमला करेगा।

​"हमें वहाँ जाना होगा। नारायणपुर यहाँ से लगभग दो घंटे की दूरी पर है। लेकिन मैं तुम्हें इस लिबास में बाहर नहीं ले जा सकता। पुलिस और लोग तुम्हें देखते ही पकड़ लेंगे," अद्वैत ने कहा।

​उसने अपनी अलमारी खोली और अपनी एक बड़ी ओवरसाइज्ड हुडी (Hoodie) और काली जींस निकाली। उसने रुद्रप्रिया को वो कपड़े दिए और उसे पहनने को कहा। जब रुद्रप्रिया ने वो मॉडर्न कपड़े पहने, तो वह अजीब लेकिन बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसने हुडी की कैप से अपने लंबे बालों और मुकुट को छुपा लिया था।

​अद्वैत ने अपने घाव पर एक नई मेडिकल पट्टी बांधी, हाथ में वह अष्टधातु का लॉकेट लिया और जेब में कुछ जरूरी दवाइयां और अपना सर्जिकल टूलकिट रख लिया।

​जैसे ही दोनों ने फ्लैट का दरवाजा खोला, पूरे गलियारे में सन्नाटा था। लिफ्ट के पास पुलिस की पीली टेप (Crime Scene Tape) बंधी हुई थी और नीचे से लोगों के चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। अद्वैत ने रुद्रप्रिया का हाथ कसकर पकड़ा। उसका हाथ अभी भी उतना ही ठंडा था, लेकिन जैसे ही दोनों के हाथ जुड़े, अद्वैत के भीतर एक अजीब सा साहस आ गया।

​वे चुपके से सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतरे और पार्किंग के पिछले दरवाजे से बाहर निकलकर कार में बैठ गए।

​अद्वैत ने कार स्टार्ट की और नारायणपुर के उस खौफनाक खंडहर की तरफ बढ़ा दिया। लेकिन जैसे ही कार सोसायटी के मुख्य गेट से बाहर निकली, कार के फ्रंट ग्लास पर अचानक ऊपर से एक काला कौआ आकर गिरा। उसका पेट फटा हुआ था और उसकी सफेद आँखें सीधे अद्वैत को देख रही थीं।

​कार के स्टीरियो सिस्टम में अपने आप तेज खरखराहट की आवाज होने लगी और रेडियो के सारे चैनल बंद होकर सिर्फ एक भारी, सड़ी हुई आवाज गूंजने लगी:

​“जाओ राणा... अपने अंत की तरफ कदम बढ़ाओ... भानुप्रताप तुम्हारा वहीं इंतजार कर रहा है...”

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