हुकुम सा की जुनूनियत भरी मोहब्बत - Chapter 1
यह कहानी शुरू होती है उत्तर प्रदेश शहर का एक छोटा सा गांव मदनपुर के घर में बहुत ज्यादा ही चहल पहल मची हुई थी....!
क्योंकि कल उस गांव में बारात आने वाली थी वो भी राजस्थान के हुकुम सा सूर्या प्रताप सिंह का
और दूसरी तरफ थी एक बहुत ही सुंदर चुलबुली जिंदादिल प्यारी मासूम लडकी महक राठौड, महक ने इस दूनिया में अपना कदम रखा ही था कि तब ही सूर्या के दादा जी ने महक के दादा ने मिलकर उन दोनों का भाग्य को जोडने का फैसला कर लिया था.... ।
महक अभी बीस साल पूरी भी नही हुई थी महक को बीस साल पूरी होने में अभी छह महीने बाकी थे महक की जिंदगी में सिवाय उसके दादा जी के आलव कोई नहीं था.....!
महक के दादा जी सतेन्द्र राठौड, महक के दादा ने महक को दस साल की उम्र से पाला था...!
क्योंकि जब महक दस साल की थी, तभी उसके माता पिता की एक हादसे में मौत हो गई थी और महक ने दस साल में ही दुनियादारी सीख ली थी वह कहते हैं ना कि इंसान उम्र से बडा नहीं होता है हालात इंसान को छोटी उम्र में ही बडा कर देता है और कुछ ऐसी ही थी हमारी महक थी....!
उसका जितना प्यार नाम उस से भी प्यारी उसकी सीरत गोरा बेदाग सफेद दुध जैसे रंग नीली आंखें घनी पलके पंखुडियों जैसे पतले होंठ और कद पाँच फुट एक इंच संगमरमर जैसा तराश हुआ शरीर और एक हाथ पर महाकाल का टैटू सुंदर इतनी की स्वर्ग में रहने वाली परी भी महक के खुबसूरती के आगे फीकी लगे.
रात के समय सभी महक के सहेलियां महक को नाचने के लिए कहते हैं. ममता महक की सहेली
अरे हम तुमको बोले है ना एक बार अगर नाच दोगी तो क्या चला जाएगा एक तो वैसे ही तुम्हारी इस गांव में आज की आखिरी रात है फिर तो तुम भी अपने हुकुम सा के साथ राजस्थान चली जाओगी आज ही का समय है तुम्हारे पास हमारे साथ थोडा सा मस्ती कर लो हंस बोल लो फिर नहीं मिलेगा हम सब बातें करने को अब चलो नखरे ना करो अब तुम हमारे साथ थोड़ा सा नाच लो तुम्हें तुम्हारे भोलेनाथ की कसम"
महक जिसने हल्की पीली Color की साड़ी पहनी हुई थी और आंखों में काजल होंठों पर हल्के पिंक Color के लिपस्टिक और बालों को जुडे बना रखा हुआ था महक इस सिंपल लुक में भी बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही थी सब के इतने कहने पर महक नाचने लगती है
आसमान की बाहों में
चाँद अकेला ठहरा था
हे हे हे हे
रात की जवानी पे
चाँदनी का पहरा था
हे हे हे हे हेहे
रुनझुन रुनझुन हवा का झोका
उजली उजली रात
तारो की डोली में आई
झिल मिलाती जुगनू की बारात
सब के होठो पे ठहरी थी
आके कोई बात
ढोल मंजीरे बजने लगे
पड़ी डफली पर थाप
और धूमक धूमक कर नाच रही है
आपकी राधा प्यारी
धूमक धूमक कर नाच रही है,
आपकी राधा प्यारी
जाने कहाँ से राज रचने
आया छैला गिरदारी
मोरे पिया डरता है
देखो मोरा जिया
हो हो हो मोरे पिया डरता है
देखो मोरा जिया
हां हाहम्म हम्म हम्म हम्म
हम्म हम्म हम्म हम्म
मोरे पिया हे हे हे हे हे
महक अपने हुकुम सा कि दीवानी होकर नाचने लगती है
महक को बचपन से ही बताया गया था कि उसके बड़े होने के बाद उसकी शादी हुकुम सा से कराई जाएगी और जब से महक ने अपना होश संभाला था तब से हुकुम सा की ही अपना पति परमेश्वर मान लिया था...!
