हुकुम सा की जुनूनियत भरी मोहब्बत - Chapter 3
यह है महक के बचपन के दोस्त राज, Height छह: एक इंच गौर रंग हल्के भूरे बाल, काली आंखें, गोल चेहरा
राज का पूरा नाम राज ठाकुर है, राज की उत्तर प्रदेश में एक छोटी सी फैक्ट्री है, और वह अपनी फैक्ट्री को बहुत ही अच्छे से चलाता है. राज अपनी मां बाबा के साथ उत्तर प्रदेश के एक शहर में ही रहता है.
उसके दादा दादी और चाचा चाची गांव में ही रहते थे.
और इसलिए राज भी अक्सर गांव में आया करता था.
लेकिन राज की पैदाइश शहर में हुई थी. राज महक को बचपन से ही बहुत पसंद करता था, पहले तो वह सिर्फ एक अच्छे दोस्त थे, पर बाद मे बढते उम्र के साथ राज के दोस्ती कब प्यार में बदला गया था....!
यह बात राज को पाता ही नहीं चला कि राज यह बात भी पहले से जानता था, कि महक की शादी बचपन में ही तय हो चुकी है. इसलिए आज तक कभी भी उसने महक से अपने प्यार का इजहार नही किया था....!
क्योंकि कि राज भी महक को बचपन से देखता आया था. कि महक बचपन से ही हुकुम सा को अपना पति मान चुकी था....!
वही दूसरी तरफ राजस्थान महल में
सुबह होते ही महल के सारे नौकर यह से वह भाग रहे थे. पूरे महल में चहल- पहल थी बरात जाने की तैयारी पूरी जोर सोर से चल रही थी...!
और हुकुम सा अपने कमरे मैं घोड़े हाथी बेच कर सो रहे थे उन्हें इन सब चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं थी....!
तभी एक बाईस साल का लड़का हुकुम सा को उठाने आया उस लड़के ने हुकुम सा को जगाते हुए कहा
"भाई सा उठिए आज आपकी शादी है आपकी आज और आप अभी तक सो रहे हैं दादा सा ने बुलाया है नीचे अब जल्दी से उठिए भाई सा"
उस लड़के के आवाज सुन कर हुकुम सा ने अपने साइड में पड़ा तकिया उठाया और उस लड़के के ऊपर फेंकते हुए बोले
"शादी नही बर्बादी है मेरी समझ आई बात और तुम्हें बड़ी खुशी हो रही है मेरी शादी की अमन प्रताप सिंह"
( यह है अमन प्रताप सिंह हुकुम सा कि चाचा सा के बेटा )
अमन कुछ बोलता की उनके कान में दादा सा की आवाज आई "सूर्या आप तैयार हूं की नहीं"
अपने दादा सा की आवाज सुन हुकुम सा जल्दी से बेड से उठ कर बाथरूम के तरफ चले गए.
हुकुम सा को ऐसे भागते देख कर अमन जोर- जोर से हंसने लगता है...!
कुछ देर में ही हुकुम सा रेडी होकर बाहर आए हुकुम सा को देख अमन ने सिटी बजाते हुए बोला
"भाई सा कसम से एकदम टिप- टाॅप लग रहे हैं आप भाभी सा पक्का आप को देख कर आज आप पर फ्लैट हो जायेगी"
अमन कि बात सुन कर हुकुम सा ने अमन को घूर कर देखे और एक बार अपने आप को आइना मैं खुद को देखने लगे रेड और क्रिम Color के शेरवानी मैं हुकुम सा बहुत ही हैंडसम लग रहे थे...!
फिर वह दोनों ही कमरे से निकल कर नीचे चले गए जहां सब लोग हुकुम सा का ही आने का इंतजार कर रहे थे...!
गायत्री जी ने हुकुम सा की बलाईया ली और उनकी नजर उतरी फिर सब लोग बारात लेकर निकाल गए.
ऐसे ही रात हो जाती है.
रात के वक्त पूरे गांव को सजाया गया था पूरे गांव में आज अलग ही रौनक था. और सभी लोग बेसब्री से बारात का इंतजार कर रहे थे.
ऊपर महक के कमरे में
महक बहुत सी सहेलियां से वो घिरी हुई थी आइने के सामने बैठी थी चटक लाल रंग के जोडे में, माथे पर मांगटिका, और आंखों में गहरी सुरम, नाक में बड़ा सा नथ, होंठों पर रेड लिपस्टिक, हाथों में रेड Color कि चूडा और गहरे रंग की मेंहदी का छाप, माथे पर लाल रंग कि चुनरी ओढे, महक पूरी तरह से तैयार हो कर आईने में खुद को देख रही थी....!
