धोखा
"ये सब क्या चल रहा है?"
यही पहला ख्याल था जो इशिका के दिमाग में आया जैसे ही वो मेहरा कॉर्पोरेशन के प्रेसिडेंट ऑफिस में घुसी।
वो अभी-अभी पेरिस से एक कामयाब बिज़नेस ट्रिप से लौटी थी। दो महीने से ज़्यादा थका देने वाली मेहनत के बाद उसने एटन आर्किटेक्चरल डील पक्की की थी — रात-रात भर की नेगोशिएशन, लगातार प्रेशर, और अनगिनत रिवीज़न। लेकिन उसने कर दिखाया। उसने प्रोजेक्ट क्लोज़ कर दिया।
इस जीत के साथ, उसे सच में लगा कि सब कुछ सही हो रहा है। शायद अब उसे कंपनी में टॉप पोज़ीशन पर प्रमोशन मिल जाएगा जिसका वो लंबे समय से इंतज़ार कर रही थी, और अपने बचपन के प्यार नक्ष के साथ वो फ्यूचर जिसकी उसने कल्पना की थी। उसका करियर, उसकी शादी, उसकी ज़िंदगी… सब कुछ बस हाथ लगने ही वाला था।
लेकिन वो खुशी एक पल में गायब हो गई जो नज़ारा उसने देखा।
ऑफिस रूम में, टेबल पर, लावण्या मेहरा, उसकी बड़ी बहन, नक्ष के बिल्कुल करीब खड़ी थी। उसका हाथ नक्ष की पीठ पर आराम से था, उनके सर एक-दूसरे की तरफ झुके हुए थे, एक ऐसे अंदाज़ में जो बिल्कुल इंटीमेट लग रहा था।
किसी और को, ये प्यार करने वालों का एक कोमल पल लग सकता था।
लेकिन इशिका के लिए, जिसके लिए वो उसका बॉयफ्रेंड और बचपन का प्यार था, ये सीधे सीने पर लगी एक गोली जैसा था।
ठंडा सा झटका लगा, उसका दिल जकड़ गया। खुद को रोक न पाते हुए वो चीख पड़ी, "लावण्या!"
नक्ष चौंक गया, उसका हाथ लावण्या की कमर से फिसल गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
लावण्या ने पलक झपकाई, वो थोड़ी चौंकी, फिर अपनी बहन की तरफ मुड़ी। उसके होंठों पर एक मासूम सी मुस्कान थी।
"इशिका, तुम कब लौटीं? बहुत समय हो गया। अच्छा लगा तुम्हें देखकर," उसने हल्के लहज़े में कहा। इस कैज़ुअल टोन ने इशिका के पेट को मरोड़ दिया। गुस्सा उसके अंदर उबल पड़ा।
उसने काँपती उंगली से नक्ष की तरफ इशारा किया। "इसका मतलब क्या है?" उसने पूछा। लावण्या ने सिर झुकाया, कन्फ्यूज़न दिखाते हुए। "क्या हुआ, इशिका?"
"क्या हुआ? माय फुट!" इशिका ने झट से जवाब दिया। "नक्ष मेरा बॉयफ्रेंड है, लावण्या। तुम्हें कोई शर्म नहीं है?"
उसे यकीन नहीं हो रहा था लावण्या की बेशर्मी पर — कैसे वो लड़की बिल्कुल बेफिक्र खड़ी थी, जैसे उसने कुछ गलत किया ही न हो।
क्या उसे सच में लगता है कि मैं बेवकूफ हूँ?
नक्ष बेचैनी से हिला, सिर झुकाए, इशिका की आँखों से मिलने से बचता रहा। उसे अपनी गलती का एहसास था, लेकिन अब उसके हाथ बंधे हुए थे। इशिका के पास अब मेहरा परिवार की विरासत में कोई हिस्सा नहीं बचा था, और वो अब वारिस नहीं रही।
इस सच्चाई के सामने आने के बाद, उसका इशिका से शादी करने का कोई इरादा नहीं रह गया था।
और सबसे बढ़कर, उसके परिवार ने पहले ही उसे बता दिया था कि लावण्या ही असली वारिस है। उसने मन ही मन आह भरी।
उस पल, लावण्या के चेहरे का भाव बदला, जैसे वो अनिश्चित हो। "तुम्हारा बॉयफ्रेंड?" उसने हैरानी से दोहराया, फिर झट से नक्ष की तरफ मुड़ी। "नक्ष… ये क्या है? जो मेरी बहन कह रही है, क्या ये सच है?"