वह हमेशा हुकुम सा की तस्वीर न्यूज पेपर में और अपने दादा जी से हुकुम सा के बारे में सुन कर बहुत खुश हो जाया करती थी....!
गाना खत्म होते ही सभी लोग महक के तालियां बजाते हुए तरीफ करने लगे और महक शर्मा कर अपने कमरे के तरफ भाग जाती हैं.
महक अपने कमरे की खिड़की पर खड़ी होकर चांद को निहारते हुए खुद से ही बोलती है
हमको नही पता कि आपने कभी हमें देखे है या नहीं लेकिन हमारी हर सुबह आपक चेहरा देखकर ही होती आप कब हमारी आंखों से गुजर कर हमारे दिल में बस गए हमें भी पता ही नहीं चला हुकुम सा? और कल पहली बार हम आपको सामने से देखेंगे"
जी हां महक और हुकुम सा एक दूसरे से कभी नहीं मिले थे महक ने तो हुकुम सा को तस्वीरों और न्युज पेपर में देखा और अपने दादा जी से हुकुम सा के बारे बहुत कुछ सुना था था और हुकुम सा का पता नहीं वो महक को देखे थे या नहीं यह तो सिर्फ हुकुम सा ही बता सकते हैं.
दूसरी तरफ राजस्थान के सूर्यवंशी महल
हुकुम सा अपने कमरे में टहलते हुए बोल रहे थे हमे अभी शादी नही कर करनी"
ऐसे ही हुकुम सा कई सवाल खुद से बोले जा रहे थे....!
यह है राजस्थान के हुकुम सा सूर्या प्रताप सिंह उम्र उनतीस साल Height छह: इंच गोरा रंग काले सिल्की बाल चेहरा एकदम परफेक्ट, तीखी लंबी नाक बड़ी-बड़ी गहरी काली आंखें, आठ पैक एब्स मस्कुलर वी शेप बाॅडी चौडा सीना, दिखने मैं किसी भी हीरो को पीछे छोड दे.
हुकुम सा खुद से ही बात करते हुए कमरे में इधर से उधर टहल रहे थे कि तभी कुछ गिरने की आवाज सुन हुकुम सा पलट कर पीछे देखा तो एक टूटा हुआ वास फर्श पर गिर पडा था और वहीं पास में उनकी मासा फर्श पर बेहोश पडी थी....!
अपने मासा को बेहोश देख हुकुम सा तेज आवाज में चीखते हैं
रामू काक जल्दी से डाॅंक्टर को बुलाइए"
कहते हुए हुकुम सा भाग के गायत्री जी के पास जाकर उन्हें अपने गोद में उठाया और बेड पर आराम से लिटा के, जब पीछे मुडे तो देखें कि रामू काका अब भी डाॅंक्टर से बाते ही कर रहे थे....!
हुकुम सा गुस्से से रामू काका के पास जाकर उनके हाथों से फोन लेकर एक एक शब्द गुस्से से चबाते हुए बोलें
"ए डाॅक्टर अगर तुझे अपना जिंदगी और नौकरी प्यारी है. तो बस दस मिनट का समय देते हैं तुझे अगर महल आने में एक मिनट की भी देरी हुई तो उसके बाद हम ना तो कुछ सुनेंगे और ना ही तुझे कुछ बोलने का मौका देंगे सीधे तुझे सजा देंगे"
कहते हुए हुकुम सा गुस्से में काॅल cut करने के बाद फोन को दीवार पर दे मारते हैं... ।