कितना बदली हुई हम लग रहे हैं, बस एक चीज की कमी है. और वह भी कुछ देर के बाद, मेरे माथे पर सज जाएगा हमेशा के लिए"
महक दुःखी मन से खुद में बड़बड़ाई अपने सुनी मांग को देखते हुए.
आज उसकी आंखें बहुत खूबसूरत लग रही थी, पर आज इन आंखों में दुख की भी सिहायी बहुत दिखाई दे रही थी, आज सब कुछ अपना पराया हो जायेगा और पराया अपना हो जायेगा, ये कैसे रीत है
कुछ देर में पूरे गांव में शोर मचाता है, बारात आ गई बारात आ गई...!
दादा जी और पूरे गांव वाले मिलकर अपनी हैसियत से कई गुना ज्यादा हुकुम सा के स्वागतम की तैयारी किये थे और शादी की सारी तैयारियां हुकुम सा की सुविधा को ध्यान में रखकर ही की गई थी....!
बहुत ही भव्य तरीके से हुकुम सा और उनके पूरे परिवार का स्वागत किया जाता है. और उनके साथ आए रिश्तेदारों का भी बहुत अच्छे से स्वागत किया गया था.
और सतेन्द्र जी अपने दोस्त राजनाथ जी को देख कर बहुत ज्यादा खुश थे. दोनों एक- दूसरे का गले मिलकर आव भगत करते हैं.
वही महक की सभी सहेलियां हुकुम सा को देख कर एक दूसरे को देखते हुए बोली
"अरे वाह जीजा सा कितने हैंडसम हैं इतने हैंडसम तो हमने सिर्फ पिक्चर में हीरो को देख है पहली बार हम किसी को अपने सामने से देख रहे हैं हमारी महक कितनी लक्की है कि उसे इतना हैंडसम पति मिलने वाला है"
तभी गांव की कुछ औरत हुकुम सा को देखते हुए बोलती है।।
"अरे भाई दुल्हा राज तो घड़ा सोना है"
तभी एक औरत बोलती है "तो हमारी महक कौन सी काम है मारी महक भी तो परी के तरह कितनी खूबसूरत है"
गांव में बरात आ चुका था और पूरे गांव में गाने और हॅंसी की लहर दौड़ गए थे....!
सभी लोग बैंड बाजा पर नाच रहे थे गांव वाले ऐसे देख रहे थे जैसे आज तक ऐसा बारात कहीं देखी ही नहीं शायद ऐसा ही था क्योंकि राजस्थान के हुकुम सा का बरात आई थी तो अलग तो होता ही.
सतेन्द्र जी राज और सभी गांव वाले मिलकर उनका स्वागत करने के लिए तैयार हो गए थे.
राज के दादी जी ने आरती की थाली लेकर द्बार पर खड़ी थी हुकुम सा की नाक खींचने के लिए हुकुम सा अपना सिर आदर के साथ आगे और झुक देते हैं ताकि वो ऐसा कर सके
पर गांव में इतनी आसानी से कोई भी शादी की रस्म पूरी हो जाए ऐसा हो नहीं सकता,
हुकुम सा के दोस्त ने हुकुम सा को पीछे की और खींचने लगाते हैं जिससे मजबूत हुकुम सा को थोड़ा परेशान करने का मौका मिले और आस पास के लोग ये देख कर हंसने लगते है.
क्योंकि छह फीट कि लम्बे हुकुम सा कि नाक आपने ससुराल वालों द्बारा खींचे जाना, देखने में बड़ा ही मजेदार मंजर था हुकुम सा के लिए ये सब नया था तो उनके चेहरे के भाव थोड़ा अजीब था...!
जल्दी ही जयमाल का समय हो गया. महक को बुलाया गया महक अप्सरा की लाल लिबास में लिपटी हुई गुडिया नीचे गर्दन झुकाए धड़कते दिल के साथ कांपते पैर के साथ अपने लाल रंग के लहंगे में धीरे- धीरे आगे बढ रही थी.....!
सभी लोग महक की तरफ आंखे फाड़ें देखें जा रहे थे जिससे नन्हीं जान कि जान और हलक में अटक गई वह अपनी नजर निचे किए हुए बड़ी नजाकत से ही स्टेज की और बढ़ रही थी....!
महक सब की नजरों को अपने ऊपर महसूस कर के घबराने लगी उसके हाथों की पकड़ अपने लहंगे पर मजबूत हो गई थी वह इतने शोर शराबा में नीचे गर्दन किए कुछ बड़बड़ाई जिसे ममता सुन चुकी थी...!