उसकी आवाज़ बस इतना काँपी कि वो दयनीय लगे।
नक्ष काफी देर चुप रहा, उसकी भौंहें सिकुड़ी हुई थीं जैसे वो गहरी उलझन में हो। उसने धीरे से सिर हिलाया लेकिन कोई साफ जवाब नहीं दिया।
फिर लावण्या वापस इशिका की तरफ मुड़ी।
"इशिका, मुझे पता है तुम बचपन से मुझसे जलती हो, लेकिन ये?" उसने दर्द भरे अंदाज़ में सिर हिलाया। "क्या तुम्हें नहीं दिख रहा? नक्ष साफ कन्फ्यूज़ है और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा।"
उसने इशिका को जवाब देने का मौका नहीं दिया और आगे बोलती गई, "हमारी एंगेजमेंट हो रही है, इशिका। तुम ऐसी बेतुकी बात कैसे कर सकती हो?"
इशिका की साँस थम गई। उसका दिल दर्द से सिकुड़ गया जैसे ये शब्द "एंगेजमेंट" उसके दिमाग में गूँज रहे थे।
उसकी आँखें नक्ष पर जम गईं, हैरानी से भरी।
"क्या ये सच है? क्या तुम सच में मेरी बहन से शादी करने वाले हो? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो?"
ये बात इतने सीधे सामने आने पर, नक्ष का गिल्ट और बढ़ गया। उसके माथे पर ठंडा पसीना आ गया, जो उसके अंदर के तूफान को बयाँ कर रहा था।
लेकिन उसने जवाब नहीं दिया।
इशिका अब समझ गई थी। नक्ष की चुप्पी साफ कह रही थी कि उसने उसे बिना किसी हिचकिचाहट के डंप कर दिया, और वो भी उसकी बहन को चुनकर।
जब उसे याद आए उनके पुराने वादे और वो सब इंटीमेट पल, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये सब हो रहा है। उसकी आँख के कोने में एक आँसू आ गया।
क्या वो सच में अपनी ही बहन से एक आदमी के लिए लड़ना चाहती है? अगर वो लड़ती है, तो उसे क्या कीमत चुकानी पड़ेगी? और इन सबके बाद, क्या वो सच में उस पर भरोसा कर सकती है?
बिना एक और शब्द कहे, इशिका मुड़ी और ऑफिस से बाहर चली गई, हर कदम पिछले से भारी होता जा रहा था।
आखिरकार, ऑफिस से बाहर, वो एक पल के लिए रुकी, अपना सिर थोड़ा पीछे घुमाया, तो बस उन्हें एक-दूसरे से लिपटे देखा।
लावण्या अचानक विदेश से क्यों लौट आई थी? और सिर्फ इतना ही नहीं उसने उसका बॉयफ्रेंड छीन लिया और अब उसका करियर भी लेने की कोशिश कर रही थी? जिस तरह से लावण्या प्रेसिडेंट ऑफिस में घूम रही थी, जैसे उसकी मालकिन हो, उससे इशिका के शक और गहरे हो गए।
उसने खुद को ये सब सोचने से रोका, इससे पहले कि उसके ख्याल और बिगड़ जाएँ।
—
इस बीच, ऑफिस रूम में, लावण्या नक्ष के करीब झुकी, अपना चेहरा उसकी छाती पर रखकर धीरे-धीरे सिसकने लगी।
"मेरी बहन मेरे साथ ऐसा क्यों करती है?" वो रोई। "उसे पता है मुझे हमेशा से तुमसे प्यार रहा है…" वो रुकी, अपना सिर उठाकर सीधे उसकी आँखों में देखा। "बताओ, नक्ष… क्या तुमने कभी उससे प्यार किया?"
