तेरे इश्क का धोखा Ch. 1

तेरे इश्क का धोखा - Chapter 1

Posted by iskibutterfly iskibutterfly • May 30, 2026 01:15 PM

तेरे इश्क़ का धोखा

एपिसोड 1: एक नई शुरुआत

ऋचा खन्ना

Age: 19

Intelligent, fearless, self-respecting

Middle-class family

अपने पिता से बहुत प्यार करती है

धोखे के बाद बदले की आग में जलने लगती है

🖤 शौर्य सिंघानिया

Age: 21

Rich, arrogant, mysterious

College का सबसे powerful लड़का

बाहर से निर्दयी, अंदर से टूटा हुआ

एक ऐसे राज़ का बोझ उठाए हुए जो उसकी जिंदगी बदल चुका है

सुबह के सात बजे थे।

दिल्ली की ठंडी हवा खिड़की से होकर कमरे में आ रही थी। कमरे की दीवारों पर लगे सपनों के छोटे-छोटे पोस्टर हवा से हिल रहे थे।

ऋचा खन्ना आईने के सामने खड़ी खुद को देख रही थी।

आज उसका कॉलेज का पहला दिन था।

उसके चेहरे पर उत्साह भी था और घबराहट भी।

"ऋचा! जल्दी नीचे आ जाओ, नाश्ता तैयार है!" उसकी माँ की आवाज़ नीचे से आई।

"आ रही हूँ माँ!"

ऋचा मुस्कुराते हुए नीचे चली गई।

डाइनिंग टेबल पर उसके पिता अखबार पढ़ रहे थे।

"तो हमारी बेटी आज कॉलेज जाने वाली है?" उन्होंने मुस्कुराकर पूछा।

"जी पापा।"

"डर तो नहीं लग रहा?"

"थोड़ा सा..."

पिता ने उसके सिर पर हाथ रखा।

"तुम बहुत मजबूत हो। जहाँ जाओगी, अपना नाम बनाओगी।"

ऋचा की आँखों में चमक आ गई।

उसे अपने पिता की बातों पर हमेशा भरोसा था।

कुछ देर बाद वह कॉलेज के लिए निकल गई।

दिल्ली का सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज।

रॉयल ग्लोबल कॉलेज।

विशाल इमारत, बड़ी-बड़ी कांच की दीवारें और चारों तरफ छात्रों की भीड़।

कॉलेज किसी फिल्म के सेट से कम नहीं लग रहा था।

ऋचा ने गहरी साँस ली।

"यहीं से मेरी नई जिंदगी शुरू होगी।"

वह मुस्कुराई और अंदर चली गई।

लेकिन उसे नहीं पता था कि यह जगह उसकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली थी।

कॉलेज के अंदर।

हर तरफ नए छात्रों की भीड़ थी।

ऋचा अपने क्लासरूम की तरफ जा रही थी तभी अचानक किसी से टकरा गई।

उसके हाथ की किताबें नीचे गिर गईं।

"ओह, सॉरी!"

ऋचा झुककर किताबें उठाने लगी।

सामने खड़ी लड़की भी मदद करने लगी।

"कोई बात नहीं। मैं भी जल्दी में थी।"

ऋचा ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।

खूबसूरत चेहरा।

स्टाइलिश कपड़े।

और चेहरे पर प्यारी मुस्कान।

"मैं तान्या हूँ।"

"और मैं ऋचा।"

"फर्स्ट ईयर?"

"हाँ।"

"ग्रेट! मैं भी।"

दोनों हँस पड़ीं।

कुछ ही मिनटों में दोनों अच्छी दोस्त बन गईं।

क्लास शुरू हो चुकी थी।

सभी छात्र अपनी सीटों पर बैठे थे।

तभी बाहर से कुछ शोर सुनाई दिया।

पूरी क्लास का ध्यान दरवाजे की तरफ चला गया।

कॉरिडोर में कई लड़के और लड़कियाँ किसी को देखकर उत्साहित हो रहे थे।

"वो आ गया!"

"शौर्य सिंघानिया!"

"कॉलेज का किंग!"

किसी ने कहा।

ऋचा ने हैरानी से बाहर देखा।

एक लंबा लड़का काले कपड़ों में कॉलेज के अंदर आ रहा था।

चेहरे पर अजीब सा आत्मविश्वास।

आँखों में ठंडापन।

और उसके पीछे दोस्तों का पूरा ग्रुप।

सब उसे सम्मान और डर दोनों से देख रहे थे।

"कौन है ये?" ऋचा ने पूछा।

तान्या ने धीरे से कहा,

"शौर्य सिंघानिया।"

"देश के सबसे बड़े बिजनेस परिवार का बेटा।"

"पूरा कॉलेज उसके इशारे पर चलता है।"

ऋचा ने कंधे उचकाए।

"मुझे क्या फर्क पड़ता है?"