" महक मुझे कस कर पकड़ो नहीं तो मैं गिर जाऊंगी"
ये सुनते ही ममता उसकी बांह को मजबूती से पकड़ते हुए उसके साथ चलने लगती है
महक का इतना खूबसूरत सा लहंगा उसके ससुराल के तरफ से आया था...!
ममता महक को लेकर स्टेज के सामने खड़ी हो गई तो हुकुम सा अपने स्वभाव के विपरित बड़े ही शांत स्वभाव के साथ आगे आकर अपना हाथ आगे बढा देते हैं..!
जिसे महक की जान हलक में अटक गई हाथ तो कांप रहे थे कैसे ऊपर उठाती वो फिर भी डरते हुए नीचे गर्दन किए अपने कुछ देर बाद होने वाले पिया जी के हाथों में पहली बार अपने हाथ दे दी और जिंदगी की शुरुआत की पहली सीढी हाथ पकड़ कर ऊपर चढी.
दोनों के शरीर में इस अनजान स्पर्श से सिहरन दौड़ गए थे जल्दी ही माला बदला गया और फिर सभी लोग इकट्ठा होकर कुछ फोटो भी लिए.
महक खुद को कब से रोकी बैठी एक बार नजर चुरा कर देखने की हिम्मत जुटा कर वैसे भी घूंघट में होने से उसे कौन देखता मगर उसकी चोरी घूंघट में भी पकड़ी गई वो भी अपने हुकुम सा से जो पहले से ही उसे देख रहे थे...!
महक झट से घबराहट में हड़बड़ाते हुए नजर हटा ली अब उसकी हिम्मत तो पूरे शादी में एक नजर देखने की भी नहीं बची अपनी बेवकूफी से
महक वहां बैठे ही अपने गालों को गर्म होते महसूस हुई उसका दिल खलबली मची हुई थी उसके साथ क्या हो रहा है बेचारी ये जानने के लिए बहुत भोली नादान थी.
वही हुकुम सा एक दम शांत बैठे हुए थे उनके आस पास डराने वाला माहौल में और से उनकी आधी हुई रानी सा बैठी घबराहट से भरी हुई थी...!
कुछ देर बाद,
महक दूल्हन के लाल जोडे में घूंघट लिए महक मंडप में हुकुम सा के करीब बैठी हुई थी और पंडित जी मंत्रोच्चार कर कर रहे थे...!
मंडप में हो रहे मंत्रोच्चार के अलावा ढोल बाजे की धून तो कुछ लोगों की हो रही बातें और कुछ बच्चों के इधर- उधर घूमने और चहलकदमी की आवाजें भी हो रही थी...!
वही महक के दादा जी और राज दोनों ही अपने भरी हुई आंखों से महक को देख रहे थे...!
जहां एक के दिल में सुकून था, उनकी पोती की शादी एक अच्छे बड़े घर में हो रही है तो दूसरी तरफ एक टूटे हुए दिल का एहसास था जिसने बचपन से जिस लड़की को चाह आज वही लड़की उसकी आंखों के सामने किसी और की होने जा रही थी...!
ऐसे ही कुछ रस्में होने के बाद पंडित जी दोनों को फेरों के लिए खड़ा होने के लिए बोले
हुकुम सा बिन मन से बस खड़ा हो जाते हैं और महक भी खड़ी हो जाती है और फिर ऐसे ही दोनों फेरे लेने लगते हैं और सातों फेरे होने के बाद वापस से पंडित जी उन्हें बैठने के लिए बोलते हैं.
फिर पंडित जी हुकुम सा को महक को मंगलसूत्र पहनाने के लिए बोलते हैं हुकुम सा ने महक के गले में अपने नाम की एक सोने की मंगलसूत्र पहना दिए जिसके लाॅकेट में छोटे- छोटे हीरे लगे हुए थे....!
फिर पंडित जी हुकुम सा को महक की मांग में सिंदूर भरने के लिए बोलते हैं
हुकुम सा ने अपने चुटकियों में सिंदूर लेते हुए महक की मांग में सिंदूर भरे तो महक को अपने शरीर में गूसबंप्स फील करने लगी.
हुकुम सा के Touch से महक के धड़कने एक बार फिर से बेकाबू हो गई थी....!
यह भी हुकुम सा के दिल का हाल भी महक से जुदा नहीं था एक पल के लिए ही पर हुकुम सा कि भी सांसे थम गई थी....!
जब हुकुम सा के हाथों को महक की गले की साॅफ्ट स्किन का स्पर्श महसूस हुआ था....!