नक्ष ने आह भरी, अपनी बाहों को उसके चारों तरफ कस लिया।
"मैं उसे फैमिली की तरह ट्रीट करता था," उसने धीरे से कहा। "उसने शायद गलत समझ लिया और सोच लिया कि मैं उससे प्यार करता हूँ। वो मेरी गलती है। चिंता मत करो, मैं उससे बात कर लूँगा।"
एक पल बाद, उसने अपना सिर नीचे किया, उसकी नज़र उसके होंठों पर टिक गई। जल्द ही, ऑफिस रूम से हल्की-हल्की आवाज़ें आने लगीं।
——
मेहरा मैन्शन में
इशिका सीधे अपने माता-पिता के पास गई, नक्ष और लावण्या के बारे में बात करने के लिए। लेकिन जवाबों के बजाय, उसे उसकी माँ मालिनी से एक करारा थप्पड़ और ठंडी, बेरहम बातें सुनने को मिलीं।
उसके पिता, राजन मेहरा, ठंडे चेहरे के साथ खड़े थे, और उन्होंने लावण्या और नक्ष की शादी की पुष्टि कर दी।
इशिका बिल्कुल टूट गई।
उसके गाल पर लगी चोट उसके दिल के दर्द के आगे कुछ नहीं थी।
और उसके ऊपर, उसके माता-पिता उसी दिन लावण्या के लिए एक वेलकम पार्टी रख रहे थे, जिस दिन वो अपनी बिज़नेस ट्रिप से लौटी थी।
वो जानती थी कि उसके माता-पिता का पक्षपात लावण्या की तरफ है, खासकर जब से लावण्या कई सालों से विदेश में रह रही थी। और ज़्यादा बर्दाश्त न कर पाते हुए, पूरी तरह से चूर-चूर होकर, वो लड़खड़ाते हुए ऊपर अपने कमरे में चली गई।
तनाव उस पर पहाड़ की तरह भारी था। वो अपने बिस्तर पर गिर पड़ी, और बेकाबू होकर सिसकने लगी। उसके आँसू तकिए को भिगो रहे थे जब उसकी दुनिया टुकड़े-टुकड़े हो रही थी।
उस शाम बाद में, काँपती उंगलियों से इशिका ने अपना फोन उठाया और एकमात्र इंसान को डायल किया जिस पर वो अब भी भरोसा कर सकती थी। "संजना… क्या तू मेरे घर आ सकती है? प्लीज़।"
संजना ने इशिका की आवाज़ में बदलाव देखा। बिना किसी हिचकिचाहट के, उसने कहा, "मैं अभी आ रही हूँ।"
--
कुछ देर बाद
मेहरा मैन्शन के ग्रैंड हॉल में, बातचीत की गूँज और गिलासों की खनक सुनहरे झूमरों की रोशनी में हो रही थी।
जब तक संजना पहुँची, इशिका पहले ही रेड वाइन की आधी बोतल पी चुकी थी। उसके गाल लाल थे, और आँखें धुँधली।
"तू बिल्कुल सही समय पर आई," इशिका ने काँपती हँसी के साथ कहा। "आ, पीते हैं।"
संजना ने माथा सिकोड़ा लेकिन उसके बगल में बैठ गई, धीरे से एक गिलास उसकी तरफ बढ़ाया। दोनों एक कोने में चली गईं जहाँ वो खुलकर बात कर सकें।
इशिका ने अपना दिल खोलकर रख दिया, उसके शब्द गुस्से, इंसल्ट और निराशा के मिश्रण में एक-दूसरे से टकरा रहे थे। संजना ने ध्यान से सुना, हर डिटेल के साथ उसका चेहरा और गहरा होता गया।
"ये तो पागलपन है," संजना ने फुफकारते हुए कहा। "तेरे पैरेंट्स को अपनी दोनों बेटियों का बराबर ख्याल रखना चाहिए। और नक्ष वो तेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता है? वो तो कॉलेज से तुझसे प्यार करता है!"
इशिका ने एक कड़वी हँसी ली, अपने गिलास को कसकर पकड़ लिया। "मुझे भी समझ नहीं आता! जब से लावण्या वापस आई है, मेरी पूरी ज़िंदगी उलट-पुलट हो गई है।"
संजना ने इशिका के कंधे पर एक दिलासा देने वाला हाथ रखा। "चिंता मत कर, बेब। हम मिलकर कुछ न कुछ हल निकाल लेंगे।"
इशिका ने हल्के से सिर हिलाया।
तभी, संजना की नज़र कहीं और गई, उसकी आँखें सिकुड़ गईं जैसे वो हॉल के उस पार किसी को देख रही हो। "अरे," उसने फुसफुसाते हुए इशिका की बाँह को हल्का सा हिलाया। "उधर देख।"
इशिका ने उसकी नज़र का पीछा किया।
एक आदमी नीचे सोफे पर अकेला बैठा था। पहली नज़र में, वो ऐसा लग रहा था जैसे सीधे बॉलीवुड से निकलकर आया हो - बहुत हैंडसम, और बेहद आकर्षक।
लेकिन उसके पास एक ठंडा, बेचैन करने वाला औरा था। उसका चेहरा काला पड़ गया जैसे ही उसकी नज़र पोडियम की तरफ गई।
धुँधली रोशनी में, न तो इशिका और न ही संजना उसके चेहरे के भाव को साफ देख पाईं।
"वो कौन है?" इशिका ने पूछा।
-------------------
मिलते हैं अगले चैप्टर में…