तान्या हँस पड़ी।

"जल्दी समझ जाओगी।"

लंच ब्रेक।

ऋचा कैंटीन में बैठी थी।

भीड़ बहुत ज्यादा थी।

वह ट्रे लेकर अपनी सीट की तरफ जा रही थी कि अचानक किसी ने पीछे से धक्का दे दिया।

पूरी कॉफी सामने खड़े लड़के की शर्ट पर गिर गई।

पूरा कैंटीन शांत हो गया।

ऋचा घबरा गई।

"सॉरी... मैंने जानबूझकर नहीं किया।"

लेकिन जब उसने सामने देखा तो उसकी साँस रुक गई।

वह शौर्य था।

उसकी सफेद शर्ट कॉफी से खराब हो चुकी थी।

आसपास बैठे सभी छात्र डर गए।

क्योंकि शौर्य अपने गुस्से के लिए मशहूर था।

शौर्य ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

"आँखें नहीं हैं तुम्हारे पास?"

उसकी आवाज़ ठंडी थी।

ऋचा को गुस्सा आ गया।

"गलती से हुआ है।"

"और वैसे भी किसी ने मुझे धक्का दिया था।"

शौर्य ने एक कदम आगे बढ़ाया।

"बहाने मत बनाओ।"

"मैं बहाना नहीं बना रही।"

अब पूरा कैंटीन दोनों को देख रहा था।

किसी लड़की की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह शौर्य से बहस करे।

लेकिन ऋचा चुप नहीं हुई।

"आप कोई राजा नहीं हैं कि सब आपसे डरें।"

कुछ सेकंड के लिए पूरा माहौल जम गया।

शौर्य की आँखें सिकुड़ गईं।

उसके दोस्त हैरान थे।

किसी ने आज तक उससे ऐसे बात नहीं की थी।

फिर अचानक...

शौर्य मुस्कुराया।

एक अजीब सी मुस्कान।

"दिलचस्प।"

बस इतना कहकर वह वहाँ से चला गया।

शाम।

कॉलेज खत्म हो चुका था।

ऋचा बस स्टॉप की तरफ जा रही थी।

अचानक उसे महसूस हुआ कि कोई उसे देख रहा है।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

दूर पार्किंग एरिया में शौर्य खड़ा था।

वह चुपचाप उसे देख रहा था।

दोनों की नजरें मिलीं।

कुछ पल के लिए समय जैसे रुक गया।

फिर शौर्य कार में बैठा और वहाँ से चला गया।

ऋचा समझ नहीं पाई कि आखिर वह उसे देख क्यों रहा था।

उसी रात।

सिंघानिया मेंशन।

शौर्य अपने कमरे की बालकनी में खड़ा था।

उसका दोस्त कबीर उसके पास आया।

"भाई, आज उस नई लड़की ने तो कमाल कर दिया।"

शौर्य चुप रहा।

"पहली बार किसी ने तुम्हारे सामने आवाज उठाई।"

कबीर हँसा।

"नाम क्या था उसका?"

कुछ सेकंड बाद शौर्य बोला—

"ऋचा।"

"ऋचा खन्ना।"

कबीर ने हैरानी से पूछा,

"तुम्हें उसका पूरा नाम भी पता चल गया?"

शौर्य ने जवाब नहीं दिया।

उसकी नजरें आसमान पर थीं।

लेकिन उसके दिमाग में बार-बार वही चेहरा घूम रहा था।

एक साधारण लड़की...

जो उससे डरी नहीं।

उधर ऋचा अपने कमरे में बैठी थी।

वह कॉलेज के पहले दिन के बारे में सोच रही थी।

फिर अचानक उसके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।

"कॉफी अगली बार संभालकर रखना।"

ऋचा चौंक गई।

"ये नंबर किसका है?"

कुछ सेकंड बाद दूसरा मैसेज आया।

"— शौर्य सिंघानिया"

ऋचा की आँखें फैल गईं।

"इसे मेरा नंबर मिला कैसे?"

लेकिन इससे पहले कि वह जवाब देती...

एक तीसरा मैसेज आया।

"खेल अभी शुरू हुआ है, ऋचा।"

मैसेज पढ़ते ही उसके चेहरे से मुस्कान गायब हो गई।

उसे नहीं पता था...

कि यह सिर्फ एक मजाक नहीं था।

यह उस कहानी की शुरुआत थी...

जो उसके प्यार, भरोसे और पूरी जिंदगी को तोड़ने वाली थी।

क्रमशः...

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